इसी क्रम में UAE का झुकाव साउदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) की ओर बढ़ा जिसे दक्षिणी यमन की सबसे प्रभावशाली अलगाववादी ताकत माना जाता है और जिसके बारे में लंबे समय से हथियार, प्रशिक्षण और रणनीतिक समर्थन मिलने की चर्चाएं चलती रही हैं।

Saudi Arabia-UAE Conflict : खाड़ी की राजनीति में जिस दरार की आशंका लंबे समय से जताई जा रही थी, वह अब खुलकर सामने आती दिख रही है। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जो वर्षों तक यमन संकट में एक ही मोर्चे पर खड़े रहे अब उसी यमन की ज मीन पर टकराव के रास्ते पर बढ़ते नजर आ रहे हैं। ताज़ा घटनाक्रम में दावा किया जा रहा है कि सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन के हदरामौत प्रांत में UAE समर्थित साउदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) से जुड़े ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिनमें 20 से ज्यादा लड़ाकों के मारे जाने की बात सामने आई है। यह टकराव सिर्फ यमन के लिए नहीं, बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट की स्थिरता के लिए भी चिंता बढ़ाने वाला माना जा रहा है। वजह यह है कि जब क्षेत्र के दो बड़े साझेदार आमने-सामने होते हैं, तो उसका फायदा अक्सर तीसरे पक्ष खासतौर पर ईरान समर्थित हूती उठाते हैं।
यमन में 2015 से जारी गृहयुद्ध ने देश को जंग का मैदान बना दिया। हूती विद्रोहियों के उभार और उनके पीछे ईरान की छाया गहराने के बाद सऊदी अरब और UAE एक साथ आए और एक साझा गठबंधन खड़ा किया मकसद था हूतियों की बढ़त रोकना और यमन को ईरानी प्रभाव के दायरे में जाने से बचाना। इसी रणनीति के तहत दोनों देशों ने हवाई हमले, जमीनी तैनाती और दक्षिणी यमन की सुरक्षा व्यवस्था में निर्णायक भूमिका निभाई। लेकिन जैसे-जैसे युद्ध लंबा खिंचता गया, गठबंधन के भीतर ही लक्ष्य बदलने लगे। सऊदी अरब चाहता रहा कि यमन एक देश बना रहे और सत्ता का नियंत्रण केंद्र के जरिए कायम हो, जबकि UAE ने दक्षिण में ऐसे स्थानीय गुटों को मजबूत किया जो अलग प्रशासन और अलग राज्य की मांग की तरफ बढ़ रहे थे। यहीं से साझेदारी में दरार पड़ी। इसी क्रम में UAE का झुकाव साउदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) की ओर बढ़ा जिसे दक्षिणी यमन की सबसे प्रभावशाली अलगाववादी ताकत माना जाता है और जिसके बारे में लंबे समय से हथियार, प्रशिक्षण और रणनीतिक समर्थन मिलने की चर्चाएं चलती रही हैं।
हाल के हफ्तों में तनाव तब बढ़ा, जब हदरामौत और महरा जैसे बड़े और रणनीतिक इलाकों में STC की गतिविधियां तेज होती दिखीं। ये इलाके सिर्फ नक्शे पर बड़े नहीं हैं—यहां की भौगोलिक स्थिति, संसाधन और सीमा नजदीकी इन्हें बेहद अहम बनाती है। सऊदी को आशंका रही कि UAE समर्थित गुट यमन के दक्षिण-पूर्व में समानांतर सत्ता स्थापित कर रहा है, जिससे सऊदी समर्थित बलों की पकड़ कमजोर हो सकती है। इसी बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हुआ,एक तरफ “गठबंधन के नियमों का उल्लंघन” और दूसरी तरफ “राजनीतिक धोखा” जैसी भाषा सामने आने लगी।
रिपोर्ट के मुताबिक 2 जनवरी 2026 को हदरामौत में STC के कथित कैंप/बेस पर हवाई हमले किए गए। इससे पहले 30 दिसंबर को मुकल्ला पोर्ट को लेकर भी तनाव की बात सामने आई, जहां कथित तौर पर हथियारों से जुड़ी गतिविधियों पर सवाल उठे। हमलों के बाद STC की ओर से इसे “खुली चुनौती” करार देते हुए सऊदी समर्थित बलों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई की बात कही गई। वहीं दूसरी तरफ, सऊदी खेमे के भीतर यह तर्क उभरता दिखा कि “गठबंधन की शर्तों” से बाहर जाकर कोई भी गुट यमन में अलग एजेंडा नहीं चला सकता।