नितेश राणे के बयान पर सियासी घमासान, ठाकरे गुट का पलटवार
ठाकरे गुट का आरोप है कि नितेश राणे का यह बयान मंत्री पद की शपथ का सीधा उल्लंघन है। अखिल चित्रे ने कहा कि संविधान के अनुसार मंत्री को बिना भेदभाव के काम करना होता है, लेकिन इस तरह के बयान सत्ता के दुरुपयोग और पक्षपातपूर्ण राजनीति को दर्शाते हैं।

Nitesh Rane : महाराष्ट्र में आगामी जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों की सरगर्मी के बीच राजनीतिक माहौल गरमा गया है। भाजपा के नेता और मंत्री नितेश राणे के एक कथित बयान को लेकर विपक्ष ने तीखा हमला बोला है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए राज्यपाल से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। दरअसल, कणकवली के फोंडा निर्वाचन क्षेत्र में आयोजित एक चुनावी जनसभा के दौरान नितेश राणे ने कथित तौर पर कहा कि सरकारी निधि का आवंटन राजनीतिक चिह्नों के आधार पर किया जाएगा। उनके इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में विवाद खड़ा हो गया है और सरकारी तंत्र की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं।
‘सरकारी खजाना निजी पिगी बैंक नहीं’
बता दें कि शिवसेना (UBT) के नेता अखिल चित्रे ने इस बयान को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने नितेश राणे पर तंज कसते हुए लिखा कि सरकारी तिजोरी जनता की मेहनत की कमाई से भरी होती है, न कि किसी मंत्री की निजी संपत्ति। चित्रे ने कहा कि सरकारी फंड का वितरण पार्टी, चुनाव चिह्न या राजनीतिक निष्ठा के आधार पर नहीं किया जा सकता। उन्होंने आगे कहा कि फंड के नाम पर दबाव बनाना और सौदेबाजी करना जनता के साथ विश्वासघात है और यह सोच लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरनाक है।
शपथ का उल्लंघन और सत्ता के दुरुपयोग का आरोप
बता दें कि ठाकरे गुट का आरोप है कि नितेश राणे का यह बयान मंत्री पद की शपथ का सीधा उल्लंघन है। अखिल चित्रे ने कहा कि संविधान के अनुसार मंत्री को बिना भेदभाव के काम करना होता है, लेकिन इस तरह के बयान सत्ता के दुरुपयोग और पक्षपातपूर्ण राजनीति को दर्शाते हैं। उन्होंने इसे असंवैधानिक और कानून के खिलाफ करार दिया।
राज्यपाल और मुख्यमंत्री से सवाल
बता दें कि इस पूरे मामले में शिवसेना (UBT) ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी ने पूछा है कि क्या ऐसे मंत्री के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी जो सरकारी फंड को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की बात कर रहा है। ठाकरे गुट का कहना है कि यदि समय रहते इस तरह की बयानबाजी पर रोक नहीं लगाई गई, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक मिसाल साबित हो सकती है। Nitesh Rane
Nitesh Rane : महाराष्ट्र में आगामी जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों की सरगर्मी के बीच राजनीतिक माहौल गरमा गया है। भाजपा के नेता और मंत्री नितेश राणे के एक कथित बयान को लेकर विपक्ष ने तीखा हमला बोला है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए राज्यपाल से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। दरअसल, कणकवली के फोंडा निर्वाचन क्षेत्र में आयोजित एक चुनावी जनसभा के दौरान नितेश राणे ने कथित तौर पर कहा कि सरकारी निधि का आवंटन राजनीतिक चिह्नों के आधार पर किया जाएगा। उनके इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में विवाद खड़ा हो गया है और सरकारी तंत्र की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं।
‘सरकारी खजाना निजी पिगी बैंक नहीं’
बता दें कि शिवसेना (UBT) के नेता अखिल चित्रे ने इस बयान को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने नितेश राणे पर तंज कसते हुए लिखा कि सरकारी तिजोरी जनता की मेहनत की कमाई से भरी होती है, न कि किसी मंत्री की निजी संपत्ति। चित्रे ने कहा कि सरकारी फंड का वितरण पार्टी, चुनाव चिह्न या राजनीतिक निष्ठा के आधार पर नहीं किया जा सकता। उन्होंने आगे कहा कि फंड के नाम पर दबाव बनाना और सौदेबाजी करना जनता के साथ विश्वासघात है और यह सोच लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरनाक है।
शपथ का उल्लंघन और सत्ता के दुरुपयोग का आरोप
बता दें कि ठाकरे गुट का आरोप है कि नितेश राणे का यह बयान मंत्री पद की शपथ का सीधा उल्लंघन है। अखिल चित्रे ने कहा कि संविधान के अनुसार मंत्री को बिना भेदभाव के काम करना होता है, लेकिन इस तरह के बयान सत्ता के दुरुपयोग और पक्षपातपूर्ण राजनीति को दर्शाते हैं। उन्होंने इसे असंवैधानिक और कानून के खिलाफ करार दिया।
राज्यपाल और मुख्यमंत्री से सवाल
बता दें कि इस पूरे मामले में शिवसेना (UBT) ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी ने पूछा है कि क्या ऐसे मंत्री के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी जो सरकारी फंड को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की बात कर रहा है। ठाकरे गुट का कहना है कि यदि समय रहते इस तरह की बयानबाजी पर रोक नहीं लगाई गई, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक मिसाल साबित हो सकती है। Nitesh Rane












