इस एक्सप्रेसवे पर लगाए गए अत्याधुनिक सेंसर और एआई आधारित सीसीटीवी कैमरे हर गतिविधि पर नजर रखेंगे। ये कैमरे यह समझने में सक्षम होंगे कि कोई वाहन अचानक रुका है, टकराया है या पलट गया है। ट्रैफिक की सामान्य धीमी गति और दुर्घटना के बीच का अंतर भी यह सिस्टम खुद पहचान लेगा।

UP News : उत्तर प्रदेश का कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे राज्य का सबसे छोटा लेकिन सबसे आधुनिक एक्सप्रेसवे बनने जा रहा है। यह सड़क न केवल यात्रा का समय घटाएगी, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक के जरिए यात्रियों की सुरक्षा को भी नई ऊंचाई पर ले जाएगी। इस एक्सप्रेसवे पर किसी भी दुर्घटना की जानकारी अब इंसानों के कॉल पर निर्भर नहीं रहेगी, बल्कि स्मार्ट सिस्टम खुद ही खतरे को पहचान कर मदद पहुंचाएगा।
इस एक्सप्रेसवे पर लगाए गए अत्याधुनिक सेंसर और एआई आधारित सीसीटीवी कैमरे हर गतिविधि पर नजर रखेंगे। ये कैमरे यह समझने में सक्षम होंगे कि कोई वाहन अचानक रुका है, टकराया है या पलट गया है। ट्रैफिक की सामान्य धीमी गति और दुर्घटना के बीच का अंतर भी यह सिस्टम खुद पहचान लेगा। मशीन लर्निंग के माध्यम से यह तकनीक समय के साथ और अधिक सटीक होती चली जाएगी।
जैसे ही किसी असामान्य घटना का पता चलेगा, सिस्टम अपने आप उस स्थान की जानकारी के साथ एनएचएआई के कंट्रोल रूम को अलर्ट भेज देगा। इसके लिए किसी व्यक्ति को फोन करने की जरूरत नहीं होगी। इस तेज प्रक्रिया से आपातकालीन सेवाओं को तुरंत सक्रिय किया जा सकेगा। कंट्रोल रूम को अलर्ट मिलते ही एंबुलेंस और हाईवे पेट्रोलिंग वाहन मौके के लिए रवाना हो जाएंगे। इससे घायलों को दुर्घटना के बाद के सबसे महत्वपूर्ण समय, यानी गोल्डन आवर, में इलाज मिल सकेगा। यह व्यवस्था जान बचाने में बेहद अहम साबित होगी।
नेशनल हाईवे अथॉरिटी आॅफ इंडिया ने इस एक्सप्रेसवे पर एंट्री ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम को आॅटोमैटिक एक्सीडेंट डिटेक्शन सिस्टम से जोड़ा है। इसके तहत दिन-रात एआई और कैमरों की मदद से पूरी सड़क की निगरानी की जाएगी, जिससे किसी भी आपात स्थिति पर तुरंत कार्रवाई संभव हो सकेगी।
उन्नाव और लखनऊ की सीमा के पास एक हाईटेक एटीएमएस कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जहां से पूरे 63 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे की निगरानी होगी। यह सिक्स लेन एक्सप्रेसवे पूरी तरह एक्सेस कंट्रोल्ड है, जिसमें न तो कोई चौराहा है और न ही कोई कट। इसमें तीन इंटरचेंज और सीमित एंट्री-एग्जिट गेट बनाए गए हैं।
सड़क को बेहद समतल बनाने के लिए जीपीएस आधारित मशीन गाइडेंस और लेजर ग्रेडिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसके कारण ड्राइविंग के दौरान तेज रफ्तार का अहसास कम होगा। औसतन 120 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से यह सफर, जो पहले दो से तीन घंटे में पूरा होता था, अब लगभग 30 मिनट में संभव हो सकेगा।
एक्सप्रेसवे पर यात्रियों की सुविधा के लिए दो रेस्ट एरिया, दो फ्लाईओवर, एक रेलवे ओवरब्रिज, चार बड़े पुल और 25 छोटे पुल बनाए गए हैं। इसके अलावा लगभग 1.47 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में आरएस वॉल का निर्माण किया गया है, जिससे सड़क की मजबूती और सुरक्षा और बढ़ गई है। स्मार्ट कैमरे और सेंसर आधारित सिस्टम पूरे मार्ग को सुरक्षित बनाए रखते हैं। कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे आधुनिक तकनीक और बेहतर योजना का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह एक्सप्रेसवे साबित करता है कि नई सड़कों का मकसद सिर्फ दूरी कम करना नहीं, बल्कि हर सफर को सुरक्षित बनाना भी है। तेज, सुरक्षित और स्मार्ट यह एक्सप्रेसवे आने वाले समय में सड़क परिवहन की नई पहचान बनेगा।