चमत्कारी मंदिर : हर मंगलवार को भक्तों के कष्ट दूर करते हैं मंगलगिरी

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चमत्कारी मंदिर
locationभारत
userचेतना मंच
calendar22 Oct 2023 07:19 PM
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Baba Mangalagiri : यूं तो भारत देश के हर कोेने में कोई न कोई ऐसा मंदिर या मठ मिल जाएगा, जहां पर रोजाना ही भक्तों की भीड़ लगी रहती है। कुछ मंदिर और सिद्धपीठ ऐसे भी हैं, जो अपनी अपनी विशेष मान्यता के चलते पूरे देश ही नहीं विदेशों में भी मशहूर है। ऐसा ही एक मंदिर है, 'बाबा मंगलगिरी धाम'। मान्यता है कि यहां पर आने वाले भक्त की हर मुराद को बाबा मंगलगिरी पूर्ण करते हैं। कहा जाता है कि इस पवित्र धाम में कदम रखने के बाद सच्चे मन से जो भी मांगा जाता है, वह भक्त को तुरंत ही मिल जाता है।

Baba Mangalagiri

मंगलवार को होती है बाबा मंगलगिरी की पूजा

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के गढ़ी नौआबाद गांव में स्थित ‘बाबा मंगलगिरी’ की आराधना और पूजा पाठ के लिए मंगलवार का दिन विषेश माना गया है। वैसे तो बाबा मंगलगिरी की पूजा हर दिन की जाती है, लेकिन मंगलवार के दिन बाबा की समाधी स्थल पर उनके भक्तों की बहुत ज्यादा भीड़ रहती है। बाबा के भक्तों का मानना है कि मंगलवार के दिन बाबा की पूजा करने से ही उनकी सभी मनोकामना पूर्ण हो जाती है।

इस विधि से करें बाबा मंगलगिरी की पूजा

वैसे तो बाबा को प्रसन्न करने के लिए कोई विशेष पूजा करने की आवश्कता नहीं है। बाबा के समाधि स्थल पर सच्चे मन से बिल्कुल साधारण तरीके से पूजा अर्चना की जाती है। श्रद्धालुओं का मानना है कि बाबा के मंदिर में दीपक और धूप जलाकर और सच्चे मन से कुछ देर के लिए बाबा का ध्यान करने से बाबा मंगलगिरी जल्दी ही अपने भक्तों के सभी कष्ट दूर करते है। लोगों का कहना है कि बाबा मंगलगिरी कभी अपने भक्तों को अपने दरबार से निराश नहीं भेजते हैं।

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भोग में क्या चढ़ाते है श्रद्धालु ?

बाबा मंगलगिरी समाधी धाम पर किसी विशेष प्रसाद की भी जरुरत नहीं है। बाबा मंगलगिरी की समाधि को दूध या जल से स्नान कराने के बाद किसी भी मिष्ठान का भोग लगाया जाता है, तो बाबा उसे सहर्ष स्वीकार करते हैं। ग्रामीणों का मानना है कि गुड़ और चना का प्रसाद सबसे ज्यादा बाबा के धाम पर चढ़ाया जाता है। लेकिन मंदिर के पुजारी का कहना है कि किसी भी मीठे प्रसाद जैसे लड्डू, बूंदी (गुलदाना) या गुड़ और चने से बाबा मंगलगिरी को भोग लगाया जा सकता है।

चादर चढ़ाने की है परंपरा

ग्रामीणों का कहना है कि भक्तों के मनोकामना पूरी होने के बाबा की समाधी पर सफेद चादर चढ़ाने की परंपरा भी है। वह भक्त की इच्छा पर निर्भर करता है कि वह कैसी चादर बाबा की समाधी पर अर्पण करता है। कई श्रद्धालुओं का मानना है कि अपनी मनोकामना पूरी होने के बाद भक्त अपनी इच्छा के अनुसार बाबा के धाम पर कोई विशेष कार्य कर सकता है।

मंगलगिरी का इतिहास

गढ़ी नौआबाद के ग्रामीण बताते हैं कि लगभग 150 वर्ष पूर्व गांव के पास स्थित एक विशाल बाग में एक साधु महाराज आए थे। इन साधु महाराज के साथ एक बछड़ा (बैल)भी था। इन साधु महाराज का नाम मंगलदास था। साधु महाराज रात-दिन जंगल में तपस्या में लीन रहते थे। गांव के लोग जो भी भिक्षा के रूप में उन्हें प्रदान कर देते थे वे उसी को ग्रहण कर लेते थे। मंगलदास इतने बड़े सिद्ध पुरूष थे कि उनके मुख से जो भी बात निकल जाती थी वह सत्य होती थी। गांव के किसानों को वह समय से पहले ही बता देते थे कि कब वर्षा होगी अथवा कब सूखा पड़ेगा। इस प्रकार बाबा मंगलदास का नाम धीरे-धीरे स्वामी मंगलगिरी पड़ गया था। ग्रामीण उनसे इतना प्यार करते थे कि उनके स्वर्गवासी हो जाने के बाद ग्रामीणों ने उनकी तपस्या स्थली पर ही उनकी समाधी बना दी। इस समाधी पर पूजा-अर्चना करने वाले जो भी मन्नत मांगते थे वह पूर्ण होती थी। धीरे-धीरे समाधी स्थल पर आस्था बढ़ती चली गई। ग्रामीणों ने चंदा एकत्र करके समाधी स्थल पर एक मंदिर बना दिया। उस मंदिर का नाम है “मंगलगिरी मंदिर”।

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बाबा का चमत्कारी बैल

बाबा मंगलगिरी के साथ रहने वाला बछड़ा धीरे-धीरे बैल बन गया। जब वह बैल हल व कोल्हू में जोतने लायक हो गया तो किसान अपनी खेती का कार्य कराने के लिए बाबा से मांगकर उस बैल को ले जाने लगे। उस समय सभी ग्रामीण आश्चर्यचकित रह जाते थे जब वे देखते थे कि बाबा का बैल उतना ही काम करता है जितना बाबा ने बोला है। दरअसल जब कोई किसान बाबा से बैल मांगने जाता था तो वह कहता था कि मुझे अपना दो बीघे खेत जोतना है अथवा मुझे गन्ने के कोल्हू में दो कुंडी (गन्ने के रस को भरे जाने वाला बर्तन) रस निकालना है।

बाबा किसान को बैल दे देते थे। किसान द्वारा बैल लाते समय जितना काम करने की बात किसान ने बोली होती थी। उतना काम होने के बाद बैल काम बंद कर देता था। उसके बाद कोई कुछ भी करे बाबा का वह बैल टस से मस नहीं होता था। बताते हैं कि बाबा के स्वर्गवासी होते ही बैल ने भी अपने प्राण अपनी मर्जी से त्याग दिए थे। ऐसा था मंगलगिरी बाबा का यह चमत्कारी बैल। बाबा की समाधी के पास ही ग्रामीणों ने उस बैल की भी समाधी बनाई हुई है।

कैसे पहुुंचे बाबा मंगल गिरी धाम

बाबा मंगलगिरी के धाम पहुंचने के लिए बेहद ही आसान मार्ग है। यदि आप अपने वाहन से आ रहे हैं तो दिल्ली से बागपत बड़ोत के रास्ते बुढ़ाना कस्बा पहुंचे। यहां से गांव गढ़ी नौआबाद पहुंचने का सीधा रास्ता है। ट्रेन से आने वाली यात्री दिल्ली शामली सहारनपुर रेल मार्ग का प्रयोग कर सकते हैं। शामली रेलवे स्टेशन पर उतरने के बाद आप गढ़ी नौआबाद गांव पहुंच सकते हैं। रेलवे स्टेशन के बाहर से ही आपको गांव के लिए वाहन मिल जाएंगे। बस मार्ग से आने वाले यात्रियों को मुजफ्फरनगर जनपद के खतौली अथवा मुजफ्फरनगर पहुंचना होगा और वहां से बाबा मंगल गिरी धाम आसानी से पहुंचा जा सकता है।

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Muzaffarnagar News : ससुर ने किया बहू से रेप तो पति ने सुनाया ये फरमान

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Muzaffarnagar News 
locationभारत
userचेतना मंच
calendar13 Sep 2023 10:23 PM
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Muzaffarnagar News : उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक ससुर ने अपनी पुत्रवधु के साथ बेहद की घिनौनी हरकत की है। यहां एक व्यक्ति द्वारा अपने बेटे की गर्भवती पत्नी के साथ रेप किए जाने का मामला सामने आया है। यह बात जब महिला ने अपने पति को बताई तो उसने महिला को पत्नी स्वीकार करने से इनकार कर दिया और कहा कि आज से तुम मेरे अब्बू की पत्नी और मेरी अम्मी हो। ये सुनकर महिला के पैर से जमीन खिसक गई। पति के मुंह से ये सब कुछ सुनने के बाद पीड़िता ने अपने पति और ससुर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया है।

Muzaffarnagar News in hindi

पूरा मामला मुजफ्फरनगर के मीरापुर क्षेत्र के एक गांव का है। करीब एक साल पहले ककरौली थाना क्षेत्र के एक गांव की युवती का विवाह मीरापुर क्षेत्र के गांव के एक व्यक्ति के साथ हुआ था। निकाह के कुछ महीने बाद ही महिला गर्भवती हो गई। पीड़िता का आरोप है कि उसका ससुर शुरू से ही उस पर बुरी नीयत रखता था। करीब दो महीने पहले पांच जुलाई को विवाहिता का पति उसकी सास को दवाई दिलाने के लिए बाहर गया हुआ था।

‘अब तुम मेरी अम्मी हो’

इस दौरान वो घर पर अकेली थी। मौके का फायदा उठाकर उसके ससुर ने उसके साथ बलात्कार किया और किसी को भी इस घटना के बारे में बताने पर उसकी हत्या करने की धमकी दी, लेकिन पीड़िता ने हिम्मत करके पति को उसके पिता की घिनौनी करतूत के बारे में बता दिया। इसके बाद पति का जवाब सुनकर पीड़िता हैरत में पड़ गई। पति ने कहा कि पिता द्वारा शारीरिक संबंध बनाए जाने के बाद अब उसके लिए उसे पत्नी के रूप में रखना संभव नहीं है, इसलिए आज से तुम मेरी पत्नी नहीं बल्कि मेरे अब्बू की पत्नी हो।

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पति ने की मारपीट

पति का जवाब सुनकर पीड़िता ने जब इसका विरोध किया तो आरोप है कि पति ने उसके साथ मारपीट करते हुए उसे घर से निकाल दिया। जिसके बाद पीड़िता ने जुल्म के खिलाफ आवाज उठाने का फैसला किया। उसने अपने परिजनों के साथ मिलकर पुलिस से इस मामले की शिकायत की, लेकिन यहां भी दो महीने तक उसे न्याय के लिए भटकना पड़ा। अब घटना के करीब दो माह बाद उच्चाधिकारियों से शिकायत के बाद 7 सितंबर को पुलिस ने पीड़िता के ससुर व पति के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया है। लेकिन पुलिस आरोपी पति व ससुर को अभी भी गिरफ्तार नहीं कर सकी है।

Muzaffarnagar News  - जल्द गिरफ्तारी का दावा

इस मामले पर मीरापुर इंस्पेक्टर रवेन्द्र सिंह यादव ने बताया कि महिला गर्भवती है और मुकदमा दर्ज किए जाने के बाद पीड़िता के 161 और 164 के बयान दर्ज कराए जा चुके हैं. आरोपियों की तलाश में दबिश दी जा रही है, जो कि गांव से फरार है। जल्द ही दोनों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। वहीं इस मामले पर सीओ जानसठ शकील अहमद का कहना है कि पीड़िता की तहरीर के आधार पर पति व ससुर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले में जांच और कार्रवाई चल रही है। Muzaffarnagar News

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मुज़फ़्फ़रनगर के थप्पड़ कांड पर सामने आया बड़ा ही सार्थक विश्लेषण, आप भी पढ़ें Muzaffarnagar Slap Case

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Muzaffarnagar Slap Case
locationभारत
userचेतना मंच
calendar28 Aug 2023 03:32 PM
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Muzaffarnagar Slap Case / रवि अरोड़ा बेशक स्कूली दिनों में मेरी भी खूब पिटाई हुई थी। छोटी छोटी गलती पर भी मैडम जी अथवा मास्टर जी हम बच्चों को बुरी तरह पीटते थे। उन दिनों बच्चों का उनकी जाति अथवा धर्म के नाम से संबोधन भी आम बात थी और मास्टर जी की देखा देखी बच्चे भी एक दूसरे को जाति सूचक शब्दों से आमतौर पर पुकार लिया करते थे। मेरी उम्र के अन्य सभी लोगों के पास भी शायद स्कूली दिनों की कुछ ऐसी ही यादें होंगी। मगर वह दौर अब हम बहुत पीछे छोड़ आए हैं।

Muzaffarnagar Slap Case

तमाम अन्य मामलों की तरह शिक्षा के क्षेत्र में भी देश और समाज पहले से अधिक समझदार हुआ है और अब छोटे से छोटे स्कूल में भी बच्चों का शारीरिक उत्पीड़न नहीं किया जा सकता। कम से कम यह तो बिल्कुल नहीं कि एक मासूम बच्चे को दूसरे धर्म बच्चों से बुरी तरह पिटवाया जाए। साफ नज़र आ रहा है कि मुजफ्फर नगर के एक स्कूल में हुए इस प्रकार के घिनौना कार्य को अंजाम देने वाली शिक्षिका जितनी दोषी है, उससे कम दोषी वे लोग भी नहीं हैं जो इस शिक्षिका की हिमायत पुराने दौर की दुहाई देकर कर रहे हैं।

दूसरे अमन पसंद शहरियों की तरह मैं भी इस विचार का हामी हूं कि मुजफ्फरनगर के एक स्कूल में मासूम बच्चे की पिटाई के मामले में राजनीति नहीं होनी चाहिए और जल्द से जल्द इसका पटाक्षेप कर दिया जाना चाहिए। मुजफ्फरनगर सांप्रदायिक मामलों में यूं भी बेहद संवेदनशील इलाका है और इस मामले को तूल देने से सर्वाधिक नुकसान आपसी सौहार्द और भाईचारे का ही होगा। हालांकि फिर भी इतना तो होना ही चाहिए कि कुछ सवालों के जवाब दे दिए जाएं। उठे सवालों और कानून सम्मत न्याय को दरकिनार कर मामले पर केवल मिट्टी डालना कई बार घातक साबित होता है और चीजें भीतर ही भीतर सड़ कर दुर्गंध पैदा करती हैं। क्या यह सवाल गैर वाजिब है कि प्रशासन ने इस मामले में जो किया क्या वही न्याय है ?

क्या केवल विपक्ष ही इस मामले में राजनीति कर रहा है अथवा सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा भी अपना खेल खेल रही है ? क्या सारा दोष स्कूल की टीचर तृप्ता त्यागी का ही है अथवा उन्हें भी कटघरे में खड़ा किया जायेगा जो सोशल मीडिया पर चौबीसों घंटे हिन्दू-मुस्लिम का खेल खेलते हैं और समाज में तृप्ता त्यागियों की फौज खड़ी कर रहे हैं ? सवाल तो यह भी बनता है कि यदि किसी मुस्लिम टीचर ने हिन्दू बच्चे के साथ ऐसा किया होता, क्या तब भी शासन प्रशासन का यही रुख होता अथवा उस टीचर के घर अब तक बुलडोजर पहुंच चुका होता ?

ऐसे बहुत से उदाहरण आए दिन अखबारों में छपते हैं जिनमें सामाजिक भाईचारे को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होती है। इसी की रोशनी में उम्मीद की जा रही थी कि सात आठ साल के मासूम बच्चे को सांप्रदायिक टिप्पणी के साथ दूसरे धर्म के बच्चों से पिटवाने वाली शिक्षिका के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी मगर इस मामले में एफआईआर ही इतनी कमजोर लिखी गई है कि उसका कुछ न बिगड़ना तय हो गया है। सबसे अधिक हैरान करते हैं स्थानीय सांसद और केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान जो आरोपी शिक्षिका से जाकर मिलते हैं और उसे न्याय का आश्वासन देते हैं। क्या यह बहुसंख्यकों को लुभाने वाली राजनीति नहीं थी?

उधर, पीड़ित बच्चे के पिता की जितनी सराहना की जाए उतनी कम है जो उसने इलाके की शान्ति के मद्देनज़र समझौता कर लिया मगर फिर भी इसकी जांच तो की ही जानी चाहिए कि सांप्रदायिकता का नंगा नाच क्षेत्र के और किस किस स्कूल में चल रहा है ? आज के दौर में बेशक समाज के एक बड़े तबके को राजनीति के चलते इस्लामोफोबिया का शिकार बना दिया गया है और सोशल मीडिया के जरिए इसका नंगा नाच चहुंओर किया जा रहा है मगर इसकी चिंता तो की ही जानी चाहिए कि क्या यह जहर अब मासूम बच्चों के जीवन में भी घोला जाना जरूरी है ? हालांकि मेरी तरह आप भी मुतमईन होंगे कि ऐसे किसी सवाल का जवाब नहीं दिया जाता और नहीं ही दिया जाएगा मगर हमें अपने आप से ऐसे सवाल करने से भला कौन रोक सकता है ? तो चलिए आप और हम ही एक दूसरे से ये तमाम सवाल करें और अपने तईं इनके जवाब तलाश करें। Muzaffarnagar Slap Case

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