घूसखोर पंडित पर भड़के सीएम योगी, लखनऊ में FIR दर्ज

पुलिस के मुताबिक, आपत्तिकर्ताओं की शिकायत है कि सीरीज का नाम और प्रस्तुति एक विशेष समाज खासतौर पर ब्राह्मण समुदाय को गलत संदर्भ में दिखाने का संकेत देता है। इससे सामाजिक तनाव बढ़ सकता है और कानून-व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका है।

सीएम योगी
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locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar06 Feb 2026 12:40 PM
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UP News : ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज से पहले ही वेब सीरीज घूसखोर पंडित उत्तर प्रदेश में विवादों के केंद्र में आ गई है। टाइटल और कथित कंटेंट को लेकर आपत्ति जताते हुए लखनऊ के हजरतगंज थाने में डायरेक्टर व टीम के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद दर्ज शिकायत के आधार पर हुई। पुलिस के मुताबिक, आपत्तिकर्ताओं की शिकायत है कि सीरीज का नाम और प्रस्तुति एक विशेष समाज खासतौर पर ब्राह्मण समुदाय को गलत संदर्भ में दिखाने का संकेत देता है। इससे सामाजिक तनाव बढ़ सकता है और कानून-व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका है। इसी आधार पर केस दर्ज कर जांच शुरू की गई है।

धार्मिक संगठनों ने खोला मोर्चा

विवाद बढ़ने के साथ ही उत्तर प्रदेश के धार्मिक-सामाजिक संगठनों ने भी विरोध तेज कर दिया है। मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी महाराज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सीरीज पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि टाइटल में इस्तेमाल शब्द समाज की छवि को ठेस पहुंचाते हैं और ‘घूसखोर’ जैसे शब्दों का प्रयोग आपत्तिजनक है। वहीं प्रयागराज से भी संत समाज की कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के अध्यक्ष स्वामी ब्रह्माश्रम महाराज ने इसे सनातन परंपरा के खिलाफ बताते हुए बैन की मांग की है।

रिलीज से पहले मेकर्स ने उठाया बड़ा कदमइस पूरे विवाद के बीच मेकर्स की ओर से भी प्रतिक्रिया आई है। डायरेक्टर नीरज पांडेय ने बयान जारी कर कहा कि कुछ दर्शकों की भावनाएं आहत होने की बात सामने आई, इसे देखते हुए फिलहाल सभी प्रमोशनल मटेरियल हटाए गए हैं। सीरीज में मनोज बाजपेयी, नुसरत भरूचा और श्रद्धा दास के मुख्य भूमिकाओं में होने की जानकारी दी जा रही है। इसका टीजर हाल में रिलीज हुआ था और इसे इसी साल नेटफ्लिक्स पर आने की चर्चा है। UP News

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उत्तर प्रदेश का वोटर बनने का लास्ट चांस आज, 4 बजे तक ही है मौका

UP SIR Update 2026: मतदाता सूची में नाम जोड़ने का आज आखिरी मौका है। अगर आज आवेदन नहीं किया तो फाइनल वोटर लिस्ट में नाम नहीं छपेगा। Form 6 भरने की अंतिम तारीख, समय और पूरी प्रक्रिया यहां समझें।

UP SIR Update 2026
वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने की अंतिम तारीख
locationभारत
userअसमीना
calendar06 Feb 2026 12:02 PM
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अगर आप उत्तर प्रदेश में रहते हैं और अब तक आपका नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं है तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। आज (6 फरवरी) का दिन निर्णायक है क्योंकि आज के बाद नया नाम जोड़ने, संशोधन करने या कटवाने का कोई मौका नहीं मिलेगा। अगर आज आवेदन नहीं किया तो 6 मार्च को प्रकाशित होने वाली फाइनल मतदाता सूची में आपका नाम नहीं छपेगा।

आज है वोटर बनने का आखिरी दिन

उत्तर प्रदेश में चल रही Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। जिला निर्वाचन कार्यालय की ओर से साफ कर दिया गया है कि शुक्रवार शाम 4 बजे तक ही मतदाता सूची से जुड़े सभी आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। इसके बाद कोई भी फॉर्म मान्य नहीं होगा। आज के दिन को देखते हुए हर बूथ पर विशेष इंतजाम किए गए हैं। BLO के साथ-साथ अन्य विभागों के कर्मचारी भी तैनात किए गए हैं ताकि किसी भी योग्य नागरिक को परेशानी न हो।

6 मार्च को छपेगी फाइनल वोटर लिस्ट

चुनाव आयोग की जानकारी के अनुसार, 6 मार्च 2026 को फाइनल मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। जो लोग आज नाम नहीं जुड़वाएंगे उनका नाम इस सूची में शामिल नहीं हो पाएगा। यही वजह है कि प्रशासन लगातार लोगों से अपील कर रहा है कि वे अंतिम दिन का पूरा लाभ उठाएं।

अब तक 2 लाख फॉर्म-6 जमा

SIR अभियान के तहत अब तक लगभग 2 लाख फॉर्म संख्या-6 (नए मतदाता जोड़ने के लिए) जमा हो चुके हैं। प्रयागराज जिले की बात करें तो अभियान शुरू होने से पहले यहां 46 लाख 92 हजार मतदाता दर्ज थे। यह दिखाता है कि बड़ी संख्या में लोग अभी भी इस प्रक्रिया में शामिल हो रहे हैं।

2.87 लाख नो-मैपिंग वोटर्स पर प्रशासन की नजर

ASD वोटर्स को हटाने के बाद जिले में करीब 35 लाख 36 हजार मतदाता बचे हैं। इनमें से 2.87 लाख वोटर्स ऐसे हैं जिनकी नो-मैपिंग हुई है यानी जिनके नाम साल 2003 और 2025 की वोटर लिस्ट से मैच नहीं हो सके। ऐसे मतदाताओं को नोटिस भेजे जा रहे हैं ताकि वे समय रहते अपना पक्ष रख सकें और नाम कटने से बचा सकें।

हर बूथ पर अधिकारी तैनात

अंतिम दिन को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। सुपरवाइजर, ERO और AERO अपने-अपने क्षेत्रों के बूथों का दौरा करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि हर योग्य नागरिक का आवेदन सही तरीके से लिया जाए। उप जिला निर्वाचन अधिकारी एवं ADM प्रशासन पूजा मिश्रा ने साफ कहा है कि आज नाम जुड़वाने का आखिरी अवसर है।

DM मनीष कुमार वर्मा ने राजनीतिक दलों से की अपील

गुरुवार को संगम सभागार में आयोजित बैठक में जिला निर्वाचन अधिकारी व DM मनीष कुमार वर्मा ने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से अपील की कि वे अंतिम दिन भी BLA के जरिए BLO का पूरा सहयोग करें ताकि कोई भी योग्य मतदाता छूट न जाए।

कौन बन सकता है नया मतदाता?

चुनाव आयोग के अनुसार, जिन नागरिकों की उम्र 1 जनवरी, 1 अप्रैल, 1 जुलाई या 1 अक्टूबर 2026 को 18 वर्ष पूरी हो रही है वे सभी मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के पात्र हैं। ऐसे युवाओं के लिए यह सुनहरा मौका है।

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ब्राह्मणों के सम्मान में बहन जी उतरी मैदान में, कर दी बड़ी मांग

मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे संवेदनशील सामाजिक ताने-बाने वाले राज्य में ऐसे कंटेंट गलत संदेश फैलाते हैं और टकराव बढ़ा सकते हैं इसीलिए उन्होंने केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर इस पर रोक लगाने की मांग की है।

बसपा सुप्रीमो मायावती
बसपा सुप्रीमो मायावती
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar06 Feb 2026 11:46 AM
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UP News : नेटफ्लिक्स की अपकमिंग वेब सीरीज घूसखोर पंडत को लेकर चल रहा विवाद अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी तेजी से दिखने लगा है। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री तथा बसपा सुप्रीमो मायावती ने इस मुद्दे पर सीधा मोर्चा खोलते हुए सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी है और आरोप लगाया कि फिल्मों/वेब कंटेंट में पंडित शब्द को जानबूझकर अपमानजनक संदर्भ में रखकर ब्राह्मण समाज की छवि को चोट पहुंचाई जा रही है। मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे संवेदनशील सामाजिक ताने-बाने वाले राज्य में ऐसे कंटेंट गलत संदेश फैलाते हैं और टकराव बढ़ा सकते हैं इसीलिए उन्होंने केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर इस पर रोक लगाने की मांग की है। 

यह सुनियोजित अपमान - मायावती

मायावती का कहना है कि बीते कुछ वक्त से उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि फिल्मों और वेब कंटेंट में भी ब्राह्मण समाज को लेकर ऐसी प्रस्तुतियां लगातार सामने आ रही हैं, जिनसे समाज में नाराजगी गहराती जा रही है। उन्होंने साफ कहा कि किसी समुदाय की पहचान से जुड़े शब्दों को जानबूझकर गलत संदर्भ में रखकर पूरे समाज को कटघरे में खड़ा करना न्यायसंगत नहीं है। इस पूरे विवाद का सबसे संवेदनशील बिंदु घुसपैठिया शब्द को लेकर उभरा है। विरोध कर रहे संगठनों का दावा है कि सीरीज में ब्राह्मण पात्रों के लिए इसी तरह की भाषा का इस्तेमाल हुआ है, जो न सिर्फ अपमानजनक है बल्कि समाज में गलत धारणा भी फैलाती है। मायावती ने इसे जातिसूचक और गरिमा पर चोट बताकर केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की। उधर, सीरीज बनाने वालों की तरफ से यह तर्क दिया जा रहा है कि कहानी का मकसद सरकारी तंत्र में रिश्वतखोरी और सिस्टम की खामियों पर प्रहार करना है जहां एक कर्मचारी पंडत उपनाम के साथ पद का दुरुपयोग कर अवैध वसूली करता दिखाया गया है। लेकिन विरोधियों का कहना है कि भ्रष्टाचार किसी एक जाति तक सीमित नहीं होता, ऐसे में कहानी के बहाने जाति-विशेष की पहचान को विवादित ढंग से जोड़ना यूपी जैसे सामाजिक रूप से संवेदनशील राज्य में तनाव बढ़ाने वाला साबित हो सकता है।

उत्तर प्रदेश के ब्राह्मण संगठनों ने खोला मोर्चा

उत्तर प्रदेश में सनातन रक्षक दल समेत कई ब्राह्मण संगठनों ने इस सीरीज के नाम और प्रस्तुति पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि ‘पंडत’ शब्द सम्मान और ज्ञान का प्रतीक है, उसके साथ घूसखोर जोड़ना सीधे-सीधे समाज की छवि धूमिल करता है। विरोधियों का तर्क है कि भ्रष्टाचार किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं होता, फिर कहानी में विशिष्ट पहचान को उभारना एजेंडा जैसा लगता है। पोस्टर/ट्रेलर में धार्मिक प्रतीकों या वेशभूषा के साथ कुछ दृश्यों पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। UP News

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