बहराइच पुलिस में बड़ी फेरबदल, एसपी ने बदली थानों-चौकियों की कमान

निलंबित किए गए कर्मियों में मटेरा थानाध्यक्ष सुरेन्द्र प्रताप बौद्ध, उपनिरीक्षक विशाल जायसवाल और सिपाही अवधेश शामिल हैं। इस कार्रवाई के बाद जिलेभर के थानों में जिम्मेदारी और जवाबदेही को लेकर संदेश साफ माना जा रहा है।

बहराइच पुलिस में बड़ा फेरबदल
बहराइच पुलिस में बड़ा फेरबदल
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar16 Jan 2026 11:40 AM
bookmark

UP News : उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में पुलिस अधीक्षक (एसपी) रामनयन सिंह की सख्त कार्रवाई से पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को और चुस्त-दुरुस्त करने के मकसद से एसपी ने कर्तव्य में लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए तीन कर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबित किए गए कर्मियों में मटेरा थानाध्यक्ष सुरेन्द्र प्रताप बौद्ध, उपनिरीक्षक विशाल जायसवाल और सिपाही अवधेश शामिल हैं। इस कार्रवाई के बाद जिलेभर के थानों में जिम्मेदारी और जवाबदेही को लेकर संदेश साफ माना जा रहा है।

एसपी की सख्ती के बाद ट्रांसफर लिस्ट जारी

उत्तर प्रदेश के बहराइच में एसपी रामनयन सिंह के निर्देश पर मटेरा थाना की कमान अब देहात कोतवाली की रायपुर राजा पुलिस चौकी के प्रभारी हरिकेश सिंह को सौंप दी गई है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में प्रभावी पुलिसिंग के लिए जहां भी कामकाज में ढिलाई या सुस्ती सामने आएगी, वहां तत्काल प्रशासनिक कदम उठाए जाएंगे। इसी रणनीति के तहत बहराइच में कई स्तर पर तबादलों की नई व्यवस्था लागू की गई है। आदेश के अनुसार उपनिरीक्षक पूर्णेश नारायण पांडे को कस्बा नानपारा चौकी से हटाकर रायपुर राजा चौकी की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि कामेश्वर राय को चौकी दरगाह शरीफ से स्थानांतरित कर कस्बा नानपारा भेजा गया है। इसके अलावा अभय पांडे को हरदी से विशेश्वरगंज, विजय कुमार गुप्ता को कोतवाली नगर से मटेरा, और रौशनी वर्मा को हुजूरपुर से रामगांव तैनात किया गया है। यातायात व्यवस्था को भी दुरुस्त करने के लिए रवि यादव को यातायात सर्किल नगर से यातायात नानपारा भेजा गया है, वहीं रौशन सिंह को जरवल रोड थाने से फील्ड यूनिट शाखा में नई जिम्मेदारी दी गई है।

41 महिला और पुरुष आरक्षियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव

उत्तर प्रदेश के बहराइच में पुलिसिंग को जमीन पर और प्रभावी बनाने के लिए एसपी रामनयन सिंह ने 41 महिला व पुरुष आरक्षियों के कार्यक्षेत्र में भी व्यापक फेरबदल किया है। पुलिस विभाग में इस कदम को पेट्रोलिंग, कानून-व्यवस्था और त्वरित कार्रवाई को मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। पुलिस अधीक्षक ने सभी स्थानांतरित कर्मियों को साफ निर्देश दिए हैं कि वे बिना देरी अपने नए तैनाती स्थल पर पहुंचकर कार्यभार संभालें, ताकि उत्तर प्रदेश के बहराइच में सुरक्षा व्यवस्था की रफ्तार और जवाबदेही दोनों और तेज हो सके। UP News

संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

‘सनातन की चाल नहीं रुकेगी’ प्रयागराज से सतुआ बाबा का बड़ा ऐलान

उनका लक्ष्य बस उत्तर प्रदेश की धरती पर तय अपने पड़ाव तक पहुंचना और यात्रा की गति बनाए रखना है। बाबा का आरोप है कि कुछ ताकतें समाज को जातियों में बांटकर परंपराओं को कमजोर करने में लगी हैं, और ऐसे लोगों के खिलाफ उनकी प्रतिक्रिया आगे भी कठोर रहेगी।

सतुआ बाबा
सतुआ बाबा
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar16 Jan 2026 10:51 AM
bookmark

UP News : उत्तर प्रदेश के माघ मेले में लग्जरी गाड़ियों में पहुंचकर सुर्खियों में आए सतुआ बाबा ने अब विरोधियों पर खुलकर पलटवार किया है। सतुआ बाबा ने कहा कि सनातन सिर्फ आस्था नहीं, बल्कि अर्थ, शास्त्र, शस्त्र और रफ्तार की भी पहचान है। उन्होंने चेताया कि जो लोग सनातन की गति रोकने की कोशिश करेंगे, उन्हें उसी रफ्तार में जवाब मिलेगा। हालांकि, बाबा ने यह भी साफ किया कि उनका इरादा किसी विवाद को भड़काने का नहीं है उनका लक्ष्य बस उत्तर प्रदेश की धरती पर तय अपने पड़ाव तक पहुंचना और यात्रा की गति बनाए रखना है। बाबा का आरोप है कि कुछ ताकतें समाज को जातियों में बांटकर परंपराओं को कमजोर करने में लगी हैं, और ऐसे लोगों के खिलाफ उनकी प्रतिक्रिया आगे भी कठोर रहेगी।

सोशल मीडिया पर घिरे सतुआ बाबा

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माघ मेले के दौरान सतुआ बाबा को डिफेंडर और पोर्शे जैसी लग्जरी गाड़ियों में देखे जाने के बाद सोशल मीडिया पर संत परंपरा, सादगी और जीवनशैली को लेकर बहस तेज हो गई। सवालों की बौछार पर बाबा ने बेपरवाह अंदाज में जवाब दियाउन्होंने कहा कि उन्हें न तो गाड़ियों के नाम मालूम हैं, न उनकी कीमत का अंदाजा। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि नाम-दम जानना है तो गूगल कर लीजिए, उनका काम किसी ब्रांड की चर्चा करना नहीं, बल्कि यात्रा करते हुए अपने पड़ाव तक पहुंचना और अपनी रफ्तार कायम रखना है।

“सनातन कमजोर नहीं” - सतुआ बाबा

बाबा ने कहा कि क्या भारत का सनातन इतना कमजोर है कि कोई गाड़ी में बैठे तो उसे गलत मान लिया जाए। उन्होंने उत्तर प्रदेश के विकास का उदाहरण देते हुए कहा कि आज का भारत “स्वतंत्रता” का देश है और यहां विकास की रफ्तार तेज है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम लेते हुए कहा कि विकास की यह गति आगे और बढ़ेगी। महंगी गाड़ियों की चर्चा पर सतुआ बाबा ने कहा कि उनके लिए गाड़ी का नाम या कीमत मुद्दा नहीं है। उनके अनुसार, जेसीबी, ठेला, बुलेट, जीप, डिफेंडर या फरारी सब साधन हैं, असली विषय लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य अपने पड़ाव तक पहुंचकर सनातन ध्वज को आगे बढ़ाना है।

माघ मेले की व्यवस्था पर सरकार की सराहना

सतुआ बाबा ने प्रयागराज माघ मेले की व्यवस्थाओं को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि यह विशाल आयोजन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पूरी मुस्तैदी के साथ संचालित हो रहा है, जिसमें संत समाज भी व्यवस्थाओं को मजबूत बनाने में सक्रिय सहयोग दे रहा है। बाबा के मुताबिक, मेले में उमड़ रही करोड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ इस बात का साफ संकेत है कि सनातन परंपरा आज भी देश की सामाजिक चेतना और मुख्यधारा में पूरी मजबूती के साथ जीवंत है।

सतुआ पीठ का अर्थ और एकजुटता का संदेश

बाबा ने सतुआ पीठ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्राचीन पीठ है और सतुआ का अर्थ कई तत्वों का एक साथ मिलना है जैसे अलग-अलग अनाज मिलकर सतुआ बनता है, वैसे ही समाज को भी एकजुट रहना चाहिए। उन्होंने मणिकर्णिका घाट का जिक्र करते हुए सनातन परंपरा से जुड़ने की बात दोहराई। अपने बयान में सतुआ बाबा ने विपक्ष और विधर्मियों को लेकर भी आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि जो लोग भारत की प्रगति और विकास की गति रोकना चाहते हैं, वे पीछे रह जाएंगे। UP News

संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

प्रयागराज माघ मेले में संतों की लग्जरी गाड़ियों ने छेड़ी नई बहस

माघ मेले में जगद्गुरु महामंडलेश्वर संतोष दास, जिन्हें सतुआ बाबा के नाम से जाना जाता है, अपनी शानदार कारों के कारण सबसे अधिक सुर्खियों में हैं। उनकी लैंड रोवर डिफेंडर पहले ही आकर्षण का केंद्र बनी हुई थी।

satua baba
सतुआ बाबा और उनकी लग्जरी गाड़ी
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar15 Jan 2026 06:39 PM
bookmark

UP News : माघ मेला सदियों से त्याग, तपस्या और आत्मिक साधना का प्रतीक रहा है, लेकिन इस वर्ष मेले में दिखाई दे रही भव्यता ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। कुछ प्रमुख संतों की आलीशान जीवनशैली, विशेषकर महंगी गाड़ियों में आगमन, श्रद्धा और वैराग्य के बीच एक नई चर्चा को जन्म दे रही है।

करोड़ों की गाड़ियों में पहुंचे संत

माघ मेले में जगद्गुरु महामंडलेश्वर संतोष दास, जिन्हें सतुआ बाबा के नाम से जाना जाता है, अपनी शानदार कारों के कारण सबसे अधिक सुर्खियों में हैं। उनकी लैंड रोवर डिफेंडर पहले ही आकर्षण का केंद्र बनी हुई थी, वहीं हाल ही में उनके काफिले में शामिल हुई लगभग तीन करोड़ रुपये मूल्य की पोर्शे कार ने चर्चा को और तेज कर दिया। मेले में स्थित उनके शिविर में इस कार का धार्मिक विधि से पूजन किया गया, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और दर्शक जुटे।

श्रद्धा और सवाल दोनों साथ

इसे लेकर लोगों की राय बंटी हुई है। एक वर्ग का मानना है कि जो संत त्याग, संयम और भोग-विलास से दूर रहने की शिक्षा देते हैं, उनका इतना वैभवपूर्ण जीवन विरोधाभास पैदा करता है। वहीं समर्थकों का कहना है कि साधन होना और साधना करना दो अलग बातें हैं। उनके अनुसार यह समृद्धि गुरु-कृपा और ईश्वर की अनुकंपा का परिणाम है।

सतुआ बाबा का पक्ष

सतुआ बाबा का कहना है कि उनके जीवन में जो कुछ भी है, वह उनके गुरु, परंपरा और देवी-देवताओं के आशीर्वाद से है। उनका तर्क है कि अध्यात्म कभी दरिद्र नहीं रहा, बल्कि ईश्वर की कृपा जीवन को आगे बढ़ाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गाड़ियां उनके लिए सुविधा का साधन हैं, न कि मोह का कारण। उनके अनुसार ब्रांड या कीमत मायने नहीं रखती, बल्कि वह उद्देश्य महत्वपूर्ण है, जिसके लिए इन साधनों का उपयोग किया जाता है।

प्राचीन परंपरा का वर्तमान स्वरूप

सतुआ बाबा का मुख्य आश्रम काशी के मणिकर्णिका घाट पर स्थित है। इस धार्मिक पीठ की स्थापना वर्ष 1803 में गुजरात के संत जेठा पटेल ने की थी। परंपरा के अनुसार, इस पीठ के प्रमुख को सतुआ बाबा कहा जाता है। आश्रम में आज भी बटुकों को वैदिक शिक्षा दी जाती है। उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले के एक साधारण ब्राह्मण परिवार में जन्मे संतोष दास ने 11 वर्ष की आयु में घर छोड़ दिया था। उनकी प्रतिभा और साधना को देखते हुए उन्हें मात्र 19 वर्ष की उम्र में महामंडलेश्वर की उपाधि प्रदान की गई, जो अपने आप में एक दुर्लभ उदाहरण है।

केवल एक संत तक सीमित नहीं मामला

यह प्रवृत्ति केवल सतुआ बाबा तक सीमित नहीं है। किन्नर अखाड़े समेत अन्य कई महामंडलेश्वर भी महंगी गाड़ियों और भव्य जीवनशैली के लिए जाने जाते हैं। मेले में फॉर्च्यूनर, इनोवा और स्कॉर्पियो जैसी गाड़ियां आम दृश्य बन चुकी हैं। माघ मेला अब केवल साधना का केंद्र नहीं, बल्कि बदलते समय के साथ अध्यात्म की नई तस्वीर भी प्रस्तुत कर रहा है। सवाल यह नहीं है कि संत क्या उपयोग कर रहे हैं, बल्कि यह है कि क्या आधुनिक साधन और आध्यात्मिक जीवन साथ-साथ चल सकते हैं? इस प्रश्न का उत्तर हर व्यक्ति अपनी आस्था और सोच के अनुसार स्वयं तय कर रहा है।

संबंधित खबरें