Startup India ने कर दिया कमाल, पहले नौकरी की लाइन अब बिजनेस की उड़ान

Startup India: पिछले 10 सालों में ‘स्टार्टअप इंडिया’ योजना ने भारत की आर्थिक तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। 2016 में जहां देश में सिर्फ 500 स्टार्टअप थे, वहीं 2025 तक इनकी संख्या 2 लाख से अधिक हो चुकी है। सरकारी फंडिंग, आसान नियमों और सीड फंड स्कीम ने युवाओं को नौकरी मांगने वाला नहीं बल्कि नौकरी देने...

Start UP India
स्टार्टअप इंडिया
locationभारत
userअसमीना
calendar16 Jan 2026 02:18 PM
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भारत में पिछले 10 सालों में जो बदलाव आया है वह सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं बल्कि सोच की क्रांति है। एक वक्त था जब युवा डिग्री लेकर नौकरी की तलाश में भटकते थे लेकिन आज वही युवा खुद दूसरों को रोजगार दे रहे हैं। इस ऐतिहासिक बदलाव के पीछे सबसे बड़ी भूमिका निभाई है सरकार की ‘स्टार्टअप इंडिया’ पहल ने जिसने भारत को नौकरी मांगने वाले देश से नौकरी देने वाला देश बनाने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया है।

500 से 2 लाख स्टार्टअप्स का सफर

साल 2016 में जब ‘स्टार्टअप इंडिया’ की शुरुआत हुई थी तब देश में केवल करीब 500 मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स थे। संसाधनों की कमी, फंडिंग की मुश्किलें और सरकारी नियमों का बोझ नए बिजनेस के रास्ते की सबसे बड़ी बाधा थे। लेकिन 2025 तक आते-आते यह संख्या 2 लाख से ज्यादा स्टार्टअप्स तक पहुंच गई। यह आंकड़ा बताता है कि भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है।

छोटे शहरों तक पहुंची स्टार्टअप क्रांति

पहले यह माना जाता था कि स्टार्टअप सिर्फ बेंगलुरु, दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों तक ही सीमित रहते हैं लेकिन अब यह सोच पूरी तरह बदल चुकी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 50 प्रतिशत से ज्यादा स्टार्टअप्स टियर-2 और टियर-3 शहरों से उभर कर सामने आए हैं। इसका मतलब साफ है कि अब उद्यमिता सिर्फ महानगरों की जागीर नहीं रही बल्कि छोटे शहरों और कस्बों के युवा भी अपने आइडिया पर काम कर रहे हैं।

महिला उद्यमियों की मजबूत भागीदारी

‘स्टार्टअप इंडिया’ ने सिर्फ युवाओं को ही नहीं बल्कि महिलाओं को भी बिजनेस की दुनिया में आगे बढ़ने का मंच दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 45 प्रतिशत से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला डायरेक्टर है। यह आंकड़ा भारत में बदलती सामाजिक और आर्थिक सोच को दर्शाता है जहां महिलाएं भी नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं।

सरकार बनी सबसे बड़ी एंजेल इन्वेस्टर

स्टार्टअप्स के लिए सबसे बड़ी चुनौती हमेशा फंडिंग रही है। इस समस्या को दूर करने के लिए सरकार ने खुद निवेशक की भूमिका निभाई। 2021 में शुरू की गई ‘स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम’ के तहत 945 करोड़ रुपये का फंड तैयार किया गया जिसे देशभर के 219 इनक्यूबेटर्स के जरिए नए स्टार्टअप्स तक पहुंचाया जा रहा है। इससे युवाओं को अपने आइडिया को प्रोटोटाइप से लेकर मार्केट तक पहुंचाने में बड़ी मदद मिली।

प्राइवेट इन्वेस्टमेंट का रास्ता हुआ आसान

सरकार के 10,000 करोड़ रुपये के ‘फंड ऑफ फंड्स’, जिसे SIDBI मैनेज करता है, ने प्राइवेट निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। इसका नतीजा यह हुआ कि पिछले 10 सालों में भारतीय स्टार्टअप्स को 150 बिलियन डॉलर से ज्यादा का प्राइवेट इन्वेस्टमेंट मिला। अब अगर किसी युवा के पास मजबूत आइडिया है तो पूंजी उसकी राह की सबसे बड़ी बाधा नहीं रही।

नियमों के जंजाल से मिली आजादी

स्टार्टअप्स को सबसे बड़ी राहत नियमों में ढील से मिली। सरकार ने 47,000 से ज्यादा कम्पलायंस खत्म किए और 4,458 कानूनी प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया। अब स्टार्टअप्स को 9 श्रम कानूनों और 3 पर्यावरण कानूनों में सेल्फ-सर्टिफिकेशन की सुविधा है जिससे बार-बार इंस्पेक्शन की जरूरत नहीं पड़ती। अगर कोई बिजनेस सफल नहीं हो पाता तो उसे बंद करने की प्रक्रिया भी आसान कर दी गई है जो अब 90 दिनों में पूरी हो सकती है।

सरकार बनी स्टार्टअप्स की बड़ी ग्राहक

सरकार ने सिर्फ नियम आसान नहीं किए बल्कि खुद स्टार्टअप्स की सबसे बड़ी ग्राहक भी बनी। गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) के जरिए स्टार्टअप्स ने अब तक 38,500 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार किया है। इससे डिफेंस, स्पेस, एग्री-टेक और टेक्नोलॉजी जैसे कठिन सेक्टर्स में भी नए स्टार्टअप्स को मौका मिला।

120 से ज्यादा यूनिकॉर्न और 21 लाख नौकरियां

आज भारत में 120 से ज्यादा यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स हैं जिनकी कुल वैल्यूएशन 350 बिलियन डॉलर से अधिक है। इन स्टार्टअप्स ने अब तक 21 लाख से ज्यादा नौकरियां पैदा की हैं। खास बात यह है कि 2025 में स्टार्टअप्स के बंद होने की दर पिछले पांच सालों में सबसे कम रही जो यह दिखाता है कि भारतीय स्टार्टअप्स अब स्थिर और टिकाऊ बिजनेस मॉडल पर काम कर रहे हैं।

2030 की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनेंगे स्टार्टअप्स

विशेषज्ञों का मानना है कि 2030 तक भारत को 7.3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में स्टार्टअप्स की भूमिका सबसे अहम होगी। आज का भारत सिर्फ आइडिया पर काम नहीं कर रहा बल्कि उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना रहा है।

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लूट लें सोना-चांदी! कीमत में आ गई भारी गिरावट

Gold Silver Price Today: MCX पर आज चांदी की कीमत में ₹6,000 की भारी गिरावट दर्ज की गई है जबकि सोने के भाव में भी हल्की कमजोरी देखने को मिली है। जानिए आज का ताजा गोल्ड और सिल्वर रेट, गिरावट की वजह, बाजार का रुझान और निवेशकों के लिए आगे क्या संकेत मिल रहे हैं।

GOLD PRICE
मार्केट में क्या है सोने का रेट?
locationभारत
userअसमीना
calendar16 Jan 2026 10:59 AM
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सोना और चांदी की कीमतों में आज गिरावट देखने को मिली है। एमसीएक्स पर बाजार खुलते ही चांदी के भाव में करीब 6,000 रुपये प्रति किलो की बड़ी गिरावट दर्ज की गई जिससे निवेशकों में हलचल मच गई। वहीं सोने की कीमत में भी आज हल्की कमजोरी देखने को मिली। हालांकि लंबी अवधि में दोनों कीमती धातुओं का रुझान अब भी मजबूत बना हुआ है।

चांदी में गिरावट

एमसीएक्स पर 5 मार्च डिलीवरी वाली चांदी पिछले सत्र में 2,91,577 रुपये प्रति किलो के भाव पर बंद हुई थी जबकि आज यह 2,87,127 रुपये प्रति किलो पर खुली। शुरुआती कारोबार के दौरान चांदी 2,85,513 रुपये प्रति किलो के निचले स्तर तक फिसली और 2,88,901 रुपये प्रति किलो के उच्च स्तर तक गई। सुबह 9 बजकर 45 मिनट पर चांदी 3,449 रुपये यानी 1.18 फीसदी की गिरावट के साथ 2,88,128 रुपये प्रति किलो पर ट्रेड कर रही थी।

क्या है सोने की कीमत?

आज सोने की कीमत में भी मामूली गिरावट दर्ज की गई। एमसीएक्स पर 5 फरवरी डिलीवरी वाला सोना पिछले सत्र में 1,43,121 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर बंद हुआ था जबकि आज यह 1,42,589 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला। शुरुआती कारोबार में सोना 1,42,400 रुपये प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर तक गया और 1,42,837 रुपये प्रति 10 ग्राम के उच्च स्तर तक पहुंचा। सुबह 10 बजे सोना 350 रुपये यानी 0.24 फीसदी की गिरावट के साथ 1,42,771 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था।

सोना-चांदी की कीमत में गिरावट की वजहें

आज सोना और चांदी की कीमतों में आई गिरावट की सबसे बड़ी वजह मुनाफावसूली मानी जा रही है। बीते कुछ महीनों में दोनों धातुओं की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली थी जिसके बाद निवेशक अब अपने मुनाफे को सुरक्षित करने के लिए बिकवाली कर रहे हैं। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उतार-चढ़ाव और डॉलर की चाल का असर भी घरेलू कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है।

कीमतों में तेजी का ट्रेंड अब भी बरकरार

हालांकि आज की गिरावट के बावजूद सोना और चांदी की कीमतों में तेजी का ट्रेंड अब भी बरकरार है। साल 2026 में अब तक सोने की कीमत में करीब 5 फीसदी और चांदी की कीमत में करीब 15 फीसदी की बढ़त दर्ज की जा चुकी है। अगर पिछले एक साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस दौरान सोने की कीमत करीब 80 फीसदी तक बढ़ी है जबकि चांदी ने करीब 192 फीसदी का शानदार रिटर्न दिया है। सोना और चांदी की कीमतों में इस तेजी के पीछे वैश्विक स्तर पर बढ़ता तनाव एक बड़ी वजह है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है जिससे निवेशक सुरक्षित निवेश के विकल्प के तौर पर सोने और चांदी की ओर रुख कर रहे हैं। इसके साथ ही दुनिया के कई देशों के केंद्रीय बैंक भी बड़े पैमाने पर सोने की खरीदारी कर रहे हैं जिससे कीमतों को मजबूत सपोर्ट मिल रहा है।

खरीदारी का बेस्ट मौका!

निवेशकों के लिए आज की गिरावट को लंबी अवधि के नजरिए से देखा जाए तो यह खरीदारी का मौका भी हो सकता है। हालांकि शॉर्ट टर्म में कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है इसलिए किसी भी निवेश से पहले बाजार की स्थिति और जोखिम को समझना जरूरी है।


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दुनिया का सबसे ताकतवर कौन? जवाब जानकर उड़ जाएंगे होश

Real Estate: 2026 में दुनिया के सबसे ताकतवर असेट की चर्चा हो रही है। क्या सोना, कच्चा तेल या रियल एस्टेट सबसे ज्यादा मार्केट कैप वाला है? इस आर्टिकल में हम समझेंगे कि क्यों रियल एस्टेट दुनिया का सबसे बड़ा और मजबूत असेट है।

Real Estate Market
2026 में सबसे ताकतवर असेट कौन है?
locationभारत
userअसमीना
calendar15 Jan 2026 02:20 PM
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आज के समय में लोग अक्सर सोचते हैं कि दुनिया का सबसे ताकतवर और मूल्यवान असेट क्या है। क्या यह सोना है, कच्चा तेल, करेंसी या फिर रियल एस्टेट? अगर आप सोच रहे हैं कि यह सिर्फ सोना या तेल है तो जवाब सुनकर आप हैरान रह जाएंगे। बीते कुछ सालों में सोने और चांदी की कीमतों में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिली है। खासकर साल 2025 में गोल्ड की कीमतों में लगभग 70% से ज्यादा का इजाफा हुआ। लेकिन अगर मार्केट कैप के हिसाब से बात करें तो कच्चा तेल सोने से भी कहीं ज्यादा ताकतवर है।

कच्चा तेल बनाम सोना

असेट मार्केट कैप डॉट कॉम के आंकड़ों के अनुसार, 2026 में कच्चे तेल की मार्केट वैल्यू 109 ट्रिलियन डॉलर है। वहीं, सोने की मार्केट वैल्यू लगभग 31 ट्रिलियन डॉलर है। इसका मतलब साफ है कि मार्केट कैप के हिसाब से कच्चा तेल सोने से 3 गुना ज्यादा ताकतवर है। कच्चा तेल का महत्व सिर्फ कीमत में नहीं है। यह ग्लोबल पॉवर और पॉलिटिक्स में भी अहम भूमिका निभाता है। उदाहरण के लिए, अमेरिका और अन्य देशों ने हमेशा तेल की सप्लाई और कंट्रोल को लेकर अंतरराष्ट्रीय पॉलिटिक्स में बड़ा कदम उठाया है।

दुनिया का सबसे ताकतवर असेट

अगर बात दुनिया के सबसे ताकतवर और बड़े असेट की करें तो न तो सोना है, न ही तेल, न ही कोई करेंसी। असली ताकतवर असेट है रियल एस्टेट। मौजूदा समय में ग्लोबल रियल एस्टेट की मार्केट कैप 671 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा है। साल 2026-2029 तक इसमें सालाना 2.64% की वृद्धि होने का अनुमान है। 2029 तक इसका मार्केट कैप बढ़कर 727.8 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा। अमेरिका इस मार्केट में सबसे बड़ा खिलाड़ी है, जिसका अनुमानित हिस्सा 141.3 ट्रिलियन डॉलर है। रियल एस्टेट इसलिए सबसे ताकतवर है क्योंकि यह सिर्फ निवेश का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन, बिजनेस और ग्लोबल इकॉनोमी का आधार भी है।

करेंसी की ताकत

अक्सर लोग डॉलर को सबसे मजबूत करेंसी मानते हैं लेकिन आंकड़े कुछ और ही कहते हैं। युआन की मार्केट वैल्यू 48 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा है और यह दुनिया की तीसरी सबसे ताकतवर करेंसी है। डॉलर की मार्केट वैल्यू 22 ट्रिलियन डॉलर है। यूरो लगभग 19 ट्रिलियन डॉलर के साथ 6वें नंबर पर है। ब्रिटिश पाउंड 3 ट्रिलियन डॉलर के साथ 15वें नंबर पर है। इससे साफ है कि ग्लोबल मार्केट में युआन की पकड़ अब काफी मजबूत हो चुकी है।

दुनिया की सबसे ताकतवर कंपनियां

अगर कंपनियों की बात करें, तो एप्पल, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट हमेशा टॉप पर रहे हैं लेकिन हाल ही में एनवीडिया ने मार्केट में सबसे तेज ग्रोथ दिखाई है। एनवीडिया की वैल्यूएशन 4.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई है। इसके बाद गूगल (अल्फाबेट) की वैल्यूएशन 4 ट्रिलियन डॉलर है। एप्पल की वैल्यूएशन 3.9 ट्रिलियन डॉलर है। माइक्रोसॉफ्ट की वैल्यूएशन 3.41 ट्रिलियन डॉलर है। इस तरह, कंपनियों के क्षेत्र में एनवीडिया और टेक सेक्टर की पकड़ सबसे मजबूत बन चुकी है।

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