शिपिंग कंपनियों ने निर्यातकों पर लगाया वार टैक्स, कंटेनर पर 2.82 लाख रुपये तक अतिरिक्त शुल्क
बढ़ते संघर्ष के बीच, भारतीय निर्यातकों को शिपिंग कंपनियों द्वारा इमरजेंसी कॉन्फ्लिक्ट सरचार्ज (वार टैक्स) देना पड़ रहा है। यह शुल्क एक 40 फुट के कंटेनर पर लगभग $3,000 या 2.82 लाख तक है। विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े मालवाहक जहाजों में औसतन 3,500 कंटेनर लदे होते हैं।

Iran War : पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच, भारतीय निर्यातकों को शिपिंग कंपनियों द्वारा इमरजेंसी कॉन्फ्लिक्ट सरचार्ज (वार टैक्स) देना पड़ रहा है। यह शुल्क एक 40 फुट के कंटेनर पर लगभग $3,000 या 2.82 लाख तक है। विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े मालवाहक जहाजों में औसतन 3,500 कंटेनर लदे होते हैं। ऐसे में, केवल एक जहाज से ही शिपिंग कंपनियों को करीब 90 करोड़ का अतिरिक्त लाभ हो रहा है। छोटे जहाजों में लगभग 300 कंटेनर होते हैं, जिससे निर्यातकों पर लगभग 80 करोड़ का अतिरिक्त दबाव बनता है।
अतिरिक्त शुल्क क्यों लगाया गया?
कंपनियों के अनुसार यह कदम समुद्री सुरक्षा जोखिम और परिचालन लागत में वृद्धि के कारण उठाया गया है। विशेष रूप से, तनावग्रस्त क्षेत्रों के पास के समुद्री मार्ग, जैसे कि स्ट्रेट आॅफ होर्मुज और बाब-अल-मनदेव स्ट्रेट, जोखिम बढ़ा रहे हैं। ईरान से जुड़े हालात के कारण जहाज, चालक दल और माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है।
प्रभावित क्षेत्र
यह अतिरिक्त शुल्क उन कंटेनरों पर लागू है जो निम्नलिखित देशों को जा रहे हैं जिनमें बहरीन, जिबूती, मिस्र, इरिट्रिया, इराक, जॉर्डन, सऊदी अरब, कुवैत, ओमान, कतर, सूडान, संयुक्त अरब अमीरात और यमन हैं। अधिकांश निर्यातक प्रति कंटेनर $2,500-$3,000 का मुनाफा कमाते हैं। वार टैक्स इसी मुनाफे के बराबर होने के कारण निर्यातकों की लाभप्रदता पर गंभीर असर डाल रहा है। छोटे और मध्यम व्यवसायों के लिए यह अतिरिक्त खर्च वित्तीय चुनौती बन सकता है। पश्चिम एशिया में तनाव और सुरक्षा खतरों के कारण शिपिंग कंपनियों ने करोड़ों रुपये का अतिरिक्त शुल्क लगाया है। यह कदम विशेष रूप से उत्तर प्रदेश जैसे निर्यातक केंद्रों के व्यापारियों के लिए आर्थिक चुनौती साबित हो रहा है। Iran War
Iran War : पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच, भारतीय निर्यातकों को शिपिंग कंपनियों द्वारा इमरजेंसी कॉन्फ्लिक्ट सरचार्ज (वार टैक्स) देना पड़ रहा है। यह शुल्क एक 40 फुट के कंटेनर पर लगभग $3,000 या 2.82 लाख तक है। विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े मालवाहक जहाजों में औसतन 3,500 कंटेनर लदे होते हैं। ऐसे में, केवल एक जहाज से ही शिपिंग कंपनियों को करीब 90 करोड़ का अतिरिक्त लाभ हो रहा है। छोटे जहाजों में लगभग 300 कंटेनर होते हैं, जिससे निर्यातकों पर लगभग 80 करोड़ का अतिरिक्त दबाव बनता है।
अतिरिक्त शुल्क क्यों लगाया गया?
कंपनियों के अनुसार यह कदम समुद्री सुरक्षा जोखिम और परिचालन लागत में वृद्धि के कारण उठाया गया है। विशेष रूप से, तनावग्रस्त क्षेत्रों के पास के समुद्री मार्ग, जैसे कि स्ट्रेट आॅफ होर्मुज और बाब-अल-मनदेव स्ट्रेट, जोखिम बढ़ा रहे हैं। ईरान से जुड़े हालात के कारण जहाज, चालक दल और माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है।
प्रभावित क्षेत्र
यह अतिरिक्त शुल्क उन कंटेनरों पर लागू है जो निम्नलिखित देशों को जा रहे हैं जिनमें बहरीन, जिबूती, मिस्र, इरिट्रिया, इराक, जॉर्डन, सऊदी अरब, कुवैत, ओमान, कतर, सूडान, संयुक्त अरब अमीरात और यमन हैं। अधिकांश निर्यातक प्रति कंटेनर $2,500-$3,000 का मुनाफा कमाते हैं। वार टैक्स इसी मुनाफे के बराबर होने के कारण निर्यातकों की लाभप्रदता पर गंभीर असर डाल रहा है। छोटे और मध्यम व्यवसायों के लिए यह अतिरिक्त खर्च वित्तीय चुनौती बन सकता है। पश्चिम एशिया में तनाव और सुरक्षा खतरों के कारण शिपिंग कंपनियों ने करोड़ों रुपये का अतिरिक्त शुल्क लगाया है। यह कदम विशेष रूप से उत्तर प्रदेश जैसे निर्यातक केंद्रों के व्यापारियों के लिए आर्थिक चुनौती साबित हो रहा है। Iran War












