जर्मनी में आसिम मुनीर की बेइज्जती, सिक्योरिटी गार्ड ने रोका

वीडियो में सुरक्षा अधिकारी उनसे बैज को सीधा करने के लिए कहते हैं ताकि उस पर लिखा नाम और विवरण स्पष्ट रूप से देखा जा सके। यह क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से साझा की जा रही है।

aasim munir
आसिम मुनीर की सुरक्षा जांच
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar15 Feb 2026 02:24 PM
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Munich Security Conference : पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर का एक वीडियो जर्मनी से सामने आया है, जिसमें म्यूनिख सिक्योरिटी कांफ्रेंस के प्रवेश द्वार पर सुरक्षा जांच के दौरान अपना पहचान-पत्र दिखाते दिखाई देते हैं। वीडियो में सुरक्षा अधिकारी उनसे बैज को सीधा करने के लिए कहते हैं ताकि उस पर लिखा नाम और विवरण स्पष्ट रूप से देखा जा सके। यह क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से साझा की जा रही है।

क्या यह असाधारण घटना थी?

अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होती है। ऐसे आयोजनों में हर प्रतिनिधि की एंट्री से पहले पहचान की पुष्टि की जाती है। सुरक्षा कर्मी बैज या आईडी को स्पष्ट दिखाने के लिए कह सकते हैं। पद या रैंक की परवाह किए बिना सभी प्रतिभागियों पर एक जैसी प्रक्रिया लागू होती है। इसलिए उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह घटना नियमित सुरक्षा जांच जैसी ही प्रतीत होती है, हालांकि सोशल मीडिया पर इसे अलग-अलग नजरिए से पेश किया जा रहा है।

सम्मेलन के बाहर विरोध

जर्मनी में सक्रिय सिंधी संगठन जिये सिंध मुत्तहिदा महाज (जेएसएमएम) ने सम्मेलन स्थल के बाहर प्रदर्शन किया। संगठन के प्रतिनिधियों ने पाकिस्तान में मानवाधिकार मुद्दों को उठाते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की। म्यूनिख सिक्योरिटी कांफ्रेंस विश्व स्तर का वार्षिक मंच है, जहाँ विभिन्न देशों के नेता, सैन्य अधिकारी और रणनीतिक विशेषज्ञ वैश्विक सुरक्षा, कूटनीति और शांति से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श करते हैं। इस स्तर के आयोजन में सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू होना सामान्य बात है।


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भारत में होने वाला है बहुत बड़ा इवेंट, 7 राष्ट्रपति, 2 उपराष्ट्रपति और 9 प्रधानमंत्री होंगे शामिल

AI Impact Summit भारत में नई दिल्ली में कल से शुरू होने जा रहा है। यह पांच दिवसीय सम्मेलन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए आयोजित किया जा रहा है। इसमें दुनियाभर के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और प्रमुख AI कंपनियों के CEO शामिल होंगे।

AI Impact Summit 2026
AI Impact Summit 2026 भारत में कब और कहां होगा
locationभारत
userअसमीना
calendar15 Feb 2026 10:39 AM
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भारत की राजधानी नई दिल्ली में कल से पांच दिवसीय AI Impact Summit 2026 शुरू होने जा रहा है। यह शिखर सम्मेलन टेक्नोलॉजी, नवाचार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए आयोजित किया जा रहा है। इस इवेंट में दुनियाभर से लगभग 2 लाख लोग शामिल होंगे। इसमें कई देशों के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और बड़ी टेक कंपनियों के CEO भी हिस्सा लेंगे। सम्मेलन का मुख्य फोकस तीन स्तंभों पर है जिनमें People, Planet और Progress शामिल है। इसका उद्देश्य AI के माध्यम से समाज और पर्यावरण दोनों में सकारात्मक बदलाव लाना और वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका को दिखाना है।

AI Impact Summit में शामिल होंगे राष्ट्रपति

विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार इस सम्मेलन में सात देशों के राष्ट्रपति शामिल होंगे-

ब्राजील- लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा

फ्रांस- इमैनुएल मैक्रों

एस्टोनिया- आलार कारिस

स्लोवाकिया- पीटर पेलेग्रिनी

श्रीलंका- अनुर कुमार दिसानायके

सर्बिया- अलेक्जेंडर वुचिच

स्विट्जरलैंड- गाइ परमेलन

इन नेताओं की उपस्थिति वैश्विक स्तर पर AI और टेक्नोलॉजी में सहयोग को मजबूती देगी।

उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की उपस्थिति

उपराष्ट्रपति के स्तर पर दो देश प्रतिनिधित्व करेंगे-

गुयाना- भरत जगदेव

सेशेल्स- सेबेस्टियन पिलाय

साथ ही नौ देशों के प्रधानमंत्री भी सम्मेलन में शामिल होंगे-

आर्मेनिया- निकोल पशिन्यान

भूटान- शेरिंग टोबगे

क्रोएशिया- आंद्रेज प्लेंकोविच

फिनलैंड- पेटेरी ऑर्पो

स्पेन- पेड्रो सांचेज

ग्रीस – किरियाकोस मित्सोताकिस

नीदरलैंड- डिक स्कूफ

कजाकिस्तान- ओलजास बेक्टेनोव

मॉरीशस- नवीनचंद्र रामगुलाम

यह नेताओं की मौजूदगी वैश्विक सहयोग और नीति निर्माण के लिए महत्वपूर्ण होगी।

AI कंपनियों के CEO भी होंगे शामिल

AI Impact Summit में दुनियाभर की प्रमुख AI कंपनियों के CEO भी उपस्थित रहेंगे। इसमें शामिल होंगे-

अल्फाबेट के CEO- सुंदर पिचाई

OpenAI के CEO- सैम ऑल्टमैन

गूगल डीपमाइंड के CEO- डेमिस हसाबिस

एंथ्रोपिक के CEO- डारियो अमोदेई

इन विशेषज्ञों की भागीदारी टेक्नोलॉजी के भविष्य और AI के नवाचार को नई दिशा देने में मदद करेगी।

AI Impact Summit का उद्देश्य

इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य AI के माध्यम से वैश्विक सहयोग, सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी विकास और लोगों के लिए बेहतर समाधान लाना है। ‘People, Planet और Progress’ के सिद्धांत पर आधारित यह इवेंट भारत के AI क्षेत्र में दृष्टिकोण और वैश्विक नेतृत्व को दर्शाता है।

AI Impact Summit 2026 सिर्फ एक टेक इवेंट नहीं बल्कि भविष्य की तकनीकी दिशा और वैश्विक संवाद का मंच है।

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अब्राहम लिंकन का जीवन देता है हर किसी को प्रेरणा

जब अब्राहम लिंकन का नम्बर आया तो कक्षा-8 में पढ़ने वाले अब्राहम लिंकन ने कहा कि बड़ा होकर मैं अमेरिका का राष्ट्रपति बनूंगा। इस घोषणा को उसके स्कूल के बच्चों ने मजाक बना लिया। किसी भी प्रकार की मजाक से अब्राहम लिंकन का हौंसला कम नहीं हुआ और वें एक दिन अमेरिका के राष्ट्रपति बन गए।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar14 Feb 2026 01:52 PM
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Abraham Lincoln : अमेरिका के राष्ट्रपति की हमेशा चर्चा होती है। अमेरिका में एक ऐसा भी राष्ट्रपति हुआ है जिसके जीवन की कहानी 150 साल बाद भी हर किसी को प्रेरणा प्रदान करती है। प्रेरणादायक जीवन के धनी अमेरिका के उस राष्ट्रपति का नाम था अब्राहम लिंकन। अब्राहम लिंकन बेहद गरीब परिवार में पैदा हुए थे। कक्षा-8 में पढ़ते समय ही अब्राहम लिंकन ने घोषणा कर दी थी कि एक दिन वें अमेरिका के राष्ट्रपति बनेंगे।

जब सबको चौंका दिया था अब्राहम लिंकन ने

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन के पूरे जीवन पर दृष्टि डालने से पहले यह जानना जरूरी है कि अब्राहम लिंकन ने बचपन में ही सबको कैसे चौंका दिया था। हुआ यह कि जब अब्राहम लिंकन कक्षा-8 में पढ़ते थे तो बड़ी विशेष घटना घट गई। अब्राहम लिंकन के क्लास टीचर सभी बच्चों से यह सवाल कर रहे थे कि बड़े होकर वें क्या बनेंगे? किसी बच्चे ने कहा कि वह बड़ा होकर इंजीनियर बनेगा। किसी ने डॉक्टर तो किसी ने वकील बनने की बात कही। जब अब्राहम लिंकन का नम्बर आया तो कक्षा-8 में पढ़ने वाले अब्राहम लिंकन ने कहा कि बड़ा होकर मैं अमेरिका का राष्ट्रपति बनूंगा। इस घोषणा को उसके स्कूल के बच्चों ने मजाक बना लिया। किसी भी प्रकार की मजाक से अब्राहम लिंकन  का हौंसला कम नहीं हुआ और वें एक दिन अमेरिका के राष्ट्रपति बन गए। तमाम विशेषज्ञों का कहना है कि अब्राहम लिंकन की तरह अपने जीवन का स्पष्ट लक्ष्य बनाने वाला हर व्यक्ति अपने जीवन के लक्ष्य को हासिल कर सकता है। केवल स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने की आवश्यकता होती है।

बेहद गरीब परिवार में पैदा हुए थे अब्राहम लिंकन 

अमेरिका के 16वें राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन का जीवन प्रेरणा से भरा हुआ जीवन है। अब्राहम लिंकन का जन्म 1809 में केंटकी में एक गरीब परिवार में हुआ था। उनके पिता थॉमस लिंकन एक किसान थे, जो परिवार को पालने के लिए कड़ी मेहनत करते थे। जब लिंकन महज 7 साल के थे, परिवार इंडियाना चला गया, जहां उन्होंने एक लॉग केबिन में रहना शुरू किया। उस समय शिक्षा की सुविधाएं बहुत कम थीं। लिंकन ने औपचारिक स्कूल में कुल मिलाकर एक साल से भी कम समय बिताया। उनकी मां नैन्सी और सौतेली मां सारा ने उन्हें पढ़ना-लिखना सिखाया। लिंकन को किताबों से इतना लगाव था कि वो किसी भी स्रोत से ज्ञान पाने के लिए आतुर रहते थे। चाहे वह बाइबल हो या कोई अखबार। वो कहते थे कि किताबें उनकी सबसे अच्छी दोस्त हैं। 

अब्राहम लिंकन ने अपने पड़ोसी से मांगी थी किताब

अब्राहम लिंकन के जीवन में किताब उधार मांगने का एक अनोखा प्रकरण छपा था। यह बात उस समय की है जब लिंकन लगभग 11-12 साल के थे। इंडियाना के उनके पड़ोसी जोसिया क्रॉफर्ड के पास एक दुर्लभ किताब थी "द लाइफ ऑफ जॉर्ज वॉशिंगटन" (जॉर्ज वॉशिंगटन की जीवनी), जो डेविड रामसे द्वारा लिखी गई थी। उस समय किताबें बहुत महंगी और दुर्लभ होती थीं, खासकर सीमांत इलाकों में। लिंकन को अमेरिका के पहले राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन की कहानी जानने की बड़ी इच्छा थी। उन्होंने क्रॉफर्ड से किताब उधार मांगी। क्रॉफर्ड ने किताब दे दी, लेकिन लिंकन के पास इसे रखने के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं थी। वो किताब को अपने लॉग केबिन की 2 लकड़ियों के बीच की दरार में रखते थे, ताकि सुबह उठते ही पढ़ सकें। एक रात तेज आंधी-तूफान आया। बारिश की बूंदें केबिन की छत से टपक कर किताब पर गिरीं। सुबह जब लिंकन उठे, तो किताब पूरी तरह गीली और खराब हो चुकी थी। पन्ने फूल गए थे, और किताब पढ़ने लायक नहीं रह गई थी। लिंकन बहुत दुखी हुए। वो जानते थे कि किताब की कीमत चुकानी पड़ेगी, लेकिन उनके पास पैसे नहीं थे। ईमानदार लिंकन ने किताब को सुखाया और सीधे क्रॉफर्ड के पास जाकर सारी बात बताई। उन्होंने कहा, "मिस्टर क्रॉफर्ड, मैं किताब की क्षति के लिए माफी मांगता हूं। मेरे पास पैसे नहीं हैं, लेकिन मैं आपके लिए काम करके इसकी भरपाई कर सकता हूं।

किताब के लिए करनी पड़ी मजदूरी

क्रॉफर्ड ने किताब की कीमत 75 सेंट बताई। उस समय एक दिन की मजदूरी लगभग 25 सेंट होती थी। इसलिए उन्होंने लिंकन से कहा कि वो किताब अपने पास रख लें, लेकिन इसके बदले 3 दिनों तक उनके खेतों में काम करें। लिंकन खुशी-खुशी राजी हो गए। अगले 3 दिनों तक उन्होंने क्रॉफर्ड के मकई के खेतों में काम किया। मकई तोड़ना, खरपतवार निकालना और अन्य कृषि कार्य। यह काम आसान नहीं था, लिंकन को सुबह से शाम तक कड़ी मेहनत करनी पड़ी। लेकिन, किताब पाने की खुशी में उन्होंने कोई शिकायत नहीं की। 3 दिनों की मेहनत के बाद किताब उनकी हो गई। उन्होंने इसे बार-बार पढ़ा और वॉशिंगटन की कहानी से इतने प्रभावित हुए कि यह उनके जीवन का हिस्सा बन गई। यह किस्सा सिर्फ एक किताब की कहानी नहीं है, बल्कि लिंकन की आत्म-शिक्षा की भावना को दर्शाती है। वॉशिंगटन की जीवनी ने लिंकन को सिखाया कि कैसे एक साधारण व्यक्ति कड़ी मेहनत और ईमानदारी से महान बन सकता है। वॉशिंगटन ने अमेरिका की स्वतंत्रता के लिए लड़ाई लड़ी और लिंकन ने बाद में गुलामी के खिलाफ। लिंकन कहते थे कि इस किताब ने उन्हें नेतृत्व और देशभक्ति का पाठ पढ़ाया। उनकी जीवनीकारों के अनुसार, इस घटना ने लिंकन की दृढ़ता को मजबूत किया। वो हमेशा कहते थे कि ज्ञान प्राप्त करने के लिए कोई कीमत बड़ी नहीं होती। लिंकन की आगे की जीवन यात्रा भी इसी भावना से भरी है। 

अब्राहम लिंकन बने अमेरिका के सफल राष्ट्रपति

अब्राहम लिंकन का नाम अमेरिका के सबसे सफल राष्ट्रपति के रूप में गिना जाता है। इंडियाना से इलिनॉय जाकर अब्राहम लिंकन वकील बने राजनीति में आए और फिर 1860 में राष्ट्रपति बने। गृहयुद्ध के दौरान उन्होंने एमांसिपेशन प्रोक्लेमेशन जारी किया, जिसने लाखों गुलामों को आजादी दी। उनकी सफलता की जड़ें उनके बचपन जुड़ी हैं। जैसे कि खेतों में काम करके किताब प्राप्त करना।  यह दर्शाता है कि लिंकन के लिए शिक्षा एक विलासिता नहीं, बल्कि जरूरत थी। उन्होंने कभी हार नहीं मानी, चाहे किताबें उधार लेनी पड़ी हों, मीलों पैदल चलना पड़ा हो। लिंकन का यह किस्सा रोचक होने के साथ-साथ प्रेरणादायक भी है। Abraham Lincoln

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