वसई-विरार में अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान हिंसक झड़प 30 पर मुकदमा दर्ज

वसई-विरार नगर निगम (VVMC) को पिछले काफी समय से सरकारी जमीन पर अवैध चॉल और दुकानों के निर्माण की शिकायतें मिल रही थीं। बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा इस मामले में कड़े रुख अपनाए जाने के बाद, निगम आयुक्त ने शहर के विभिन्न वार्डों में अवैध ढांचों को गिराने का आदेश दिया था।

Vasai-Virar city
वसई-विरार में अतिक्रमण हटाने का विरोध (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar13 Feb 2026 03:47 PM
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Vasai-Virar News : महाराष्ट्र के पालघर जिले के वसई-विरार शहर में नगर निगम द्वारा चलाए जा रहे अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान गुरुवार को हालात हिंसक हो गए। अवैध निर्माण ढहाने पहुंची निगम टीम पर स्थानीय लोगों और भू-माफियाओं के समर्थकों ने हमला बोल दिया। आरोप है कि भीड़ ने जेसीबी मशीनों को रोका, पथराव किया और कर्मचारियों के साथ मारपीट की। इस घटना के बाद पुलिस ने 30 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है।

बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश पर चला अभियान

जानकारी के मुताबिक, वसई-विरार नगर निगम (VVMC) को पिछले काफी समय से सरकारी जमीन पर अवैध चॉल और दुकानों के निर्माण की शिकायतें मिल रही थीं। बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा इस मामले में कड़े रुख अपनाए जाने के बाद, निगम आयुक्त ने शहर के विभिन्न वार्डों में अवैध ढांचों को गिराने का आदेश दिया था। इसी क्रम में गुरुवार को भारी सुरक्षा बल के साथ निगम की टीम जेसीबी मशीनों के साथ मौके पर पहुंची।

भीड़ बनी हमलावर, हमले में कई कर्मचारी घायल

जैसे ही निगम टीम ने अवैध निर्माणों को ढहाने की कार्रवाई शुरू करने की कोशिश की, तो वहां इकट्ठा हुई भारी भीड़ ने उनका रास्ता रोक लिया। शुरुआत में प्रशासन ने लोगों को समझाने की कोशिश की, लेकिन विवाद तेजी से बढ़ गया। प्रदर्शनकारियों ने मशीनों के आगे मानव श्रृंखला बनाई और अचानक से उग्र होकर पत्थरबाजी शुरू कर दी। इस दौरान भीड़ ने नगर निगम के अधिकारियों और सुरक्षा गार्डों पर शारीरिक हमला भी किया, जिसमें कुछ कर्मचारियों को मामूली चोटें आई हैं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को अतिरिक्त बल बुलाना पड़ा।

पुलिस ने दर्ज की FIR, छापेमारी जारी

घटना के बाद पुलिस ने सरकारी काम में बाधा डालने और लोक सेवकों पर हमला करने के गंभीर आरोपों में करीब 30 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। वसई पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मौके पर मौजूद लोगों ने कानून अपने हाथ में ले लिया था। पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में ले लिया है और मुख्य आरोपियों की तलाश में छापेमारी जारी है। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि वीडियो फुटेज के आधार पर उपद्रवियों की पहचान की जा रही है और किसी भी दोषी को नहीं बख्शा जाएगा।

प्रशासन का रुख सख्त, कहा- मनोबल नहीं टूटेगा

इस घटना के बाद भी प्रशासन ने अपना रुख सख्त बनाए रखा है। निगम अधिकारियों ने कहा कि शहर में भू-माफियाओं ने बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण कर रखे हैं, जिससे नालियों की सफाई और सड़कों के चौड़ीकरण जैसे विकास कार्यों में बाधा आ रही है। अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि ऐसे हमलों से प्रशासन का मनोबल नहीं टूटेगा और आने वाले दिनों में यह अभियान और भी तेजी से चलाया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि जिन इमारतों को नोटिस जारी हो चुका है, उन्हें हर हाल में ढहाया जाएगा। Vasai-Virar News

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eSUV 10 महीने ज्यादा में बेचकर महिंद्रा ने बनाया नया रिकॉर्ड

कंपनी का इलेक्ट्रिक वाहन सेक्टर में प्रदर्शन बेहद शानदार रहा है। मार्च 2025 से डिलीवरी शुरू होने के बाद से अब तक कंपनी 41,000 से अधिक इलेक्ट्रिक एसयूवी बेच चुकी है। इन आंकड़ों में नवंबर 2024 में पेश किए गए XEV 9e और BE 6 जैसे मॉडल शामिल हैं।

Mahindra XEV 9e000
महिंद्रा की सफलता (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar13 Feb 2026 02:21 PM
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भारत की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा (Mahindra & Mahindra) ने ऑटोमोबाइल बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करते हुए एक नया रिकॉर्ड बनाया है। कंपनी ने महज 10 महीनों के अंदर 41,000 से ज्यादा इलेक्ट्रिक एसयूवी (eSUV) की बिक्री कर अपनी सफलता का प्रमाण दिया है। यह उपलब्धि कंपनी की इलेक्ट्रिक और पारंपरिक वाहन खंडों में समानांतर रणनीति का नतीजा है।

इलेक्ट्रिक सेगमेंट में जबरदस्त प्रदर्शन

कंपनी का इलेक्ट्रिक वाहन सेक्टर में प्रदर्शन बेहद शानदार रहा है। मार्च 2025 से डिलीवरी शुरू होने के बाद से अब तक कंपनी 41,000 से अधिक इलेक्ट्रिक एसयूवी बेच चुकी है। इन आंकड़ों में नवंबर 2024 में पेश किए गए XEV 9e और BE 6 जैसे मॉडल शामिल हैं। बाजार में ग्राहकों की ओर से इन ईवी उत्पादों को मिल रही सकारात्मक प्रतिक्रिया ने कंपनी की बस्ती मजबूत की है।

पारंपरिक एसयूवी पोर्टफोलियो का विस्तार

पारंपरिक वाहनों के मोर्चे पर भी कंपनी आक्रामक रुख अपनाए हुए है। ऑटो डिवीजन के तहत महिंद्रा ने नई XUV 7XO की लॉन्चिंग पर जोर दिया है। साथ ही, कंपनी ने पुष्टि की है कि कैलेंडर साल 2026 में दो नई ICE (पेट्रोल-डीजल) एसयूवी पेश की जाएंगी। इनमें लोकप्रिय स्कॉर्पियो रेंज का अपडेटेड वर्जन (स्कॉर्पियो N और स्कॉर्पियो क्लासिक) और तीन-दरवाजों वाली थार का बड़ा फेसलिफ्ट शामिल होगा। यह कदम स्पष्ट करता है कि कंपनी अपने मजबूत ब्रांड नामों को नए अवतार में पेश कर बाजार में दबदबा बनाए रखना चाहती है।

घर बैठे मिलेगी सर्विस, शुरू हुआ 'eVAN'

ग्राहक सुविधा को ध्यान में रखते हुए महिंद्रा ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में इलेक्ट्रिक एसयूवी मालिकों के लिए 'eVAN' नामक स्पेशल रिमोट सर्विस वैन की शुरुआत की है। यह पहल ग्राहकों के घर पर ही उनकी समस्याओं का समाधान करेगी। इलेक्ट्रिक वाहनों में अक्सर सॉफ्टवेयर आधारित समस्याएं होती हैं, ऐसे में ये वैन सॉफ्टवेयर अपडेट, डायग्नोस्टिक जांच, हल्की इलेक्ट्रिकल दिक्कतों और बुनियादी मैकेनिकल निरीक्षण जैसी सुविधाएं घर पर ही प्रदान करेगी। इससे ग्राहकों का समय और श्रम दोनों की बचत होगी।

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भारत में 124 साल पुरानी ट्रेन, सिग्नल नहीं, हाथ के इशारे पर चलने वाली अनोखी ट्रेन

अंग्रेजों के समय साल 1902 में शुरू हुई थी। यानी यह ट्रेन करीब 124 साल से ज्यादा समय से इस इलाके की सेवा में है। इतने लंबे समय में रेलवे ने कई बदलाव देखे हैं, लेकिन इस छोटी लाइन की पहचान आज भी वैसी ही बनी हुई है।

Unique trains in India
बुंदेलखंड की गलियों तक पहुंचाती है यह ट्रेन (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar13 Feb 2026 01:14 PM
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Trains in India during the British rule : भारतीय रेलवे दुनिया की चौथी सबसे बड़ी रेल सेवा है, जहां हर दिन हजारों ट्रेनें सिग्नल के हिसाब से अपना सफर तय करती हैं। हरा सिग्नल मिलने पर ट्रेन चल पड़ती है और लाल सिग्नल पर रुक जाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश में एक ऐसी भी ट्रेन है, जो लाल-हरे सिग्नल के बंधन से मुक्त है? उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में दौड़ती यह ट्रेन न तो किसी बड़े शहर का हिस्सा है और न ही हाईस्पीड, फिर भी अपनी अनोखी पहचान के कारण यह रेलवे के इतिहास में एक अलग अध्याय लिखती है।

हाथ के इशारे पर रुकती है ट्रेन

जालौन जिले के एट जंक्शन से कोंच के बीच चलने वाली यह ट्रेन अपनी खास पहचान के लिए जानी जाती है। इसे रोकने के लिए यात्रियों को किसी स्टेशन या सिग्नल का इंतजार नहीं करना पड़ता। अगर कोई व्यक्ति ट्रैक के पास या प्लेटफॉर्म पर खड़ा होकर हाथ का इशारा करता है, तो ट्रेन उसे लेने के लिए रुक जाती है। यह लचीलापन इस ट्रेन को अन्य ट्रेनों से अलग बनाता है। स्थानीय लोग इसे प्यार से 'अड्डा' कहकर बुलाते हैं।

124 साल से ज्यादा पुराना है इतिहास

यह सेवा अंग्रेजों के समय साल 1902 में शुरू हुई थी। यानी यह ट्रेन करीब 124 साल से ज्यादा समय से इस इलाके की सेवा में है। इतने लंबे समय में रेलवे ने कई बदलाव देखे हैं, लेकिन इस छोटी लाइन की पहचान आज भी वैसी ही बनी हुई है।

किसानों और छात्रों की जीवनरेखा

महज तीन डिब्बों वाली इस ट्रेन की औसत रफ्तार 30 किलोमीटर प्रति घंटा है। यह 13 किलोमीटर का सफर करीब 40 मिनट में पूरा करती है। बुंदेलखंड जैसे इलाके में, जहां गांव दूर-दूर बसे हैं, यह ट्रेन रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुकी है। यहां के किसान अपनी उपज लेकर बाजार इसी ट्रेन से पहुंचते हैं, तो वहीं छोटे व्यापारी और विद्यार्थी भी इसी पर निर्भर रहते हैं। यह ट्रेन सिर्फ एक परिवहन का साधन नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों की जीवनरेखा के रूप में अपनी सेवा निभा रही है। Trains in India during the British rule

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