ट्रेड डील खोलेगी तरक्की का नया दरवाजा! निर्यात में होगा जबरदस्त फायदा

India-UK Trade: भारत की मिडिल ईस्ट के साथ बढ़ती दोस्ती और नए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स के चलते अगले वित्त वर्ष 2026-27 में भारत के निर्यात में बड़ा उछाल आने की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2026 में निर्यात 840-850 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है और 2027 में यह 950 अरब डॉलर या उससे भी अधिक हो सकता है।

India–UK Trade Agreement 2026
India–UK Trade Deal
locationभारत
userअसमीना
calendar03 Jan 2026 02:30 PM
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भारत की वैश्विक व्यापार नीति अब नए दौर में कदम रख चुकी है। मिडिल ईस्ट देशों के साथ मजबूत होते रिश्ते, फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) और टेक्नोलॉजी आधारित सेक्टर्स की तेज ग्रोथ आने वाले वर्षों में भारत के निर्यात को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि वित्त वर्ष 2026 और 2027 भारत के एक्सपोर्ट सेक्टर के लिए गेम चेंजर साबित हो सकते हैं। अगर मौजूदा ट्रेंड जारी रहा तो भारत का कुल निर्यात 950 अरब डॉलर के ऐतिहासिक आंकड़े को भी पार कर सकता है।

भारत के निर्यात में रिकॉर्ड उछाल की उम्मीद

निर्यातकों और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में भारत का कुल गुड्स और सर्विस एक्सपोर्ट 840–850 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। वहीं वित्त वर्ष 2027 में इसके लगभग 950 अरब डॉलर या उससे भी अधिक होने की संभावना जताई जा रही है। इसका सबसे बड़ा कारण भारत द्वारा लगातार नए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स को बढ़ावा देना और पारंपरिक बाजारों से आगे बढ़कर नए क्षेत्रों में पकड़ मजबूत करना है।

मिडिल ईस्ट के साथ बढ़ती नजदीकी बनेगी ताकत

भारत और मिडिल ईस्ट देशों के बीच व्यापारिक रिश्ते तेजी से मजबूत हो रहे हैं। पश्चिम एशियाई देशों के साथ फ्री ट्रेड डील्स से भारतीय उत्पादों को नए बाजार मिल रहे हैं। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन्स (FIEO) के मुताबिक, भारतीय एक्सपोर्ट का सबसे खराब दौर अब पीछे छूट चुका है और टेक-बेस्ड सेक्टर्स आने वाले समय में बेहतर प्रदर्शन करेंगे। लाल सागर संकट का लगभग समाप्त होना भी लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन के लिए राहत भरी खबर है।

क्लोथ और अपैरल सेक्टर को मिलेगा बड़ा फायदा

भारत का टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर अगले साल शानदार प्रदर्शन कर सकता है। उद्योग जगत का मानना है कि भारत-ब्रिटेन एफटीए के लागू होने, जीएसटी सुधार, क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर हटने और ड्यूटी-फ्री कॉटन जैसे कदमों से इस सेक्टर में मूलभूत सुधार हुआ है। इसके चलते अगले वर्ष क्लोथ और अपैरल एक्सपोर्ट में 10 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि संभव है।

इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट में भी दिखेगी मजबूती

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग अब भारत की तीसरी सबसे बड़ी एक्सपोर्ट कैटेगरी बन चुकी है। वित्त वर्ष 2026 के अप्रैल से नवंबर के बीच भारत का कुल निर्यात 562.13 अरब डॉलर रहने का अनुमान है जो पिछले वर्ष की तुलना में 5.43 प्रतिशत अधिक है। यह संकेत देता है कि भारत का मैन्युफैक्चरिंग और टेक सेक्टर लगातार मजबूत हो रहा है।

अमेरिका और यूरोप पर बनी हुई है नजर

भारत ने 2025 में ब्रिटेन और ओमान के साथ अहम व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं और न्यूजीलैंड के साथ बातचीत पूरी कर ली है। भारत-ब्रिटेन CETA के 2026 में लागू होने की उम्मीद है। इसके अलावा, निर्यातकों की नजर अमेरिका के साथ संभावित बाइलेटरल ट्रेड डील और यूरोपीय यूनियन के साथ व्यापार समझौते में प्रगति पर टिकी हुई है। हालांकि, अमेरिकी टैरिफ और यूरोप की धीमी ग्रोथ को लेकर सतर्कता बनी हुई है।

अमेरिकी टैरिफ से बढ़ी चुनौतियां

अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 50 फीसदी तक के टैरिफ से कुछ श्रम-प्रधान उद्योगों पर असर पड़ा है। खिलौना उद्योग में कई कंपनियों ने अपने मोल्ड और उपकरण भारत से वियतनाम और इंडोनेशिया ट्रांसफर कर दिए हैं। हालांकि, निर्यातकों का कहना है कि अमेरिका के साथ 50-60 फीसदी रेगुलर बिजनेस अभी भी जारी है और स्थिति पूरी तरह नकारात्मक नहीं है।

एफटीए से कच्चे माल की होगी आसानी

नए मुक्त व्यापार समझौतों के लागू होने के बाद भारत को न्यूजीलैंड जैसे देशों से सस्ता कच्चा माल मिलने की संभावना है। इससे घरेलू उद्योगों को लागत में राहत मिलेगी और उलटे शुल्क ढांचे की समस्या भी काफी हद तक दूर हो सकती है। इससे भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता वैश्विक बाजार में और मजबूत होगी।

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ईरान विरोध प्रदर्शन: ‘मुल्ला ईरान छोड़ो’ के नारे क्यों लगा रही Gen Z?

सबसे अहम बात यह है कि इन प्रदर्शनों में बड़ी संख्या में युवा और कॉलेज छात्र नजर आ रहे हैं यानी वही पीढ़ी जिसे दुनिया Gen Z के नाम से जानती है। यही वजह है कि यह विरोध सिर्फ एक आर्थिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि सत्ता बनाम नई पीढ़ी की टकराहट जैसा रूप लेता जा रहा है।

ईरान विरोध प्रदर्शन
ईरान Gen Z विरोध प्रदर्शन
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar02 Jan 2026 03:40 PM
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Iran Protest : ईरान के हालात एक बार फिर असामान्य हो गए हैं। राजधानी तेहरान से उठी विरोध की चिंगारी अब कई प्रांतों और शहरों तक फैल चुकी है। सड़कों पर भीड़ है, नारों का शोर है और सुरक्षा बलों के साथ टकराव की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। शुरुआती तौर पर यह आंदोलन महंगाई और आर्थिक बदहाली के खिलाफ शुरू हुआ माना जा रहा है, लेकिन अब इसकी दिशा बदलती दिख रही है लोग सिर्फ रोटी-महंगाई की बात नहीं कर रहे, सीधे सत्ता के केंद्र पर सवाल उठा रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक झड़पों में अब तक 17 लोगों की मौत की सूचना भी सामने आई है। सबसे अहम बात यह है कि इन प्रदर्शनों में बड़ी संख्या में युवा और कॉलेज छात्र नजर आ रहे हैं यानी वही पीढ़ी जिसे दुनिया Gen Z के नाम से जानती है। यही वजह है कि यह विरोध सिर्फ एक आर्थिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि सत्ता बनाम नई पीढ़ी की टकराहट जैसा रूप लेता जा रहा है।

ईरान में आखिर हो क्या रहा है?

बीते कुछ दिनों से देशभर में विरोध प्रदर्शन तेज हैं। तेहरान के साथ-साथ दूसरे शहरों, कस्बों और कई इलाकों तक इसका असर पहुंच चुका है। प्रदर्शनकारियों के नारों में अब ‘तानाशाह मुर्दाबाद’ जैसे नारे और ‘मुल्ला शासन’ के खिलाफ खुली चुनौती सुनाई दे रही है। जगह-जगह हालात तनावपूर्ण हैं और सुरक्षा एजेंसियां सख्ती के साथ आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रही हैं, जिससे टकराव और बढ़ रहा है।

गुस्से की पहली वजह: चौपट अर्थव्यवस्था

ईरान में नाराजगी की सबसे बड़ी और तात्कालिक वजह आर्थिक संकट है। आम लोगों की जेब पर सबसे बड़ा हमला मुद्रा की गिरती कीमत ने किया है। ईरानी रियाल की हालत इतनी कमजोर हो चुकी है कि डॉलर के मुकाबले इसकी कीमत ऐतिहासिक निचले स्तरों पर बताई जा रही है। नतीजा रोजमर्रा की चीजें आम परिवार की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं।

  1. महंगाई ने खाने-पीने से लेकर दवा और ईंधन तक सब कुछ महंगा कर दिया है।
  2. बेरोजगारी और ठप होता कारोबार युवाओं के भविष्य पर सीधा वार कर रहा है।
  3. छोटे व्यवसाय और अस्थायी बाजार बंद होने से लोगों की आय का स्रोत सिकुड़ रहा है।

यानी संकट सिर्फ आंकड़ों का नहीं, घर-घर के चूल्हे का बन गया है।

लेकिन यह अब ‘सिर्फ आर्थिक विरोध’ नहीं रहा

ईरान की सड़कों पर जो दिख रहा है, वह अब महंगाई विरोध से आगे निकल चुका है। जब आर्थिक पीड़ा लंबे समय तक बनी रहती है, तो लोगों का गुस्सा सत्ता की नीतियों और शासन-प्रणाली पर आ टिकता है। अब विरोध में यह सवाल भी शामिल है कि देश की प्राथमिकताएं क्या हैं—जनता की जरूरतें या सत्ता के फैसले?

लोगों के बीच यह धारणा मजबूत हो रही है कि आर्थिक तबाही केवल बाजार की वजह से नहीं, बल्कि शासन के फैसलों, व्यापक भ्रष्टाचार, और संसाधनों के बंटवारे की राजनीति की वजह से भी है। यही वह मोड़ है, जहां आंदोलन “राहत” की मांग से “बदलाव” की मांग में बदलने लगता है।

शासन और नेतृत्व से भरोसा टूटने की कहानी

ईरान में असंतोष नया नहीं है। 2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद हिजाब विरोधी आंदोलन ने बड़े पैमाने पर युवाओं और महिलाओं को सड़कों पर उतारा था। उस दौर से ही समाज और शासन के बीच दूरी बढ़ती चली गई। अब वही नाराजगी, नए कारणों के साथ और ज्यादा तीखे रूप में लौटती दिख रही है और इस बार मुद्दा केवल सामाजिक नियंत्रण नहीं, बल्कि आर्थिक अस्तित्व और राजनीतिक भविष्य भी है।

क्या निशाने पर सीधे खामेनेई हैं?

काफी हद तक, हां। विरोध का रुख अब सीधे सर्वोच्च नेतृत्व की ओर है। प्रदर्शनकारियों के नारों और संदेशों में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की सत्ता, शासन-शैली और फैसलों पर खुली नाराजगी झलक रही है। लोगों का कहना है कि जिस व्यवस्था में शीर्ष नेतृत्व के पास व्यापक अधिकार हों, वहां देश के संकट की जवाबदेही भी उसी सत्ता-केंद्र पर तय होती है। यही वजह है कि विरोध अब नीतियों की आलोचना से आगे बढ़कर “व्यवस्था” पर सवाल बनता जा रहा है।

Gen Z क्यों सबसे आगे है?

Gen Z के लिए यह लड़ाई सिर्फ आज की महंगाई नहीं, बल्कि कल के सपनों की है। ईरान की मौजूदा व्यवस्था ने जिस तरह अवसरों के दरवाज़े संकुचित किए हैं, उसका सबसे बड़ा बोझ उसी पीढ़ी के कंधों पर आ गया है जो अभी अपना भविष्य गढ़ना शुरू ही कर रही थी। इंटरनेट और वैश्विक दुनिया से जुड़कर पली-बढ़ी यह युवा जमात अब तुलना भी करती है और सवाल भी कि जब बाकी देश आगे बढ़ रहे हैं, तो उनके हिस्से में बेरोजगारी, गिरता जीवन-स्तर और अनिश्चितता क्यों? यही वजह है कि उनका गुस्सा सिर्फ रोटी-दामों तक सीमित नहीं रहता, वह आजादी, पहचान, सम्मान और बराबरी के हक की मांग बनकर सड़कों पर उतर आता है।

सरकार की प्रतिक्रिया

ईरानी प्रशासन ने विरोध को काबू में करने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। कई इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई है, गिरफ्तारी और सख्ती की खबरें आती रही हैं। संचार और इंटरनेट पर रोक-टोक जैसे उपाय भी विरोध की गति को धीमा करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। सरकार की तरफ से यह तर्क भी सामने आता रहा है कि आंदोलन को “बाहरी ताकतें” हवा दे रही हैं। लेकिन सड़कों पर दिख रहा गुस्सा बताता है कि मुद्दा लोगों की जिंदगी, उनकी आमदनी और उनकी उम्मीदों से जुड़ा है और यही बात इसे ज्यादा विस्फोटक बनाती है। Iran Protest

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ईरान में आर्थिक संकट पर हालात बिगड़े, हिंसा में 6 की मौत

अधिकारियों के हवाले से कहा जा रहा है कि ये मौतें तीन ऐसे शहरों में हुईं जहां लुर समुदाय की आबादी अधिक है। राजधानी तेहरान में प्रदर्शन फिलहाल कुछ हद तक शांत दिखे, लेकिन देश के अन्य हिस्सों में आंदोलन की तीव्रता बढ़ती जा रही है।

ईरान में आर्थिक संकट के खिलाफ प्रदर्शन तेज
ईरान में आर्थिक संकट के खिलाफ प्रदर्शन तेज
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar02 Jan 2026 10:22 AM
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Iran Protest :  ईरान में आर्थिक बदहाली, बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब राजधानी तेहरान की सीमाओं से बाहर निकलकर कई प्रांतों और ग्रामीण इलाकों तक फैलते जा रहे हैं। गुरुवार को हालात उस वक्त और गंभीर हो गए जब सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में कम से कम 6 लोगों की मौत की खबर सामने आई। रिपोर्टों के मुताबिक एक मौत बुधवार को हुई, जबकि गुरुवार को 5 लोगों ने जान गंवाई। यह घटनाक्रम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि 2022 के बड़े आंदोलन के बाद मौजूदा प्रदर्शनों के दौरान यह पहली बार है जब मौतों की पुष्टि हुई है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि सरकार स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कड़ा रुख अपना सकती है। अधिकारियों के हवाले से कहा जा रहा है कि ये मौतें तीन ऐसे शहरों में हुईं जहां लुर समुदाय की आबादी अधिक है। राजधानी तेहरान में प्रदर्शन फिलहाल कुछ हद तक शांत दिखे, लेकिन देश के अन्य हिस्सों में आंदोलन की तीव्रता बढ़ती जा रही है।

2022 के बाद सबसे बड़ा उभार?

विश्लेषकों के मुताबिक यह 2022 के बाद ईरान में सबसे बड़े विरोध प्रदर्शनों में गिना जा रहा है। तब महसा अमीनी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद देशभर में व्यापक आंदोलन हुआ था। मौजूदा प्रदर्शन अभी उतने व्यापक या उग्र नहीं बताए जा रहे, लेकिन इसका स्वर धीरे-धीरे सत्ता-विरोधी होता जा रहा है—और यही सरकार के लिए चिंता का संकेत माना जा रहा है।

लोरेस्तान के अजना में सबसे ज्यादा टकराव

सबसे अधिक हिंसा लोरेस्तान प्रांत के अजना शहर में देखने को मिली। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में सड़कों पर आगजनी, गोली चलने जैसी आवाजें और “शर्म करो” जैसे नारे सुनाई देने का दावा किया जा रहा है। अर्ध-सरकारी फार्स न्यूज एजेंसी ने अजना में तीन लोगों की मौत की बात कही है। दिलचस्प पहलू यह भी रहा कि सरकारी मीडिया ने इन घटनाओं पर बेहद सीमित जानकारी साझा की। माना जा रहा है कि 2022 के आंदोलन की रिपोर्टिंग करने वाले कई पत्रकारों की गिरफ्तारी के बाद मीडिया में बढ़ी सावधानी और दबाव भी सूचना-प्रवाह कम होने की एक बड़ी वजह हो सकती है। Iran Protest

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