उत्तर प्रदेश में 21 IAS को प्रमोशन, योगी सरकार ने जारी की नई सूची

खासतौर पर राजस्व- वित्त- नगर विकास से जुड़े बदलावों को उत्तर प्रदेश की प्राथमिक परियोजनाओं और जनहित कार्यक्रमों को तेज धार देने वाली प्रशासनिक तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।

नए साल पर योगी सरकार का बड़ा प्रशासनिक फैसला
नए साल पर योगी सरकार का बड़ा प्रशासनिक फैसला, 21 IAS को प्रमोशन
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar02 Jan 2026 09:38 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश में नए साल की दस्तक के साथ ही उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रशासनिक ढांचे को नई रफ्तार देने के लिए नौकरशाही में बड़ा फेरबदल किया है। शासनादेश के तहत 21 वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारियों को पदोन्नति के साथ नई तैनाती मिली है, जिसमें कई अफसर विशेष सचिव से सचिव स्तर तक पहुंचे हैं। साथ ही निर्वाचन, वित्त, राजस्व, नगर विकास, चिकित्सा शिक्षा, महिला कल्याण और समाज कल्याण जैसे अहम विभागों में जिम्मेदारियों का पुनर्गठन किया गया है। माना जा रहा है कि यह कदम उत्तर प्रदेश में फैसलों की गति बढ़ाने, योजनाओं की निगरानी मजबूत करने और फील्ड पर इम्प्लीमेंटेशन को अधिक असरदार बनाने की रणनीति का हिस्सा है। खासतौर पर राजस्व- वित्त- नगर विकास से जुड़े बदलावों को उत्तर प्रदेश की प्राथमिक परियोजनाओं और जनहित कार्यक्रमों को तेज धार देने वाली प्रशासनिक तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।

किसे मिली कौन-सी नई जिम्मेदारी: देखें पूरी सूची

  1. अखंड प्रताप सिंह: विशेष सचिव, निर्वाचन विभाग से सचिव, निर्वाचन विभाग एवं अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी बनाए गए।
  2. नेहा शर्मा: प्रभारी महानिरीक्षक, निबंधन से महानिरीक्षक, निबंधन।
  3. मोनिका रानी: प्रभारी महानिदेशक, स्कूल शिक्षा से महानिदेशक, स्कूल शिक्षा (उत्तर प्रदेश)।
  4. योगेश कुमार: प्रभारी आयुक्त एवं निबंधक, सहकारी समितियाँ से आयुक्त एवं निबंधक, सहकारिता (उत्तर प्रदेश)।
  5. अपर्णा यू.: सचिव, चिकित्सा शिक्षा विभाग एवं महानिदेशक, चिकित्सा शिक्षा से प्रमुख सचिव, राजस्व विभाग।
  6. डा. सारिका मोहन: सचिव, वित्त विभाग से सचिव, चिकित्सा शिक्षा विभाग तथा साथ में महानिदेशक, चिकित्सा शिक्षा का दायित्व।
  7. एस.वी.एस. रंगा राव: सदस्य (न्यायिक), राजस्व परिषद से प्रमुख सचिव, उत्तर प्रदेश पुनर्गठन समन्वय/राष्ट्रीय एकीकरण/सामान्य प्रशासन विभाग।
  8. नवीन कुमार जी.एस.: सचिव, सिंचाई एवं जल संसाधन से सदस्य (न्यायिक), राजस्व परिषद।
  9. भवानी सिंह खंगारौत: विशेष सचिव, राजस्व से सचिव, वित्त विभाग।
  10. अरुण प्रकाश: विशेष सचिव, नगर विकास से विशेष सचिव, राजस्व विभाग।
  11. रवीन्द्र कुमार: विशेष सचिव, कृषि एवं कृषि शिक्षा से सचिव, नगर विकास विभाग एवं राज्य मिशन निदेशक।
  12. दिव्य प्रकाश गिरि: विशेष सचिव, नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति से सचिव, लोक निर्माण विभाग।
  13. कृष्ण कुमार: विशेष सचिव, सिंचाई एवं जल संसाधन से सचिव, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के साथ मुख्य कार्यपालक अधिकारी, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना।
  14. सुधा वर्मा: विशेष सचिव, महिला कल्याण एवं सचिव, राज्य महिला आयोग से सचिव, राजस्व विभाग।
  15. रेणु तिवारी: सचिव, उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग से विशेष सचिव, महिला कल्याण एवं सचिव, राज्य महिला आयोग।
  16. राजेन्द्र सिंह-2: विशेष सचिव, समाज कल्याण के साथ सचिव, उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग का अतिरिक्त प्रभार।
  17. संजीव सिंह: विशेष सचिव, वित्त से डायरेक्टर, समाज कल्याण एवं एमडी, यूपी सिडको।
  18. डा. वंदना वर्मा: निदेशक, पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं एमडी, पिछड़ा वर्ग वित्त विकास निगम से डायरेक्टर, महिला कल्याण तथा एमडी, उत्तर प्रदेश महिला कल्याण निगम।
  19. उमेश प्रताप सिंह: विशेष सचिव, पिछड़ा वर्ग कल्याण के साथ डायरेक्टर, पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं एमडी, पिछड़ा वर्ग वित्त विकास निगम का अतिरिक्त प्रभार।
  20. कुमार प्रशान्त: निदेशक, समाज कल्याण एवं एमडी, यूपीसिडको से सचिव, गृह विभाग।
  21. संदीप कौर: एमडी, उत्तर प्रदेश महिला कल्याण निगम एवं निदेशक, महिला कल्याण विभाग से सचिव, वित्त विभाग।

उत्तर प्रदेश में क्यों अहम माना जा रहा है यह फेरबदल?

उत्तर प्रदेश में साल के पहले ही दिन इस स्तर का बदलाव कई संकेत देता है सरकार की कोशिश है कि प्रशासनिक ढांचे में तेजी, जवाबदेही और विभागीय तालमेल बढ़े। राजस्व, नगर विकास और वित्त जैसे विभागों में नई पोस्टिंग से उत्तर प्रदेश में विकास परियोजनाओं, शहरी व्यवस्थाओं, वित्तीय अनुशासन और जनकल्याण योजनाओं के क्रियान्वयन को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। UP News

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माघ मेले में प्रतिमा विवाद पर गरमाई राजनीति, योगी सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

बृहस्पतिवार को माता प्रसाद पांडेय प्रयागराज के माघ मेला क्षेत्र स्थित सेक्टर-6 में बने मुलायम सिंह यादव स्मृति सेवा संस्थान के शिविर में पहुंचे। यहां उन्होंने बताया कि मेला प्रशासन द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद अब शिविर में नेताजी की प्रतिमा नहीं लगाई जाएगी।

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माघ मेला क्षेत्र में मुलायम सिंह यादव की प्रतिमा
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar01 Jan 2026 06:43 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने माघ मेले में सपा संस्थापक नेताजी मुलायम सिंह यादव की प्रतिमा को लेकर उठे विवाद पर योगी सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी की बढ़ती जनस्वीकृति से सरकार घबराई हुई है और इसी वजह से दमनात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। बृहस्पतिवार को माता प्रसाद पांडेय प्रयागराज के माघ मेला क्षेत्र स्थित सेक्टर-6 में बने मुलायम सिंह यादव स्मृति सेवा संस्थान के शिविर में पहुंचे। यहां उन्होंने बताया कि मेला प्रशासन द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद अब शिविर में नेताजी की प्रतिमा नहीं लगाई जाएगी। हालात को देखते हुए संस्थान ने प्रतिमा के स्थान पर श्री राधा-कृष्ण की मूर्ति स्थापित करने का निर्णय लिया है।

महाकुंभ में अनुमति, माघ मेले में आपत्ति

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पूर्व में महाकुंभ मेले के दौरान नेताजी की प्रतिमा स्थापित की गई थी, तब किसी प्रकार की आपत्ति नहीं जताई गई। लेकिन इस बार माघ मेले में प्रशासन ने इसे राजनीतिक बताते हुए रोक लगा दी। उन्होंने इसे दोहरा मापदंड बताते हुए सरकार की नीयत पर सवाल खड़े किए।

संदीप यादव पर कार्रवाई को बताया राजनीतिक बदले की भावना

माता प्रसाद पांडेय ने सपा नेता और शिविर संस्थापक संदीप यादव के खिलाफ दर्ज मुकदमों को भी राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया। उन्होंने कहा कि संदीप यादव कोई अपराधी नहीं बल्कि एक सक्रिय राजनीतिक कार्यकर्ता हैं, जो शहर उत्तरी विधानसभा से चुनाव भी लड़ चुके हैं। उनके खिलाफ दर्ज मामलों को लोकतांत्रिक आंदोलनों से जुड़ा बताते हुए उन्होंने कहा कि इसी तरह के मुकदमे कभी भाजपा नेताओं पर भी दर्ज हो चुके हैं। उन्होंने आशंका जताई कि संदीप यादव पर आगे गैंगस्टर एक्ट भी लगाया जा सकता है, जो सत्ता के दुरुपयोग का उदाहरण है। हालांकि, गुंडा एक्ट की कार्रवाई के बाद संदीप यादव के भूमिगत होने को लेकर नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि उन्हें इस संबंध में कोई ठोस जानकारी नहीं है।

माघ मेले की व्यवस्थाओं पर उठाए सवाल

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के माघ मेले के खर्च संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि सरकार जितना खर्च दिखा रही है, उतनी सुविधाएं जमीन पर नजर नहीं आ रहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि भारी बजट के बावजूद मेला व्यवस्थाएं अधूरी हैं और सरकार दावे पूरे करने में विफल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि महाकुंभ के दौरान किए गए बड़े-बड़े वादों के बावजूद वे स्वयं मेले के भीतर तक नहीं जा सके और अरैल क्षेत्र से ही लौटना पड़ा।

साधु-संतों और नाविकों की समस्याओं का मुद्दा

नेता प्रतिपक्ष ने माघ मेले में साधु-संतों द्वारा किए जा रहे विरोध को गंभीर बताते हुए कहा कि यह आम जनता का नहीं, बल्कि धार्मिक संतों का असंतोष है, जिसे सरकार को गंभीरता से सुनना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने नाविकों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि माघ मेले में मोटर बोट का अधिक उपयोग पारंपरिक नाविकों की रोजी-रोटी को प्रभावित करता है और दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ाता है। उन्होंने सुझाव दिया कि मोटर बोट का इस्तेमाल केवल आपात स्थितियों तक सीमित रखा जाना चाहिए। माता प्रसाद पांडेय ने स्पष्ट किया कि मुलायम सिंह यादव स्मृति सेवा संस्थान के शिविर में किसी प्रकार की राजनीतिक गतिविधि नहीं हो रही है। यहां धार्मिक अनुष्ठान, श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था और भंडारे का आयोजन किया जाएगा।

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यूपी रेरा ने 7 नई रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को दी मंजूरी, बनेंगी 1,024 यूनिट्स

इन परियोजनाओं के माध्यम से पांच जिलों नोएडा, लखनऊ, मथुरा, बरेली और मेरठ में कुल 1,024 आवासीय और व्यावसायिक यूनिटों का निर्माण किया जाएगा। इन परियोजनाओं की अनुमानित कुल लागत 416.94 करोड़ है।

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यूपी रेरा
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar01 Jan 2026 06:12 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) ने हाल ही में सात नई रियल एस्टेट परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं के माध्यम से पांच जिलों नोएडा, लखनऊ, मथुरा, बरेली और मेरठ में कुल 1,024 आवासीय और व्यावसायिक यूनिटों का निर्माण किया जाएगा। इन परियोजनाओं की अनुमानित कुल लागत 416.94 करोड़ है।

शहरवार विवरण

* नोएडा: 2 व्यावसायिक प्रोजेक्ट्स, कुल लागत 181.36 करोड़, 298 यूनिट्स। उद्देश्य व्यावसायिक गतिविधियों और निवेश को बढ़ावा देना।

* मथुरा: 2 आवासीय प्रोजेक्ट्स, कुल लागत 154.92 करोड़, 565 यूनिट्स। यह परियोजनाएँ मथुरा में आवासीय विकास को गति देंगी।

* लखनऊ: 1 व्यावसायिक प्रोजेक्ट, लागत 27.65 करोड़, 30 यूनिट्स। इससे संगठित व्यावसायिक ढांचे को मजबूती मिलेगी।

* बरेली: 1 आवासीय प्रोजेक्ट, लागत 24.56 करोड़, 106 यूनिट्स। शहर में आवासीय विकास को बढ़ावा मिलेगा।

* मेरठ: 1 मिश्रित प्रोजेक्ट (आवासीय + व्यावसायिक), लागत 28.45 करोड़, 25 यूनिट्स। इसका लक्ष्य संतुलित शहरी विकास है।

आर्थिक और सामाजिक लाभ

यूपी रेरा के अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी ने कहा कि ये परियोजनाएँ न केवल आवासीय और व्यावसायिक संरचना को मजबूत करेंगी, बल्कि नए रोजगार के अवसर भी पैदा करेंगी। 416.94 करोड़ के निवेश से निर्माण क्षेत्र के श्रमिकों, इंजीनियरों, तकनीकी विशेषज्ञों और अन्य संबंधित उद्योगों को लाभ मिलेगा। साथ ही यह निवेश प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करेगा। यूपी रेरा ने परियोजनाओं में पारदर्शिता, समयबद्ध पूर्णता और गृह खरीदारों के हितों की सुरक्षा पर जोर दिया है, साथ ही जिम्मेदार और गुणवत्तापूर्ण निवेश को बढ़ावा देने का संकल्प व्यक्त किया है।

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