सीएम योगी ने जन-शिकायतों और परियोजनाओं पर किया फोकस

सीएम ने बताया कि यह मॉडल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गुजरात में मुख्यमंत्री रहते हुए शुरू किए गए प्रशासनिक सुधारों का राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त रूप है। उनका कहना था कि इंटेंट, टेक्नोलॉजी और जवाबदेही के मेल से परिणाम अपने आप सुनिश्चित होते हैं।

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सीएम योगी आदित्यनाथ
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar13 Jan 2026 05:02 PM
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UP News : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को आयोजित विशेष प्रेस वार्ता में कहा कि प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन (प्रगति) पोर्टल सिर्फ बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की निगरानी का मंच नहीं है, बल्कि यह नई कार्यसंस्कृति और आधुनिक प्रशासनिक दृष्टिकोण का उदाहरण है। सीएम ने बताया कि यह मॉडल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गुजरात में मुख्यमंत्री रहते हुए शुरू किए गए प्रशासनिक सुधारों का राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त रूप है। उनका कहना था कि इंटेंट, टेक्नोलॉजी और जवाबदेही के मेल से परिणाम अपने आप सुनिश्चित होते हैं।

डिजिटल गवर्नेंस और विभागीय समन्वय को मजबूत करता प्रगति

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रगति पोर्टल अंतर-मंत्रालयीय और अंतर-विभागीय समन्वय को सक्षम बनाता है। इसके जरिए जटिल समस्याओं का समयबद्ध समाधान संभव हुआ है। प्रगति का प्रारंभिक रूप वर्ष 2003 में गुजरात में 'स्वागत' के रूप में हुआ था। इसका उद्देश्य नागरिक शिकायतों के समाधान में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना था। राष्ट्रीय स्तर पर विकसित प्रगति मॉडल ने अब मेगा प्रोजेक्ट्स, सामाजिक योजनाओं और सिस्टम रिफॉर्म्स में टीम इंडिया अप्रोच को मजबूत किया है।

शासन में बदलाव : फाइल-आधारित से फील्ड-आधारित

सीएम ने स्पष्ट किया कि प्रगति केवल समीक्षा का यंत्र नहीं है, बल्कि शासन सुधार का माध्यम है। निर्णय प्रक्रिया को तेज बनाना, समय और लागत की बचत करना और केंद्र और राज्य के बीच स्पष्ट जवाबदेही सुनिश्चित करना है। प्रगति ने इन क्षेत्रों में असर दिखाया है। राष्ट्रीय स्तर पर 86 लाख करोड़ से अधिक परियोजनाओं में प्रगति ने गति लाई है। प्रधानमंत्री द्वारा 377 प्रमुख परियोजनाओं की प्रत्यक्ष समीक्षा की जाती है, जबकि 3162 में से 2958 मुद्दे हल हो चुके हैं।

उत्तर प्रदेश में प्रगति मॉडल का असर : गेम-चेंजर

सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में प्रगति राज्य के लिए गेम-चेंजर साबित हुआ। एक्सप्रेस-वे नेटवर्क, देश का सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क है। मेट्रो और एयर कनेक्टिविटी, रैपिड रेल, जलमार्ग और रोपवे प्रोजेक्ट सभी परियोजनाओं में समयबद्ध समीक्षा और समस्या-समाधान का लाभ मिला है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 10.48 लाख करोड़ की 330 परियोजनाएं चल रही हैं। इसमें परिवहन, ऊर्जा, स्वास्थ्य, औद्योगिक और शहरी विकास से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। 2.37 लाख करोड़ की 128 परियोजनाएं पहले ही पूर्ण हो चुकी हैं, जबकि बाकी 8.11 लाख करोड़ की 202 परियोजनाएं समयबद्ध प्रगति पर हैं।

तकनीक के बल पर बॉटलनेक से ब्रेकथ्रू स्टेट

सीएम ने बताया कि प्रगति जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म की वजह से उत्तर प्रदेश अब केवल फैसिलिटेटर नहीं, बल्कि परियोजनाओं को गति देने वाला एक्सेलेरेटर बन गया है। टीम इंडिया स्पिरिट मजबूत हुआ व केंद्र और राज्य के बीच सहयोग बढ़ा और परियोजनाओं पर चर्चा अब समाधान केंद्रित है। 2014 से पहले परियोजनाएं स्वीकृत तो होती थीं लेकिन पूरी नहीं हो पाती थीं। अब हर परियोजना के शिलान्यास के साथ समय-सीमा और नियमित समीक्षा सुनिश्चित की जाती है।

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योगी सरकार का रजिस्ट्री फीस पर बड़ा फैसला, बदला सिस्टम

ऑनलाइन भुगतान लागू होने से न सिर्फ प्रक्रिया तेज और सुरक्षित होगी, बल्कि काउंटर पर भीड़ भी घटेगी और रजिस्ट्री का काम अधिक सुचारू हो सकेगा। कुल मिलाकर, यह कदम उत्तर प्रदेश में संपत्ति पंजीकरण व्यवस्था को और भरोसेमंद व आधुनिक बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

उत्तर प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला
उत्तर प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar13 Jan 2026 04:48 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश में जमीन और मकान की रजिस्ट्री व्यवस्था को कैशलेस, पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाने की दिशा में योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब ₹20,000 से अधिक की रजिस्ट्री/रजिस्ट्रेशन फीस नकद नहीं, बल्कि केवल ऑनलाइन मोड से ही जमा होगी। इस बदलाव को लेकर महानिरीक्षक निबंधन नेहा शर्मा ने प्रदेश के सभी पंजीकरण कार्यालयों को निर्देश जारी कर दिए हैं। सरकार की मंशा साफ है रजिस्ट्री में नकद लेनदेन की भूमिका घटे, भुगतान का हर रिकॉर्ड डिजिटल ट्रैक हो और आम नागरिकों को उत्तर प्रदेश के निबंधन कार्यालयों के चक्कर कम लगाने पड़ें। ऑनलाइन भुगतान लागू होने से न सिर्फ प्रक्रिया तेज और सुरक्षित होगी, बल्कि काउंटर पर भीड़ भी घटेगी और रजिस्ट्री का काम अधिक सुचारू हो सकेगा। कुल मिलाकर, यह कदम उत्तर प्रदेश में संपत्ति पंजीकरण व्यवस्था को और भरोसेमंद व आधुनिक बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

पहले फेज में इन जिलों को मिली प्राथमिकता

यह नई व्यवस्था सोमवार से ही उत्तर प्रदेश में लागू कर दी गई है और शुरुआत पहले चरण के तहत चुनिंदा जिलों से की गई है। इस फेज में आजमगढ़, बाराबंकी, रायबरेली, सुल्तानपुर, सीतापुर, हापुड़, मुजफ्फरनगर, अलीगढ़, बुलंदशहर, बरेली, अमरोहा, कानपुर नगर, फतेहपुर, देवरिया, चित्रकूट, बागपत, कासगंज, एटा, रामपुर, इटावा, महोबा, हरदोई, बस्ती, अंबेडकरनगर, जौनपुर, कौशांबी, भदोही, महाराजगंज, बहराइच और मऊ में ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था को सक्रिय किया गया है। प्रशासन का तर्क है कि इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने से सिस्टम पर अचानक लोड नहीं पड़ेगा, तकनीकी तैयारियां बेहतर तरीके से परखी जा सकेंगी और लोगों को भी उत्तर प्रदेश के रजिस्ट्री नियमों में हुए बदलाव अपनाने के लिए पर्याप्त समय व सुविधा मिल सकेगी।

यूपी में सैनिकों को नववर्ष पर राहत

उत्तर प्रदेश में नए साल की शुरुआत सशस्त्र सेनाओं और अर्धसैनिक बलों के सेवारत व सेवानिवृत्त जवानों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आई है। उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद ने ‘पहले आओ–पहले पाओ’ योजना के तहत फ्लैट बुकिंग पर जवानों को अतिरिक्त छूट देने का निर्णय लिया है। परिषद की 274वीं बैठक में मंजूर प्रस्ताव के बाद अब पात्र कार्मिकों को फ्लैट बुकिंग पर अधिकतम 20% तक छूट का लाभ मिलेगा। खास बात यह है कि यह सुविधा उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद के ऑनलाइन पोर्टल पर सक्रिय कर दी गई है, जिससे आवेदन और बुकिंग प्रक्रिया पहले से ज्यादा आसान हो गई है। फिलहाल परिषद लखनऊ, गाजियाबाद, मेरठ, कानपुर, सहारनपुर, मुरादाबाद और आगरा में उपलब्ध रेडी-टू-मूव रिक्त फ्लैट्स का आवंटन कर रही है। जहां आम नागरिकों को एकमुश्त भुगतान पर 15% तक छूट मिलती है वहीं उत्तर प्रदेश के जवानों के लिए यह रियायत बढ़ाकर ज्यादा आकर्षक बना दी गई है, ताकि वे कम लागत में अपना घर लेने का सपना तेजी से पूरा कर सकें।

भुगतान समय-सीमा के हिसाब से छूट का फॉर्मूला

उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद की इस पहल में छूट का फायदा भुगतान की समय-सीमा से सीधे जुड़ा रखा गया है। जो लाभार्थी आवंटन तिथि से 60 दिनों के भीतर पूरा भुगतान कर देंगे, उन्हें 20% तक की अधिकतम छूट मिलेगी। वहीं 61 से 90 दिनों के बीच भुगतान करने पर 15% और 91 से 120 दिनों के भीतर भुगतान करने वालों को 10% की छूट दी जाएगी। UP News

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जावेद अख़्तर की टॉप 5 शायरी: पढ़ते ही दिल ‘ठहर’ जाएगा

अपने योगदान के लिए उन्हें कई फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार, राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार और पद्म भूषण सहित अनेक सम्मान मिले हैं। वर्ष 2020 में उन्हें धर्मनिरपेक्षता और स्वतंत्र सोच को बढ़ावा देने के लिए रिचर्ड डॉकिंस अवार्ड से भी नवाज़ा गया।

जावेद अख़्तर की शायरी
जावेद अख़्तर की शायरी
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar13 Jan 2026 04:19 PM
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Javed Akhtar : जावेद अख़्तर हिंदी सिनेमा और आधुनिक शायरी की दुनिया का ऐसा नाम हैं, जिनकी कलम ने पर्दे पर कई पीढ़ियों की सोच और ज़ुबान को आकार दिया है। वह कवि, गीतकार और पटकथा-लेखक के तौर पर लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। शुरुआती दौर में सलीम ख़ान के साथ उनकी मशहूर सलीम–जावेद जोड़ी ने सीता और गीता, ज़ंजीर, दीवार और शोले जैसी फिल्मों के लिए कहानी, पटकथा और संवाद लिखकर हिंदी फिल्म लेखन को नई पहचान दी। इसके बाद उन्होंने गीत-लेखन में भी अपनी अलग छाप छोड़ी तेज़ाब, 1942: अ लव स्टोरी, बॉर्डर और लगान जैसी फिल्मों के गीत उनकी रचनात्मकता की मिसाल माने जाते हैं। अपने योगदान के लिए उन्हें कई फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार, राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार और पद्म भूषण सहित अनेक सम्मान मिले हैं। वर्ष 2020 में उन्हें धर्मनिरपेक्षता और स्वतंत्र सोच को बढ़ावा देने के लिए रिचर्ड डॉकिंस अवार्ड से भी नवाज़ा गया।

व्यक्तिगत जीवन

जावेद अख़्तर का जन्म 17 जनवरी 1945 को ग्वालियर में हुआ। उनके पिता जाँ निसार अख़्तर प्रगतिशील कवि थे, जबकि माता सफ़िया अख़्तर उर्दू की लेखिका और शिक्षिका के रूप में जानी जाती थीं। पारिवारिक विरासत साहित्यिक रही वे लोकप्रिय कवि मजाज़ के भांजे बताए जाते हैं और दादा मुज़्तर ख़ैराबादी भी शायरी की दुनिया का प्रतिष्ठित नाम थे। हालांकि इतनी समृद्ध साहित्यिक पृष्ठभूमि के बावजूद उनका बचपन आसान नहीं रहा। कम उम्र में मां का साया उठ गया। इसके बाद कुछ समय उन्होंने लखनऊ में नाना-नानी के साथ बिताया और फिर शिक्षा के लिए अलीगढ़ में अपनी ख़ाला के घर रहकर शुरुआती पढ़ाई पूरी की। यह अनुभव उनकी संवेदनशीलता और विचारों में साफ झलकता है, जो आगे चलकर उनकी रचनाओं की पहचान बनी।

जावेद अख़्तर टॉप 5 शायरी

1 -सब का ख़ुशी से फ़ासला एक क़दम है, जावेद अख़्तर टॉप 5 शायरी 

हर घर में बस एक ही कमरा कम है। 

2 -इस शहर में जीने के अंदाज़ निराले हैं,

होंटों पे लतीफ़े हैं आवाज़ में छाले हैं। 

3 - हम तो बचपन में भी अकेले थे,

सिर्फ़ दिल की गली में खेले थे। 

4 - खुला है दर प तिरा इंतिज़ार जाता रहा,

ख़ुलूस तो है मगर ए'तिबार जाता रहा। 

5 - तुम बैठे हो लेकिन जाते देख रहा हूँ,

मैं तन्हाई के दिन आते देख रहा हूँ। 


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