ट्रेड डील खोलेगी तरक्की का नया दरवाजा! निर्यात में होगा जबरदस्त फायदा
India-UK Trade: भारत की मिडिल ईस्ट के साथ बढ़ती दोस्ती और नए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स के चलते अगले वित्त वर्ष 2026-27 में भारत के निर्यात में बड़ा उछाल आने की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2026 में निर्यात 840-850 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है और 2027 में यह 950 अरब डॉलर या उससे भी अधिक हो सकता है।

भारत की वैश्विक व्यापार नीति अब नए दौर में कदम रख चुकी है। मिडिल ईस्ट देशों के साथ मजबूत होते रिश्ते, फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) और टेक्नोलॉजी आधारित सेक्टर्स की तेज ग्रोथ आने वाले वर्षों में भारत के निर्यात को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि वित्त वर्ष 2026 और 2027 भारत के एक्सपोर्ट सेक्टर के लिए गेम चेंजर साबित हो सकते हैं। अगर मौजूदा ट्रेंड जारी रहा तो भारत का कुल निर्यात 950 अरब डॉलर के ऐतिहासिक आंकड़े को भी पार कर सकता है।
भारत के निर्यात में रिकॉर्ड उछाल की उम्मीद
निर्यातकों और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में भारत का कुल गुड्स और सर्विस एक्सपोर्ट 840–850 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। वहीं वित्त वर्ष 2027 में इसके लगभग 950 अरब डॉलर या उससे भी अधिक होने की संभावना जताई जा रही है। इसका सबसे बड़ा कारण भारत द्वारा लगातार नए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स को बढ़ावा देना और पारंपरिक बाजारों से आगे बढ़कर नए क्षेत्रों में पकड़ मजबूत करना है।
मिडिल ईस्ट के साथ बढ़ती नजदीकी बनेगी ताकत
भारत और मिडिल ईस्ट देशों के बीच व्यापारिक रिश्ते तेजी से मजबूत हो रहे हैं। पश्चिम एशियाई देशों के साथ फ्री ट्रेड डील्स से भारतीय उत्पादों को नए बाजार मिल रहे हैं। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन्स (FIEO) के मुताबिक, भारतीय एक्सपोर्ट का सबसे खराब दौर अब पीछे छूट चुका है और टेक-बेस्ड सेक्टर्स आने वाले समय में बेहतर प्रदर्शन करेंगे। लाल सागर संकट का लगभग समाप्त होना भी लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन के लिए राहत भरी खबर है।
क्लोथ और अपैरल सेक्टर को मिलेगा बड़ा फायदा
भारत का टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर अगले साल शानदार प्रदर्शन कर सकता है। उद्योग जगत का मानना है कि भारत-ब्रिटेन एफटीए के लागू होने, जीएसटी सुधार, क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर हटने और ड्यूटी-फ्री कॉटन जैसे कदमों से इस सेक्टर में मूलभूत सुधार हुआ है। इसके चलते अगले वर्ष क्लोथ और अपैरल एक्सपोर्ट में 10 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि संभव है।
इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट में भी दिखेगी मजबूती
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग अब भारत की तीसरी सबसे बड़ी एक्सपोर्ट कैटेगरी बन चुकी है। वित्त वर्ष 2026 के अप्रैल से नवंबर के बीच भारत का कुल निर्यात 562.13 अरब डॉलर रहने का अनुमान है जो पिछले वर्ष की तुलना में 5.43 प्रतिशत अधिक है। यह संकेत देता है कि भारत का मैन्युफैक्चरिंग और टेक सेक्टर लगातार मजबूत हो रहा है।
अमेरिका और यूरोप पर बनी हुई है नजर
भारत ने 2025 में ब्रिटेन और ओमान के साथ अहम व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं और न्यूजीलैंड के साथ बातचीत पूरी कर ली है। भारत-ब्रिटेन CETA के 2026 में लागू होने की उम्मीद है। इसके अलावा, निर्यातकों की नजर अमेरिका के साथ संभावित बाइलेटरल ट्रेड डील और यूरोपीय यूनियन के साथ व्यापार समझौते में प्रगति पर टिकी हुई है। हालांकि, अमेरिकी टैरिफ और यूरोप की धीमी ग्रोथ को लेकर सतर्कता बनी हुई है।
अमेरिकी टैरिफ से बढ़ी चुनौतियां
अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 50 फीसदी तक के टैरिफ से कुछ श्रम-प्रधान उद्योगों पर असर पड़ा है। खिलौना उद्योग में कई कंपनियों ने अपने मोल्ड और उपकरण भारत से वियतनाम और इंडोनेशिया ट्रांसफर कर दिए हैं। हालांकि, निर्यातकों का कहना है कि अमेरिका के साथ 50-60 फीसदी रेगुलर बिजनेस अभी भी जारी है और स्थिति पूरी तरह नकारात्मक नहीं है।
एफटीए से कच्चे माल की होगी आसानी
नए मुक्त व्यापार समझौतों के लागू होने के बाद भारत को न्यूजीलैंड जैसे देशों से सस्ता कच्चा माल मिलने की संभावना है। इससे घरेलू उद्योगों को लागत में राहत मिलेगी और उलटे शुल्क ढांचे की समस्या भी काफी हद तक दूर हो सकती है। इससे भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता वैश्विक बाजार में और मजबूत होगी।
भारत की वैश्विक व्यापार नीति अब नए दौर में कदम रख चुकी है। मिडिल ईस्ट देशों के साथ मजबूत होते रिश्ते, फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) और टेक्नोलॉजी आधारित सेक्टर्स की तेज ग्रोथ आने वाले वर्षों में भारत के निर्यात को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि वित्त वर्ष 2026 और 2027 भारत के एक्सपोर्ट सेक्टर के लिए गेम चेंजर साबित हो सकते हैं। अगर मौजूदा ट्रेंड जारी रहा तो भारत का कुल निर्यात 950 अरब डॉलर के ऐतिहासिक आंकड़े को भी पार कर सकता है।
भारत के निर्यात में रिकॉर्ड उछाल की उम्मीद
निर्यातकों और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में भारत का कुल गुड्स और सर्विस एक्सपोर्ट 840–850 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। वहीं वित्त वर्ष 2027 में इसके लगभग 950 अरब डॉलर या उससे भी अधिक होने की संभावना जताई जा रही है। इसका सबसे बड़ा कारण भारत द्वारा लगातार नए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स को बढ़ावा देना और पारंपरिक बाजारों से आगे बढ़कर नए क्षेत्रों में पकड़ मजबूत करना है।
मिडिल ईस्ट के साथ बढ़ती नजदीकी बनेगी ताकत
भारत और मिडिल ईस्ट देशों के बीच व्यापारिक रिश्ते तेजी से मजबूत हो रहे हैं। पश्चिम एशियाई देशों के साथ फ्री ट्रेड डील्स से भारतीय उत्पादों को नए बाजार मिल रहे हैं। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन्स (FIEO) के मुताबिक, भारतीय एक्सपोर्ट का सबसे खराब दौर अब पीछे छूट चुका है और टेक-बेस्ड सेक्टर्स आने वाले समय में बेहतर प्रदर्शन करेंगे। लाल सागर संकट का लगभग समाप्त होना भी लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन के लिए राहत भरी खबर है।
क्लोथ और अपैरल सेक्टर को मिलेगा बड़ा फायदा
भारत का टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर अगले साल शानदार प्रदर्शन कर सकता है। उद्योग जगत का मानना है कि भारत-ब्रिटेन एफटीए के लागू होने, जीएसटी सुधार, क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर हटने और ड्यूटी-फ्री कॉटन जैसे कदमों से इस सेक्टर में मूलभूत सुधार हुआ है। इसके चलते अगले वर्ष क्लोथ और अपैरल एक्सपोर्ट में 10 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि संभव है।
इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट में भी दिखेगी मजबूती
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग अब भारत की तीसरी सबसे बड़ी एक्सपोर्ट कैटेगरी बन चुकी है। वित्त वर्ष 2026 के अप्रैल से नवंबर के बीच भारत का कुल निर्यात 562.13 अरब डॉलर रहने का अनुमान है जो पिछले वर्ष की तुलना में 5.43 प्रतिशत अधिक है। यह संकेत देता है कि भारत का मैन्युफैक्चरिंग और टेक सेक्टर लगातार मजबूत हो रहा है।
अमेरिका और यूरोप पर बनी हुई है नजर
भारत ने 2025 में ब्रिटेन और ओमान के साथ अहम व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं और न्यूजीलैंड के साथ बातचीत पूरी कर ली है। भारत-ब्रिटेन CETA के 2026 में लागू होने की उम्मीद है। इसके अलावा, निर्यातकों की नजर अमेरिका के साथ संभावित बाइलेटरल ट्रेड डील और यूरोपीय यूनियन के साथ व्यापार समझौते में प्रगति पर टिकी हुई है। हालांकि, अमेरिकी टैरिफ और यूरोप की धीमी ग्रोथ को लेकर सतर्कता बनी हुई है।
अमेरिकी टैरिफ से बढ़ी चुनौतियां
अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 50 फीसदी तक के टैरिफ से कुछ श्रम-प्रधान उद्योगों पर असर पड़ा है। खिलौना उद्योग में कई कंपनियों ने अपने मोल्ड और उपकरण भारत से वियतनाम और इंडोनेशिया ट्रांसफर कर दिए हैं। हालांकि, निर्यातकों का कहना है कि अमेरिका के साथ 50-60 फीसदी रेगुलर बिजनेस अभी भी जारी है और स्थिति पूरी तरह नकारात्मक नहीं है।
एफटीए से कच्चे माल की होगी आसानी
नए मुक्त व्यापार समझौतों के लागू होने के बाद भारत को न्यूजीलैंड जैसे देशों से सस्ता कच्चा माल मिलने की संभावना है। इससे घरेलू उद्योगों को लागत में राहत मिलेगी और उलटे शुल्क ढांचे की समस्या भी काफी हद तक दूर हो सकती है। इससे भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता वैश्विक बाजार में और मजबूत होगी।











