जेल में टेंडर का खेल : 10 टेंडर एक ही कंपनी को दिया, जांच के आदेश
पक्षपात का संदेह इसलिए हुआ क्यों कि एक ही कंपनी को सभी टेंडर देने से भ्रष्टाचार की आशंका है। अन्य कंपनियों का डिसक्वालीफिकेशन किस आधार पर हुआ। कई कंपनियां तकनीकी रूप से क्वालीफाई होने के बावजूद अंतिम बिड में बाहर कर दी गईं। टेंडर खोलने का समय को लेकर भी संदेह पैदा हुआ।

UP News : जेल विभाग में खाद्य तेल और मसालों के टेंडरों के मामले में अनियमितताओं की आशंका जताई जा रही है। शासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दिए हैं। पिछले साल कारागार विभाग ने कुल 10 टेंडर निकाले थे जिनमें 9 खाद्य और मसाले संबंधित थे और 1 विद्युत यांत्रिकी से जुड़ा। तकनीकी बिड में कई कंपनियों ने हिस्सा लिया, लेकिन केवल तीन कंपनियां क्वालीफाई हुईं शिव शक्ति इंटरप्राइजेज, एमजी आॅगेर्नाइजेशन, राजमाता इंफ्राकॉन प्रा. लि.। हालांकि, फाइनेंशियल बिड में केवल शिव शक्ति इंटरप्राइजेज ही क्वालीफाई हुई, और इसके बाद सभी 10 टेंडर उसी कंपनी को आवंटित कर दिए गए।
सवाल उठाने वाले बिंदु
पक्षपात का संदेह इसलिए हुआ क्यों कि एक ही कंपनी को सभी टेंडर देने से भ्रष्टाचार की आशंका है। अन्य कंपनियों का डिसक्वालीफिकेशन किस आधार पर हुआ। कई कंपनियां तकनीकी रूप से क्वालीफाई होने के बावजूद अंतिम बिड में बाहर कर दी गईं।
टेंडर खोलने का समय को लेकर भी संदेह पैदा हुआ। आवेदन की समयसीमा रात 8 बजे समाप्त हुई, लेकिन टेंडर केवल 30 मिनट बाद रात 8:30 बजे खोले गए, जो प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है।
टेंडर में भाग लेने वाली कंपनियां
* हल्दी आपूर्ति: 11 कंपनियां
* काली मिर्च: 12 कंपनियां
* बड़ी इलायची और लाल मिर्च: 13-13 कंपनियां
* सरसों का तेल: 15 कंपनियां
इन सभी मामलों में अंतत: शिव शक्ति इंटरप्राइजेज को ही टेंडर आवंटित किया गया।
प्रशासनिक कदम
एक विधायक ने इस मामले में लिखित शिकायत की, जिसमें भारी अनियमितताओं का आरोप लगाया गया। शासन ने जांच के आदेश जारी किए और संयुक्त सचिव सूर्य प्रकाश मिश्रा ने जेल प्रशासन को रिपोर्ट जमा करने के निर्देश दिए। हालांकि, जेल के डीजी पीसी मीणा का कहना है कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है। इस पूरे मामले में टेंडर आवंटन की प्रक्रिया, केवल एक कंपनी का चयन और बाकी कंपनियों का बाहर होना सवालों के घेरे में है। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि क्या किसी अनियमितता में लिप्तता रही है।
UP News : जेल विभाग में खाद्य तेल और मसालों के टेंडरों के मामले में अनियमितताओं की आशंका जताई जा रही है। शासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दिए हैं। पिछले साल कारागार विभाग ने कुल 10 टेंडर निकाले थे जिनमें 9 खाद्य और मसाले संबंधित थे और 1 विद्युत यांत्रिकी से जुड़ा। तकनीकी बिड में कई कंपनियों ने हिस्सा लिया, लेकिन केवल तीन कंपनियां क्वालीफाई हुईं शिव शक्ति इंटरप्राइजेज, एमजी आॅगेर्नाइजेशन, राजमाता इंफ्राकॉन प्रा. लि.। हालांकि, फाइनेंशियल बिड में केवल शिव शक्ति इंटरप्राइजेज ही क्वालीफाई हुई, और इसके बाद सभी 10 टेंडर उसी कंपनी को आवंटित कर दिए गए।
सवाल उठाने वाले बिंदु
पक्षपात का संदेह इसलिए हुआ क्यों कि एक ही कंपनी को सभी टेंडर देने से भ्रष्टाचार की आशंका है। अन्य कंपनियों का डिसक्वालीफिकेशन किस आधार पर हुआ। कई कंपनियां तकनीकी रूप से क्वालीफाई होने के बावजूद अंतिम बिड में बाहर कर दी गईं।
टेंडर खोलने का समय को लेकर भी संदेह पैदा हुआ। आवेदन की समयसीमा रात 8 बजे समाप्त हुई, लेकिन टेंडर केवल 30 मिनट बाद रात 8:30 बजे खोले गए, जो प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है।
टेंडर में भाग लेने वाली कंपनियां
* हल्दी आपूर्ति: 11 कंपनियां
* काली मिर्च: 12 कंपनियां
* बड़ी इलायची और लाल मिर्च: 13-13 कंपनियां
* सरसों का तेल: 15 कंपनियां
इन सभी मामलों में अंतत: शिव शक्ति इंटरप्राइजेज को ही टेंडर आवंटित किया गया।
प्रशासनिक कदम
एक विधायक ने इस मामले में लिखित शिकायत की, जिसमें भारी अनियमितताओं का आरोप लगाया गया। शासन ने जांच के आदेश जारी किए और संयुक्त सचिव सूर्य प्रकाश मिश्रा ने जेल प्रशासन को रिपोर्ट जमा करने के निर्देश दिए। हालांकि, जेल के डीजी पीसी मीणा का कहना है कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है। इस पूरे मामले में टेंडर आवंटन की प्रक्रिया, केवल एक कंपनी का चयन और बाकी कंपनियों का बाहर होना सवालों के घेरे में है। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि क्या किसी अनियमितता में लिप्तता रही है।












