उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव से पहले होगा ऐतिहासिक फैसला

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव से पहले होने वाले ऐतिहासिक फैसले से उत्तर प्रदेश ही नहीं पूरे भारत की राजनीतिक तस्वीर बदल जाएगी। भारत सरकार ने देश के लिए यह ऐतिहासिक फैसला लेने की दिशा में कदम आगे बढ़ा दिए हैं।

उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले बड़ा दांव
उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले बड़ा दांव
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar11 Mar 2026 05:52 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव-2027 से पहले देश में एक ऐतिहासिक फैसला होगा। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव से पहले होने वाले ऐतिहासिक फैसले से उत्तर प्रदेश ही नहीं पूरे भारत की राजनीतिक तस्वीर बदल जाएगी। भारत सरकार ने देश के लिए यह ऐतिहासिक फैसला लेने की दिशा में कदम आगे बढ़ा दिए हैं। भारत सरकार के मौजूदा सत्र में ही संविधान संशोधन प्रस्ताव लाकर वर्ष-2027 से ही पूरे देश में महिला आरक्षण का ऐतिहासिक फैसला लागू करना चाहती है। वर्ष-2023 में लाए गए नारी शक्ति वंदन विधेयक में बदलाव करके पूरे देश में 2027 से ही महिला आरक्षण कानून लागू करने की योजना बनाई गई है।

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में मास्टर स्ट्रोक होगा महिला आरक्षण कानून

आपको बता दें कि भाजपा सरकार का फोकस हमेशा से महिला आबादी पर रहा है। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव-2027 में महिला आरक्षण लागू करके भाजपा की सरकार मास्टर स्ट्रोक चलाना चाहती है। वर्ष-2023 में संसद में संविधान संशोधन करके नारी शक्ति वंदन के नाम से महिला आरक्षण देने का कानून पारित किया गया था। वर्ष-2023 में पारित कानून में यह व्यवस्था की गई थी कि महिला आरक्षण की व्यवस्था को जनगणना तथा लोकसभा एवं विधानसभाओं का परिसीमन पूरा होने के बाद लागू किया जाएगा। सरकार ने सितंबर -2023 में जो संविधान संशोधन कराया था उसके अनुसार वर्ष-2029 के लोकसभा चुनाव में महिला आरक्षण लागू करना था। केन्द्र सरकार ने एक बार फिर संसद में महिला आरक्षण को 2027 में लागू कराने की पहल की है।

उत्तर प्रदेश के विधानसभा के चुनाव में बड़ा प्रयोग करना चाहती है भाजपा

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि वर्ष-2027 में महिला आरक्षण कानून लागू करके भाजपा की सरकार उत्तर प्रदेश में बहुत बड़ा प्रयोग करना चाहती है। वर्ष-2023 में संसद ने महिला आरक्षण लागू करने के लिए नारी शक्ति वंदन विधेयक को संसद से पारित कराया था। उस विधेयक में जनगणना तथा परिसीमन के बाद महिला आरक्षण को लागू करने की व्यवस्था है। भारत में जनगणना का काम 31 मार्च 2027 तक चलेगा। जनगणना के आंकड़े आने में 2 से 3 साल का समय लग जाएगा। उसके बाद परिसीमन आयोग का गठन होगा। परिसीमन आयोग की रिपोर्ट आने में 3 से 4 साल तक का समय लगेगा। इस प्रकार वर्ष-2029 के लोकसभा चुनाव में महिला आरक्षण कानून लागू नहीं हो पाएगा। यही कारण है कि केन्द्र सरकार ने एक बार फिर से संविधान संशोधन विधयेक लाकर महिला आरक्षण की व्यवस्था को वर्ष-2027 में ही लागू करने की बड़ी योजना बनाई है।

उत्तर प्रदेश के प्रमुख विपक्षी दल सहित सभी दल सरकार के साथ

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी प्रमुख विपक्षी दल है। केन्द्र सरकार ने वर्ष-2027 में महिला आरक्षण लागू करने के मकसद से विधेयक के लिए समाजवादी पार्टी से बातचीत शुरू कर दी है। इसके साथ ही देश भर के सभी प्रमुख विपक्षी दलों के साथ केन्द्र सरकार बातचीत कर रही है। बताया जाता है कि कोई भी विपक्षी दल महिला आरक्षण की व्यवस्था का विरोध नहीं करना चाहता है। विपक्ष को पता है कि महिला आरक्षण का विरोध आत्मघाती कदम साबित होगा। यही कारण है कि यह बात तय मानी जा रही है कि विधानसभा चुनाव-2027 से पहले ही भारत में महिला आरक्षण लागू करने का ऐतिहासिक फैसला हो जाएगा।

राजनीति के लिए सबसे बड़ा फैसला होगा महिला आरक्षण कानून

भारत में महिला आरक्षण कानून भारत की राजनीति के लिए सबसे बड़ा फैसला साबित होगा। यही कारण है कि महिला आरक्षण की व्यवस्था को ऐतिहासिक फैसला कहा जा रहा है। महिला आरक्षण की व्यवस्था लागू होने से देश की सभी विधानसभा सीटों तथा लोकसभा सीटों में से 33 प्रतिशत सीट महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। इसे इस प्रकार भी समझ सकते हैं कि महिला आरक्षण कानून लागू होने से देश में कुल विधायकों तथा सांसदों में से 33 प्रतिशत विधायक तथा सांसद महिलाएं होंगी।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन करके बनेगा नया कानून

भारत की संसद ने सितंबर-2023 में महिला आरक्षण लागू करने के लिए संविधान में संशोधन कर दिया था। उस समय इस विधयेक को नारी शक्ति वंदन विधेयक नाम दिया गया था। नारी शक्ति वंदन विधेयक के द्वारा भारत के संविधान में आर्टीकल-339ए, 332ए तथा 334ए में संशोधन किया गया। 339 एए के माध्यम से 33 फीसदी सीटें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। 330ए के माध्यम से लोकसभा में प्रत्यक्ष निर्वाचन से भरी जाने वाली एक तिहाई सीटें (एससी और एसटी से संबंधित महिलाओं के लिए आरक्षित सीट सहित) महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। 332ए के माध्यम से प्रत्येक राज्य की विधानसभा में महिलाओं के लिए स्थान आरक्षित होंगे। अनुच्छेद के खंड-3 में एससी और एसटी सहित एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। 334ए में नया प्रावधान जोड़ा गया है जिसके तहत महिला आरक्षण की अवधि 15 साल के लिए होगी। भविष्य में जरूरत महसूस होने पर संसद को आरक्षण की अवधि बढ़ाने का अधिकार होगा। आपको यह भी बता दें कि लोकसभा में वर्तमान में सीटों की संख्या 543 है। जैसे ही महिला आरक्षण कानून लागू होगा, महिला सदस्यों की संख्या 181 हो जाएगी जो वर्तमान में 82 है। UP News

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उत्तर प्रदेश में ब्रेन डेड घोषित महिला की सांसें सड़क के झटके से लौट आईं

विनीता शुक्ला, जो कि जिला न्यायालय में लिपिक के पद पर कार्यरत हैं, की तबियत 22 फरवरी को अचानक बिगड़ गई थी। उन्हें बेहोश अवस्था में बरेली के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। 24 फरवरी को चिकित्सकों ने उनका ब्रेन डेड होने की घोषणा कर दी और वेंटिलेटर से हटाया।

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विनीता शुक्ला
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar11 Mar 2026 05:38 PM
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UP News : पीलीभीत से एक अद्भुत और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। विनीता शुक्ला, जो कि जिला न्यायालय में लिपिक के पद पर कार्यरत हैं, की तबियत 22 फरवरी को अचानक बिगड़ गई थी। उन्हें बेहोश अवस्था में बरेली के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। 24 फरवरी को चिकित्सकों ने उनका ब्रेन डेड होने की घोषणा कर दी और वेंटिलेटर से हटाया।

सड़क के झटकों ने दिया विनीता को जीवनदान

परिवार उन्हें घर ले जा रहा था और अंतिम संस्कार की तैयारियाँ चल रही थीं। लेकिन पीलीभीत-बरेली मार्ग पर हाफिजगंज के पास सड़क पर गहरे गड्ढे में एंबुलेंस का पहिया गिर गया। इस झटके के कारण विनीता के शरीर में हलचल हुई और उनके शरीर में सांसें लौट आईं।

घटना किसी चमत्कार से कम नहीं

परिवार ने तुरंत उन्हें पास के निजी अस्पताल में भर्ती कराया। न्यूरो चिकित्सकों द्वारा उपचार के बाद विनीता लगभग आठ दिन में पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट गईं। उनके पति कुलदीप शुक्ला का कहना है कि यह घटना किसी चमत्कार से कम नहीं है। विनीता की अचानक जिंदगी में वापसी ने पूरे परिवार को खुशी और आशा दी। अस्पताल में ब्रेन डेड घोषित होने के बाद परिजन पहले से ही अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे, लेकिन इस घटना ने सबके लिए नया जीवन और उम्मीद ला दी।


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मेरठ में तेल-गैस संकट से उद्योग प्रभावित, उत्पादन घटा, 50 यूनिट बंद

अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण इन संसाधनों की आपूर्ति बाधित हुई है। स्थानीय उद्योग एसोसिएशनों के मुताबिक, अब तक लगभग 8,000 से अधिक उद्योगों ने अपने उत्पादन में कटौती की है और 50 यूनिट पूरी तरह बंद हो गई हैं।

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गैस की कमी
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar11 Mar 2026 04:54 PM
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UP News : मेरठ के उद्योगों पर तेल और गैस की कमी का गंभीर असर पड़ा है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण इन संसाधनों की आपूर्ति बाधित हुई है। स्थानीय उद्योग एसोसिएशनों के मुताबिक, अब तक लगभग 8,000 से अधिक उद्योगों ने अपने उत्पादन में कटौती की है और 50 यूनिट पूरी तरह बंद हो गई हैं।

उद्योगों पर असर

* प्रमुख प्रभावित क्षेत्रों में प्लास्टिक, रबर, फाइबर ग्लास, पेंट, कॉटन फाइबर, वेल्डिंग, मेटल और पेट्रोकेमिकल शामिल हैं।

* उत्पादन घटने के कारण एमएसएमई सेक्टर, निर्यातक कंपनियों और मशीनरी उद्योग भी संकट में हैं।

* प्लास्टिक और रबर जैसी कच्ची सामग्री की सप्लाई पूरी तरह प्रभावित है।

*कच्चे माल और उत्पादों की कीमतें बढ़ गई हैं। जिनमें प्लास्टिक दाना, रबर, रबर प्रोसेसिंग आयल, अन्य पेट्रोलियम पदार्थ, कामर्शियल गैस सिलेंडर शामिल है।

* ट्रांसफार्मर निर्माण सामग्री के दाम दोगुने हो गए हैं।

* जेम्स ज्वैलरी में चांदी और सोने की कीमतों में भी तेजी आई है।

गैस सिलिंडर की कमी

* इंडस्ट्रियल गैस सिलिंडर का ब्लैक मार्केट रेट 1,800-2,000 रुपये तक पहुँच गया।

* घरेलू एलपीजी सिलिंडर उपलब्ध हैं, लेकिन रिफिल अब केवल 25 दिन बाद बुक किया जा सकता है।

* होटल, रेस्तरां और कैटरिंग व्यवसायों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है।

निर्यात पर असर

* समुद्री मार्ग बदलने से यूरोप तक माल पहुँचाने की लागत बढ़कर $1,400-$7,000 हो गई है।

* समय पर डिलीवरी में देरी और अतिरिक्त लागत की आशंका बनी हुई है।

* शहर में 55,000 घरेलू कनेक्शन हैं, जिन पर आपूर्ति बनी हुई है।

* उद्योगों की आपूर्ति में केवल 20% कटौती संभव है, घरेलू उपयोग पर असर नहीं पड़ेगा।

यह संकट मुख्य रूप से वैश्विक तेल और गैस की आपूर्ति में व्यवधान के कारण उत्पन्न हुआ है। इसके चलते मेरठ के उद्योगों को उत्पादन घटाने, लागत बढ़ने और निर्यात प्रभावित होने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।


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