उत्तर प्रदेश में कोहरे का कहर : 40 से अधिक वाहन आपस में भिड़े, 6 की मौत

मुरादाबाद में दिल्ली-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग पर कोहरे ने बड़ा हादसा करा दिया। आगे चल रहे एक कंटेनर में पीछे से आ रही कार टकरा गई। इसके कुछ ही क्षण बाद पीछे से आई तीन अन्य गाड़ियां भी उसी स्थान पर आपस में भिड़ गईं। इस दर्दनाक हादसे में कंटेनर चालक कमल सिंह, जो हल्द्वानी का निवासी था, की मौत हो गई।

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कोहरे के कारण भिड़ी गाड़ियां
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar18 Jan 2026 03:21 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश में रविवार को घने कोहरे ने जनजीवन और यातायात दोनों को बुरी तरह प्रभावित किया। सुबह के समय दृश्यता बेहद कम होने के कारण गाजियाबाद से लेकर बाराबंकी तक अलग-अलग स्थानों पर एक के बाद एक गंभीर सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इन हादसों में 40 से अधिक वाहन आपस में भिड़ गए, जिससे 6 लोगों की जान चली गई, जबकि 50 से ज्यादा लोग घायल हो गए। कई घायलों की हालत नाजुक बताई जा रही है। गाजियाबाद के ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर कोहरे के कारण एक कार अचानक संतुलन खो बैठी और डिवाइडर से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार सवार एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

दिल्ली-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग पर कोहरे से बड़ा हादसा

मुरादाबाद में दिल्ली-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग पर कोहरे ने बड़ा हादसा करा दिया। आगे चल रहे एक कंटेनर में पीछे से आ रही कार टकरा गई। इसके कुछ ही क्षण बाद पीछे से आई तीन अन्य गाड़ियां भी उसी स्थान पर आपस में भिड़ गईं। इस दर्दनाक हादसे में कंटेनर चालक कमल सिंह, जो हल्द्वानी का निवासी था, की मौत हो गई। दुर्घटना इतनी भीषण थी कि वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए और चालक का शव निकालने के लिए रेस्क्यू टीम को गाड़ी काटनी पड़ी। कई अन्य लोग इस हादसे में घायल हुए हैं।

नारायणपुर मोड़ के पास एक इनोवा और अर्टिगा कार की आमने-सामने टक्कर

बाराबंकी जिले के रामनगर थाना क्षेत्र में भी कोहरे ने कहर बरपाया। लखनऊ-बहराइच हाईवे पर हरी नारायणपुर मोड़ के पास एक इनोवा और अर्टिगा कार आमने-सामने टकरा गईं। इसी दौरान लखनऊ की ओर से आ रही रोडवेज बस भी नियंत्रण खो बैठी और दोनों कारों में जा घुसी। इस हादसे में गोंडा निवासी 38 वर्षीय देवेंद्र कुमार की मौत हो गई, जबकि दो दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए।

एक यात्री बस घने कोहरे के कारण हाईवे पर खड़े ट्रॉला से टकराई

इटावा के जसवंतनगर क्षेत्र में सुबह के समय एक यात्री बस घने कोहरे के कारण हाईवे पर खड़े ट्रॉला से टकरा गई। हादसे में बस चालक, परिचालक और एक यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए। प्राथमिक उपचार के बाद चालक और परिचालक को आगरा तथा घायल यात्री को सैफई पीजीआई रेफर किया गया। श्रावस्ती जिले में भी एक निजी बस कोहरे के चलते अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खाई में गिर गई। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस दुर्घटना में सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और कोई जनहानि नहीं हुई। लगातार हो रहे इन हादसों के बाद पुलिस और प्रशासन की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। प्रशासन ने वाहन चालकों से अपील की है कि वे कोहरे के दौरान सावधानी बरतें, धीमी गति से वाहन चलाएं, फॉग लाइट का इस्तेमाल करें और अनावश्यक यात्रा से बचें, क्योंकि आने वाले दिनों में भी कोहरा बना रहने की संभावना है।


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उत्तर प्रदेश में ट्रांसपोर्ट नगर के भूखंड होंगे फ्री-होल्ड, मिलेगा आवंटियों को मालिकाना हक

एलडीए अधिकारियों के अनुसार, ट्रांसपोर्ट नगर योजना की शुरुआत वर्ष 1980 में की गई थी। इस योजना के तहत 50 से 1000 वर्गमीटर क्षेत्रफल वाले लगभग 1900 भूखंड शामिल हैं, जिन्हें उस समय लीज पर आवंटित किया गया था।

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ट्रांसपोर्ट नगर के भूखंड
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar18 Jan 2026 01:42 PM
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UP News : लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने ट्रांसपोर्ट नगर योजना के अंतर्गत लीज पर दिए गए भूखंडों को फ्री-होल्ड करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इस फैसले से वर्षों से मालिकाना हक का इंतजार कर रहे सैकड़ों व्यापारियों और भूखंड धारकों को सीधी राहत मिलने जा रही है। प्राधिकरण ने इस प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए विशेष कैंप आयोजित करने का निर्णय लिया है, ताकि आवंटियों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

लंबे समय से आवंटी कर रहे थे भूखंडों को फ्री-होल्ड कराने की मांग

एलडीए अधिकारियों के अनुसार, ट्रांसपोर्ट नगर योजना की शुरुआत वर्ष 1980 में की गई थी। इस योजना के तहत 50 से 1000 वर्गमीटर क्षेत्रफल वाले लगभग 1900 भूखंड शामिल हैं, जिन्हें उस समय लीज पर आवंटित किया गया था। इन भूखंडों पर वर्तमान में गोदाम, ट्रांसपोर्ट एजेंसियां और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। लंबे समय से आवंटी इन भूखंडों को फ्री-होल्ड कराने की मांग कर रहे थे, जिस पर प्राधिकरण बोर्ड ने पिछले वर्ष सैद्धांतिक मंजूरी दे दी थी।

कमेटी हॉल में एक विशेष कैंप लगाया जाएगा

इसी क्रम में एलडीए ने 29 जनवरी 2026 को गोमती नगर स्थित प्राधिकरण भवन के कमेटी हॉल में एक विशेष कैंप लगाने का फैसला किया है। यह कैंप सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक चलेगा। कैंप के दौरान इच्छुक आवंटी अपने भूखंडों को फ्री-होल्ड कराने के लिए आवेदन कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें अपने सभी आवश्यक दस्तावेजों की सत्यापित प्रतियां साथ लानी होंगी। प्राधिकरण द्वारा दस्तावेजों की जांच के बाद निर्धारित नियमों और शर्तों के अनुसार भूखंडों को लीज से फ्री-होल्ड किया जाएगा। एलडीए का मानना है कि इस पहल से न केवल आवंटियों को स्थायी मालिकाना अधिकार मिलेगा, बल्कि क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी। फ्री-होल्ड होने के बाद भूखंड स्वामी अपने प्लॉट का स्वतंत्र रूप से उपयोग, बिक्री या वित्तीय लेनदेन कर सकेंगे। एलडीए की यह पहल ट्रांसपोर्ट नगर के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिससे हजारों लोगों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

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उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को लेकर राज्य सरकार ने लिया अहम फैसला

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार राज्य को देश के अग्रणी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए लगातार ठोस निर्णय ले रही है।

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योगी आदित्यनाथ नक्शे को समझते हुए
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar17 Jan 2026 07:08 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को लेकर राज्य सरकार ने एक अहम फैसला लिया है, जिससे प्रदेश के औद्योगिक विकास को नई रफ्तार मिलने वाली है। निवेश प्रस्तावों को तेजी से अमल में लाने के उद्देश्य से सरकार ने लगभग 1000 एकड़ अतिरिक्त भूमि आवंटित करने की योजना बनाई है। इस कदम से न केवल रक्षा उत्पादन क्षेत्र को मजबूती मिलेगी, बल्कि चार प्रमुख जिलों की आर्थिक तस्वीर भी बदलने की उम्मीद है।

राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार राज्य को देश के अग्रणी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए लगातार ठोस निर्णय ले रही है। डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में पहले से मौजूद निवेश प्रस्तावों के अनुसार, अलग-अलग नोड्स पर भूमि आवंटन के माध्यम से करीब 3,500 करोड़ रुपये तक का निवेश आकर्षित किया जा सकता है। इससे प्रदेश में औद्योगिक ढांचे को मजबूती मिलने के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।

विदेशी निवेशक भी उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर में रुचि दिखा रहे

सरकार की स्पष्ट और निवेशकों के अनुकूल डिफेंस इंडस्ट्रियल नीति, तेज प्रशासनिक प्रक्रियाएं और मजबूत बुनियादी ढांचा निवेश को आकर्षित करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। यही वजह है कि अब देशी कंपनियों के साथ-साथ विदेशी निवेशक भी उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर में रुचि दिखा रहे हैं। यह पहल भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य को और सशक्त करेगी। 

डिफेंस कॉरिडोर के विभिन्न नोड्स में झांसी सबसे तेजी से उभरता हुआ केंद्र बनकर सामने आया है। यहां बड़ी कंपनियां बड़े पैमाने पर निवेश की योजना बना रही हैं। झांसी में प्रस्तावित निवेश से बुंदेलखंड क्षेत्र को एक मजबूत डिफेंस इंडस्ट्रियल क्लस्टर के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी, जिससे लंबे समय से पिछड़े इस क्षेत्र को औद्योगिक पहचान मिलेगी।

स्थानीय युवाओं को तकनीकी कौशल विकसित करने का अवसर मिलेगा

अलीगढ़ और चित्रकूट नोड्स भी तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण साबित होने वाले हैं। अलीगढ़ में केमिकल, आॅफशोर और डिफेंस सपोर्ट से जुड़े उद्योगों के लिए निवेश प्रस्तावित हैं, जबकि चित्रकूट में डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स और ड्रोन टेक्नोलॉजी से संबंधित इकाइयों के स्थापित होने की संभावना है। इससे इन क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक का प्रसार होगा और स्थानीय युवाओं को तकनीकी कौशल विकसित करने का अवसर मिलेगा। राजधानी लखनऊ के डिफेंस नोड में सीमित भूमि पर उच्च तकनीक आधारित यूनिट्स लगाए जाने की योजना है। ये यूनिट्स डिफेंस सप्लाई चेन, अनुसंधान और तकनीकी सहयोग को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगी, जिससे प्रदेश की रणनीतिक क्षमता और बढ़ेगी। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी के अनुसार, भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिफेंस कॉरिडोर में पर्याप्त भूमि उपलब्ध है और सभी निवेश प्रस्तावों पर तय मानकों के अनुसार तेजी से कार्य किया जा रहा है।

परियोजनाओं के जरिए हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा

इस पूरी योजना का सबसे बड़ा लाभ स्थानीय स्तर पर देखने को मिलेगा। भूमि आवंटन से किसानों को उचित मुआवजा मिलेगा, जबकि प्रस्तावित परियोजनाओं के जरिए हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। इसके साथ ही स्थानीय एमएसएमई और स्टार्टअप्स को भी डिफेंस सेक्टर की सप्लाई चेन से जुड़ने का अवसर मिलेगा। कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का यह विस्तार राज्य को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल न केवल आर्थिक विकास को गति देगी, बल्कि मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे राष्ट्रीय अभियानों को भी मजबूत आधार प्रदान करेगी।

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