सद्गुरु की ये सीख आपके रिश्ते में फूंक देगी जान, खूब मजबूत हो जाएगा रिश्ता
Relationship Tips: रिलेशनशिप को लेकर सद्गुरु कहते हैं कि रिश्ते तभी मजबूत रहते हैं जब दोनों लोग समझदारी, धैर्य और जिम्मेदारी के साथ उन्हें निभाएं। जानिए कैसे छोटी-सी समझदारी, आभार और प्यार आपके रिश्ते को खुशहाल और टिकाऊ बना सकते हैं।

अक्सर हमने बचपन से एक बात सुनी है “शादियां स्वर्ग में बनती हैं।” यह लाइन सुनने में जितनी खूबसूरत लगती है उतनी ही खतरनाक भी साबित हो सकती है। सद्गुरु के अनुसार, यही सोच आज के समय में रिश्तों के टूटने की सबसे बड़ी वजह बनती जा रही है। जब इंसान मान लेता है कि रिश्ता पहले से तय और परफेक्ट है तो वह उसमें मेहनत करना बंद कर देता है। यहीं से गलतफहमियां, उम्मीदें और शिकायतें जन्म लेती हैं। शादी कोई जादू नहीं है बल्कि यह रोज निभाई जाने वाली जिम्मेदारी है।
सद्गुरु क्यों कहते हैं इसे सबसे बड़ी भूल?
सद्गुरु का कहना है कि “शादियां स्वर्ग में बनती हैं” कहना इंसान की सबसे बड़ी गलती है। इस सोच की वजह से लोग यह मान लेते हैं कि रिश्ता अपने आप चल जाएगा। जबकि सच्चाई यह है कि कोई भी रिश्ता बिना समझ, धैर्य और प्रयास के मजबूत नहीं बन सकता। शादी किस्मत का तोहफा नहीं बल्कि दो लोगों का Conscious Decision होती है जहां दोनों को हर दिन एक-दूसरे को समझना और स्वीकार करना पड़ता है।
सपनों की शादी और हकीकत का टकराव
अक्सर लोग शादी में परियों जैसी कहानी लेकर प्रवेश करते हैं। उम्मीद होती है कि शादी के बाद सब कुछ परफेक्ट होगा प्यार, समझ, खुशी और सपोर्ट। लेकिन जैसे ही शादी की असली जिंदगी शुरू होती है बिल, जिम्मेदारियां, बच्चे, ससुराल और रोजमर्रा की परेशानियां सामने आ जाती हैं। तब वही साथी जिससे खुशियां मिलने की उम्मीद थी धीरे-धीरे तनाव का कारण बनने लगता है। सद्गुरु कहते हैं कि जब आप अपनी खुशी की जिम्मेदारी दूसरे पर डाल देते हैं तो रिश्ता प्यार नहीं बल्कि बोझ बन जाता है।
एक इंसान से सब कुछ चाहना सबसे बड़ी चूक
सद्गुरु बताते हैं कि इंसान की ज़िंदगी कई तरह की जरूरतों से भरी होती है शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, सामाजिक और आर्थिक। गलती तब होती है जब हम इन सभी जरूरतों को पूरा करने की जिम्मेदारी सिर्फ अपने जीवनसाथी पर डाल देते हैं। कोई भी इंसान आपकी हर उम्मीद पर खरा नहीं उतर सकता। जब अपेक्षाएं हद से ज्यादा बढ़ जाती हैं तो नाराजगी, शिकायतें और दूरी पैदा होने लगती है।
आभार ही रिश्ते की असली ताकत है
सद्गुरु के अनुसार, रिश्ते को मजबूत बनाए रखने का सबसे आसान और असरदार तरीका है आभार। यह समझना कि सामने वाला इंसान भी अपनी सीमाओं के बावजूद आपके साथ निभाने की कोशिश कर रहा है। एक छोटा सा धन्यवाद, सम्मान और स्वीकार्यता रिश्ते को गहराई देती है। समस्या तब शुरू होती है जब तुलना आने लगती है किसी और से, किसी और की शादी से या सोशल मीडिया की झूठी खुशियों से। तुलना खत्म होते ही आदर खत्म हो जाता है और वहीं से रिश्ता कमजोर पड़ने लगता है।
शादी का असली नियम क्या है?
सद्गुरु साफ कहते हैं कि शादी का नियम यह नहीं है कि कोई आपको खुश करे या आप किसी को खुश करें। अगर दो खुश और संतुलित इंसान साथ आते हैं तो उनके बीच कुछ सुंदर बन सकता है। लेकिन अगर आप खुद दुखी हैं और चाहते हैं कि आपका जीवनसाथी आपको खुश करे तो दुख और बढ़ेगा। रिश्ते में शांति तब आती है जब दोनों अपनी जिम्मेदारी खुद उठाते हैं न कि एक-दूसरे पर बोझ डालते हैं।
शादी कब बनती है खूबसूरत?
शादी स्वर्ग से नहीं आती उसे रोजमर्रा की समझ, संवाद और प्रयास से बेहतर बनाना पड़ता है। एक छोटा सा आभार, थोड़ी सी समझ और बिना अपेक्षा का साथ यही रिश्ते को मजबूत बनाता है। सद्गुरु की सीख यही है कि जब आप रिश्ते को पाने की जगह निभाने का नजरिया अपनाते हैं तब ही शादी सच में खूबसूरत बनती है।
अक्सर हमने बचपन से एक बात सुनी है “शादियां स्वर्ग में बनती हैं।” यह लाइन सुनने में जितनी खूबसूरत लगती है उतनी ही खतरनाक भी साबित हो सकती है। सद्गुरु के अनुसार, यही सोच आज के समय में रिश्तों के टूटने की सबसे बड़ी वजह बनती जा रही है। जब इंसान मान लेता है कि रिश्ता पहले से तय और परफेक्ट है तो वह उसमें मेहनत करना बंद कर देता है। यहीं से गलतफहमियां, उम्मीदें और शिकायतें जन्म लेती हैं। शादी कोई जादू नहीं है बल्कि यह रोज निभाई जाने वाली जिम्मेदारी है।
सद्गुरु क्यों कहते हैं इसे सबसे बड़ी भूल?
सद्गुरु का कहना है कि “शादियां स्वर्ग में बनती हैं” कहना इंसान की सबसे बड़ी गलती है। इस सोच की वजह से लोग यह मान लेते हैं कि रिश्ता अपने आप चल जाएगा। जबकि सच्चाई यह है कि कोई भी रिश्ता बिना समझ, धैर्य और प्रयास के मजबूत नहीं बन सकता। शादी किस्मत का तोहफा नहीं बल्कि दो लोगों का Conscious Decision होती है जहां दोनों को हर दिन एक-दूसरे को समझना और स्वीकार करना पड़ता है।
सपनों की शादी और हकीकत का टकराव
अक्सर लोग शादी में परियों जैसी कहानी लेकर प्रवेश करते हैं। उम्मीद होती है कि शादी के बाद सब कुछ परफेक्ट होगा प्यार, समझ, खुशी और सपोर्ट। लेकिन जैसे ही शादी की असली जिंदगी शुरू होती है बिल, जिम्मेदारियां, बच्चे, ससुराल और रोजमर्रा की परेशानियां सामने आ जाती हैं। तब वही साथी जिससे खुशियां मिलने की उम्मीद थी धीरे-धीरे तनाव का कारण बनने लगता है। सद्गुरु कहते हैं कि जब आप अपनी खुशी की जिम्मेदारी दूसरे पर डाल देते हैं तो रिश्ता प्यार नहीं बल्कि बोझ बन जाता है।
एक इंसान से सब कुछ चाहना सबसे बड़ी चूक
सद्गुरु बताते हैं कि इंसान की ज़िंदगी कई तरह की जरूरतों से भरी होती है शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, सामाजिक और आर्थिक। गलती तब होती है जब हम इन सभी जरूरतों को पूरा करने की जिम्मेदारी सिर्फ अपने जीवनसाथी पर डाल देते हैं। कोई भी इंसान आपकी हर उम्मीद पर खरा नहीं उतर सकता। जब अपेक्षाएं हद से ज्यादा बढ़ जाती हैं तो नाराजगी, शिकायतें और दूरी पैदा होने लगती है।
आभार ही रिश्ते की असली ताकत है
सद्गुरु के अनुसार, रिश्ते को मजबूत बनाए रखने का सबसे आसान और असरदार तरीका है आभार। यह समझना कि सामने वाला इंसान भी अपनी सीमाओं के बावजूद आपके साथ निभाने की कोशिश कर रहा है। एक छोटा सा धन्यवाद, सम्मान और स्वीकार्यता रिश्ते को गहराई देती है। समस्या तब शुरू होती है जब तुलना आने लगती है किसी और से, किसी और की शादी से या सोशल मीडिया की झूठी खुशियों से। तुलना खत्म होते ही आदर खत्म हो जाता है और वहीं से रिश्ता कमजोर पड़ने लगता है।
शादी का असली नियम क्या है?
सद्गुरु साफ कहते हैं कि शादी का नियम यह नहीं है कि कोई आपको खुश करे या आप किसी को खुश करें। अगर दो खुश और संतुलित इंसान साथ आते हैं तो उनके बीच कुछ सुंदर बन सकता है। लेकिन अगर आप खुद दुखी हैं और चाहते हैं कि आपका जीवनसाथी आपको खुश करे तो दुख और बढ़ेगा। रिश्ते में शांति तब आती है जब दोनों अपनी जिम्मेदारी खुद उठाते हैं न कि एक-दूसरे पर बोझ डालते हैं।
शादी कब बनती है खूबसूरत?
शादी स्वर्ग से नहीं आती उसे रोजमर्रा की समझ, संवाद और प्रयास से बेहतर बनाना पड़ता है। एक छोटा सा आभार, थोड़ी सी समझ और बिना अपेक्षा का साथ यही रिश्ते को मजबूत बनाता है। सद्गुरु की सीख यही है कि जब आप रिश्ते को पाने की जगह निभाने का नजरिया अपनाते हैं तब ही शादी सच में खूबसूरत बनती है।












