भारत में एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर अरबों डॉलर का दांव, हुई पैसों की बारिश

अब असली मुकाबला उस बुनियादी ढांचे को बनाने का है जिस पर भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था टिकेगी। बड़े डेटा सेंटर, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, क्लाउड नेटवर्क और एडवांस चिप्स यही इस नए दौर की असली ताकत हैं। दुनिया की अग्रणी टेक कंपनियों ने भारत को एआई विस्तार के लिए एक रणनीतिक केंद्र के रूप में देखा है।

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उभरते बाजारों में एआई अपनाने की रफ्तार तेज करने पर जोर
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar21 Feb 2026 03:47 PM
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AI Summit 2026 : इंडिया एआई इम्पैक्ट सम्मिट 2026 ने यह स्पष्ट कर दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ प्रयोग और चर्चा तक सीमित नहीं है। अब असली मुकाबला उस बुनियादी ढांचे को बनाने का है जिस पर भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था टिकेगी। बड़े डेटा सेंटर, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, क्लाउड नेटवर्क और एडवांस चिप्स यही इस नए दौर की असली ताकत हैं। दुनिया की अग्रणी टेक कंपनियों ने भारत को एआई विस्तार के लिए एक रणनीतिक केंद्र के रूप में देखा है। आइए प्रमुख घोषणाओं पर नजर डालते हैं:

माइक्रोसौफ्ट : 50 अरब डॉलर का वैश्विक विस्तार लक्ष्य

माइक्रोसॉफ्ट ने 2030 तक ग्लोबल साउथ में एआई क्षमताओं को मजबूत करने के लिए 50 अरब डॉलर तक निवेश करने की योजना पर काम करने की बात कही। भारत को इस रणनीति में अहम स्थान दिया गया है। पिछले वर्ष के दौरान कंपनी पहले ही देश में एआईपरियोजनाओं के लिए लगभग 17.5 अरब डॉलर की प्रतिबद्धता जता चुकी है। यह संकेत है कि उभरते बाजारों में एआई अपनाने की रफ्तार तेज करने पर जोर रहेगा।

अडानी ग्रुप : ग्रीन एनर्जी से संचालित एआई डेटा सेंटर

अडानी ग्रुप ने 2035 तक नवीकरणीय ऊर्जा आधारित एआई डेटा सेंटर नेटवर्क खड़ा करने के लिए 100 अरब डॉलर निवेश की योजना पेश की। कंपनी का अनुमान है कि इससे सर्वर निर्माण और सॉवरेन क्लाउड जैसे क्षेत्रों में अतिरिक्त 150 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित हो सकता है। यदि यह योजना सफल रहती है, तो भारत में लगभग 250 अरब डॉलर का एआई इकोसिस्टम विकसित हो सकता है।

टाटा कंसल्टेंसी सर्विस और ओपेन एआई इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर बढ़ता आईटी सेक्टर

टीसीएस ने बताया कि ओपेन एआई उसके डेटा सेंटर कारोबार का पहला प्रमुख ग्राहक बना है, जो एक वैश्विक एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पहल का हिस्सा है। यह साझेदारी दर्शाती है कि भारतीय आईटी कंपनियां पारंपरिक सॉफ्टवेयर सेवाओं से आगे बढ़कर एआई इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण में भी अपनी भूमिका मजबूत करना चाहती हैं।

लार्सन एंड टूब्रो और एनवीडिया : भारत की बड़ी एआई फैक्ट्री

लार्सन एंड टूब्रो ने एनवीडिया के सहयोग से देश में एक बड़े पैमाने की एआई फैक्ट्री स्थापित करने की घोषणा की। इस परियोजना का उद्देश्य एआई-रेडी डेटा सेंटर, उन्नत कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म और भारी एआई वर्कलोड संभालने में सक्षम ढांचा तैयार करना है। इससे भारत की हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग क्षमता को नई मजबूती मिल सकती है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज और जियो प्लेटफॉर्म्स : 109.8 अरब डॉलर की दीर्घकालिक योजना

रिलायंस इंडस्ट्रीज और उसकी डिजिटल इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स ने अगले सात वर्षों में 109.8 अरब डॉलर निवेश का खाका पेश किया। यह पूंजी बड़े डेटा सेंटर, क्लाउड सेवाओं और उन्नत डिजिटल नेटवर्क तैयार करने पर केंद्रित रहेगी। इसे समिट की सबसे बड़ी घोषणाओं में गिना जा रहा है।

योट्टा डेटा सर्विसेज: एशिया-स्तरीय एआई कंप्यूटिंग हब

योट्टा डेटा सर्विसेज ने 2 अरब डॉलर की लागत से एशिया के प्रमुख एआई कंप्यूटिंग केंद्रों में से एक विकसित करने की योजना बताई। इस सुविधा में एनवीडिया के अत्याधुनिक ब्लैकवेल अल्ट्रा चिप्स का उपयोग होगा, जिन्हें बड़े पैमाने के एआई वर्कलोड के लिए डिजाइन किया गया है। यह परियोजना भारत की उन्नत कंप्यूटिंग क्षमताओं को सुदृढ़ करेगी। इन घोषणाओं से स्पष्ट है कि एआई का भविष्य केवल सॉफ्टवेयर या चैटबॉट तक सीमित नहीं है। असली प्रतिस्पर्धा उस बुनियादी ढांचे को तैयार करने की है जो एआई मॉडल्स को शक्ति देता है। भारत तेजी से एआई उपभोक्ता से एआई इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माता की भूमिका में प्रवेश कर रहा है। यदि ये योजनाएं समयबद्ध तरीके से लागू होती हैं, तो आने वाले दशक में भारत वैश्विक अक मानचित्र पर एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर सकता है।


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जिद्दी ट्रंप सुप्रीम कोर्ट की बात मनाने को भी नहीं है तैयार, लगाया नया टैरिफ

Trump Tariff: अमेरिका में ट्रेड पॉलिसी को लेकर बड़ा अपडेट आया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप द्वारा लागू किए गए कई टैरिफ को गैर-कानूनी करार दिया है। इसके बावजूद ट्रंप झुकने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने नए एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किया।

Donald Trump
ट्रंप टैरिफ
locationभारत
userअसमीना
calendar21 Feb 2026 12:08 PM
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अमेरिका में ट्रेड नीति को लेकर एक बार फिर सुर्खियां बनी हैं। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा कई देशों पर लागू किए गए टैरिफ को गैर-कानूनी करार दिया है। 6-3 के बहुमत से सुनाए गए फैसले में चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने कहा कि ट्रंप ने अपने अधिकार का गलत इस्तेमाल करते हुए बड़े लेवी लगाए। हालांकि, ट्रंप सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी झुकने को तैयार नहीं हैं और उन्होंने नए टैरिफ लगाने का आदेश दे दिया है।

150 दिनों के लिए नए टैरिफ लागू

ट्रंप ने शुक्रवार देर रात एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किया। इसके तहत ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 122 के तहत मंगलवार (24 जनवरी) से 150 दिनों के लिए नए टैरिफ लागू किए जाएंगे। इसके मुताबिक अमेरिका में आने वाले इंपोर्ट पर मौजूदा रेट के अलावा 10 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ लगेगा। यह कदम इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट 1977 के तहत लगाए गए पुराने टैरिफ को कुछ हद तक रिप्लेस करेगा जिसे सुप्रीम कोर्ट ने गैर-कानूनी घोषित कर दिया था।

अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है भारी असर

ट्रेड एक्ट 1974 का सेक्शन 122 अमेरिकी राष्ट्रपति को 15 प्रतिशत तक के इंपोर्ट सरचार्ज, इंपोर्ट कोटा या दोनों मिलाकर बड़े और गंभीर बैलेंस-ऑफ-पेमेंट घाटे को दूर करने का अधिकार देता है। ट्रंप के इस फैसले से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक सप्लाई चेन पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

भारत के साथ व्यापार डील में कोई बदलाव नहीं

भारत पर इसका सीधा असर ट्रेड डील और टैरिफ पर होगा। ट्रंप ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भारत के साथ व्यापार डील में कोई बदलाव नहीं हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत को टैरिफ देना होगा और अमेरिका अपने टैरिफ नहीं घटाएगा। इसके बावजूद भारत और अमेरिका के बीच साइन होने वाले अंतरिम व्यापार समझौते के तहत अमेरिका भारतीय सामानों पर रेसिप्रोकल टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करेगा। वहीं, भारत अमेरिकी निर्यात के लिए टैरिफ में कमी करने और रेगुलेटरी आसानियों के लिए प्रतिबद्ध है।

50 प्रतिशत तक बढ़ा था टैरिफ

इसके अलावा अमेरिका ने रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर लगाया गया अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ 7 फरवरी 2026 से हटा दिया है। अगस्त 2025 में यह अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया था जिसके कारण भारत से अमेरिका जाने वाले सामान पर कुल टैरिफ 50 प्रतिशत तक बढ़ गया था। यह कदम भारत-अमेरिका व्यापार रिश्तों को संतुलित करने के लिए उठाया गया है।

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बांग्लादेश की नई सरकार ने भारत के लिए वीजा सेवाओं को फिर से बहाल किया

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख तारिक रहमान के नेतृत्व में प्रशासन ने नई दिल्ली स्थित बांग्लादेश उच्चायोग को भारतीय नागरिकों के लिए वीजा जारी करने की प्रक्रिया दोबारा शुरू करने की अनुमति दी है। पिछले कुछ समय से कूटनीतिक तनाव और प्रशासनिक कारणों के चलते वीजा सेवाएं सीमित या निलंबित थीं।

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अंतरिम सरकार के प्रमुख तारिक रहमान
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar20 Feb 2026 06:32 PM
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India-Bangladesh Relations : भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में आई तल्खी के बाद अब सुधार के संकेत दिखने लगे हैं। बांग्लादेश की नई सरकार के नेतृत्व में एक अहम कदम उठाते हुए भारत के लिए वीजा सेवाओं को फिर से शुरू कर दिया गया है। इस निर्णय को दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

क्या है पूरा मामला?

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख तारिक रहमान के नेतृत्व में प्रशासन ने नई दिल्ली स्थित बांग्लादेश उच्चायोग को भारतीय नागरिकों के लिए वीजा जारी करने की प्रक्रिया दोबारा शुरू करने की अनुमति दी है। पिछले कुछ समय से कूटनीतिक तनाव और प्रशासनिक कारणों के चलते वीजा सेवाएं सीमित या निलंबित थीं।

भारत की ओर से क्या संकेत?

भारत ने भी सकारात्मक रुख दिखाते हुए बांग्लादेश में अपनी वीजा सेवाओं को चरणबद्ध तरीके से सामान्य करने के संकेत दिए हैं। माना जा रहा है कि पर्यटन, व्यवसाय और पारिवारिक यात्राओं से जुड़े वीजा फिर से नियमित रूप से जारी किए जाएंगे।

क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

* दोनों देशों के बीच लोगों के आवागमन में आसानी होगी।

* व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूती मिलेगी।

* हालिया तनाव के बाद आपसी भरोसा फिर से स्थापित करने में मदद मिलेगी।

भारत और बांग्लादेश के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध लंबे समय से मजबूत रहे हैं। ऐसे में वीजा सेवाओं की बहाली को द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने वाले कदम के रूप में देखा जा रहा है।


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