‘सनातन की चाल नहीं रुकेगी’ प्रयागराज से सतुआ बाबा का बड़ा ऐलान

उनका लक्ष्य बस उत्तर प्रदेश की धरती पर तय अपने पड़ाव तक पहुंचना और यात्रा की गति बनाए रखना है। बाबा का आरोप है कि कुछ ताकतें समाज को जातियों में बांटकर परंपराओं को कमजोर करने में लगी हैं, और ऐसे लोगों के खिलाफ उनकी प्रतिक्रिया आगे भी कठोर रहेगी।

सतुआ बाबा
सतुआ बाबा
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar16 Jan 2026 10:51 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश के माघ मेले में लग्जरी गाड़ियों में पहुंचकर सुर्खियों में आए सतुआ बाबा ने अब विरोधियों पर खुलकर पलटवार किया है। सतुआ बाबा ने कहा कि सनातन सिर्फ आस्था नहीं, बल्कि अर्थ, शास्त्र, शस्त्र और रफ्तार की भी पहचान है। उन्होंने चेताया कि जो लोग सनातन की गति रोकने की कोशिश करेंगे, उन्हें उसी रफ्तार में जवाब मिलेगा। हालांकि, बाबा ने यह भी साफ किया कि उनका इरादा किसी विवाद को भड़काने का नहीं है उनका लक्ष्य बस उत्तर प्रदेश की धरती पर तय अपने पड़ाव तक पहुंचना और यात्रा की गति बनाए रखना है। बाबा का आरोप है कि कुछ ताकतें समाज को जातियों में बांटकर परंपराओं को कमजोर करने में लगी हैं, और ऐसे लोगों के खिलाफ उनकी प्रतिक्रिया आगे भी कठोर रहेगी।

सोशल मीडिया पर घिरे सतुआ बाबा

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माघ मेले के दौरान सतुआ बाबा को डिफेंडर और पोर्शे जैसी लग्जरी गाड़ियों में देखे जाने के बाद सोशल मीडिया पर संत परंपरा, सादगी और जीवनशैली को लेकर बहस तेज हो गई। सवालों की बौछार पर बाबा ने बेपरवाह अंदाज में जवाब दियाउन्होंने कहा कि उन्हें न तो गाड़ियों के नाम मालूम हैं, न उनकी कीमत का अंदाजा। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि नाम-दम जानना है तो गूगल कर लीजिए, उनका काम किसी ब्रांड की चर्चा करना नहीं, बल्कि यात्रा करते हुए अपने पड़ाव तक पहुंचना और अपनी रफ्तार कायम रखना है।

“सनातन कमजोर नहीं” - सतुआ बाबा

बाबा ने कहा कि क्या भारत का सनातन इतना कमजोर है कि कोई गाड़ी में बैठे तो उसे गलत मान लिया जाए। उन्होंने उत्तर प्रदेश के विकास का उदाहरण देते हुए कहा कि आज का भारत “स्वतंत्रता” का देश है और यहां विकास की रफ्तार तेज है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम लेते हुए कहा कि विकास की यह गति आगे और बढ़ेगी। महंगी गाड़ियों की चर्चा पर सतुआ बाबा ने कहा कि उनके लिए गाड़ी का नाम या कीमत मुद्दा नहीं है। उनके अनुसार, जेसीबी, ठेला, बुलेट, जीप, डिफेंडर या फरारी सब साधन हैं, असली विषय लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य अपने पड़ाव तक पहुंचकर सनातन ध्वज को आगे बढ़ाना है।

माघ मेले की व्यवस्था पर सरकार की सराहना

सतुआ बाबा ने प्रयागराज माघ मेले की व्यवस्थाओं को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि यह विशाल आयोजन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पूरी मुस्तैदी के साथ संचालित हो रहा है, जिसमें संत समाज भी व्यवस्थाओं को मजबूत बनाने में सक्रिय सहयोग दे रहा है। बाबा के मुताबिक, मेले में उमड़ रही करोड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ इस बात का साफ संकेत है कि सनातन परंपरा आज भी देश की सामाजिक चेतना और मुख्यधारा में पूरी मजबूती के साथ जीवंत है।

सतुआ पीठ का अर्थ और एकजुटता का संदेश

बाबा ने सतुआ पीठ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्राचीन पीठ है और सतुआ का अर्थ कई तत्वों का एक साथ मिलना है जैसे अलग-अलग अनाज मिलकर सतुआ बनता है, वैसे ही समाज को भी एकजुट रहना चाहिए। उन्होंने मणिकर्णिका घाट का जिक्र करते हुए सनातन परंपरा से जुड़ने की बात दोहराई। अपने बयान में सतुआ बाबा ने विपक्ष और विधर्मियों को लेकर भी आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि जो लोग भारत की प्रगति और विकास की गति रोकना चाहते हैं, वे पीछे रह जाएंगे। UP News

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सहारनपुर में घरेलू कलह का खौफनाक अंत, मां ने दो बच्चों संग खाया जहर

इसी विवाद के बाद मनिता ने कथित तौर पर पहले दोनों बच्चों को जहर दिया और फिर स्वयं भी विषाक्त पदार्थ का सेवन कर लिया। हालत बिगड़ने पर परिवार ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और तीनों को गंभीर अवस्था में निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

घरेलू कलह ने छीनी तीन जिंदगियां
घरेलू कलह ने छीनी तीन जिंदगियां
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar16 Jan 2026 10:29 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्तिथ गागलहेड़ी थाना क्षेत्र में पारिवारिक कलह और कथित प्रताड़ना से टूट चुकी एक महिला ने अपने दो मासूम बच्चों को विषाक्त पदार्थ खिलाने के बाद खुद भी जहर खाकर जान दे दी। इस त्रासदी ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। पुलिस ने मामले में ससुराल पक्ष के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

लंबे समय से प्रताड़ना झेल रही थी मनिता

मृतका की पहचान मनिता (30 वर्ष) के तौर पर हुई है। परिजनों के मुताबिक, मनिता की शादी करीब नौ साल पहले बलियाखेड़ी निवासी नीटू से हुई थी। दंपती के दो बच्चे थे छह वर्षीय नित्या और चार वर्षीय कार्तिकेय। मायके पक्ष का आरोप है कि मनिता को लंबे समय से शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था, जिससे वह लगातार तनाव में रहती थी। परिजनों ने बताया कि गुरुवार को घर में किसी बात को लेकर जेठ, जेठानी और ससुर के साथ कहासुनी हुई थी। इसी विवाद के बाद मनिता ने कथित तौर पर पहले दोनों बच्चों को जहर दिया और फिर स्वयं भी विषाक्त पदार्थ का सेवन कर लिया। हालत बिगड़ने पर परिवार ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और तीनों को गंभीर अवस्था में निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

घटना के बाद प्रशासन अलर्ट

इलाज के दौरान देर रात महिला और उसकी बेटी की मौत हो गई। वहीं बेटे की हालत काफी नाजुक बनी रही और करीब दो घंटे बाद उसने भी दम तोड़ दिया। एक ही परिवार के तीन-तीन जनों की मौत से उत्तर प्रदेश के इस हिस्से में शोक और आक्रोश का माहौल है। तीनों शवों को जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया है। पुलिस के मुताबिक, आज पोस्टमार्टम कराया जाएगा, जिसके बाद मौत के कारणों की पुष्टि हो सकेगी। सूचना मिलते ही मनिता के मायके पक्ष के लोग अस्पताल पहुंचे और ससुराल वालों पर गंभीर आरोप लगाए।

ससुराल पक्ष पर केस दर्ज

पुलिस ने मायके पक्ष की तहरीर के आधार पर ससुराल पक्ष के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिकल दस्तावेज, पारिवारिक पृष्ठभूमि और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, उत्तर प्रदेश पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है। UP News

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प्रयागराज माघ मेले में संतों की लग्जरी गाड़ियों ने छेड़ी नई बहस

माघ मेले में जगद्गुरु महामंडलेश्वर संतोष दास, जिन्हें सतुआ बाबा के नाम से जाना जाता है, अपनी शानदार कारों के कारण सबसे अधिक सुर्खियों में हैं। उनकी लैंड रोवर डिफेंडर पहले ही आकर्षण का केंद्र बनी हुई थी।

satua baba
सतुआ बाबा और उनकी लग्जरी गाड़ी
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar15 Jan 2026 06:39 PM
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UP News : माघ मेला सदियों से त्याग, तपस्या और आत्मिक साधना का प्रतीक रहा है, लेकिन इस वर्ष मेले में दिखाई दे रही भव्यता ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। कुछ प्रमुख संतों की आलीशान जीवनशैली, विशेषकर महंगी गाड़ियों में आगमन, श्रद्धा और वैराग्य के बीच एक नई चर्चा को जन्म दे रही है।

करोड़ों की गाड़ियों में पहुंचे संत

माघ मेले में जगद्गुरु महामंडलेश्वर संतोष दास, जिन्हें सतुआ बाबा के नाम से जाना जाता है, अपनी शानदार कारों के कारण सबसे अधिक सुर्खियों में हैं। उनकी लैंड रोवर डिफेंडर पहले ही आकर्षण का केंद्र बनी हुई थी, वहीं हाल ही में उनके काफिले में शामिल हुई लगभग तीन करोड़ रुपये मूल्य की पोर्शे कार ने चर्चा को और तेज कर दिया। मेले में स्थित उनके शिविर में इस कार का धार्मिक विधि से पूजन किया गया, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और दर्शक जुटे।

श्रद्धा और सवाल दोनों साथ

इसे लेकर लोगों की राय बंटी हुई है। एक वर्ग का मानना है कि जो संत त्याग, संयम और भोग-विलास से दूर रहने की शिक्षा देते हैं, उनका इतना वैभवपूर्ण जीवन विरोधाभास पैदा करता है। वहीं समर्थकों का कहना है कि साधन होना और साधना करना दो अलग बातें हैं। उनके अनुसार यह समृद्धि गुरु-कृपा और ईश्वर की अनुकंपा का परिणाम है।

सतुआ बाबा का पक्ष

सतुआ बाबा का कहना है कि उनके जीवन में जो कुछ भी है, वह उनके गुरु, परंपरा और देवी-देवताओं के आशीर्वाद से है। उनका तर्क है कि अध्यात्म कभी दरिद्र नहीं रहा, बल्कि ईश्वर की कृपा जीवन को आगे बढ़ाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गाड़ियां उनके लिए सुविधा का साधन हैं, न कि मोह का कारण। उनके अनुसार ब्रांड या कीमत मायने नहीं रखती, बल्कि वह उद्देश्य महत्वपूर्ण है, जिसके लिए इन साधनों का उपयोग किया जाता है।

प्राचीन परंपरा का वर्तमान स्वरूप

सतुआ बाबा का मुख्य आश्रम काशी के मणिकर्णिका घाट पर स्थित है। इस धार्मिक पीठ की स्थापना वर्ष 1803 में गुजरात के संत जेठा पटेल ने की थी। परंपरा के अनुसार, इस पीठ के प्रमुख को सतुआ बाबा कहा जाता है। आश्रम में आज भी बटुकों को वैदिक शिक्षा दी जाती है। उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले के एक साधारण ब्राह्मण परिवार में जन्मे संतोष दास ने 11 वर्ष की आयु में घर छोड़ दिया था। उनकी प्रतिभा और साधना को देखते हुए उन्हें मात्र 19 वर्ष की उम्र में महामंडलेश्वर की उपाधि प्रदान की गई, जो अपने आप में एक दुर्लभ उदाहरण है।

केवल एक संत तक सीमित नहीं मामला

यह प्रवृत्ति केवल सतुआ बाबा तक सीमित नहीं है। किन्नर अखाड़े समेत अन्य कई महामंडलेश्वर भी महंगी गाड़ियों और भव्य जीवनशैली के लिए जाने जाते हैं। मेले में फॉर्च्यूनर, इनोवा और स्कॉर्पियो जैसी गाड़ियां आम दृश्य बन चुकी हैं। माघ मेला अब केवल साधना का केंद्र नहीं, बल्कि बदलते समय के साथ अध्यात्म की नई तस्वीर भी प्रस्तुत कर रहा है। सवाल यह नहीं है कि संत क्या उपयोग कर रहे हैं, बल्कि यह है कि क्या आधुनिक साधन और आध्यात्मिक जीवन साथ-साथ चल सकते हैं? इस प्रश्न का उत्तर हर व्यक्ति अपनी आस्था और सोच के अनुसार स्वयं तय कर रहा है।

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