Thursday, 18 April 2024

किसान पंचायत ने लिख दी इतिहास की नई इबारत!

मुजफ्फरनगर। कल यहाँ हुई ऐतिहासिक किसान पंचायत ने देश में इतिहास की नई इबारत लिख दी है। जिस ऐतिहासिक मैदान…

किसान पंचायत ने लिख दी इतिहास की नई इबारत!

मुजफ्फरनगर। कल यहाँ हुई ऐतिहासिक किसान पंचायत ने देश में इतिहास की नई इबारत लिख दी है। जिस ऐतिहासिक मैदान पर यह महापंचायत हुई उसका पहले से ही एक शानदार इतिहास रहा है। अब उस इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है।

दरअसल मीडिया के एक तबके ने नौ महीनों से चल रहे किसान आंदोलन को एक छोटे से क्षेत्र का आंदोलन साबित करने का भरसक प्रयास किया था। कल मुजफ्फरनगर की महापंचायत में जिस प्रकार देश के हर प्रदेश से प्रतिनिधित्व हुआ उससे यह साबित हो गया कि किसान आंदोलन का असर पूरे भारत में है। कर्नाटक, उड़ीसा, तमिलनाडु व केरल के किसान नेताओं ने जिस उत्साह व उमंग के साथ इस महापंचायत में संबोधन किया उससे साफ़ ज़ाहिर है कि यह आंदोलन अब दूर तक फैल चुका है। वैसे भी पूरे देश की नजऱ इस महापंचायत पर टिकी हुई थी। सब जानना चाहते थे कि आखिर इस महापंचायत से क्या मिलेगा। विश्लेषकों का दावा है कि जिस प्रकार पंचायत में जनसैलाब उमड़ा और देश के कोने-कोने से आकर किसानों ने इसमें शिरकत की उससे साफ़ ज़ाहिर है कि इस आंदोलन का रूप व स्वरूप राष्ट्रीय स्तर का है। संयुक्त किसान मोर्चा ने महापंचायत के मंच से भारत बंद का ऐलान करके इसके राष्ट्रीय स्वरूप को और मज़बूत किया है।

जिस मैदान पर यह पंचायत हुई उसका बड़ा पुराना इतिहास है। मुजफ्फरनगर के इतिहास को जानने वालों का दावा है कि इस मैदान पर होने वाली जन सभाओं में ऐसे अवसर कम ही आए हैं कि जब यह मैदान जनता से भरा न हो। जिस संगठन के बुलावे पर हुई जनसभा में राजकीय इन्टर कालिज का यह मैदान भर गया। उस संगठन की जीत हमेशा हुई है । कल तो यह मैदान ना केवल खचाखच भरा हुआ था बल्कि मैदान के चारों तरफ़ भी लाखों लोग मौजूद थे। जनसभा को देखने वाला हर कोई यही कह रहा था कि यह ऐतिहासिक महापंचायत है। यूँ तो महापंचायत के मंच से सैकड़ों नेताओं का संबोधन हुआ किन्तु सबकी निगाहें किसान नेता चौधरी राकेश टिकैत पर ही टिकी रही। श्री टिकैत ने अपने जोशीले अन्दाज़ में दिए सम्बोधन से सबका दिल जीत लिया। उनके सम्बोधन का लबोलुवाब यह था कि किसान आन्दोलन चाहे जितना लम्बा चले, किन्तु तीन कृषि क़ानून समाप्त हुए बिना यह आन्दोलन रूकेगा नहीं। उन्होंने साफ़ कहा कि चाहे वे शहीद हो जाएँ किन्तु किसानों की माँग पूरी हुए बिना अपने घर वापस नहीं जाएँगे। उनकी इस प्रतिज्ञा की सर्वत्र चर्चा हो रही है। जिस गर्मजोशी के साथ किसानों ने उनका स्वागत किया वह नजारा भी देखने लायक़ था। मंच तथा मंच के आसपास हुई अव्यवस्था ज़रूर सभी को खल रही थी।

माला नहीं पहनूंगा
राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी ने घोषणा की है कि जब तक उत्तर प्रदेश की वर्तमान सरकार को उखाड़कर नहीं फेंक दिया जाएगा वे फूल-माला नहीं पहनेंगे।

दरअसल कल मुजफ्फरनगर में हुई किसान पंचायत में जुटे किसानों के ऊपर जयंत चौधरी हैलीकॉप्टर से फूलों की वर्षा करना चाहते थे। लेकिन जिला प्रशासन ने उन्हें इजाजत नहीं दी। श्री चौधरी का कहना था कि किसान 9 महीने से दिल्ली में चारों तरफ बैठे हैं। सर्दी, गर्मी, बरसात में वे सड़कों पर सोते रहे हैं। कल वे सब एक स्थान पर एकजुट थे। मैं उनका अभिनंदन करना चाहता था। तानाशाह सरकार ने अनुमति नहीं दी। मैंने प्रतीज्ञा ली है कि जब तक योगी सरकार को उखाड़ नहीं फेंका जाएगा फूलमाला नहीं पहनूंगा।

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