अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने वेनेजुएला में सैन्य हस्तक्षेप को तेल रिकवरी और शांति मिशन बताया और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए ग्रीनलैंड पर दावा जताया। इस पर प्रतिक्रिया में फ्रांस, जर्मनी और पांच अन्य यूरोपीय देशों ने संयुक्त बयान जारी कर ट्रंप को संदेश दिया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की आक्रामक टिप्पणी के बाद यूरोप के सात प्रमुख देश एकजुट हो गए हैं और उन्होंने साफ कर दिया है कि ग्रीनलैंड के भविष्य पर किसी भी तरह का बाहरी दबाव स्वीकार नहीं किया जाएगा।
फ्रांस, जर्मनी, इटली, पोलैंड, स्पेन, ब्रिटेन और डेनमार्क ने एक संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा यूरोप की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। बयान में स्पष्ट किया गया कि ग्रीनलैंड के भविष्य पर फैसला केवल डेनमार्क और वहां के लोगों का अधिकार है।
इस संयुक्त बयान पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टुस्क, स्पेन के प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर और डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन के हस्ताक्षर हैं।
संयुक्त बयान में कहा गया कि आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा न केवल यूरोप बल्कि अंतरराष्ट्रीय और ट्रांस-अटलांटिक सुरक्षा के लिए भी बेहद अहम है। नाटो पहले ही आर्कटिक को अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल कर चुका है और यूरोपीय सहयोगी देश वहां अपनी सैन्य मौजूदगी और निवेश लगातार बढ़ा रहे हैं। यूरोपीय नेताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि*डेनमार्क साम्राज्य, जिसमें ग्रीनलैंड शामिल है, नाटो का हिस्सा है और इस क्षेत्र की सुरक्षा नाटो सहयोगियों, खासकर अमेरिका, के साथ मिलकर सुनिश्चित की जानी चाहिए। हालांकि, इसमें संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और सीमाओं की अक्षुण्णता से कोई समझौता नहीं होगा।
बयान में 1951 के रक्षा समझौते का हवाला देते हुए कहा गया कि अमेरिका आर्कटिक सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण साझेदार है, लेकिन ग्रीनलैंड से जुड़े फैसले किसी भी बाहरी दबाव में नहीं लिए जाएंगे।
दरअसल, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा था किे हमें ग्रीनलैंड चाहिए… वहां इस वक्त रूसी और चीनी जहाज मौजूद हैं। ट्रंप ने यह दावा भी किया कि यूरोपीय संघ चाहता है कि अमेरिका ग्रीनलैंड को अपने नियंत्रण में ले, क्योंकि यह अमेरिका की सुरक्षा और आर्थिक हितों के लिए जरूरी है। उनके इस बयान के बाद यूरोप में गंभीर चिंता जताई गई।