सऊदी अरब कैसे बना Economy का शहंशाह?

सवाल यह है कि सऊदी अरब आखिर कैसे बना मध्य-पूर्व की आर्थिक रीढ़? इसकी कहानी सिर्फ तेल की नहीं, बल्कि दूरदर्शी नीतियों, वैश्विक रणनीति और समय के साथ बदलाव को अपनाने की भी है।

सऊदी अरब
सऊदी अरब
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar22 Jan 2026 01:06 PM
bookmark

Saudi Arabia : मध्य-पूर्व की राजनीति और अर्थव्यवस्था की बात हो और सऊदी अरब का नाम न आए, ऐसा संभव नहीं। कभी सीमित संसाधनों और रेगिस्तानी अर्थव्यवस्था वाला यह देश आज क्षेत्र की सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति माना जाता है। सवाल यह है कि सऊदी अरब आखिर कैसे बना मध्य-पूर्व की आर्थिक रीढ़? इसकी कहानी सिर्फ तेल की नहीं, बल्कि दूरदर्शी नीतियों, वैश्विक रणनीति और समय के साथ बदलाव को अपनाने की भी है।

तेल की खोज ने बदली किस्मत

सऊदी अरब के आर्थिक उत्थान की नींव 1938 में पड़े उस क्षण से जुड़ी है, जब देश में बड़े पैमाने पर तेल भंडार की खोज हुई। इसके बाद सऊदी अरब देखते ही देखते दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में शामिल हो गया। कच्चे तेल के निर्यात से मिलने वाली भारी आय ने सरकार को बुनियादी ढांचे, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में निवेश की ताकत दी। तेल ने सऊदी अरब को केवल समृद्ध ही नहीं बनाया, बल्कि उसे वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक निर्णायक भूमिका भी दिलाई।

अरामको: आर्थिक ताकत का स्तंभ

सऊदी अरब की आर्थिक शक्ति का सबसे मजबूत आधार है सऊदी अरामको। यह कंपनी दुनिया की सबसे बड़ी तेल उत्पादक और निर्यातक कंपनियों में गिनी जाती है। अरामको ने न सिर्फ सऊदी सरकार को स्थायी राजस्व दिया, बल्कि तकनीक, रिफाइनिंग और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाया। अरामको की वजह से सऊदी अरब वैश्विक तेल बाजार में कीमतों और आपूर्ति को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।

OPEC में निर्णायक भूमिका

सऊदी अरब तेल निर्यातक देशों के संगठन OPEC का सबसे प्रभावशाली सदस्य रहा है। तेल उत्पादन बढ़ाने या घटाने के फैसलों में सऊदी अरब की सहमति निर्णायक मानी जाती है। यही कारण है कि वैश्विक तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव के समय दुनिया की नजरें रियाद पर टिकी रहती हैं। यह प्रभाव सऊदी अरब को सिर्फ आर्थिक ही नहीं, बल्कि राजनीतिक शक्ति भी प्रदान करता है।

तेल राजस्व से आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर

तेल से आई कमाई को सऊदी अरब ने केवल खजाने में बंद नहीं रखा। राजमार्ग, एयरपोर्ट, बंदरगाह, स्मार्ट शहर, अस्पताल और विश्वविद्यालय इन सभी में बड़े पैमाने पर निवेश किया गया। नतीजा यह हुआ कि सऊदी अरब ने खुद को एक आधुनिक और संगठित अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित किया। यह इंफ्रास्ट्रक्चर आज विदेशी निवेश और वैश्विक कंपनियों को आकर्षित करने का आधार बना हुआ है।

विदेशी निवेश और रणनीतिक साझेदारी

सऊदी अरब ने समय के साथ अमेरिका, चीन, यूरोप और एशियाई देशों के साथ मजबूत आर्थिक रिश्ते बनाए। रक्षा, ऊर्जा, निर्माण और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में विदेशी कंपनियों को खुला मौका दिया गया। इससे न केवल पूंजी आई, बल्कि आधुनिक तकनीक और प्रबंधन कौशल भी देश में प्रवेश कर सका।

Vision 2030: तेल से आगे की सोच

तेल पर अत्यधिक निर्भरता के जोखिम को समझते हुए सऊदी नेतृत्व ने Vision 2030 की शुरुआत की। इसका उद्देश्य अर्थव्यवस्था को विविध बनाना है। पर्यटन, मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल टेक्नोलॉजी, एंटरटेनमेंट और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे सेक्टर अब सऊदी विकास की नई पहचान बन रहे हैं। NEOM जैसे मेगा प्रोजेक्ट्स इस बदलाव के प्रतीक हैं, जो सऊदी अरब को भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए तैयार कर रहे हैं। आर्थिक शक्ति केवल संसाधनों से नहीं बनती, बल्कि मानव पूंजी से भी बनती है। सऊदी अरब ने शिक्षा सुधार, स्किल डेवलपमेंट और महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। इससे देश की उत्पादक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। Saudi Arabia

संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

सऊदी अरब का कफाला सिस्टम क्या है? जानिए इसके नियम, असर और बदलती सच्चाई

सवाल सीधा है कफाला सिस्टम आखिर है क्या, यह किन नियमों पर चलता है, प्रवासी श्रमिकों के लिए इसके मायने क्या हैं और हालिया बदलावों के बाद आज इसकी तस्वीर कितनी बदली है? आइए, इसे विस्तार से समझते हैं।

सऊदी अरब का कफाला सिस्टम
सऊदी अरब का कफाला सिस्टम
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar21 Jan 2026 02:22 PM
bookmark

Saudi Arabia : सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था को चलाने वाली बड़ी श्रम-शक्ति में लाखों प्रवासी कामगार शामिल हैं खासतौर पर भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और फिलीपींस जैसे देशों से पहुंचे लोग इसमें मुख्य रूप से शामिल है। इन कामगारों की नौकरी, रेजिडेंसी और रोज़मर्रा की कई औपचारिक प्रक्रियाओं पर कफाला सिस्टम (Kafala System) का असर लंबे समय तक निर्णायक रहा है। यही वजह है कि यह व्यवस्था वर्षों से बहस, आलोचना और सुधारों के केंद्र में बनी हुई है। सवाल सीधा है कफाला सिस्टम आखिर है क्या, यह किन नियमों पर चलता है, प्रवासी श्रमिकों के लिए इसके मायने क्या हैं और हालिया बदलावों के बाद आज इसकी तस्वीर कितनी बदली है? आइए, इसे विस्तार से समझते हैं।

कफाला सिस्टम का अर्थ और अवधारणा

अरबी शब्द कफाला का अर्थ होता है जिम्मेदारी या प्रायोजन। सऊदी अरब में यह एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें किसी विदेशी कर्मचारी को देश में काम करने और रहने के लिए किसी स्थानीय नागरिक या कंपनी (जिसे कफील कहा जाता है) का प्रायोजन जरूरी होता है। यानी प्रवासी कर्मचारी का वीज़ा, नौकरी और कई कानूनी प्रक्रियाएं उसी कफील से जुड़ी होती हैं। सरल शब्दों में कहें तो कफाला सिस्टम के तहत कर्मचारी पूरी तरह अपने नियोक्ता पर निर्भर रहता है।

कफाला सिस्टम कैसे काम करता है?

सऊदी अरब में जब कोई विदेशी नागरिक नौकरी के लिए जाता है, तो उसकी एंट्री सिर्फ “जॉब” से नहीं एक स्पॉन्सरशिप सिस्टम से होती है। आमतौर पर कोई सऊदी कंपनी/नियोक्ता उसे स्पॉन्सर करता है, वही वर्क वीजा और इकामा (रेजिडेंसी परमिट) की प्रक्रिया पूरी कराता है। इसके बाद नौकरी बदलने, देश छोड़ने या कई मामलों में दस्तावेज़ी नियंत्रण जैसे फैसलों पर भी नियोक्ता का असर दिखता है। कागज़ों पर यह व्यवस्था प्रवासी श्रमिकों की निगरानी और कानूनी जवाबदेही तय करने के लिए बनी थी, लेकिन वक्त के साथ यही सिस्टम अधिकारों, निर्भरता और शोषण जैसे मुद्दों को लेकर बार-बार सवालों के घेरे में आता रहा है

कफाला सिस्टम से जुड़ी प्रमुख समस्याएं

कफाला सिस्टम पर सबसे तीखी आपत्ति यही रही है कि इसमें पावर का संतुलन पूरी तरह नियोक्ता के पक्ष में झुक जाता है। कई मामलों में कर्मचारी की नौकरी, दस्तावेज़ और आवाजाही सब कुछ एक तरह से मर्जी की मोहर पर टिक जाता है। नतीजा यह हुआ कि बिना अनुमति जॉब बदलने पर रोक, वेतन रोकने या देर से देने की शिकायतें, पासपोर्ट जब्त कर लेना, लंबे काम के घंटे और असुरक्षित/खराब कार्यस्थितियां जैसी समस्याएं बार-बार सामने आईं। ऊपर से देश छोड़ने के लिए एग्जिट परमिट जैसी शर्त ने कई प्रवासी श्रमिकों की मुश्किलें और बढ़ा दीं। यही वजह है कि मानवाधिकार संगठनों ने इस व्यवस्था को कई बार आधुनिक समय की बंधुआ मजदूरी जैसी संरचना बताकर कड़ी आलोचना की है।

सऊदी अरब में कफाला सिस्टम में हुए सुधार

आलोचनाओं और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच सऊदी अरब ने पिछले कुछ सालों में कफाला सिस्टम की जकड़न ढीली करने की दिशा में कई ठोस कदम उठाए हैं। Vision 2030 के एजेंडे के तहत श्रम सुधारों को तेज किया गया, ताकि प्रवासी कर्मचारियों की निर्भरता कम हो और अधिकारों की सुरक्षा बढ़े। इन बदलावों में कई श्रेणियों के कर्मचारियों को नौकरी बदलने की अनुमति, नियोक्ता की मंजूरी के बिना एग्ज़िट-रीएंट्री जैसी सुविधा, डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए कॉन्ट्रैक्ट सत्यापन और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया, और वेज प्रोटेक्शन सिस्टम (WPS) को मजबूत करना शामिल है। सरकार का दावा है कि इन सुधारों का मकसद श्रमिकों को ज्यादा आज़ादी, पारदर्शिता और कानूनी सुरक्षा देना और कार्यस्थलों पर जवाबदेही तय करना है।

आज कफाला सिस्टम की वास्तविक स्थिति

हालांकि सुधार हुए हैं, लेकिन कफाला सिस्टम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अब भी घरेलू कामगारों और कुछ श्रमिक वर्गों पर इसके नियम सख्ती से लागू होते हैं। यानी यह कहना गलत होगा कि कफाला सिस्टम समाप्त हो चुका है, बल्कि यह धीरे-धीरे सीमित और नियंत्रित किया जा रहा है।

भारतीय कामगारों पर इसका प्रभाव

सऊदी अरब में काम करने वाले भारतीयों की संख्या काफी अधिक है। कफाला सिस्टम के चलते कई भारतीय कामगारों को पहले कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन नए नियमों से अब स्थिति पहले से बेहतर हुई है। फिर भी, नौकरी से पहले कॉन्ट्रैक्ट पढ़ना, सही एजेंसी चुनना और कानूनी जानकारी रखना बेहद जरूरी है। Saudi Arabia


संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

लोकल हायरिंग पर सऊदी का 60% लॉक: मार्केटिंग में नया नियम लागू

इसके साथ ही इन भूमिकाओं के लिए न्यूनतम वेतन 5,500 सऊदी रियाल (SAR) निर्धारित किया गया है। नए नियम 19 जनवरी से प्रभावी होंगे, जबकि कंपनियों को बदलाव लागू करने के लिए तीन महीने का ट्रांजिशन पीरियड दिया गया है।

सऊदी अरब
सऊदी अरब
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar20 Jan 2026 04:33 PM
bookmark

Saudi Arabia : सऊदी अरब ने निजी क्षेत्र में स्थानीय नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मानव संसाधन और सामाजिक विकास मंत्रालय (HRSD) ने मार्केटिंग और सेल्स सेक्टर की नौकरियों में सऊदीकरण (Saudization) की दर 60% करने का फैसला लिया है। इसके साथ ही इन भूमिकाओं के लिए न्यूनतम वेतन 5,500 सऊदी रियाल (SAR) निर्धारित किया गया है। नए नियम 19 जनवरी से प्रभावी होंगे, जबकि कंपनियों को बदलाव लागू करने के लिए तीन महीने का ट्रांजिशन पीरियड दिया गया है।

क्या है सऊदीकरण?

सऊदी सरकार ने ‘सऊदीकरण’ नीति के तहत निजी कंपनियों में स्थानीय युवाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए मार्केटिंग और सेल्स सेक्टर पर सीधा फोकस किया है। नए प्रावधानों के मुताबिक, जिन प्रतिष्ठानों में इन भूमिकाओं में कम से कम 3 कर्मचारी काम कर रहे हैं, वहां 60% पद सऊदी नागरिकों से भरना अनिवार्य होगा। साथ ही मार्केटिंग से जुड़े पदों पर न्यूनतम 5,500 रियाल वेतन तय किया गया है, ताकि सिर्फ भर्ती ही नहीं बल्कि सम्मानजनक कमाई भी सुनिश्चित हो। इस दायरे में मार्केटिंग/एडवरटाइजिंग मैनेजर, विज्ञापन प्रतिनिधि, ग्राफिक व विज्ञापन डिजाइनर, PR स्पेशलिस्ट-मैनेजर, मार्केटिंग स्पेशलिस्ट और फोटोग्राफर जैसे पद शामिल हैं। वहीं, सेल्स सेक्टर में भी सेल्स मैनेजर, रिटेल-होलसेल प्रतिनिधि, आईटी/कम्युनिकेशन उपकरण बिक्री विशेषज्ञ, कमर्शियल स्पेशलिस्ट और ब्रोकरेज/माल दलाल जैसी भूमिकाएं नियम के दायरे में आएंगी। कंपनियों को नए लक्ष्य हासिल करने के लिए तीन महीने की तैयारी अवधि दी गई है

HRSD ने खोला मदद का पूरा रास्ता

HRSD का कहना है कि यह सिर्फ नियम थोपने की कवायद नहीं, बल्कि निजी कंपनियों को साथ लेकर चलने की रणनीति है। मंत्रालय के मुताबिक, कंपनियों को भर्ती प्रक्रिया से लेकर ट्रेनिंग, स्किल-अपग्रेडेशन, कर्मचारी विकास और जॉब स्टेबिलिटी बढ़ाने तक सरकार के कई सपोर्ट प्रोग्राम्स का सीधा फायदा मिलेगा। इतना ही नहीं, ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट फंड (Hadaf) के जरिए चल रही सऊदीकरण पहलों में निजी क्षेत्र को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि योग्य सऊदी टैलेंट तक पहुंच आसान हो और नियुक्तियों के बाद कर्मचारियों को टिकाए रखने में भी मदद मिल सके। कुल मिलाकर, सरकार का संदेश साफ है लोकल हायरिंग के लक्ष्य के साथ-साथ कंपनियों को जरूरी संसाधन और सिस्टम सपोर्ट भी दिया जाएगा।

लेबर मार्केट एनालिसिस से तय हुए नए लक्ष्य

मंत्रालय का दावा है कि मार्केटिंग और सेल्स सेक्टर में सऊदीकरण से जुड़ा यह फैसला किसी “अनुमान” पर नहीं, बल्कि लेबर मार्केट के डेटा-आधारित विश्लेषण पर लिया गया है। HRSD के मुताबिक, इन क्षेत्रों में नौकरी चाहने वाले सऊदी युवाओं की उपलब्धता और आने वाले समय की इंडस्ट्री डिमांड को सामने रखकर नए लक्ष्य तय किए गए हैं। सरकार को भरोसा है कि इस कदम से निजी क्षेत्र में क्वालिटी जॉब्स का दायरा बढ़ेगा, बाजार और प्रतिस्पर्धी व आकर्षक बनेगा, और कर्मचारियों के लिए स्थायी रोजगार की नींव मजबूत होगी। वहीं, नियमों के पालन में कंपनियों को दिक्कत न हो, इसके लिए मंत्रालय ने अपनी वेबसाइट पर स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रियात्मक गाइडलाइन भी जारी की है। Saudi Arabia

संबंधित खबरें