एआई इंपैक्ट समिट 2026 में यूथ कांग्रेस का अर्धनग्न विरोध प्रदर्शन

इस प्रदर्शन का मुख्य कारण भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील और प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ असंतोष था। कांग्रेस कार्यकतार्ओं ने एआई इंपैक्ट सम्मिट के दौरान आज हॉल नंबर 5 में मार्च किया और नारे लगाए।

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इंडियन यूथ कांग्रेस के कार्यकतार्ओं ने विरोध प्रदर्शन किया
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar20 Feb 2026 04:31 PM
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AI ​​Impact Summit 2026 : दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एआई इंपैक्ट समिट 2026 के दौरान इंडियन यूथ कांग्रेस के कार्यकतार्ओं ने विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन का मुख्य कारण भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील और प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ असंतोष था। कांग्रेस कार्यकतार्ओं ने एआई इंपैक्ट सम्मिट के दौरान आज हॉल नंबर 5 में मार्च किया और नारे लगाए। कुछ ने सफेद टी-शर्ट पहन रखी थी या हाथ में बैनर पकड़े हुए थे, जिन पर प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीरें और नारे जैसे इंडिया यूएस ट्रेड डील, एप्सटीन फाइल, पीएम इज कम्प्रोमाइज्ड लिखे थे। कुछ प्रदर्शनकारियों ने टी-शर्ट उतारकर प्रदर्शन की, जिससे हॉल में अफरा-तफरी मच गई।

पुलिस कार्रवाई

दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन ले गई। हिरासत में लिए गए प्रमुख कार्यकर्ता कृष्णा हरि, राष्ट्रीय सचिव, भारतीय युवा कांग्रेस, कुंदन यादव, बिहार प्रदेश सचिव, युवा कांग्रेस, अजय कुमार, उत्तर प्रदेश उपाध्यक्ष, नरसिम्हा यादव, राष्ट्रीय समन्वयक सभी से पूछताछ की जा रही है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

युवा कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने कहा कि यह शांतिपूर्ण प्रदर्शन युवाओं की आवाज है और पीएम इज कम्प्रोमाइज्ड नारा बेरोजगार युवाओं और किसानों की चिंता को दर्शाता है। राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे को संसद में उठाया। राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इसे देश और एआई समिट की उपलब्धियों के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि यह विरोध केवल पार्टी की राजनीति का हिस्सा है और देश की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है। मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि विरोध के दौरान कपड़े उतारना शर्मनाक था और यह देश को वैश्विक मंच पर छोटा दिखाने जैसा है। इस विरोध प्रदर्शन ने न केवल समिट में व्यवधान पैदा किया, बल्कि राजनीतिक दलों के बीच बहस को भी तेज कर दिया। युवा कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक अधिकार के रूप में पेश किया, जबकि भाजपा और दिल्ली सरकार ने इसे अनुचित और अपमानजनक बताया।



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ट्रंप की महत्वाकांक्षी परियोजना 'बोर्ड ऑफ पीस' की पहली बैठक

वॉशिंगटन डीसी में आयोजित इस ऐतिहासिक बैठक में भारतीय दूतावास में तैनात चार्ज डी' अफेयर्स नामग्या सी खम्पा ने देश का प्रतिनिधित्व किया। भारत का यह कदम उसकी विदेश नीति की सूझबूझ को दर्शाता है।

Board of Peace
भारत ने अपनाया संतुलित रुख, सदस्यता पर बनाई सावधानी (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar20 Feb 2026 08:59 AM
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Board of Peace : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की महत्वाकांक्षी पहल 'बोर्ड ऑफ पीस' (Board of Peace) की पहली बैठक में भारत ने अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को प्रदर्शित करते हुए एक संतुलित रुख अपनाया है। भारत ने इस नए अंतरराष्ट्रीय गठजोड़ का पूर्ण सदस्य बनने के निमंत्रण पर तत्काल स्वीकृति नहीं दी, बल्कि सावधानी बरतते हुए 'पर्यवेक्षक' (Observer) के रूप में इसमें शामिल होकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

भारत का प्रतिनिधित्व और रणनीति

गुरुवार (19 फरवरी) को वॉशिंगटन डीसी में आयोजित इस ऐतिहासिक बैठक में भारतीय दूतावास में तैनात चार्ज डी' अफेयर्स नामग्या सी खम्पा ने देश का प्रतिनिधित्व किया। भारत का यह कदम उसकी विदेश नीति की सूझबूझ को दर्शाता है, जिसके तहत वह किसी भी नए अंतरराष्ट्रीय मंच के उद्देश्यों और बारीकियों को समझे बिना उसमें शामिल होने में जल्दबाजी नहीं करना चाहता।

पिछले महीने दावोस में इस परियोजना की घोषणा के समय भारत इस कार्यक्रम से दूर रहा था। 12 फरवरी को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी स्पष्ट किया था कि अमेरिका का निमंत्रण मिला है और प्रस्ताव पर विचार चल रहा है। उन्होंने कहा था, "भारत ने पश्चिम एशिया में शांति को बढ़ावा देने वाले प्रयासों का हमेशा समर्थन किया है।"

ट्रंप का लक्ष्य: संयुक्त राष्ट्र को टक्कर

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का यह कदम मौजूदा वैश्विक व्यवस्था को चुनौती देने की ओर इशारा करता है। ट्रंप ने दावोस में विश्व आर्थिक मंच (WEF) के दौरान दावा किया था कि यह बोर्ड संयुक्त राष्ट्र (UN) को टक्कर देने में सक्षम होगा। हालांकि, इसकी शुरुआत गाजा में इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम की निगरानी और शासन व्यवस्था स्थापित करने के उद्देश्य से की गई थी, लेकिन अब इसका दायरा काफी व्यापक हो गया है।

बैठक का आयोजन और सदस्य

वॉशिंगटन स्थित 'यूएस इंस्टीट्यूट ऑफ पीस' में आयोजित इस बैठक में लगभग 50 देशों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इनमें 27 देशों ने पूर्ण सदस्यता स्वीकार की, जिनमें अजरबैजान, बेलारूस, मिस्र, हंगरी, इंडोनेशिया, इजराइल, जॉर्डन, मोरक्को, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, तुर्किये, यूएई और वियतनाम शामिल हैं। वहीं, भारत और यूरोपीय संघ (EU) सहित कई अन्य देशों ने सावधानी बरतते हुए पर्यवेक्षक का दर्जा स्वीकार किया।

बड़ी वित्तीय प्रतिबद्धता

बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति ने बड़ी वित्तीय सहायता की घोषणा की। ट्रंप ने बताया कि 9 सदस्य देशों- कजाकिस्तान, अजरबैजान, यूएई, मोरक्को, बहरीन, कतर, सऊदी अरब, उज्बेकिस्तान और कुवैत ने गाजा के लिए राहत पैकेज के तहत कुल 7 अरब डॉलर देने पर सहमति व्यक्त की है। साथ ही, उन्होंने घोषणा की कि अमेरिका भी इस बोर्ड के लिए 10 अरब डॉलर का योगदान देगा, जो इस परियोजना की महत्वाकांक्षा को दर्शाता है।

विश्लेषण: भारत का सोचा-समझा कदम

भारत का पर्यवेक्षक के रूप में शामिल होना एक स्पष्ट संदेश देता है कि वह अमेरिका के साथ संवाद और पश्चिम एशिया में शांति पहल में योगदान देने के इच्छुक है, लेकिन वह अपनी विदेश नीति की स्वतंत्रता को किसी भी नए संगठन की सदस्यता के नाम पर बाध्य नहीं करना चाहता। भारत की यह रणनीति उसके दीर्घकालिक हितों और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में उसकी परिपक्व समझ को रेखांकित करती है। Board of Peace

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एपस्टीन फाइल्स में नया खुलासा, अब नोबेल वैज्ञानिक की तस्वीर सामने आई

इन दस्तावेजों में एक पुरानी तस्वीर सामने आई है जिसमें प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक जेम्स वॉटसन दिखाई दे रहे हैं। वह वही वैज्ञानिक हैं जिन्होंने डीएनए की संरचना (डबल हेलिक्स) की खोज की थी, जो जैविक विज्ञान और चिकित्सा अनुसंधान में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर साबित हुई।

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वैज्ञानिक जेम्स वॉटसन
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar18 Feb 2026 05:01 PM
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Epstein Files : हाल ही में अमेरिकी न्याय विभाग ने डेविड नेटवर्क से जुड़े लाखों दस्तावेज, ईमेल और तस्वीरें सार्वजनिक किए हैं, जिन्हें मीडिया एपस्टीन फाइल्स कह रहा है। इन दस्तावेजों में एक पुरानी तस्वीर सामने आई है जिसमें प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक जेम्स वॉटसन दिखाई दे रहे हैं। वह वही वैज्ञानिक हैं जिन्होंने डीएनए की संरचना (डबल हेलिक्स) की खोज की थी, जो जैविक विज्ञान और चिकित्सा अनुसंधान में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर साबित हुई। 

तस्वीर का विवरण

इस तस्वीर में वॉटसन को जेफ्री एपस्टीन के न्यूयॉर्क स्थित घर में तीन महिलाओं के साथ खड़ा दिखाया गया है। तस्वीर का मूल संदर्भ, तारीख और उसमें शामिल व्यक्तियों की पहचान स्पष्ट रूप से सार्वजनिक फाइलों से पुष्टि नहीं हुई है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यह फोटो एपस्टीन से जुड़े एक संग्रह का हिस्सा है, जिसमें कई प्रकार की तस्वीरें और दस्तावेज हैं। 

वॉटसन कौन हैं?

जेम्स डब्ल्यू. वॉटसन को 1962 में डीएनए की डबल हेलिक्स आकृति की खोज के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

उनकी यह खोज विज्ञान और आनुवंशिकी की दुनिया में अत्यधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है और उसने आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान के रास्ते बदल दिए हैं। 

क्या इससे कोई आपराधिक आरोप साबित होता है?

अब तक उपलब्ध जानकारी से ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जो दशार्ता हो कि वॉटसन ने किसी आपराधिक कृत्य में शामिल था।

तस्वीर खींची गई थी, इसका केवल एक दृश्य दस्तावेज के रूप में उपयोग हुआ है लेकिन किसी आरोपी व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्यवाही के लिए यह पर्याप्त नहीं है। मीडिया और समाज में चर्चा इसी तस्वीर के आधार पर हो रही है, न कि किसी जांच प्रक्रिया में। 

पूरा मामला क्या है?

एपस्टीन फाइल्स का उदय ऐसे विशाल दस्तावेजों और मीडिया फोटोज के सार्वजनिक होने के कारण हुआ है, जिनमें प्रतिष्ठित लोगों के नाम, चित्र और ईमेल शामिल हैं। इन फाइलों से जुड़ी जानकारी को कई देशों और मीडिया संस्थानों द्वारा खोजा और प्रकाशित किया जा रहा है, जिससे वैश्विक राजनीति और समाज में बहस बढ़ रही है।


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