H-1B वीजा धारक भारतीय बना रहे हैं अमेरिका को अमीर, नई रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 01:28 AM
अमेरिका में ट्रंप प्रशासन भले ही H-1B वीजा धारक भारतीय पेशेवरों पर सख्त रवैया अपनाए हुए है लेकिन एक नई आर्थिक रिपोर्ट कुछ और ही कहानी कहती है। सच तो यह है कि जिन भारतीयों को ट्रंप समस्या मानते हैं वही आज अमेरिकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुके हैं। हाल ही में अमेरिकी सरकार ने H-1B वीजा शुल्क में बढ़ोतरी की घोषणा की जिससे अमेरिका में काम कर रहे हजारों भारतीय प्रभावित हुए हैं। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि ये भारतीय प्रवासी ही अमेरिका की GDP बढ़ाने और राष्ट्रीय कर्ज घटाने में सबसे बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। International News
भारतीय प्रवासी अमेरिका के लिए सबसे फायदेमंद
मैनहट्टन इंस्टीट्यूट के शोधकर्ता डैनियल डि मार्टिनो के ताजा अध्ययन के अनुसार, एक औसत भारतीय प्रवासी 30 सालों में अमेरिकी सरकार का लगभग 1.6 मिलियन डॉलर (करीब ₹13 करोड़) कर्ज घटा देता है। उन्होंने बताया कि आर्थिक योगदान के लिहाज से भारतीय प्रवासी दुनिया में सबसे ज्यादा सकारात्मक प्रभाव डालने वाले समुदायों में से हैं।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था के गेमचेंजर
शोध में पाया गया कि H-1B वीजा धारक जिनमें अधिकांश भारतीय हैं अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर सबसे सकारात्मक असर डालते हैं। एक औसत H-1B प्रोफेशनल 30 सालों में लगभग $2.3 मिलियन (₹19 करोड़) तक अमेरिकी कर्ज घटाता है और GDP में करीब $5 लाख (₹4.2 करोड़) का योगदान देता है यानि, जितना ट्रंप इस वीजा को सीमित करने की कोशिश करते हैं उतना ही वे अपनी अर्थव्यवस्था को कमजोर कर रहे हैं।
कौन कितना योगदान देता है?
डि मार्टिनो की रिपोर्ट बताती है कि भारतीय प्रवासी $16 लाख डॉलर तक कर्ज घटाते हैं, चीनी प्रवासी $8 लाख डॉलर तक, फिलीपींस के प्रवासी $6 लाख डॉलर तक। वहीं मध्य अमेरिकी और मैक्सिकन प्रवासी अमेरिकी सरकार पर उल्टा आर्थिक बोझ बढ़ा रहे हैं। भारतीय प्रवासी आम तौर पर उच्च शिक्षित, टेक्नोलॉजी, मेडिकल और इंजीनियरिंग क्षेत्रों में काम करते हैं। वे अधिक टैक्स देते हैं, बहुत कम सरकारी सहायता लेते हैं और अमेरिकी बजट को मजबूत करते हैं। इस कारण भारतीय प्रवासी अमेरिका के लिए न केवल कामगार हैं बल्कि राजकोषीय संपत्ति भी हैं।
ट्रंप ने राष्ट्रपति रहते हुए अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज घटाने का वादा किया था लेकिन हकीकत उलटी है। वर्तमान में अमेरिका का कर्ज $38 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच चुका है जो ट्रंप के कार्यकाल में तेजी से बढ़ा। विडंबना यह है कि जिन भारतीयों को वे निशाना बना रहे हैं वही अमेरिकी कर्ज घटाने में सबसे ज्यादा मदद कर रहे हैं। शोधकर्ता डि मार्टिनो ने सुझाव दिया है कि अमेरिका को भारतीयों के लिए ग्रीन कार्ड की संख्या बढ़ानी चाहिए और अन्य देशों के आवेदनों को अस्थायी रूप से सीमित करना चाहिए। वर्तमान में भारतीयों को ग्रीन कार्ड पाने में दशकों तक इंतजार करना पड़ता है जबकि कई देशों के नागरिकों को सिर्फ दो साल में स्थायी निवास मिल जाता है। International News