तेजी से बढ़ रहा है दूसरी शादी का ट्रेंड, 36 को छोड़कर सिर्फ 1 गुण खोज रहे लोग

हाल की रिपोर्ट्स बताते हैं कि अब शादी की औसत उम्र बढ़कर 29 साल हो गई है। साथ ही, दूसरी शादी को लेकर भी लोगों की सोच में बड़ा बदलाव आया है। अब जाति या आयु से ज्यादा पार्टनर की समझ और आपसी कम्पैटिबिलिटी को महत्व दिया जाता है।

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Remarriage Trends in India
locationभारत
userअसमीना
calendar14 Mar 2026 01:34 PM
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भारत में शादी अब केवल परंपरा या समाज का दबाव नहीं रही। आज के युवा पहले अपना करियर और मानसिक तैयारी पूरी करते हैं और उसके बाद शादी के बारे में सोचते हैं। हाल की रिपोर्ट्स बताते हैं कि अब शादी की औसत उम्र बढ़कर 29 साल हो गई है। साथ ही, दूसरी शादी को लेकर भी लोगों की सोच में बड़ा बदलाव आया है। अब जाति या आयु से ज्यादा पार्टनर की समझ और आपसी कम्पैटिबिलिटी को महत्व दिया जाता है।

शादी की औसत उम्र बढ़ी

पहले भारत में शादी जल्दी अक्सर 27 साल की उम्र तक हो जाती थी लेकिन अब युवा शादी के लिए सोच-समझकर कदम उठाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आधे से ज्यादा सिंगल्स 29 साल की उम्र में पार्टनर सर्च करना शुरू करते हैं। इसका कारण है करियर, वित्तीय स्थिति और मानसिक रूप से शादी के लिए तैयार होना। अब शादी जल्दबाजी का फैसला नहीं रही बल्कि समझदारी और तैयारी के बाद लिया जाने वाला कदम बन गई है।

दूसरी शादी का ट्रेंड

सिर्फ शादी की उम्र ही नहीं बल्कि दूसरी शादी (रीमैरिज) का ट्रेंड भी बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 2016 में दूसरी शादी के मामले 11 प्रतिशत थे जो 2025 तक बढ़कर 16 प्रतिशत हो गए हैं। इसका मतलब है कि अब हर छह सफल शादियों में से एक दूसरी शादी है। पहले जहां तलाक या दूसरी शादी को समाज में गलत माना जाता था अब लोग इसे सामान्य और स्वीकार्य समझ रहे हैं।

दूसरी शादी अब शर्म की बात नहीं

पहले दूसरी शादी को लेकर कई सामाजिक मिथक थे। लोग सोचते थे कि शादी टूटने के बाद नए रिश्ते में मुश्किलें होंगी। लेकिन अब तलाकशुदा प्रोफाइल में दिलचस्पी दिखाने वाले लोगों में 15 प्रतिशत ऐसे हैं जिन्होंने कभी शादी नहीं की। यह बताता है कि दूसरी शादी को लेकर पहले जो डर और गलतफहमी थी अब काफी हद तक खत्म हो चुकी है।

शादी में कम्पैटिबिलिटी सबसे जरूरी

पहले शादी में जाति और सामाजिक स्थिति को सबसे ज्यादा अहमियत दी जाती थी लेकिन अब करीब 90 प्रतिशत लोगों का मानना है कि सही स्वभाव और आपसी समझ वाला पार्टनर होना उम्र, जाति या कमाई से ज्यादा जरूरी है। मेट्रो शहरों में यह सोच और भी बढ़ गई है। अब लोग अपनी मैट्रिमोनियल प्रोफाइल खुद बनाते और संभालते हैं पहले यह सिर्फ 67 प्रतिशत था, अब 77 प्रतिशत लोग इसे खुद मैनेज कर रहे हैं। हालांकि अब शादी का प्रोसेस सेल्फ-ड्रिवन है परिवार की भूमिका पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। 69 प्रतिशत लोग मानते हैं कि माता-पिता के बीच में होने से प्रोसेस आसान और सुरक्षित बन जाता है। इसका मतलब है कि परिवार सहयोग देते हैं लेकिन फैसला अब पूरी तरह व्यक्ति का अपना है।

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इन देशों में महिलाओं को मिलती है Period Leave, देखें पूरी लिस्ट

Menstrual Leave: कई जगह कामकाजी महिलाएं पीरियड्स के दौरान दर्द और असुविधा झेलती हैं लेकिन कुछ देशों ने इसके लिए खास कानून बनाए हैं। भारत में सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पीरियड्स लीव की याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया।

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Menstrual Leave
locationभारत
userअसमीना
calendar14 Mar 2026 11:08 AM
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महिलाओं की सेहत और काम के बीच संतुलन बनाए रखना हर देश के लिए चुनौती है। कई जगह कामकाजी महिलाएं पीरियड्स के दौरान दर्द और असुविधा झेलती हैं लेकिन कुछ देशों ने इसके लिए खास कानून बनाए हैं। भारत में सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पीरियड्स लीव की याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट का कहना है कि ऐसा फैसला महिलाओं के लिए नुकसानदेह हो सकता है। इस आर्टिकल में हम आपको दुनिया के उन देशों के बारे में बताएंगे जहां महिलाओं को पीरियड्स के दौरान छुट्टी मिलती है।

इंडोनेशिया: 2 दिन की पेड लीव

इंडोनेशिया में 1948 से महिलाओं को महीने में 2 दिन की पेड पीरियड लीव का अधिकार है। यह नियम महिलाओं के स्वास्थ्य और कामकाजी क्षमता को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

जापान: सेइरी क्युका का प्रावधान

जापान में 1947 से ‘सेइरी क्युका’ (Seiri Kyuka) लागू है। इसका मतलब है मासिक धर्म के दौरान मिलने वाली छुट्टी। हालांकि, कंपनियों पर यह निर्भर करता है कि वे इस दौरान पेड लीव देंगी या नहीं।

ताइवान: आधी सैलरी के साथ 3 दिन की छुट्टी

ताइवान में ‘जेंडर इक्वैलिटी इन एम्प्लॉयमेंट एक्ट’ के तहत महिलाओं को साल में 3 दिन की पीरियड लीव मिलती है। इस दौरान उन्हें आधी सैलरी का भुगतान किया जाता है।

दक्षिण कोरिया: 1 दिन की छुट्टी और बोनस

दक्षिण कोरिया में 2001 से महिलाओं को पीरियड्स के दौरान 1 दिन की छुट्टी मिलती है। अगर कोई महिला यह छुट्टी नहीं लेती तो कंपनियां इसका एक्स्ट्रा पैसा भी देती हैं।

जाम्बिया: मदर्स डे के नाम पर लीव

जाम्बिया में पीरियड्स लीव को ‘मदर्स डे’ कहा जाता है। 2015 में कानून बनने के बाद महिलाएं महीने में 1 दिन की छुट्टी बिना सूचना दिए ले सकती हैं।

वियतनाम: रोजाना ब्रेक या 3 दिन की छुट्टी

वियतनाम में कामकाजी महिलाओं को रोजाना 30 मिनट का ब्रेक या साल में 3 दिन की छुट्टी दी जाती है। इसका मकसद महिलाओं को काम के दौरान आराम और स्वास्थ्य का ध्यान रखना है।

स्पेन: सरकार उठाती है खर्च

स्पेन ने 2023 में पीरियड्स लीव कानून बनाया। महिलाओं को क्रैंप और दर्द जैसी स्थितियों में 3 से 5 दिन तक छुट्टी मिलती है और इस दौरान खर्च सरकार उठाती है।

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तेजी से बढ़ रहा है Solo Travel का ट्रेंड, GenZ की फेवरेट लिस्ट में शामिल

पहले यात्रा का मतलब था परिवार या दोस्तों के साथ ट्रिप लेकिन अब युवा वर्ग सोलो ट्रैवल की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। सोशल मीडिया पर ऐसे ट्रेंड्स और रील्स इसे और भी लोकप्रिय बना रहे हैं।

Solo Travel
सोलो ट्रैवल क्यों हो रहा है इतना पॉपुलर?
locationभारत
userअसमीना
calendar12 Mar 2026 03:53 PM
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आज का समय डिजिटल दुनिया का है। टिकट बुकिंग हो या होटल रूम सब कुछ अब कुछ ही क्लिक में हो जाता है। इसी डिजिटल क्रांति ने ट्रैवल के तरीके को भी बदल दिया है। पहले यात्रा का मतलब था परिवार या दोस्तों के साथ ट्रिप लेकिन अब युवा वर्ग सोलो ट्रैवल की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। सोशल मीडिया पर ऐसे ट्रेंड्स और रील्स इसे और भी लोकप्रिय बना रहे हैं।

सोलो ट्रैवल में मिलती है पूरी आजादी

अकेले सफर करने का सबसे बड़ा फायदा है आपकी पूरी आजादी। अब आपको किसी की पसंद या समय के हिसाब से अपनी योजना नहीं बनानी पड़ती। आप जहां मन करे वहां जा सकते हैं अपनी गति और समय के अनुसार यात्रा का मज़ा ले सकते हैं। यही वजह है कि युवा इसे इतना पसंद कर रहे हैं।

आत्मविश्वास और पर्सनैलिटी में होता है इजाफा

सोलो ट्रैवल सिर्फ मनोरंजन नहीं है। यह आपके आत्मविश्वास (Self-Confidence) को भी बढ़ाता है। नए शहर में अकेले रहना, नई जगहों की खोज करना और नए लोगों से मिलना ये सब आपकी पर्सनैलिटी डेवलपमेंट में मदद करते हैं। साथ ही यह आपको खुद के लिए ‘मी-टाइम’ भी देता है जो मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।

डिजिटल दुनिया ने आसान और सुरक्षित बनाया सफर

आज के समय में डिजिटल सुविधाओं की वजह से सोलो ट्रैवल पहले से कहीं ज्यादा आसान और सुरक्षित हो गया है। होटल और टिकट बुकिंग, लोकल ट्रांसपोर्ट सभी कुछ अब ऑनलाइन उपलब्ध हैं। यह सुविधा न केवल योजना बनाना आसान बनाती है बल्कि यात्रा के दौरान सुरक्षा का भी भरोसा देती है।

सोलो ट्रिप की प्लानिंग में ध्यान देने योग्य बातें

अकेले यात्रा करने से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए-

  • यात्रा की जगह और वहां की सारी जानकारी पहले से पता करें।
  • अपने परिवार और दोस्तों के साथ अपनी लोकेशन शेयर करें।
  • जरूरी दस्तावेज और हेल्थ किट साथ रखें।
  • स्थानीय नियमों और संस्कृति का सम्मान करें।
  • अनुभव और आत्मनिर्भरता दोनों बढ़ते हैं

सोलो ट्रैवल सिर्फ घूमने का तरीका नहीं बल्कि यह जीवन में आत्मनिर्भर बनने और अनुभव इकट्ठा करने का एक तरीका भी है। अकेले यात्रा करने से निर्णय लेने की क्षमता, समस्या सुलझाने की स्किल और जीवन के प्रति जिम्मेदारी बढ़ती है।

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