गाजियाबाद के हरीश राणा को सुप्रीम कोर्ट ने दी इच्छामृत्यु की मंजूरी

शीर्ष अदालत ने माना कि जब किसी मरीज के स्वस्थ होने की कोई वास्तविक संभावना न हो और वह लंबे समय से असहनीय चिकित्सकीय स्थिति में हो, तब उसे गरिमा के साथ विदाई देने पर विचार किया जा सकता है।

हरीश राणा को इच्छा मृत्यु की मंजूरी
हरीश राणा को इच्छा मृत्यु की मंजूरी
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar11 Mar 2026 11:32 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से जुड़े एक बेहद संवेदनशील मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। करीब 13 साल से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे गाजियाबाद निवासी हरीश राणा को अदालत ने पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति दे दी है। शीर्ष अदालत ने माना कि जब किसी मरीज के स्वस्थ होने की कोई वास्तविक संभावना न हो और वह लंबे समय से असहनीय चिकित्सकीय स्थिति में हो, तब उसे गरिमा के साथ विदाई देने पर विचार किया जा सकता है।

एम्स के पैलिएटिव केयर विभाग में होगी पूरी प्रक्रिया

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा को ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) के पैलिएटिव केयर विभाग में भर्ती कराया जाएगा। वहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में चिकित्सा सहायता को चरणबद्ध तरीके से वापस लिया जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह पूरी प्रक्रिया पूरी संवेदनशीलता, गरिमा और मानवीय सम्मान के साथ संपन्न की जानी चाहिए। इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा के परिजनों की स्थिति पर भी गंभीरता से विचार किया। उत्तर प्रदेश के इस परिवार ने वर्षों तक बेटे की सेवा की, लेकिन लगातार बिगड़ती हालत और शून्य सुधार की संभावना ने उन्हें मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक रूप से तोड़ दिया। हरीश के माता-पिता ने अदालत से अनुरोध किया था कि उनके बेटे को ऐसी अवस्था में अनंत पीड़ा में न रखा जाए और उसे इच्छा मृत्यु की अनुमति दी जाए।

मेडिकल रिपोर्ट ने भी नहीं छोड़ी उम्मीद

एम्स की ओर से पेश मेडिकल रिपोर्ट में साफ कहा गया कि हरीश राणा के ठीक होने की कोई संभावना नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक उनकी स्थिति लाइलाज है और लंबे समय से चेतना वापस आने के कोई संकेत नहीं मिले हैं। इसी तथ्य को आधार बनाते हुए अदालत ने मामले को केवल कानूनी नहीं, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से भी परखा। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जे.बी. पारडीवाला ने टिप्पणी की कि यह अत्यंत दुखद और पीड़ादायक परिस्थिति है। अदालत के लिए ऐसा निर्णय लेना कभी आसान नहीं होता, लेकिन किसी व्यक्ति को वर्षों तक ऐसी अवस्था में बनाए रखना भी न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता, जब उसके ठीक होने की कोई संभावना न बची हो। अदालत ने यह भी माना कि जीवन की गरिमा केवल जीने तक सीमित नहीं है, बल्कि मृत्यु के क्षण में भी उसका सम्मान बना रहना चाहिए। बता दें कि गाजियाबाद के हरीश राणा वर्ष 2013 में चंडीगढ़ में पढ़ाई कर रहे थे। उसी दौरान वह अपने हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए थे। इस दर्दनाक हादसे में उनके सिर पर गंभीर चोट आई, जिसके बाद से वह अचेत अवस्था में हैं। पिछले कई वर्षों से वह बिस्तर पर ही पड़े रहे। लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहने के कारण उनके शरीर पर घाव भी बन गए, जिससे उनकी तकलीफ और बढ़ती चली गई। UP News

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ग्रीन कॉरिडोर से बदलेगी लखनऊ की चाल, 13 मार्च को बड़ा कार्यक्रम

राजधानी लखनऊ के झूलेलाल वाटिका में आयोजित इस अहम समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल होंगे। खास बात यह है कि इसी मौके पर तीसरे और चौथे चरण की आधारशिला भी रखी जाएगी।

कार्यक्रम में शामिल सीएम योगी और राजनाथ सिंह
कार्यक्रम में शामिल सीएम योगी और राजनाथ सिंह
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar11 Mar 2026 10:58 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के लिए बड़ी खुशखबरी है। लंबे समय से चर्चा में रही ग्रीन कॉरिडोर परियोजना का दूसरा चरण बनकर तैयार हो गया है और 13 मार्च को इसका लोकार्पण होने जा रहा है। राजधानी लखनऊ के झूलेलाल वाटिका में आयोजित इस अहम समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल होंगे। खास बात यह है कि इसी मौके पर तीसरे और चौथे चरण की आधारशिला भी रखी जाएगी। ऐसे में माना जा रहा है कि यह परियोजना लखनऊ की ट्रैफिक व्यवस्था को नई रफ्तार देने के साथ उत्तर प्रदेश के शहरी विकास मॉडल को भी मजबूत करेगी।

लखनऊ के व्यस्त इलाकों को मिलेगी राहत

ग्रीन कॉरिडोर के दूसरे चरण के शुरू होने से उत्तर प्रदेश की राजधानी के उन इलाकों को सीधा फायदा मिलेगा, जहां रोजाना भारी ट्रैफिक दबाव रहता है। इस हिस्से में डालीगंज, निशातगंज और समता मूलक चौक को जोड़ा गया है। करीब सात किलोमीटर लंबा यह मार्ग लखनऊ विकास प्राधिकरण की निगरानी में तैयार किया गया है। परियोजना पर लगभग 299 करोड़ रुपये की लागत आई है। इस मार्ग के चालू होते ही शहर के कई भीड़भाड़ वाले हिस्सों में जाम का दबाव कम होने की उम्मीद है। खास बात यह है कि वाहन चालकों को अब कई स्थानों पर रुक-रुककर आगे बढ़ने की मजबूरी से छुटकारा मिल सकता है। रिवर फ्रंट के किनारे से आवागमन आसान होने पर गोमतीनगर की ओर जाने वाले लोगों को भी फायदा मिलेगा।

समय की होगी बचत

उत्तर प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन का मानना है कि ग्रीन कॉरिडोर के सभी चरण पूरे होने के बाद लखनऊ के यातायात का ढांचा काफी हद तक बदल जाएगा। इस पूरी परियोजना का उद्देश्य आईआईएम रोड क्षेत्र को सीधे शहीद पथ और गोमतीनगर से जोड़ना है, ताकि शहर के एक छोर से दूसरे छोर तक आवाजाही ज्यादा तेज और व्यवस्थित हो सके। अभी आईआईएम रोड से गोमतीनगर तक पहुंचने में लोगों को 45 मिनट से लेकर एक घंटे तक का समय लग जाता है। लेकिन ग्रीन कॉरिडोर का पूरा नेटवर्क तैयार होने के बाद यही दूरी महज 15 से 20 मिनट में पूरी होने का दावा किया जा रहा है। अगर ऐसा होता है, तो यह उत्तर प्रदेश की राजधानी में रोजाना सफर करने वाले हजारों लोगों के लिए बड़ी राहत होगी।

तीसरे और चौथे चरण से और मजबूत होगा नेटवर्क

13 मार्च को होने वाले कार्यक्रम में केवल लोकार्पण ही नहीं, बल्कि परियोजना के अगले विस्तार की औपचारिक शुरुआत भी होगी। तीसरे और चौथे चरण के तहत समता मूलक चौक से जनेश्वर मिश्र पार्क होते हुए शहीद पथ तक सड़क संपर्क को मजबूत किया जाएगा। इससे लखनऊ का पूर्वी और पश्चिमी हिस्सा अधिक व्यवस्थित तरीके से जुड़ सकेगा। शहरी विकास के नजरिए से देखा जाए तो यह परियोजना सिर्फ सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजधानी के भविष्य के ट्रैफिक मॉडल की नींव भी मानी जा रही है। आने वाले समय में इसका असर आवागमन, ईंधन बचत और यात्रा सुविधा तीनों पर दिख सकता है। ग्रीन कॉरिडोर को एक सामान्य सड़क परियोजना के बजाय आधुनिक शहरी मार्ग के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके किनारे हरियाली बढ़ाने, बेहतर रोशनी की व्यवस्था करने और सुरक्षा के लिहाज से सीसीटीवी कैमरे लगाने पर भी जोर दिया गया है। इससे यह कॉरिडोर न सिर्फ यातायात को गति देगा, बल्कि गोमती नदी के किनारे शहर के सौंदर्य को भी नया स्वरूप देगा। उत्तर प्रदेश में तेजी से बदलते शहरी ढांचे के बीच लखनऊ का यह ग्रीन कॉरिडोर विकास और सुगम यातायात का एक अहम उदाहरण बन सकता है। कार्यक्रम को देखते हुए प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं और सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है।

लखनऊ के विकास को नई रफ्तार देने वाली परियोजना

ग्रीन कॉरिडोर को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार की मंशा साफ दिख रही है कि राजधानी में ट्रैफिक दबाव कम करने के साथ-साथ एक आधुनिक, सुरक्षित और तेज परिवहन ढांचा तैयार किया जाए। 13 मार्च का कार्यक्रम सिर्फ एक उद्घाटन समारोह नहीं, बल्कि लखनऊ के इंफ्रास्ट्रक्चर के अगले चरण की शुरुआत माना जा रहा है। अगर परियोजना तय समय में पूरी होती है, तो उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को जाम, लंबी यात्रा और अव्यवस्थित ट्रैफिक से काफी हद तक राहत मिल सकती है। ऐसे में ग्रीन कॉरिडोर आने वाले वर्षों में शहर की नई लाइफलाइन बनकर उभर सकता है। UP News

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भ्रष्टाचार पर योगी सरकार का बड़ा प्रहार, दो अफसरों पर गिरी गाज

बर्खास्त किए गए अधिकारियों में अमेठी के मनोज कुमार शुक्ला और हरदोई के हर्ष मवार शामिल हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की इस कार्रवाई को राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही सख्त नीति और जीरो टॉलरेंस रुख के मजबूत संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।।

भ्रष्टाचार पर योगी सरकार की बड़ी कार्रवाई
भ्रष्टाचार पर योगी सरकार की बड़ी कार्रवाई
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar11 Mar 2026 10:36 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार और सरकारी पद के दुरुपयोग पर योगी सरकार ने एक बार फिर कड़ा संदेश दिया है। उत्तर प्रदेश की मौजूदा योगी सरकार ने समाज कल्याण विभाग के दो अधिकारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया है। अमेठी और हरदोई में तैनात रहे इन दोनों तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारियों पर लगे आरोप जांच में गंभीर पाए गए, जिसके बाद शासन ने सख्त फैसला लेने में देर नहीं की। बर्खास्त किए गए अधिकारियों में अमेठी के मनोज कुमार शुक्ला और हरदोई के हर्ष मवार शामिल हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की इस कार्रवाई को राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही सख्त नीति और जीरो टॉलरेंस रुख के मजबूत संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।।

अमेठी में लिपिक के मोबाइल से पत्नी के खाते में पहुंचाए गए रुपये

उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले से सामने आए मामले ने विभागीय कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। आरोप है कि तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी मनोज कुमार शुक्ला ने अपने ही कार्यालय में तैनात प्रधान लिपिक गोकुल प्रसाद जायसवाल के साथ पद का दबाव बनाकर अनुचित हरकत की। शिकायत के मुताबिक, 26 दिसंबर 2024 को मनोज कुमार शुक्ला ने प्रधान लिपिक को अपने चैंबर में बुलाया। वहां उन्होंने कथित रूप से लिपिक का मोबाइल अपने कब्जे में लिया और दबाव बनाकर डिजिटल भुगतान एप का गुप्त पिन जान लिया। इसके बाद लिपिक के बैंक खाते से 40 हजार रुपये अपनी पत्नी डॉ. अंजू शुक्ला के खाते में ट्रांसफर करा दिए गए। इस पूरे प्रकरण ने उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी थी, क्योंकि मामला केवल आर्थिक अनियमितता तक सीमित नहीं था। जांच के दौरान यह भी आरोप सामने आए कि संबंधित अधिकारी अधीनस्थ कर्मचारियों के प्रति अपमानजनक रवैया रखते थे और दफ्तर में अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करते थे।

जांच में झूठी निकली सफाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश शासन ने शुरुआती जांच कराई, जिसके बाद मनोज कुमार शुक्ला को 5 मार्च 2025 को निलंबित कर दिया गया था। जांच अधिकारी संयुक्त निदेशक सुनील कुमार विसेन की रिपोर्ट में यह साफ हुआ कि अधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अधीनस्थ कर्मचारी से अवैध रूप से धनराशि ट्रांसफर कराई। हालांकि, मनोज कुमार शुक्ला ने अपने बचाव में यह दलील दी थी कि संबंधित कर्मचारी ने उनसे उधार लिया था और वही रकम वापस ली गई थी, लेकिन जांच में यह दावा टिक नहीं पाया। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस स्पष्टीकरण को असंतोषजनक मानते हुए आगे की कठोर कार्रवाई की राह चुनी।

भुगतान और खरीद प्रक्रिया में गड़बड़ी

उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले से जुड़ा दूसरा मामला वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित है। हरदोई के तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी हर्ष मवार पर सरकारी धन के दुरुपयोग, नियमों की अनदेखी और टेंडर प्रक्रिया में हेराफेरी के गंभीर आरोप लगे थे। जांच रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2017-18 से 2020-21 के बीच राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय, चठिया धनवार में भोजन, सामग्री आपूर्ति और अन्य मदों में नियमों के विपरीत भुगतान किए गए। आरोप है कि हर्ष मवार ने कुछ चुनिंदा फर्मों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से खरीद और भुगतान प्रक्रिया को प्रभावित किया।

जांच में यह भी सामने आया कि बिना सक्षम स्वीकृति के बड़े भुगतान किए गए। इतना ही नहीं, कई भुगतानों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर इस तरह पेश किया गया, ताकि नियमित टेंडर प्रक्रिया से बचा जा सके। उत्तर प्रदेश में सरकारी खरीद व्यवस्था की पारदर्शिता पर यह एक गंभीर सवाल माना गया। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि कुछ संस्थाओं को भुगतान हुआ, जबकि उनके द्वारा वास्तविक सेवा या आपूर्ति का प्रमाण नहीं मिला।

यूपीपीएससी की सहमति के बाद शासन ने लिया अंतिम फैसला

दोनों मामलों की जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट उत्तर प्रदेश शासन को भेजी गई। इसके बाद नियमानुसार उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC), प्रयागराज से परामर्श लिया गया। आयोग ने उपलब्ध साक्ष्यों और आरोपों की गंभीरता का परीक्षण करने के बाद दोनों अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई पर सहमति दी। जानकारी के मुताबिक, हर्ष मवार की बर्खास्तगी पर आयोग ने 16 फरवरी को और मनोज कुमार शुक्ला की बर्खास्तगी पर 26 फरवरी को अपनी अंतिम सहमति दे दी। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने दोनों अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया।

उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश

समाज कल्याण विभाग के इन दो मामलों में की गई कार्रवाई को उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार के सख्त रुख के रूप में देखा जा रहा है। अमेठी में अधीनस्थ कर्मचारी के साथ कथित जबरन धन हस्तांतरण का मामला हो या हरदोई में वित्तीय अनियमितताओं और टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर का प्रकरण, दोनों ही मामलों में शासन ने साफ संकेत दिया है कि सरकारी पद का दुरुपयोग किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उत्तर प्रदेश सरकार के इस फैसले से अन्य विभागों में भी स्पष्ट संदेश गया है कि अगर कोई अधिकारी अधिकारों का गलत इस्तेमाल करता है, अधीनस्थ कर्मचारियों का शोषण करता है या सरकारी धन के इस्तेमाल में गड़बड़ी करता है, तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। UP News

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