‘बेटा लापता है… जवाब चाहिए’ एक पिता की लड़ाई से हिल गया प्रशासन

परिजनों ने 17 जुलाई 2024 को चिनहट थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। परिवार का कहना है कि रंजन बिना मोबाइल और पैसे के घर से निकले थे। पिता ने आरोप लगाया कि शिकायत के बावजूद पुलिस ने शुरुआती दौर में जितनी तेजी और गंभीरता दिखानी चाहिए थी, वह नजर नहीं आई।

लापता बेटे की तलाश में पिता की लड़ाई
लापता बेटे की तलाश में पिता की लड़ाई
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar12 Feb 2026 10:02 AM
bookmark

UP News : उत्तर प्रदेश में लापता लोगों के मामलों ने एक बार फिर प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक गुमशुदगी मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका (PIL) के तौर पर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि लापता मामलों में तेजी और जवाबदेही नहीं बढ़ी, तो यह सिर्फ पुलिसिंग ही नहीं बल्कि न्याय व्यवस्था पर भरोसे का भी मुद्दा बन जाएगा।

लखनऊ का मामला बना प्रदेशव्यापी सवाल

यह प्रकरण लखनऊ के गोमती नगर स्थित विकल्प खंड निवासी 32 वर्षीय रंजन कुमार के लापता होने से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, रंजन 15 जुलाई 2024 को शाम करीब 6 बजे घर से निकले थे, लेकिन उसके बाद उनका कोई सुराग नहीं मिला। परिजनों ने 17 जुलाई 2024 को चिनहट थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। परिवार का कहना है कि रंजन बिना मोबाइल और पैसे के घर से निकले थे। पिता ने आरोप लगाया कि शिकायत के बावजूद पुलिस ने शुरुआती दौर में जितनी तेजी और गंभीरता दिखानी चाहिए थी, वह नजर नहीं आई। इसी निराशा के बीच पिता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया।

हाईकोर्ट के सामने आए आंकड़े, बेंच ने जताई हैरानी

जनवरी 2026 की सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने पुलिस तकनीकी सेवा मुख्यालय से संबंधित आंकड़े रखे गए। इन आंकड़ों के मुताबिक 1 जनवरी 2024 से 18 जनवरी 2026 के बीच उत्तर प्रदेश में 1,08,300 लोगों के लापता होने की शिकायतें दर्ज हुईं। लेकिन इनमें से केवल 9,700 मामलों में ही ट्रेसिंग/खोजबीन की कार्रवाई दर्ज होने की बात सामने आई। कोर्ट ने इस स्थिति पर तीखा सवाल करते हुए पूछा कि शेष मामलों में तलाश के प्रयास इतने सीमित क्यों रहे और इसका औचित्य क्या है?

कोर्ट ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया

अदालत ने इस प्रकरण में पुलिस के रवैये को कैजुअल और कैवलियर बताते हुए नाराजगी दर्ज की। अदालत ने राज्य सरकार को साफ निर्देश दिए कि गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के जरिए विस्तृत हलफनामा दाखिल किया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि लापता मामलों की जांच आखिर किस स्तर पर और क्यों कमजोर पड़ रही है। याचिकाकर्ता पक्ष ने दलील दी कि यह मामला उस प्रवृत्ति का उदाहरण बन गया है, जहां कई बार लापता व्यक्तियों की शिकायतों को औपचारिकता की तरह लिया जाता है और जब शुरुआती समय निकल जाता है, तो सुराग मिलना और मुश्किल हो जाता है। कोर्ट ने 6 फरवरी 2026 को आदेश दिया कि इस याचिका को PIL के रूप में पंजीकृत किया जाए और राज्य सरकार से लापता मामलों से जुड़े समग्र आंकड़े, उठाए गए कदम और कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा जाए। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि लापता मामलों में तेज, प्रभावी और समयबद्ध जांच की व्यवस्था मजबूत करना बेहद जरूरी है। UP News

संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

उत्तर प्रदेश में एक और एनकाउंटर, कुख्यात अमजद का खेल हुआ खत्म

सूचना के आधार पर उत्तर प्रदेश पुलिस टीम ने इलाके में नाकेबंदी की। जैसे ही बाइक सवार संदिग्ध पुलिस बैरियर के करीब पहुंचे, उन्हें रुकने का संकेत दिया गया। इसी दौरान खुद को घिरा देख बदमाशों ने पुलिस पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।

मुजफ्फरनगर एनकाउंटर में मारा गया अमजद
मुजफ्फरनगर एनकाउंटर में मारा गया अमजद
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar12 Feb 2026 09:26 AM
bookmark

UP News : उत्तर प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ चल रहे सख्त अभियान के तहत मुजफ्फरनगर पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में हुई मुठभेड़ में 50 हजार रुपये का इनामी बदमाश अमजद पुलिस की जवाबी कार्रवाई में ढेर हो गया है। इस कार्रवाई के दौरान बदमाशों की फायरिंग में एक दरोगा और एक सिपाही गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

बुढ़ाना क्षेत्र में नाकेबंदी के दौरान हुई भिड़ंत

बुढ़ाना कोतवाली क्षेत्र के विज्ञानी रोड पर यह मुठभेड़ तब हुई, जब उत्तर प्रदेश पुलिस को इनामी अपराधी अमजद की आवाजाही को लेकर पुख्ता जानकारी मिली थी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने इलाके में घेराबंदी कर नाकेबंदी लगा दी और संदिग्धों पर नजर रखी जाने लगी। कुछ देर बाद बाइक से आते दो संदिग्ध जैसे ही पुलिस बैरियर के करीब पहुंचे, उन्हें रुकने का इशारा किया गया। लेकिन खुद को घिरा देख बदमाशों ने अचानक पुलिस पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। जवाब में पुलिस ने मोर्चा संभालते हुए आत्मरक्षा में फायरिंग की, जिसमें अमजद को कई गोलियां लगीं और वह मौके पर ही ढेर हो गया। पुलिस ने तुरंत घटनास्थल को सुरक्षित कर जांच शुरू कर दी। अधिकारियों के मुताबिक अमजद पर लूट, हत्या और डकैती समेत करीब 40 गंभीर मुकदमे दर्ज थे और वह उत्तर प्रदेश के साथ-साथ दिल्ली, राजस्थान और उत्तराखंड में भी वांछित चल रहा था। मौके से पुलिस ने एक घातक कारबाइन, एक पिस्टल और बाइक बरामद की है। वहीं अमजद का एक साथी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गया, जिसकी तलाश में पुलिस ने आसपास के इलाकों में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया है।

SP देहात की गाड़ी पर गोलियां

बदमाशों की फायरिंग में SP देहात आदित्य बंसल की गाड़ी की खिड़की और बॉडी पर गोलियां लगीं। राहत की बात रही कि अधिकारी को कोई चोट नहीं आई। वहीं कुछ गोलियां पुलिसकर्मियों की बुलेटप्रूफ जैकेट पर भी लगीं, जिससे बड़ा हादसा टल गया। इस मुठभेड़ में दरोगा संदीप और सिपाही स्वाग गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। पुलिस प्रशासन घायलों की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है। UP News

संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

यूपी बजट 2026-27: मायावती ने योगी सरकार के बजट पर साधा निशाना

बसपा सुप्रीमो ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि अगर सरकार पिछले वर्ष के बजट के जमीनी क्रियान्वयन का सही डेटा देकर बजट भाषण प्रस्तुत करती, तो यह परंपरा ठोस और विश्वसनीय बनती। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान बजट भी सिर्फ अखबारों की सुर्खियां बटोरने वाला लग रहा है।

Former CM Mayawati
मायावती ने बजट के बाद सरकार पर बनाया दबाव (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar11 Feb 2026 09:16 PM
bookmark

UP News : उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा बुधवार को वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश किए जाने के बाद विपक्ष ने मोर्चा खोल दिया है। बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने वित्त मंत्री सुरेश खन्ना द्वारा पेश किए गए 9.13 लाख करोड़ रुपये के बजट को 'लोक लुभावना' और जमीनी हकीकत से दूर बताते हुए कड़ी आलोचना की है। मायावती ने बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट शेयर की। उन्होंने कहा कि आज पेश किया गया बजट प्रदेश के सर्वसमाज और सभी क्षेत्रों के विकास की अपेक्षा ज्यादा 'लोक लुभावना' प्रतीत होता है।

पिछले बजट के क्रियान्वयन पर उठाए सवाल

बसपा सुप्रीमो ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि अगर सरकार पिछले वर्ष के बजट के जमीनी क्रियान्वयन का सही डेटा देकर बजट भाषण प्रस्तुत करती, तो यह परंपरा ठोस और विश्वसनीय बनती। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान बजट भी सिर्फ अखबारों की सुर्खियां बटोरने वाला लग रहा है। उन्होंने कहा, "जिससे एक बार फिर लोगों को अपने 'अच्छे दिन' की उम्मीदों पर पानी फिर गया लगता है।"

रोजगार और आरक्षण पर जोर

मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश के लोगों को स्थाई आमदनी वाली रोजगार व्यवस्था का इंतजार बना हुआ है, जिसके लिए सरकार को गंभीरता और सक्रियता दिखाने की आवश्यकता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि एससी, एसटी व ओबीसी आरक्षण पर उचित ध्यान देते हुए लंबित भर्तियों (बैकलॉग) की पूर्ति जितनी जल्दी हो सके उतना ही बेहतर होगा।

'सर्वजन हिताय' का सिद्धांत याद दिलाया

अपनी प्रतिक्रिया में पूर्व सीएम ने भाजपा सरकार को सलाह देते हुए कहा कि अगर वह बीएसपी की चारों सरकारों की तरह 'सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय' के संवैधानिक दायित्व को निष्ठा और ईमानदारी से निभाने का प्रयास करे, तो यह देश और जनहित में उचित होगा। उन्होंने कहा कि बजट किसी वर्ग विशेष या क्षेत्र विशेष का हितकारी नहीं, बल्कि करोड़ों गरीबों और किसानों के जीवन सुधार का माध्यम बनना चाहिए। UP News

संबंधित खबरें