भारत-EU डील अमेरिका तथा ट्रंप के मुंह पर बड़ा तमाचा

भारत-EU डील ने सीधे तौर पर अमेरिकी संरक्षणवादी (Protectionist) व्यापार नीतियों को चुनौती दी है और यही कारण है कि अब यह सवाल उठने लगा है क्या ट्रंप और अमेरिका वैश्विक व्यापार की इस नई धुरी के सामने बैकफुट पर चले गए हैं?

भारत–EU समझौता
भारत–EU समझौता
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar28 Jan 2026 04:54 PM
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India-EU Agreement : दुनिया की बदलती भू-राजनीति और वैश्विक व्यापार संतुलन के बीच भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुई ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक नया भूचाल पैदा कर दिया है। इस डील को सिर्फ आर्थिक समझौता नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। खास बात यह है कि यह समझौता ऐसे समय पर सामने आया है, जब अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और उनके संभावित राजनीतिक प्रभाव को लेकर पूरी दुनिया सतर्क नजर आ रही है। भारत-EU डील ने सीधे तौर पर अमेरिकी संरक्षणवादी (Protectionist) व्यापार नीतियों को चुनौती दी है और यही कारण है कि अब यह सवाल उठने लगा है क्या ट्रंप और अमेरिका वैश्विक व्यापार की इस नई धुरी के सामने बैकफुट पर चले गए हैं?

भारत-EU समझौता: सिर्फ व्यापार नहीं, रणनीतिक गठबंधन

भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुआ यह मुक्त व्यापार समझौता दुनिया के लगभग 2 अरब लोगों की आबादी वाले बाजार को जोड़ता है। इस डील के तहत दोनों पक्षों ने टैरिफ कम करने, निवेश को बढ़ावा देने, सेवाओं के आदान-प्रदान और तकनीकी सहयोग को नई ऊंचाई देने पर सहमति जताई है। इस समझौते का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि भारतीय उत्पादों को यूरोपीय बाजारों में पहले से कहीं आसान और सस्ता प्रवेश मिलेगा। टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग गुड्स, ऑटो पार्ट्स, फार्मा, आईटी और जेम-ज्वेलरी जैसे सेक्टरों को सीधे फायदा होगा। वहीं यूरोपीय कंपनियों के लिए भारत का विशाल उपभोक्ता बाजार और मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम खुल जाएगा। यह डील भारत को केवल एक निर्यातक नहीं, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन का मजबूत स्तंभ बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

ट्रंप की नीतियों पर सीधा असर

डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में अमेरिका ने “अमेरिका फर्स्ट” नीति के तहत कई देशों पर भारी टैरिफ लगाए थे। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा। स्टील, एल्युमिनियम, टेक्सटाइल और अन्य उत्पादों पर अमेरिकी शुल्क बढ़ाए गए, जिससे भारत-अमेरिका व्यापार रिश्तों में खटास आई। भारत-EU डील को इसी पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। यह समझौता संकेत देता है कि भारत अब किसी एक वैश्विक शक्ति पर निर्भर नहीं रहना चाहता। भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपने आर्थिक हितों के लिए विकल्पों का निर्माण करेगा, चाहे इसके लिए अमेरिका की नाराजगी ही क्यों न झेलनी पड़े। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह डील अमेरिका के लिए एक चेतावनी है कि वैश्विक व्यापार में दबाव की राजनीति अब पहले जैसी प्रभावी नहीं रही।

अमेरिका के लिए बढ़ी रणनीतिक चुनौती

भारत-EU समझौते के बाद अमेरिका की प्रतिक्रिया यह दिखाती है कि वाशिंगटन इस बदलते समीकरण को हल्के में नहीं ले रहा। अमेरिकी नीति-निर्माताओं को यह अहसास हो चुका है कि भारत तेजी से मल्टी-पोलर ट्रेड स्ट्रैटेजी अपना रहा है, जिसमें अमेरिका सिर्फ एक साझेदार भर रह जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ट्रंप दोबारा सत्ता में आते हैं और फिर से आक्रामक टैरिफ नीति अपनाते हैं, तो भारत-EU जैसे गठबंधन अमेरिका के लिए आर्थिक और कूटनीतिक दबाव और बढ़ा सकते हैं।

चीन के संदर्भ में भी अहम है यह डील

यह समझौता चीन को लेकर भी बड़ा संदेश देता है। यूरोपीय संघ और भारत दोनों ही चीन पर अत्यधिक निर्भरता कम करना चाहते हैं। भारत-EU FTA एक वैकल्पिक वैश्विक सप्लाई चेन का खाका पेश करता है, जिसमें चीन की भूमिका सीमित हो सकती है। यही वजह है कि इस डील को केवल भारत-EU समझौता नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन का नया अध्याय माना जा रहा है।

भारत की कूटनीतिक जीत

भारत के लिए यह डील एक बड़ी कूटनीतिक सफलता है। यह साबित करता है कि भारत अब केवल उभरती अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि वैश्विक नीति-निर्धारक खिलाड़ी बन चुका है। भारत ने बिना टकराव के, लेकिन स्पष्ट रणनीति के साथ अपने लिए नए अवसर तैयार किए हैं। यह समझौता भारत की “मेक इन इंडिया”, “आत्मनिर्भर भारत” और “ग्लोबल साउथ लीडरशिप” की सोच को भी मजबूती देता है। 

निष्कर्ष: अमेरिका को अब सोचना पड़ेगा

भारत-EU डील ने साफ कर दिया है कि वैश्विक व्यापार का खेल बदल चुका है। ट्रंप की आक्रामक व्यापार नीतियों के दौर में जो देश विकल्प नहीं ढूंढ पाए, वे पीछे रह गए। भारत ने समय रहते अपनी रणनीति बदली और यूरोप के साथ मजबूत गठबंधन बना लिया। अब सवाल अमेरिका के सामने है—क्या वह पुराने टैरिफ हथियारों के सहारे वैश्विक नेतृत्व बनाए रख पाएगा, या फिर नई वैश्विक वास्तविकताओं के अनुसार खुद को बदलेगा? भारत-EU समझौता इसी बदलते वैश्विक परिदृश्य की सबसे बड़ी मिसाल बनकर उभरा है। India-EU Agreement

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भारत-ईयू ऐतिहासिक व्यापार समझौता : 'ट्रंप देखते रहे कारवां गुजर गया'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मदर आफ आल डील्स बताया। इस समझौते के लागू होने से भारतीय बाजार में यूरोपियन कारों की कीमतों में भारी गिरावट आने की संभावना है। इस डील के बाद विशेषज्ञ यह कहने लगे हैं कि ट्रंप देखते रहे और कारवां गुजर गया।

india eu
ईयू और भारत के बीच समझौता करते हुए
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar27 Jan 2026 05:12 PM
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Trade Agreement : भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने कई सालों की बातचीत के बाद आखिरकार मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप दे दिया है। इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मदर आफ आल डील्स बताया। इस समझौते के लागू होने से भारतीय बाजार में यूरोपियन कारों की कीमतों में भारी गिरावट आने की संभावना है। इस डील के बाद विशेषज्ञ यह कहने लगे हैं कि ट्रंप देखते रहे और कारवां गुजर गया।

कौन-कौन कंपनियों को फायदा होगा

फॉक्सवैगन, रेनो, मर्सिडीज-बेंज, बीएमडब्ल्यू जैसी कंपनियां। इन कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में अपने उत्पाद पेश करना अब आसान और किफायती होगा। इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को छूट नहीं होगी। इस डील में ईवी शामिल नहीं हैं। टेस्ला और अन्य यूरोपीय इलेक्ट्रिक कार निर्माता अभी भी पुराने टैक्स नियमों के अनुसार ही शुल्क देंगे।

समझौते का इतिहास

2007 में बातचीत शुरू हुई थी। 2013 में यह ठप हो गई। 2022 में पुन: शुरू हुई और 2026 में फाइनल हुई। इस डील के साथ भारत जापान और दक्षिण कोरिया के बाद तीसरा एशियाई देश बन गया जिसने ईवी समेत यूरोप के साथ एफटीए किया। भारत-ईयू का व्यापार 2024-25 में लगभग 190 अरब डॉलर था। नए समझौते से यह और बढ़ने की उम्मीद है। वैश्विक सप्लाई चेन मजबूत होगी और निवेशकों का भारत में भरोसा बढ़ेगा। लग्जरी और प्रीमियम यूरोपियन कारें अब भारतीय बाजार में सस्ती और अधिक उपलब्ध होंगी। यह कदम भारत को वैश्विक व्यापार में और मजबूत स्थिति दिलाएगा।

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तेहरान से अमेरिका को मिल रही है कड़ी सैन्य चेतावनी, पोस्टर से दिया बिनाशक संदेश

पोस्टर पर दिखाए गए चित्र में एक अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर, उसके डेक पर जलते और विस्फोटित फाइटर जेट और बिखरे शव हैं। समुद्र में बहता खून अमेरिकी ध्वज की धारियों जैसा रूप लेता दिख रहा है। इस भित्ति चित्र पर लिखा हुआ नारा है: अगर तुम हवा बोओगे, तो तुम बवंडर काटोगे।

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तेहरान में लगाए गए अमेरिका विरोधी पोस्टर
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar26 Jan 2026 04:09 PM
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Iran-US conflict : इस बीच तेहरान के एंगेलाब चौक में एक भव्य पोस्टर लगाया गया है, जिसमें ईरान ने संयुक्त राज्य अमेरिका को संभावित सैन्य कार्रवाई से दूर रहने के लिए साफ संदेश दिया है। पोस्टर में एक अमेरिकी विमानवाहक युद्धपोत को विनष्ट दिखाया गया है, साथ ही ध्वस्त लड़ाकू विमानों और खून से लाल समुद्र का दृश्य भी चित्रित है, जो दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को उजागर करता है।

भित्ति चित्र में क्या दिखा स्पष्ट संकेत

पोस्टर पर दिखाए गए चित्र में एक अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर, उसके डेक पर जलते और विस्फोटित फाइटर जेट और बिखरे शव हैं। समुद्र में बहता खून अमेरिकी ध्वज की धारियों जैसा रूप लेता दिख रहा है। इस भित्ति चित्र पर लिखा हुआ नारा है: अगर तुम हवा बोओगे, तो तुम बवंडर काटोगे। यह संदेश संभावित सैन्य टकराव के खिलाफ सीधी चेतावनी के रूप में दुनिया को दिखाया जा रहा है। 

क्षेत्र में तैनात युद्धपोत और विमान

सनद रहे कि अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन और उसके साथ अन्य युद्ध जहाज तथा विमान अमेरिकी प्रशासन की ओर से मध्य पूर्व की ओर भेजे जा रहे हैं। ये कदम बढ़ते तनाव के बीच उठाए गए हैं और अमेरिका ने इसे सुरक्षा उपाय बताया है। दोनों देशों के बीच तनाव लंबे समय से चल रहा है और यह हालिया विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा मुद्दों के कारण और गहरा गया है। ईरान में हुए बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन सरकार के खिलाफ उबाल की तस्वीर पेश कर रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या में जानें चली गईं और कई गिरफ्तारियाँ भी हुईं हैं।

संदेश का भाव: आगे बढ़ने से पहले सोचें

तेहरान द्वारा लगाए गए इस पोस्टर को केवल एक भित्ति चित्र से बढ़कर देखा जा रहा है। वैश्विक स्तर पर यह संदेश दोनों पक्षों को आगे की सैन्य कार्रवाई से पहले स्थिति का आकलन करने की चेतावनी के रूप में भी लिया जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब अमेरिकी और ईरानी सैन्य तंत्र बढ़ते टकराव के बीच सक्रिय हैं।

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