पीएसएलवी राकेट के तीसरे चरण में आई खराबी, अन्वेषा उपग्रह का क्या हुआ

लॉन्च के बाद मीडिया से बात करते हुए डॉ. नारायणन ने कहा कि रॉकेट के तीसरे चरण के अंत में तकनीकी गड़बड़ी का सामना करना पड़ा, जिससे मिशन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई।

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1पीएसएलवी-सी62
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar12 Jan 2026 01:42 PM
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PSLV Launch : सोमवार को सुबह हुए पीएसएलवी-सी62 मिशन के तीसरे चरण में तकनीकी खामी आ गई, जिसके कारण मिशन को आगे नहीं बढ़ाया जा सका। इसरो के चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन ने इस तकनीकी समस्या की पुष्टि करते हुए बताया कि इसकी जांच प्रारंभ कर दी गई है। इस मिशन का उद्देश्य ईओएस-एन1 नामक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह और साथ में भेजे गए 15 छोटे उपग्रहों को सूर्य समकालिक कक्षा में स्थापित करना था। यह प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सुबह 10:17 बजे किया गया था।

रॉकेट के तीसरे चरण के अंत में तकनीकी गड़बड़ी आई

लॉन्च के बाद मीडिया से बात करते हुए डॉ. नारायणन ने कहा कि रॉकेट के तीसरे चरण के अंत में तकनीकी गड़बड़ी का सामना करना पड़ा, जिससे मिशन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। उन्होंने बताया कि पहले तीन चरणों में रॉकेट का प्रदर्शन सामान्य था, लेकिन चौथे चरण के दौरान एक हल्का बदलाव देखा गया, जिससे रॉकेट का मार्ग बदल गया। इस समय वैज्ञानिक टीम ग्राउंड स्टेशन से प्राप्त आंकड़ों का अध्ययन कर रही है, ताकि समस्या का कारण स्पष्ट किया जा सके।

पिछले साल भी पीएसएलवी मिशन में आई थी समस्या

पीएसएलवी रॉकेट में चार चरण होते हैं। पहला ठोस ईंधन से, दूसरा तरल ईंधन से, तीसरा फिर ठोस ईंधन से और चौथा तरल ईंधन से। तीसरे चरण तक रॉकेट ने अपेक्षित प्रदर्शन किया था, लेकिन उसके बाद कुछ समस्या उत्पन्न हो गई। इसरो के प्रमुख ने यह भी कहा कि पिछले साल मई में हुए पीएसएलवी-सी61 मिशन में भी तीसरे चरण में तकनीकी समस्या आई थी, जिससे वह मिशन भी पूरी तरह सफल नहीं हो सका था।

कई उपग्रह भी दुर्घटना के हुए शिकार

ईओएस-एन1 उपग्रह, जिसे अन्वेषा भी कहा जा रहा है, का उद्देश्य भारत की कृषि, शहरी योजना और पर्यावरण निगरानी क्षमता को बढ़ाना था। साथ ही, मिशन के तहत स्पेन की एक स्टार्टअप द्वारा विकसित केआईडी नामक एक छोटे पुन:प्रवेश यान का प्रदर्शन भी किया जाना था। यह मिशन इसरो की वाणिज्यिक शाखा न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड का नौवां वाणिज्यिक मिशन था। हालांकि पीएसएलवी रॉकेट का यह मिशन सफल नहीं हो सका, लेकिन इसरो का पीएसएलवी कार्यक्रम अब तक 63 सफल उड़ानें पूरी कर चुका है। इसके प्रमुख मिशनों में चंद्रयान-1, मंगल कक्षा मिशन, आदित्य-एल1 और एस्ट्रोसैट जैसे ऐतिहासिक अभियान शामिल हैं। 2017 में पीएसएलवी ने एक ही मिशन में 104 उपग्रहों को लॉन्च कर विश्व रिकॉर्ड भी स्थापित किया था। इसरो की टीम ने जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है, और पूरी उम्मीद है कि वे इस समस्या का समाधान जल्द निकालेंगे और भविष्य में इस तरह की गड़बड़ी से बचने के उपाय अपनाएंगे। अब यह देखना होगा कि यह गड़बड़ी भविष्य में भारतीय अंतरिक्ष मिशनों पर क्या असर डालती है। क्या आपको लगता है कि इसरो जल्द ही इस समस्या का समाधान निकाल पाएगा?

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तेल नहीं, समंदर असली निशाना, ट्रंप की रणनीति दुनिया के लिए खतरनाक

वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देशों में गिना जाता है। लंबे समय से यह देश अमेरिकी रणनीतिकारों की नजर में रहा है। माना जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन वेनेजुएला को केवल ऊर्जा स्रोत के तौर पर नहीं, बल्कि कैरेबियन सागर में प्रभाव बढ़ाने के प्रवेश द्वार के रूप में देखता है।

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डोनाल्ड ट्रंप
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar11 Jan 2026 01:47 PM
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Trump's Strategy : डोनाल्ड ट्रंप की राजनीति हमेशा से सीधे टकराव और आक्रामक फैसलों के लिए जानी जाती रही है। 2025 में टैरिफ वॉर के जरिए जिस तरह उन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाया, उसने कई देशों को हिला कर रख दिया। लेकिन 2026 की शुरुआत में ट्रंप की रणनीति और भी खतरनाक मोड़ पर जाती दिखाई दे रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अब ट्रंप सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि ऊर्जा और समुद्री रास्तों पर वर्चस्व की लड़ाई लड़ना चाहते हैं। तेल तो महज एक बहाना है, असली खेल दुनिया के समंदरों पर कब्जे का है।

वेनेजुएला और ऊर्जा नियंत्रण की रणनीति

वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देशों में गिना जाता है। लंबे समय से यह देश अमेरिकी रणनीतिकारों की नजर में रहा है। माना जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन वेनेजुएला को केवल ऊर्जा स्रोत के तौर पर नहीं, बल्कि कैरेबियन सागर में प्रभाव बढ़ाने के प्रवेश द्वार के रूप में देखता है। कैरेबियन क्षेत्र पर मजबूत पकड़ का मतलब है मध्य और दक्षिण अमेरिका की शिपिंग पर प्रभाव। पनामा नहर के आसपास रणनीतिक दबदबा और अमेरिका की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती का मिलना। यही वजह है कि वेनेजुएला के बाद कोलंबिया, क्यूबा और मैक्सिको जैसे देशों की भूमिका भी अमेरिकी रणनीति में अहम मानी जा रही है।

ग्रीनलैंड : बर्फ नहीं, भू-राजनीति का खजाना

ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की दिलचस्पी कोई नई बात नहीं है। आधिकारिक तौर पर इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बताया जाता है, लेकिन असल वजह कहीं ज्यादा गहरी है। ग्रीनलैंड डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है, आबादी भले ही बेहद कम हो, लेकिन इसका भौगोलिक स्थान इसे बेहद अहम बना देता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रीनलैंड पर प्रभाव होने से आर्कटिक क्षेत्र में अमेरिका की पकड़ मजबूत होगी। बर्फ पिघलने से खुलने वाले नए शिपिंग रूट्स पर नियंत्रण मिलेगा। रूस और चीन की आर्कटिक गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी। ग्रीनलैंड के जरिए अमेरिका को बैफिन बे, लैब्राडोर सी, हडसन बे और बैरेंट्स सी जैसे रणनीतिक समुद्री इलाकों में प्रभाव बढ़ाने का मौका मिल सकता है।

आर्कटिक : भविष्य का ट्रेड हाइवे

जलवायु परिवर्तन के कारण आर्कटिक की बर्फ तेजी से पिघल रही है। इससे ऐसे समुद्री रास्ते खुल रहे हैं जो पारंपरिक रूट्स के मुकाबले छोटे और सस्ते हैं। जिस देश का इन रास्तों पर नियंत्रण होगा, वही भविष्य के वैश्विक व्यापार को दिशा देगा। ट्रंप यह भलीभांति जानते हैं कि अगर आर्कटिक में रूस या चीन का दबदबा बढ़ता है, तो अमेरिका की समुद्री बादशाहत को सीधी चुनौती मिलेगी। इसी आशंका के चलते ग्रीनलैंड ट्रंप की रणनीति का केंद्र बनता जा रहा है।

समंदर पर कब्जा = वैश्विक व्यापार पर नियंत्रण

विश्लेषकों के अनुसार ट्रंप की रणनीति सिर्फ अटलांटिक या आर्कटिक तक सीमित नहीं है। लाल सागर, फारस की खाड़ी और बंगाल की खाड़ी जैसे इलाकों पर प्रभाव बढ़ाने की कोशिशों को भी इसी बड़े प्लान का हिस्सा माना जा रहा है। अगर कोई ताकत इन समुद्री रूट्स को प्रभावित करने की स्थिति में आ जाती है, तो वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हो सकती है। व्यापार महंगा और अस्थिर हो जाएगा

और छोटे और विकासशील देशों की निर्भरता बढ़ेगी। 

अमेरिका फर्स्ट से दुनिया कंट्रोल तक?

ट्रंप का नारा अमेरिका फर्स्ट अब सिर्फ घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं दिखता। आलोचकों का कहना है कि उनका उद्देश्य दुनिया के देशों को दो ही विकल्प देना है। अमेरिकी शर्तों पर व्यापार करो या वैश्विक बाजार से बाहर हो जाओ। रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ की धमकी और समुद्री रास्तों पर नियंत्रण की कोशिशें इसी दिशा में उठाए गए कदम माने जा रहे हैं।

क्यों खतरनाक है यह रणनीति?

अगर वैश्विक व्यापार कुछ गिने-चुने समुद्री रास्तों और एक ताकत के नियंत्रण में चला गया, तो अंतरराष्ट्रीय कानून कमजोर पड़ेंगे। वैश्विक असंतुलन बढ़ेगा और टकराव और संघर्ष की आशंका बढ़ेगी। ट्रंप का अब तक का रिकॉर्ड बताता है कि वे अंतरराष्ट्रीय सहमति से ज्यादा ताकत की भाषा में भरोसा रखते हैं। यही वजह है कि उनकी यह समुद्री रणनीति दुनिया के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है।

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Elon Musk के X पर चला बड़ा हथौड़ा, डिलीट हुए 600 अकाउंट

Elon Musk के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अश्लील कंटेंट को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। हजारों पोस्ट ब्लॉक होने और सैकड़ों अकाउंट डिलीट होने के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं। Grok AI से जुड़े इस विवाद ने सरकार और टेक कंपनियों के रिश्ते पर नई बहस छेड़ दी है।

Elon Musk
अश्लील कंटेंट को लेकर बड़ा फैसला
locationभारत
userअसमीना
calendar11 Jan 2026 11:14 AM
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सोशल मीडिया आज हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है लेकिन जब यही प्लेटफॉर्म गलत इस्तेमाल का ज़रिया बन जाए तो सवाल उठना लाजमी है। बीते कुछ दिनों से Elon Musk के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले Twitter) पर अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर विवाद गहराता जा रहा था। अब इस पूरे मामले में X ने बड़ा कदम उठाते हुए सख्त फैसला लिया है जो भारत में डिजिटल कंटेंट की दिशा तय कर सकता है।

सरकार की सख्ती के बाद हरकत में आया X

भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने जब X प्लेटफॉर्म पर मौजूद आपत्तिजनक कंटेंट पर आपत्ति जताई तब जाकर यह मामला गंभीर हुआ। मंत्रालय ने X को एक लेटर लिखकर साफ कहा कि ऐसे कंटेंट को तुरंत हटाया जाए खासकर वह सामग्री जो महिलाओं और नाबालिगों से जुड़ी हो। सरकार की इस चेतावनी के करीब एक हफ्ते बाद अब X ने माना है कि उनसे कंटेंट मॉडरेशन में गलती हुई है और वह आगे भारत के कानून और सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार काम करेगा।

3,500 पोस्ट ब्लॉक और 600 अकाउंट्स डिलीट

X की ओर से की गई कार्रवाई काफ़ी बड़ी मानी जा रही है। प्लेटफॉर्म ने 3,500 से ज्यादा आपत्तिजनक पोस्ट ब्लॉक किए हैं और 600 अकाउंट्स को हमेशा के लिए डिलीट कर दिया है। ये वही अकाउंट्स थे जो अश्लील कंटेंट फैलाने या उसे बढ़ावा देने में शामिल पाए गए। सूत्रों के मुताबिक, X ने साफ कर दिया है कि अब ऐसे कंटेंट को किसी भी हालत में अनुमति नहीं दी जाएगी और कंटेंट मॉनिटरिंग को और सख्त किया जाएगा।

Grok AI बना विवाद की जड़

इस पूरे विवाद के केंद्र में रहा Grok AI, जो कि Elon Musk की कंपनी xAI द्वारा बनाया गया एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चैटबॉट है। Grok को X प्लेटफॉर्म के साथ जोड़ा गया है और इसे अलग ऐप के ज़रिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। समस्या तब शुरू हुई जब कुछ यूजर्स ने Grok AI का गलत इस्तेमाल करते हुए अश्लील इमेज तैयार करना शुरू कर दिया। खास तौर पर महिलाओं और नाबालिगों की तस्वीरों को एडिट कर आपत्तिजनक कंटेंट बनाया गया जो सोशल मीडिया पर तेजी से फैलने लगा।

Grok AI क्या है और कैसे होता है इसका इस्तेमाल?

Grok AI एक ऐसा चैटबॉट है जो टेक्स्ट या वॉयस कमांड के जरिए यूजर्स के सवालों का जवाब देता है और कंटेंट जनरेट करता है। आम तौर पर इसका इस्तेमाल जानकारी पाने, सवाल पूछने या क्रिएटिव कामों के लिए किया जाता है लेकिन जब इसी तकनीक का इस्तेमाल गलत इरादों से किया जाए तो यह समाज के लिए खतरा बन सकता है। यही वजह है कि Grok AI के फीचर्स को लेकर सरकार और आम लोगों दोनों ने चिंता जताई।

आगे नहीं दोहराई जाएगी गलती

इस पूरे मामले के बाद X ने यह भरोसा दिलाया है कि वह आगे से ऐसे किसी भी कंटेंट को प्लेटफॉर्म पर जगह नहीं देगा जो कानून के खिलाफ हो। कंपनी ने कहा है कि वह भारत सरकार के साथ मिलकर काम करेगी और अपने नियमों को और मजबूत बनाएगी।

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