NEOM: सऊदी अरब का 600 अरब डॉलर वाला मेगा विजन, जानिए क्या है प्लान?

रियाद का दावा है कि NEOM केवल एक फ्यूचर सिटी नहीं, बल्कि ग्रीन एनर्जी, स्मार्ट अर्बन प्लानिंग और सस्टेनेबल लाइफस्टाइल का ऐसा मॉडल है जो आने वाले वर्षों में शहरी जीवन की वैश्विक परिभाषा को नई भाषा दे सकता है।

Red Sea किनारे बन रहा NEOM
Red Sea किनारे बन रहा NEOM
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar05 Jan 2026 11:28 AM
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Saudi Arabia NEOM Project : दुनिया के सबसे महत्वाकांक्षी डेवलपमेंट ब्लूप्रिंट्स में शुमार सऊदी अरब का NEOM प्रोजेक्ट एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा के केंद्र में आ गया है। करीब 599 अरब डॉलर की अनुमानित लागत वाला यह मेगा प्लान Vision 2030 के जरिए सऊदी अरब की “तेल-केंद्रित पहचान” को बदलकर उसे टेक्नोलॉजी और इनोवेशन-ड्रिवन इकोनॉमी की दिशा में ले जाने की सबसे बड़ी कोशिश माना जा रहा है। रियाद का दावा है कि NEOM केवल एक फ्यूचर सिटी नहीं, बल्कि ग्रीन एनर्जी, स्मार्ट अर्बन प्लानिंग और सस्टेनेबल लाइफस्टाइल का ऐसा मॉडल है जो आने वाले वर्षों में शहरी जीवन की वैश्विक परिभाषा को नई भाषा दे सकता है। 

क्या है NEOM Project?

NEOM दरअसल सऊदी अरब का फ्यूचर सिटी विजन है, जिसे देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में Red Sea और Gulf of Aqaba के तट पर विकसित किया जा रहा है। इसकी लोकेशन को रणनीतिक तौर पर इसलिए बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह क्षेत्र एशिया–यूरोप–अफ्रीका के बीच बनते एक बड़े कनेक्टिंग कॉरिडोर की तरह देखा जाता हैजहां से ग्लोबल ट्रेड रूट्स और इंटरनेशनल कनेक्टिविटी तक सीधी पहुंच बनती है। सऊदी अरब का दावा है कि NEOM को केवल एक नया शहर नहीं, बल्कि हाई-टेक और सस्टेनेबल अर्बन मॉडल के रूप में गढ़ा जाएगा, जहां मजबूत डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लीन एनर्जी रोज़मर्रा की जिंदगी का हिस्सा होंगे

THE LINE: शहर की परिभाषा बदलने का दावा

NEOM का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला और सबसे क्रांतिकारी कॉन्सेप्ट है THE LINE। इसे 170 किलोमीटर लंबे एक सीधे शहर के रूप में डिज़ाइन किया गया है, जहां न तो पारंपरिक सड़कें होंगी और न ही निजी कारों पर निर्भरता। सऊदी अरब का दावा है कि यह शहर पूरी तरह AI-आधारित ट्रांसपोर्ट सिस्टम और रिन्यूएबल एनर्जी पर चलेगा, जिससे प्रदूषण और ईंधन की खपत को न्यूनतम स्तर पर लाया जा सकेगा। सरकार के मुताबिक, THE LINE में रहने वाले लोगों को स्कूल, अस्पताल, ऑफिस और एंटरटेनमेंट जैसी जरूरी सुविधाएं कुछ ही मिनटों की दूरी पर मिलेंगी। सीधे शब्दों में कहें तो THE LINE के जरिए सऊदी अरब शहरी जीवन को तेज, स्मार्ट और पर्यावरण के अनुकूल बनाने का एक बिल्कुल नया मॉडल दुनिया के सामने रख दिया है।

NEOM का मल्टी-हब मॉडल

NEOM को सऊदी अरब एक एकल शहर की तरह नहीं, बल्कि कई स्पेशलाइज्ड ज़ोन्स के नेटवर्क के रूप में तैयार कर रहा है जहां हर जोन अलग-अलग सेक्टर को गति देगा और पूरे प्रोजेक्ट की अर्थव्यवस्था को अलग इंजन मिलेगा। इस ब्लूप्रिंट में Oxagon को दुनिया के सबसे बड़े फ्लोटिंग इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक्स हब के तौर पर पेश किया गया है, जहां हाई-एंड मैन्युफैक्चरिंग से लेकर सप्लाई-चेन तक नई पीढ़ी का इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने की तैयारी है। वहीं Trojena को पहाड़ों के बीच एक टूरिज़्म और एडवेंचर जोन के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां विंटर गेम्स और स्नो-स्पोर्ट्स जैसी सुविधाएं आकर्षण का केंद्र होंगी। दूसरी तरफ Sindalah को एक लग्जरी आइलैंड डेस्टिनेशन के रूप में आकार दिया जा रहा है.जिसके जरिए सऊदी अरब ग्लोबल टूरिज्म मैप पर अपनी मौजूदगी और पकड़ को और मजबूत करना चाहता है।

NEOM से बनेंगे नए करियर पाथ

सऊदी अरब NEOM को अपने इकोनॉमिक ट्रांसफॉर्मेशन का सबसे बड़ा गेम-चेंजर मानकर चल रहा है। रियाद का दावा है कि यह मेगा-प्रोजेक्ट सिर्फ नई इमारतें और स्मार्ट सिटी सिस्टम खड़ा नहीं करेगा, बल्कि रोजगार के बड़े अवसर भी पैदा करेगा जहां लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियों की संभावना जताई जा रही है। सरकार के मुताबिक NEOM के जरिए विदेशी निवेश को आकर्षित करने, स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने और टेक-सेक्टर में नई कंपनियों व टैलेंट को जोड़ने की रणनीति पर काम हो रहा है। Saudi Arabia NEOM Project

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ट्रेड डील खोलेगी तरक्की का नया दरवाजा! निर्यात में होगा जबरदस्त फायदा

India-UK Trade: भारत की मिडिल ईस्ट के साथ बढ़ती दोस्ती और नए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स के चलते अगले वित्त वर्ष 2026-27 में भारत के निर्यात में बड़ा उछाल आने की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2026 में निर्यात 840-850 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है और 2027 में यह 950 अरब डॉलर या उससे भी अधिक हो सकता है।

India–UK Trade Agreement 2026
India–UK Trade Deal
locationभारत
userअसमीना
calendar03 Jan 2026 02:30 PM
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भारत की वैश्विक व्यापार नीति अब नए दौर में कदम रख चुकी है। मिडिल ईस्ट देशों के साथ मजबूत होते रिश्ते, फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) और टेक्नोलॉजी आधारित सेक्टर्स की तेज ग्रोथ आने वाले वर्षों में भारत के निर्यात को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि वित्त वर्ष 2026 और 2027 भारत के एक्सपोर्ट सेक्टर के लिए गेम चेंजर साबित हो सकते हैं। अगर मौजूदा ट्रेंड जारी रहा तो भारत का कुल निर्यात 950 अरब डॉलर के ऐतिहासिक आंकड़े को भी पार कर सकता है।

भारत के निर्यात में रिकॉर्ड उछाल की उम्मीद

निर्यातकों और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में भारत का कुल गुड्स और सर्विस एक्सपोर्ट 840–850 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। वहीं वित्त वर्ष 2027 में इसके लगभग 950 अरब डॉलर या उससे भी अधिक होने की संभावना जताई जा रही है। इसका सबसे बड़ा कारण भारत द्वारा लगातार नए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स को बढ़ावा देना और पारंपरिक बाजारों से आगे बढ़कर नए क्षेत्रों में पकड़ मजबूत करना है।

मिडिल ईस्ट के साथ बढ़ती नजदीकी बनेगी ताकत

भारत और मिडिल ईस्ट देशों के बीच व्यापारिक रिश्ते तेजी से मजबूत हो रहे हैं। पश्चिम एशियाई देशों के साथ फ्री ट्रेड डील्स से भारतीय उत्पादों को नए बाजार मिल रहे हैं। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन्स (FIEO) के मुताबिक, भारतीय एक्सपोर्ट का सबसे खराब दौर अब पीछे छूट चुका है और टेक-बेस्ड सेक्टर्स आने वाले समय में बेहतर प्रदर्शन करेंगे। लाल सागर संकट का लगभग समाप्त होना भी लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन के लिए राहत भरी खबर है।

क्लोथ और अपैरल सेक्टर को मिलेगा बड़ा फायदा

भारत का टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर अगले साल शानदार प्रदर्शन कर सकता है। उद्योग जगत का मानना है कि भारत-ब्रिटेन एफटीए के लागू होने, जीएसटी सुधार, क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर हटने और ड्यूटी-फ्री कॉटन जैसे कदमों से इस सेक्टर में मूलभूत सुधार हुआ है। इसके चलते अगले वर्ष क्लोथ और अपैरल एक्सपोर्ट में 10 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि संभव है।

इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट में भी दिखेगी मजबूती

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग अब भारत की तीसरी सबसे बड़ी एक्सपोर्ट कैटेगरी बन चुकी है। वित्त वर्ष 2026 के अप्रैल से नवंबर के बीच भारत का कुल निर्यात 562.13 अरब डॉलर रहने का अनुमान है जो पिछले वर्ष की तुलना में 5.43 प्रतिशत अधिक है। यह संकेत देता है कि भारत का मैन्युफैक्चरिंग और टेक सेक्टर लगातार मजबूत हो रहा है।

अमेरिका और यूरोप पर बनी हुई है नजर

भारत ने 2025 में ब्रिटेन और ओमान के साथ अहम व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं और न्यूजीलैंड के साथ बातचीत पूरी कर ली है। भारत-ब्रिटेन CETA के 2026 में लागू होने की उम्मीद है। इसके अलावा, निर्यातकों की नजर अमेरिका के साथ संभावित बाइलेटरल ट्रेड डील और यूरोपीय यूनियन के साथ व्यापार समझौते में प्रगति पर टिकी हुई है। हालांकि, अमेरिकी टैरिफ और यूरोप की धीमी ग्रोथ को लेकर सतर्कता बनी हुई है।

अमेरिकी टैरिफ से बढ़ी चुनौतियां

अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 50 फीसदी तक के टैरिफ से कुछ श्रम-प्रधान उद्योगों पर असर पड़ा है। खिलौना उद्योग में कई कंपनियों ने अपने मोल्ड और उपकरण भारत से वियतनाम और इंडोनेशिया ट्रांसफर कर दिए हैं। हालांकि, निर्यातकों का कहना है कि अमेरिका के साथ 50-60 फीसदी रेगुलर बिजनेस अभी भी जारी है और स्थिति पूरी तरह नकारात्मक नहीं है।

एफटीए से कच्चे माल की होगी आसानी

नए मुक्त व्यापार समझौतों के लागू होने के बाद भारत को न्यूजीलैंड जैसे देशों से सस्ता कच्चा माल मिलने की संभावना है। इससे घरेलू उद्योगों को लागत में राहत मिलेगी और उलटे शुल्क ढांचे की समस्या भी काफी हद तक दूर हो सकती है। इससे भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता वैश्विक बाजार में और मजबूत होगी।

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खाड़ी के दो साथी आमने-सामने: यमन में सऊदी-यूएई टकराव क्यों बढ़ा?

इसी क्रम में UAE का झुकाव साउदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) की ओर बढ़ा जिसे दक्षिणी यमन की सबसे प्रभावशाली अलगाववादी ताकत माना जाता है और जिसके बारे में लंबे समय से हथियार, प्रशिक्षण और रणनीतिक समर्थन मिलने की चर्चाएं चलती रही हैं।

खाड़ी के दो साथी अब आमने-सामने
खाड़ी के दो साथी अब आमने-सामने
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar03 Jan 2026 10:32 AM
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Saudi Arabia-UAE Conflict : खाड़ी की राजनीति में जिस दरार की आशंका लंबे समय से जताई जा रही थी, वह अब खुलकर सामने आती दिख रही है। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जो वर्षों तक यमन संकट में एक ही मोर्चे पर खड़े रहे अब उसी यमन की ज मीन पर टकराव के रास्ते पर बढ़ते नजर आ रहे हैं। ताज़ा घटनाक्रम में दावा किया जा रहा है कि सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन के हदरामौत प्रांत में UAE समर्थित साउदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) से जुड़े ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिनमें 20 से ज्यादा लड़ाकों के मारे जाने की बात सामने आई है। यह टकराव सिर्फ यमन के लिए नहीं, बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट की स्थिरता के लिए भी चिंता बढ़ाने वाला माना जा रहा है। वजह यह है कि जब क्षेत्र के दो बड़े साझेदार आमने-सामने होते हैं, तो उसका फायदा अक्सर तीसरे पक्ष खासतौर पर ईरान समर्थित हूती उठाते हैं।

यमन की पृष्ठभूमि

यमन में 2015 से जारी गृहयुद्ध ने देश को जंग का मैदान बना दिया। हूती विद्रोहियों के उभार और उनके पीछे ईरान की छाया गहराने के बाद सऊदी अरब और UAE एक साथ आए और एक साझा गठबंधन खड़ा किया मकसद था हूतियों की बढ़त रोकना और यमन को ईरानी प्रभाव के दायरे में जाने से बचाना। इसी रणनीति के तहत दोनों देशों ने हवाई हमले, जमीनी तैनाती और दक्षिणी यमन की सुरक्षा व्यवस्था में निर्णायक भूमिका निभाई। लेकिन जैसे-जैसे युद्ध लंबा खिंचता गया, गठबंधन के भीतर ही लक्ष्य बदलने लगे। सऊदी अरब चाहता रहा कि यमन एक देश बना रहे और सत्ता का नियंत्रण केंद्र के जरिए कायम हो, जबकि UAE ने दक्षिण में ऐसे स्थानीय गुटों को मजबूत किया जो अलग प्रशासन और अलग राज्य की मांग की तरफ बढ़ रहे थे। यहीं से साझेदारी में दरार पड़ी। इसी क्रम में UAE का झुकाव साउदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) की ओर बढ़ा जिसे दक्षिणी यमन की सबसे प्रभावशाली अलगाववादी ताकत माना जाता है और जिसके बारे में लंबे समय से हथियार, प्रशिक्षण और रणनीतिक समर्थन मिलने की चर्चाएं चलती रही हैं।

दोस्त दुश्मन क्यों बन रहे हैं?

हाल के हफ्तों में तनाव तब बढ़ा, जब हदरामौत और महरा जैसे बड़े और रणनीतिक इलाकों में STC की गतिविधियां तेज होती दिखीं। ये इलाके सिर्फ नक्शे पर बड़े नहीं हैं—यहां की भौगोलिक स्थिति, संसाधन और सीमा नजदीकी इन्हें बेहद अहम बनाती है। सऊदी को आशंका रही कि UAE समर्थित गुट यमन के दक्षिण-पूर्व में समानांतर सत्ता स्थापित कर रहा है, जिससे सऊदी समर्थित बलों की पकड़ कमजोर हो सकती है। इसी बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हुआ,एक तरफ “गठबंधन के नियमों का उल्लंघन” और दूसरी तरफ “राजनीतिक धोखा” जैसी भाषा सामने आने लगी।

एयरस्ट्राइक का दावा और उसके बाद की सियासी आग

रिपोर्ट के मुताबिक 2 जनवरी 2026 को हदरामौत में STC के कथित कैंप/बेस पर हवाई हमले किए गए। इससे पहले 30 दिसंबर को मुकल्ला पोर्ट को लेकर भी तनाव की बात सामने आई, जहां कथित तौर पर हथियारों से जुड़ी गतिविधियों पर सवाल उठे। हमलों के बाद STC की ओर से इसे “खुली चुनौती” करार देते हुए सऊदी समर्थित बलों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई की बात कही गई। वहीं दूसरी तरफ, सऊदी खेमे के भीतर यह तर्क उभरता दिखा कि “गठबंधन की शर्तों” से बाहर जाकर कोई भी गुट यमन में अलग एजेंडा नहीं चला सकता।

पॉइंटर्स में समझिए—अब तक क्या-क्या हुआ?

  1. दावा है कि हदरामौत में UAE समर्थित STC ठिकानों पर सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने हवाई हमला किया।
  2. हमले में 20+ लड़ाकों की मौत की सूचना बताई गई।
  3. STC पर आरोप है कि उसने कुछ क्षेत्रों में सऊदी समर्थित बलों को पीछे धकेला।
  4. दोनों पक्ष एक-दूसरे पर अंदरखाने गठजोड़/कट्टरपंथियों से संबंध जैसे आरोप लगा रहे हैं।
  5. यमन के भीतर पहले से चल रही युद्ध-त्रासदी के बीच यह नया टकराव मानवीय संकट और बढ़ा सकता है। Saudi Arabia-UAE Conflict

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