नितिन नबीन भाजपा के सबसे कम उम्र के सारथी, शुरुआती 100 दिनों के कार्यकाल पर टिकी सबकी नजरें
नितिन नबीन का जन्म भाजपा की स्थापना के कुछ ही समय बाद हुआ। वर्ष 2006 में पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा के निधन के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा है और यह 2006 से अब तक बांकीपुर विधानसभा सीट से पांच बार विधायक चुने जा चुके हैं।

भाजपा पार्टी को आज नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल गया है। बिहार के वरिष्ठ नेता और पांच बार के विधायक नितिन नबीन ने मंगलवार 20 जनवरी 2026 से भाजपा अध्यक्ष के तौर पर अपने कार्यकाल की शुरुआत कर दी है। 45 वर्षीय नितिन नबीन निर्विरोध पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए हैं। उनके नाम का औपचारिक ऐलान आज किया गया। इससे पहले वर्ष 2020 से जगत प्रकाश नड्डा इस पद पर थे। नितिन नबीन का नामांकन बिना किसी विरोध के स्वीकार किया गया। उनके समर्थन में नामांकन पत्रों के 37 सेट दाखिल किए गए, जिन्हें वैध पाया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और पूर्व भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा उनके प्रस्तावकों में शामिल थे।
संगठन की कमान ऐसे वक्त में
बता दें कि नितिन नबीन को ऐसे समय में पार्टी की कमान सौंपी गई है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा नीत एनडीए सरकार लगातार 12 वर्षों से केंद्र की सत्ता में है। भाजपा आज 18 करोड़ से अधिक सदस्यों के साथ विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है और 20 करोड़ से ज्यादा सक्रिय सदस्य संगठन से जुड़े हैं।
पहले 100 दिनों में 5 बड़ी चुनौतियां
1. असम विधानसभा चुनाव 2026
बता दें कि मार्च–अप्रैल 2026 में असम विधानसभा चुनाव होने हैं। पिछले 10 वर्षों से राज्य में भाजपा की सरकार है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में पार्टी हैट्रिक लगाने की तैयारी में है।
2. पश्चिम बंगाल की सियासी जंग
बता दें कि 2026 में होने वाले पश्चिम बंगाल चुनाव भाजपा के लिए बड़ी चुनौती होंगे। ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस पिछले 15 वर्षों से सत्ता में है। पूर्वी भारत में बंगाल भाजपा के लिए सबसे कठिन रणक्षेत्र बना हुआ है।
3. केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी
बता दें कि केरल में भाजपा को करीब 20 प्रतिशत वोट मिल रहा है, लेकिन यह सीटों में तब्दील नहीं हो पा रहा। तिरुवनंतपुरम में मेयर पद जीतने के बाद पार्टी खुद को तीसरी बड़ी ताकत के रूप में स्थापित करना चाहती है। तमिलनाडु में डीएमके-कांग्रेस गठबंधन एक दशक से सत्ता में है। यहां भाजपा गठबंधन राजनीति के सहारे वापसी की रणनीति पर काम कर रही है। पुडुचेरी में सत्ता बचाए रखना भी बड़ी चुनौती है।
4. युवाओं को साधने की जिम्मेदारी
बता दें कि देश की करीब 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है। सबसे युवा भाजपा अध्यक्ष के तौर पर नितिन नबीन के सामने जेन-जी और युवा मतदाताओं को पार्टी से जोड़े रखने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।
5. यूपी चुनाव 2027 की तैयारी
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की शुरुआत में होने हैं। लोकसभा चुनाव के बाद यूपी का चुनाव हमेशा ‘सेमीफाइनल’ माना जाता है। पार्टी यहां योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में तीसरी बार सत्ता में लौटने की कोशिश करेगी।
नितिन नबीन की सबसे बड़ी ताकत
नितिन नबीन की उम्र और संगठनात्मक अनुभव उनकी सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है और बता दें कि नितिन नबीन न केवल भाजपा के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, बल्कि दूसरे प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं की तुलना में भी काफी युवा हैं। जहां ममता बनर्जी 71, मल्लिकार्जुन खड़गे 83 और नीतीश कुमार 74 वर्ष के हैं, वहीं नितिन नबीन महज 45 वर्ष के हैं।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
बता दें कि 23 मई 1980 को जन्मे नितिन नबीन का जन्म भाजपा की स्थापना के कुछ ही समय बाद हुआ। वर्ष 2006 में पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा के निधन के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा है और यह 2006 से अब तक बांकीपुर विधानसभा सीट से पांच बार विधायक चुने जा चुके हैं। इसके अलावा वे सिक्किम और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के चुनाव प्रभारी भी रह चुके हैं।
20 से अधिक राज्यों में भाजपा-एनडीए की सरकार
बता दें कि वर्तमान में भाजपा 13 राज्यों में सीधे सत्ता में है, जबकि 7 राज्यों में एनडीए की सहयोगी सरकारें हैं। ऐसे में नितिन नबीन के सामने न सिर्फ चुनावी जीत, बल्कि विशाल संगठन को एकजुट और सक्रिय बनाए रखने की भी बड़ी जिम्मेदारी होगी। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, नितिन नबीन का कार्यकाल भाजपा के भविष्य की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकता है।
भाजपा पार्टी को आज नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल गया है। बिहार के वरिष्ठ नेता और पांच बार के विधायक नितिन नबीन ने मंगलवार 20 जनवरी 2026 से भाजपा अध्यक्ष के तौर पर अपने कार्यकाल की शुरुआत कर दी है। 45 वर्षीय नितिन नबीन निर्विरोध पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए हैं। उनके नाम का औपचारिक ऐलान आज किया गया। इससे पहले वर्ष 2020 से जगत प्रकाश नड्डा इस पद पर थे। नितिन नबीन का नामांकन बिना किसी विरोध के स्वीकार किया गया। उनके समर्थन में नामांकन पत्रों के 37 सेट दाखिल किए गए, जिन्हें वैध पाया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और पूर्व भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा उनके प्रस्तावकों में शामिल थे।
संगठन की कमान ऐसे वक्त में
बता दें कि नितिन नबीन को ऐसे समय में पार्टी की कमान सौंपी गई है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा नीत एनडीए सरकार लगातार 12 वर्षों से केंद्र की सत्ता में है। भाजपा आज 18 करोड़ से अधिक सदस्यों के साथ विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है और 20 करोड़ से ज्यादा सक्रिय सदस्य संगठन से जुड़े हैं।
पहले 100 दिनों में 5 बड़ी चुनौतियां
1. असम विधानसभा चुनाव 2026
बता दें कि मार्च–अप्रैल 2026 में असम विधानसभा चुनाव होने हैं। पिछले 10 वर्षों से राज्य में भाजपा की सरकार है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में पार्टी हैट्रिक लगाने की तैयारी में है।
2. पश्चिम बंगाल की सियासी जंग
बता दें कि 2026 में होने वाले पश्चिम बंगाल चुनाव भाजपा के लिए बड़ी चुनौती होंगे। ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस पिछले 15 वर्षों से सत्ता में है। पूर्वी भारत में बंगाल भाजपा के लिए सबसे कठिन रणक्षेत्र बना हुआ है।
3. केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी
बता दें कि केरल में भाजपा को करीब 20 प्रतिशत वोट मिल रहा है, लेकिन यह सीटों में तब्दील नहीं हो पा रहा। तिरुवनंतपुरम में मेयर पद जीतने के बाद पार्टी खुद को तीसरी बड़ी ताकत के रूप में स्थापित करना चाहती है। तमिलनाडु में डीएमके-कांग्रेस गठबंधन एक दशक से सत्ता में है। यहां भाजपा गठबंधन राजनीति के सहारे वापसी की रणनीति पर काम कर रही है। पुडुचेरी में सत्ता बचाए रखना भी बड़ी चुनौती है।
4. युवाओं को साधने की जिम्मेदारी
बता दें कि देश की करीब 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है। सबसे युवा भाजपा अध्यक्ष के तौर पर नितिन नबीन के सामने जेन-जी और युवा मतदाताओं को पार्टी से जोड़े रखने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।
5. यूपी चुनाव 2027 की तैयारी
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की शुरुआत में होने हैं। लोकसभा चुनाव के बाद यूपी का चुनाव हमेशा ‘सेमीफाइनल’ माना जाता है। पार्टी यहां योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में तीसरी बार सत्ता में लौटने की कोशिश करेगी।
नितिन नबीन की सबसे बड़ी ताकत
नितिन नबीन की उम्र और संगठनात्मक अनुभव उनकी सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है और बता दें कि नितिन नबीन न केवल भाजपा के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, बल्कि दूसरे प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं की तुलना में भी काफी युवा हैं। जहां ममता बनर्जी 71, मल्लिकार्जुन खड़गे 83 और नीतीश कुमार 74 वर्ष के हैं, वहीं नितिन नबीन महज 45 वर्ष के हैं।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
बता दें कि 23 मई 1980 को जन्मे नितिन नबीन का जन्म भाजपा की स्थापना के कुछ ही समय बाद हुआ। वर्ष 2006 में पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा के निधन के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा है और यह 2006 से अब तक बांकीपुर विधानसभा सीट से पांच बार विधायक चुने जा चुके हैं। इसके अलावा वे सिक्किम और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के चुनाव प्रभारी भी रह चुके हैं।
20 से अधिक राज्यों में भाजपा-एनडीए की सरकार
बता दें कि वर्तमान में भाजपा 13 राज्यों में सीधे सत्ता में है, जबकि 7 राज्यों में एनडीए की सहयोगी सरकारें हैं। ऐसे में नितिन नबीन के सामने न सिर्फ चुनावी जीत, बल्कि विशाल संगठन को एकजुट और सक्रिय बनाए रखने की भी बड़ी जिम्मेदारी होगी। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, नितिन नबीन का कार्यकाल भाजपा के भविष्य की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकता है।












