ठाकुर का आरोप है कि उत्तर प्रदेश में इस पूरे प्रकरण के अहम डिजिटल सबूतों को जानबूझकर गायब कराया जा रहा है, ताकि गिरफ्तारी की कार्रवाई में भूमिका निभाने वाले पुलिसकर्मियों पर आंच न आए। वहीं पुलिस का दावा है कि 9-10 दिसंबर की रात उन्हें शाहजहांपुर में ट्रेन से गिरफ्तार किया गया था।

UP News : उत्तर प्रदेश के देवरिया जिला जेल में बंद पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने 1 जनवरी से आमरण अनशन छेड़ दिया है। ठाकुर का आरोप है कि शाहजहांपुर में गिरफ्तारी के वक्त का CCTV फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) अब तक उन्हें नहीं दिया गया, जबकि यही साक्ष्य गिरफ्तारी की पूरी कहानी सामने ला सकते हैं। शुक्रवार को कोर्ट में पेशी के दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव पर सबूत दबाने/मिटाने का गंभीर दावा कर प्रशासनिक हलकों में नई हलचल पैदा कर दी। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में शनिवार, 3 जनवरी को होने वाली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं, जहां अदालत का रुख तय करेगा कि रिकॉर्ड सामने आएगा या विवाद और गहराएगा।
देवरिया के CJM कोर्ट में पेशी के दौरान पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने दो टूक कहा कि शाहजहांपुर से हुई गिरफ्तारी के समय की CCTV रिकॉर्डिंग और CDR सामने आए बिना सच की परतें नहीं खुल सकतीं। ठाकुर का आरोप है कि उत्तर प्रदेश में इस पूरे प्रकरण के अहम डिजिटल सबूतों को जानबूझकर गायब कराया जा रहा है, ताकि गिरफ्तारी की कार्रवाई में भूमिका निभाने वाले पुलिसकर्मियों पर आंच न आए। वहीं पुलिस का दावा है कि 9-10 दिसंबर की रात उन्हें शाहजहांपुर में ट्रेन से गिरफ्तार किया गया था।
अदालत परिसर में मीडिया से रूबरू होते हुए अमिताभ ठाकुर ने बताया कि उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर अपनी गिरफ्तारी से जुड़े डिजिटल साक्ष्य उपलब्ध कराने की मांग की थी, लेकिन उनकी बात सुनी जाने के बजाय उन्हें लगातार टालने और परेशान करने जैसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। ठाकुर ने साफ शब्दों में कहा कि CCTV फुटेज हाथ में आए बिना वह अपना आमरण अनशन नहीं तोड़ेंगे। उनका तर्क है कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया, कथित मानवाधिकार उल्लंघन और घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाने के लिए यही रिकॉर्ड सबसे अहम कड़ी हैं। साथ ही उन्होंने भरोसा जताया कि इस पूरे मामले में उत्तर प्रदेश की न्यायपालिका से ही उन्हें अंततः न्याय मिलेगा।
ठाकुर के अधिवक्ता अभिषेक शर्मा का कहना है कि यह मामला 1999 से अदालत के गलियारों में चल रहा है, लेकिन उत्तर प्रदेश में अब तक की जांच किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी। इसी को आधार बनाकर उन्होंने कोर्ट से मांग की कि पूरे केस की जांच पर कड़ी न्यायिक निगरानी रखी जाए और जांच अधिकारी को सभी जरूरी दस्तावेजों के साथ तलब किया जाए। वकील की दलील पर संज्ञान लेते हुए अदालत ने जांच अधिकारी (IO) को शनिवार, 3 जनवरी को पेश होने का आदेश दिया है।
यह मामला उत्तर प्रदेश के देवरिया से जुड़ा एक पुराना विवाद है, जिसकी जड़ें 1999 तक जाती हैं, जब अमिताभ ठाकुर यहां एसपी के तौर पर तैनात थे। आरोप है कि उस दौर में उन्होंने अपने पद का प्रभाव इस्तेमाल कर इंडस्ट्रियल एरिया में पत्नी नूतन ठाकुर के नाम जमीन/प्लॉट का आवंटन कराया और बाद में 2002 में उसे बेच दिया गया। समाजसेवी संजय शर्मा की शिकायत पर दर्ज इसी केस में पुलिस ने दिसंबर में ठाकुर की गिरफ्तारी की थी। तब से वे देवरिया जेल में बंद हैं, जबकि अदालत में उनकी जमानत अर्जी पर सुनवाई लगातार चल रही है। UP News