उत्तर प्रदेश के पूर्व DGP ने किया बड़ा दावा, बताया पुराना सच
उन्होंने बताया है कि एक जमाना ऐसा भी था जब भारत में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) की निगरानी का काम भारत की बड़ी खुफिया एजेंसी IB (इंटेलिजेंस ब्यूरो) को सौंपा गया था। IB के अधिकारी या कर्मचारी RSS में स्वयं सेवक संघ बनकर RSS के ऊपर निगाह रखने का काम करते थे।

UP News : उत्तर प्रदेश के पूर्व DGP प्रकाश सिंह एक प्रसिद्ध पुलिस अधिकारी रहे हैं। पूर्व IPS अधिकारी प्रकाश सिंह ने भारतीय पुलिस व्यवस्था में बदलाव के लिए बहुत सार्थक प्रयास किए हैं। उत्तर प्रदेश के DGP रहे प्रकाश सिंह ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने बताया है कि एक जमाना ऐसा भी था जब भारत में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) की निगरानी का काम भारत की बड़ी खुफिया एजेंसी IB (इंटेलिजेंस ब्यूरो) को सौंपा गया था। IB के अधिकारी या कर्मचारी RSS में स्वयं सेवक संघ बनकर RSS के ऊपर निगाह रखने का काम करते थे।
मीडिया संस्थान के साथ इंटरव्यू में उत्तर प्रदेश के पूर्व DGP का दावा
आपको बता दें कि हाल ही में उत्तर प्रदेश के पूर्व DGP प्रकाश सिंह ने एक मीडिया हाउस को इंटरव्यू दिया है। इस इंटरव्यू में उत्तर प्रदेश के पूर्व DGP ने बताया है कि जब भारत में कांग्रेस का शासन था तो भारत की गुप्तचर एजेंसी IB के द्वारा RSS की गतिविधियों पर खूब नजर रखी जाती थी। RSS को साथ ही जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठनों की निगरानी के लिए भी IB को तैनात रखा जाता था। उत्तर प्रदेश के पूर्व DGP प्रकाश सिंह ने इंटरव्यू में बताया कि उस वक्त की भारत सरकार RSS को सांप्रदायिक संगठन मानती थी। यही कारण था कि भारत सरकार की तरफ से RSS तथा जमाते इस्लामी आदि संगठनों के पीछे IB को लगाया गया था। उत्तर प्रदेश के पूर्व DGP प्रकाश सिंह ने इंटरव्यू में बताया कि IB के एजेंट कई मामलों में उन संगठनों के भीतर काडर बनकर भी दाखिल हो जाते थे। उन्होंने कहा कि IB की कार्यशैली ह्यूमन इंटेलिजेंस पर आधारित थी। एजेंसी के लोग कभी सीधे संगठन का हिस्सा बनकर तो कभी उससे जुड़े लोगों से दोस्ती कर अहम जानकारियां जुटाते थे। मुखबिरों का मजबूत नेटवर्क तैयार किया जाता था, जो संवेदनशील इलाकों और संगठनों से इनपुट देते थे।
उत्तर प्रदेश के पूर्व DGP ने साझा किया निजी अनुभव
उत्तर प्रदेश के पूर्व DGP प्रकाश सिंह ने इस इंटरव्यू में अपने सेवा काल से जुड़ा एक अहम अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर लगाम कसने की बात बताई। इसके लिए भारत-पाक सीमा पर कंटीले तार लगवाने की पहल की गई थी, जिससे घुसपैठ की घटनाओं में बड़ी कमी आई। इसी योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया था। आपको बता दें कि प्रकाश सिंह 1959 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के IPS अधिकारी रहे हैं। वे सीमा सुरक्षा बल के महानिदेशक रह चुके हैं। असम और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में पुलिस महानिदेशक की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं। आतंकवाद और उग्रवाद से निपटने का उनका अनुभव देश में पुलिस सुधारों की दिशा में बेहद अहम माना जाता है। उन्होंने उन्होंने छह किताबें भी लिखी हैं। इसमें 'इंडियाज नॉर्थईस्ट : द फ्रंटियर इन फर्मेंट' प्रमुख किताब है। UP News
UP News : उत्तर प्रदेश के पूर्व DGP प्रकाश सिंह एक प्रसिद्ध पुलिस अधिकारी रहे हैं। पूर्व IPS अधिकारी प्रकाश सिंह ने भारतीय पुलिस व्यवस्था में बदलाव के लिए बहुत सार्थक प्रयास किए हैं। उत्तर प्रदेश के DGP रहे प्रकाश सिंह ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने बताया है कि एक जमाना ऐसा भी था जब भारत में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) की निगरानी का काम भारत की बड़ी खुफिया एजेंसी IB (इंटेलिजेंस ब्यूरो) को सौंपा गया था। IB के अधिकारी या कर्मचारी RSS में स्वयं सेवक संघ बनकर RSS के ऊपर निगाह रखने का काम करते थे।
मीडिया संस्थान के साथ इंटरव्यू में उत्तर प्रदेश के पूर्व DGP का दावा
आपको बता दें कि हाल ही में उत्तर प्रदेश के पूर्व DGP प्रकाश सिंह ने एक मीडिया हाउस को इंटरव्यू दिया है। इस इंटरव्यू में उत्तर प्रदेश के पूर्व DGP ने बताया है कि जब भारत में कांग्रेस का शासन था तो भारत की गुप्तचर एजेंसी IB के द्वारा RSS की गतिविधियों पर खूब नजर रखी जाती थी। RSS को साथ ही जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठनों की निगरानी के लिए भी IB को तैनात रखा जाता था। उत्तर प्रदेश के पूर्व DGP प्रकाश सिंह ने इंटरव्यू में बताया कि उस वक्त की भारत सरकार RSS को सांप्रदायिक संगठन मानती थी। यही कारण था कि भारत सरकार की तरफ से RSS तथा जमाते इस्लामी आदि संगठनों के पीछे IB को लगाया गया था। उत्तर प्रदेश के पूर्व DGP प्रकाश सिंह ने इंटरव्यू में बताया कि IB के एजेंट कई मामलों में उन संगठनों के भीतर काडर बनकर भी दाखिल हो जाते थे। उन्होंने कहा कि IB की कार्यशैली ह्यूमन इंटेलिजेंस पर आधारित थी। एजेंसी के लोग कभी सीधे संगठन का हिस्सा बनकर तो कभी उससे जुड़े लोगों से दोस्ती कर अहम जानकारियां जुटाते थे। मुखबिरों का मजबूत नेटवर्क तैयार किया जाता था, जो संवेदनशील इलाकों और संगठनों से इनपुट देते थे।
उत्तर प्रदेश के पूर्व DGP ने साझा किया निजी अनुभव
उत्तर प्रदेश के पूर्व DGP प्रकाश सिंह ने इस इंटरव्यू में अपने सेवा काल से जुड़ा एक अहम अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर लगाम कसने की बात बताई। इसके लिए भारत-पाक सीमा पर कंटीले तार लगवाने की पहल की गई थी, जिससे घुसपैठ की घटनाओं में बड़ी कमी आई। इसी योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया था। आपको बता दें कि प्रकाश सिंह 1959 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के IPS अधिकारी रहे हैं। वे सीमा सुरक्षा बल के महानिदेशक रह चुके हैं। असम और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में पुलिस महानिदेशक की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं। आतंकवाद और उग्रवाद से निपटने का उनका अनुभव देश में पुलिस सुधारों की दिशा में बेहद अहम माना जाता है। उन्होंने उन्होंने छह किताबें भी लिखी हैं। इसमें 'इंडियाज नॉर्थईस्ट : द फ्रंटियर इन फर्मेंट' प्रमुख किताब है। UP News












