सीएम योगी ने जन-शिकायतों और परियोजनाओं पर किया फोकस
सीएम ने बताया कि यह मॉडल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गुजरात में मुख्यमंत्री रहते हुए शुरू किए गए प्रशासनिक सुधारों का राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त रूप है। उनका कहना था कि इंटेंट, टेक्नोलॉजी और जवाबदेही के मेल से परिणाम अपने आप सुनिश्चित होते हैं।

UP News : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को आयोजित विशेष प्रेस वार्ता में कहा कि प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन (प्रगति) पोर्टल सिर्फ बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की निगरानी का मंच नहीं है, बल्कि यह नई कार्यसंस्कृति और आधुनिक प्रशासनिक दृष्टिकोण का उदाहरण है। सीएम ने बताया कि यह मॉडल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गुजरात में मुख्यमंत्री रहते हुए शुरू किए गए प्रशासनिक सुधारों का राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त रूप है। उनका कहना था कि इंटेंट, टेक्नोलॉजी और जवाबदेही के मेल से परिणाम अपने आप सुनिश्चित होते हैं।
डिजिटल गवर्नेंस और विभागीय समन्वय को मजबूत करता प्रगति
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रगति पोर्टल अंतर-मंत्रालयीय और अंतर-विभागीय समन्वय को सक्षम बनाता है। इसके जरिए जटिल समस्याओं का समयबद्ध समाधान संभव हुआ है। प्रगति का प्रारंभिक रूप वर्ष 2003 में गुजरात में 'स्वागत' के रूप में हुआ था। इसका उद्देश्य नागरिक शिकायतों के समाधान में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना था। राष्ट्रीय स्तर पर विकसित प्रगति मॉडल ने अब मेगा प्रोजेक्ट्स, सामाजिक योजनाओं और सिस्टम रिफॉर्म्स में टीम इंडिया अप्रोच को मजबूत किया है।
शासन में बदलाव : फाइल-आधारित से फील्ड-आधारित
सीएम ने स्पष्ट किया कि प्रगति केवल समीक्षा का यंत्र नहीं है, बल्कि शासन सुधार का माध्यम है। निर्णय प्रक्रिया को तेज बनाना, समय और लागत की बचत करना और केंद्र और राज्य के बीच स्पष्ट जवाबदेही सुनिश्चित करना है। प्रगति ने इन क्षेत्रों में असर दिखाया है। राष्ट्रीय स्तर पर 86 लाख करोड़ से अधिक परियोजनाओं में प्रगति ने गति लाई है। प्रधानमंत्री द्वारा 377 प्रमुख परियोजनाओं की प्रत्यक्ष समीक्षा की जाती है, जबकि 3162 में से 2958 मुद्दे हल हो चुके हैं।
उत्तर प्रदेश में प्रगति मॉडल का असर : गेम-चेंजर
सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में प्रगति राज्य के लिए गेम-चेंजर साबित हुआ। एक्सप्रेस-वे नेटवर्क, देश का सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क है। मेट्रो और एयर कनेक्टिविटी, रैपिड रेल, जलमार्ग और रोपवे प्रोजेक्ट सभी परियोजनाओं में समयबद्ध समीक्षा और समस्या-समाधान का लाभ मिला है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 10.48 लाख करोड़ की 330 परियोजनाएं चल रही हैं। इसमें परिवहन, ऊर्जा, स्वास्थ्य, औद्योगिक और शहरी विकास से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। 2.37 लाख करोड़ की 128 परियोजनाएं पहले ही पूर्ण हो चुकी हैं, जबकि बाकी 8.11 लाख करोड़ की 202 परियोजनाएं समयबद्ध प्रगति पर हैं।
तकनीक के बल पर बॉटलनेक से ब्रेकथ्रू स्टेट
सीएम ने बताया कि प्रगति जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म की वजह से उत्तर प्रदेश अब केवल फैसिलिटेटर नहीं, बल्कि परियोजनाओं को गति देने वाला एक्सेलेरेटर बन गया है। टीम इंडिया स्पिरिट मजबूत हुआ व केंद्र और राज्य के बीच सहयोग बढ़ा और परियोजनाओं पर चर्चा अब समाधान केंद्रित है। 2014 से पहले परियोजनाएं स्वीकृत तो होती थीं लेकिन पूरी नहीं हो पाती थीं। अब हर परियोजना के शिलान्यास के साथ समय-सीमा और नियमित समीक्षा सुनिश्चित की जाती है।
UP News : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को आयोजित विशेष प्रेस वार्ता में कहा कि प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन (प्रगति) पोर्टल सिर्फ बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की निगरानी का मंच नहीं है, बल्कि यह नई कार्यसंस्कृति और आधुनिक प्रशासनिक दृष्टिकोण का उदाहरण है। सीएम ने बताया कि यह मॉडल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गुजरात में मुख्यमंत्री रहते हुए शुरू किए गए प्रशासनिक सुधारों का राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त रूप है। उनका कहना था कि इंटेंट, टेक्नोलॉजी और जवाबदेही के मेल से परिणाम अपने आप सुनिश्चित होते हैं।
डिजिटल गवर्नेंस और विभागीय समन्वय को मजबूत करता प्रगति
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रगति पोर्टल अंतर-मंत्रालयीय और अंतर-विभागीय समन्वय को सक्षम बनाता है। इसके जरिए जटिल समस्याओं का समयबद्ध समाधान संभव हुआ है। प्रगति का प्रारंभिक रूप वर्ष 2003 में गुजरात में 'स्वागत' के रूप में हुआ था। इसका उद्देश्य नागरिक शिकायतों के समाधान में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना था। राष्ट्रीय स्तर पर विकसित प्रगति मॉडल ने अब मेगा प्रोजेक्ट्स, सामाजिक योजनाओं और सिस्टम रिफॉर्म्स में टीम इंडिया अप्रोच को मजबूत किया है।
शासन में बदलाव : फाइल-आधारित से फील्ड-आधारित
सीएम ने स्पष्ट किया कि प्रगति केवल समीक्षा का यंत्र नहीं है, बल्कि शासन सुधार का माध्यम है। निर्णय प्रक्रिया को तेज बनाना, समय और लागत की बचत करना और केंद्र और राज्य के बीच स्पष्ट जवाबदेही सुनिश्चित करना है। प्रगति ने इन क्षेत्रों में असर दिखाया है। राष्ट्रीय स्तर पर 86 लाख करोड़ से अधिक परियोजनाओं में प्रगति ने गति लाई है। प्रधानमंत्री द्वारा 377 प्रमुख परियोजनाओं की प्रत्यक्ष समीक्षा की जाती है, जबकि 3162 में से 2958 मुद्दे हल हो चुके हैं।
उत्तर प्रदेश में प्रगति मॉडल का असर : गेम-चेंजर
सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में प्रगति राज्य के लिए गेम-चेंजर साबित हुआ। एक्सप्रेस-वे नेटवर्क, देश का सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क है। मेट्रो और एयर कनेक्टिविटी, रैपिड रेल, जलमार्ग और रोपवे प्रोजेक्ट सभी परियोजनाओं में समयबद्ध समीक्षा और समस्या-समाधान का लाभ मिला है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 10.48 लाख करोड़ की 330 परियोजनाएं चल रही हैं। इसमें परिवहन, ऊर्जा, स्वास्थ्य, औद्योगिक और शहरी विकास से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। 2.37 लाख करोड़ की 128 परियोजनाएं पहले ही पूर्ण हो चुकी हैं, जबकि बाकी 8.11 लाख करोड़ की 202 परियोजनाएं समयबद्ध प्रगति पर हैं।
तकनीक के बल पर बॉटलनेक से ब्रेकथ्रू स्टेट
सीएम ने बताया कि प्रगति जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म की वजह से उत्तर प्रदेश अब केवल फैसिलिटेटर नहीं, बल्कि परियोजनाओं को गति देने वाला एक्सेलेरेटर बन गया है। टीम इंडिया स्पिरिट मजबूत हुआ व केंद्र और राज्य के बीच सहयोग बढ़ा और परियोजनाओं पर चर्चा अब समाधान केंद्रित है। 2014 से पहले परियोजनाएं स्वीकृत तो होती थीं लेकिन पूरी नहीं हो पाती थीं। अब हर परियोजना के शिलान्यास के साथ समय-सीमा और नियमित समीक्षा सुनिश्चित की जाती है।

















