बैंकों के बजाय अब पोस्ट आफिस स्कीम्स में निवेश का बढ़ रहा क्रेज

हाल ही में कई बड़े सरकारी और निजी बैंकों ने एफडी पर ब्याज दरें घटा दी हैं। पहले एफडी निवेशकों के लिए सुरक्षित निवेश के साथ सम्मानजनक रिटर्न का जरिया था, लेकिन अब यह केवल पैसा सुरक्षित रखने तक सीमित नजर आता है। इसके अलावा, आने वाले समय में बड़ी वृद्धि की संभावना भी कम है।

post office
पोस्ट आफिस स्कीम
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar17 Jan 2026 05:29 PM
bookmark

Interest Rates : बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) पर मिलने वाली ब्याज दरें घट गई हैं, जिसके कारण आम निवेशक सुरक्षित और अच्छे रिटर्न वाले विकल्प की तलाश में हैं। इस समय पोस्ट आॅफिस की सरकारी योजनाएं 7% से 8.2% तक का आकर्षक ब्याज दे रही हैं। इन योजनाओं में निवेश न सिर्फ सुरक्षित है, बल्कि टैक्स लाभ और नियमित आय के विकल्प भी मिलते हैं।

बैंक एफडी क्यों कम आकर्षक हैं?

हाल ही में कई बड़े सरकारी और निजी बैंकों ने एफडी पर ब्याज दरें घटा दी हैं। पहले एफडी निवेशकों के लिए सुरक्षित निवेश के साथ सम्मानजनक रिटर्न का जरिया था, लेकिन अब यह केवल पैसा सुरक्षित रखने तक सीमित नजर आता है। इसके अलावा, आने वाले समय में बड़ी वृद्धि की संभावना भी कम है।

पोस्ट आफिस स्कीम्स की ताकत

पोस्ट आफिस की सभी छोटी बचत योजनाओं में सरकार की 100% गारंटी होती है। इसका मतलब है कि आपका निवेश पूरी तरह सुरक्षित है। साथ ही, कुछ योजनाओं में टैक्स में छूट भी मिलती है। सरकार ब्याज दरों की समीक्षा तिमाही आधार पर करती है, जिससे रिटर्न बाजार की स्थितियों के अनुरूप संतुलित रहते हैं।

लोकप्रिय योजनाएं और ब्याज दरें

े योजना                 ब्याज दर खासियत                     

े सीनियर सिटिजन सेविंग्स स्कीम    8.2%   तिमाही आधार पर ब्याज, बुजुर्गों के लिए आकर्षक 

े मंथली इनकम अकाउंट          7.4%   हर महीने निश्चित आय की सुविधा         

े नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट       7.7%   टैक्स सेविंग के साथ सुरक्षित रिटर्न     

े पब्लिक प्रोविडेंट फंड           7.10%  लंबी अवधि में टैक्स-फ्री रिटर्न       

े किसान विकास पत्र            7.5%   115 महीनों में निवेश राशि दोगुना होने का वादा

े महिला सम्मान बचत पत्र         7.5%   महिलाओं के लिए विशेष योजना          

े सुकन्या समृद्धि योजना          8.2%   बेटियों के भविष्य के लिए उच्चतम ब्याज दर   

टाइम डिपॉजिट विकल्प

* 2 साल की ऊ पर 7% ब्याज

* 3 साल की ऊ पर 7.1% ब्याज

* 5 साल की ऊ पर 7.5% ब्याज

बैंक एफडी की तुलना में पोस्ट आॅफिस की स्कीम्स निवेशकों को सुरक्षित, स्थिर और आकर्षक रिटर्न प्रदान करती हैं। टैक्स लाभ, सरकारी गारंटी और नियमित आय जैसी सुविधाएं इन्हें और भी लोकप्रिय बनाती हैं।



संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

मुंबई की सत्ता पर सियासी गणित, शिंदे सेना की भाजपा से बड़ी मांग

बीएमसी में सत्ता गठन को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। चुनाव में दूसरे स्थान पर रही एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना ने अब मेयर पद को लेकर भाजपा के सामने 50-50 पावर शेयरिंग का प्रस्ताव रखा है। इस फॉर्मूले के तहत मुंबई के मेयर का कार्यकाल ढाई-ढाई साल के लिए दोनों दलों में बांटने की मांग की गई है।

Coalition government in BMC
बीएमसी में गठबंधन की सरकार (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar17 Jan 2026 04:51 PM
bookmark

शिंदे गुट के नेताओं और नवनिर्वाचित पार्षदों का कहना है कि बीएमसी में एक स्थिर और मजबूत सरकार बनाने के लिए यह सबसे व्यावहारिक रास्ता है। पार्टी का तर्क है कि सत्ता गठन में उसकी निर्णायक भूमिका है, ऐसे में मेयर पद पर भागीदारी उसका हक बनता है। शिंदे सेना इस मांग को भावनात्मक मुद्दे से भी जोड़ रही है। पार्टी चाहती है कि बालासाहेब ठाकरे की जन्मशती वर्ष में मुंबई का मेयर शिवसेना (शिंदे गुट) से हो। नेताओं का कहना है कि शिवसेना की पहचान और मुंबई से उसका ऐतिहासिक रिश्ता मेयर पद से गहराई से जुड़ा रहा है।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि बालासाहेब ठाकरे का पूरा राजनीतिक जीवन मुंबई और बीएमसी से जुड़ा रहा है। ऐसे में जन्मशती वर्ष में मेयर पद पर शिवसेना का प्रतिनिधि होना कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लिए बेहद अहम है।

भाजपा–शिंदे गुट के बीच बातचीत जारी

सूत्रों के मुताबिक, 50-50 फॉर्मूले को लेकर भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के शीर्ष नेताओं के बीच लगातार बातचीत चल रही है। हालांकि अभी तक कोई अंतिम सहमति नहीं बन पाई है। दोनों पक्ष सीटों के गणित और भविष्य की राजनीतिक स्थिरता को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग विकल्पों पर मंथन कर रहे हैं।भाजपा के लिए यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि बीएमसी देश की सबसे अमीर नगर निकाय है और यहां सत्ता का असर सीधे तौर पर महाराष्ट्र की राजनीति पर पड़ता है।

फैसला भाजपा हाईकमान के हाथ में

शिंदे गुट ने स्पष्ट कर दिया है कि इस मसले पर अंतिम निर्णय भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को लेना है। अब सभी की निगाहें भाजपा हाईकमान पर टिकी हैं कि वह इस प्रस्ताव को स्वीकार कर बीएमसी में मजबूत गठबंधन बनाता है या किसी वैकल्पिक रास्ते की ओर बढ़ता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि 50-50 फॉर्मूले पर सहमति बन जाती है तो बीएमसी में सत्ता संघर्ष थम सकता है, लेकिन मांग ठुकराए जाने की स्थिति में गठबंधन के भीतर तनाव बढ़ सकता है।

बीएमसी चुनाव के नतीजे में चुनावी गणित

मुंबई नगर निगम के 227 सीटों वाले सदन में बहुमत के लिए 114 सीटों की जरूरत है। चुनाव परिणामों में बीजेपी–शिंदे गुट गठबंधन को कुल 118 सीटें मिली हैं। इसमें बीजेपी ने 89 और शिंदे गुट की शिवसेना ने 29 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (UBT) को 65, कांग्रेस को 24, AIMIM को 8, मनसे को 6 और समाजवादी पार्टी को 2 सीटें मिली हैं।

संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

राष्ट्रीय अध्यक्ष चयन का पूरा रोडमैप: बीजेपी में कैसे तय होता है नाम?

पार्टी संविधान के मुताबिक राष्ट्रीय अध्यक्ष का चयन एक तयशुदा व्यवस्था के तहत होता है, जिसमें इलेक्टोरल कॉलेज, नामांकन, जांच, नाम वापसी और जरूरत पड़ने पर मतदान शामिल है।

बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष चयन की पूरी टाइमलाइन
बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष चयन की पूरी टाइमलाइन
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar17 Jan 2026 02:03 PM
bookmark

BJP National President Election 2026 : भारतीय जनता पार्टी ने अपने अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह चुनाव पार्टी के देशव्यापी संगठनात्मक अभियान संगठन पर्व-2024 के तहत कराया जा रहा है। शुक्रवार को बीजेपी के राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी डॉ. के. लक्ष्मण ने चुनाव कार्यक्रम अधिसूचित कर दिया। पार्टी संविधान के मुताबिक राष्ट्रीय अध्यक्ष का चयन एक तयशुदा व्यवस्था के तहत होता है, जिसमें इलेक्टोरल कॉलेज, नामांकन, जांच, नाम वापसी और जरूरत पड़ने पर मतदान शामिल है।

चरण 1: इलेक्टोरल कॉलेज की सूची जारी (16 जनवरी 2026)

राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव की शुरुआत 16 जनवरी 2026 को हुई। दोपहर 12 बजे इलेक्टोरल कॉलेज की सूची प्रकाशित की गई।बीजेपी के संविधान के अनुसार, इलेक्टोरल कॉलेज में राष्ट्रीय परिषद (नेशनल काउंसिल) के सदस्य और राज्य परिषदों से चुने गए प्रतिनिधि शामिल होते हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में वोट देने का अधिकार इन्हीं सदस्यों को होता है।

चरण 2: नामांकन दाखिल (19 जनवरी 2026)

19 जनवरी 2026 को इस चुनावी प्रक्रिया का सबसे अहम मोड़ आएगा—जब नई दिल्ली स्थित बीजेपी के केंद्रीय कार्यालय में दोपहर 2 से 4 बजे के बीच राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किए जाएंगे। लेकिन यह सिर्फ फॉर्म जमा करने की औपचारिकता नहीं है; पार्टी के संविधान ने उम्मीदवार के लिए कड़ी योग्यता और मजबूत संगठनात्मक समर्थन की शर्तें तय कर रखी हैं। दावेदार को या तो पार्टी में कम से कम चार कार्यकाल पूरे करने होंगे, या फिर 15 वर्षों तक सक्रिय सदस्य के तौर पर निरंतर भूमिका निभाई होनी चाहिए। वहीं नामांकन तभी वैध माना जाएगा जब किसी एक राज्य के इलेक्टोरल कॉलेज के कम से कम 20 सदस्य प्रस्तावक बनें और साथ ही कम से कम 5 राज्यों से समर्थन मिले

चरण 3: नामांकन जांच और नाम वापसी (19 जनवरी 2026)

नामांकन की घड़ी जैसे ही खत्म होगी, उसी दिन पार्टी मुख्यालय में चुनावी प्रक्रिया तेज रफ्तार में अगले चरण में प्रवेश कर जाएगी। शाम 4 से 5 बजे तक दाखिल किए गए नामांकन पत्रों की बारीकी से जांच होगी। इसके बाद शाम 5 से 6 बजे का समय उम्मीदवारों के लिए रणनीतिक फैसला लेने का होगा यहीं नाम वापस लेने की अंतिम खिड़की खुलेगी। फिर शाम 6:30 बजे राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी की प्रेस विज्ञप्ति से तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी कि पार्टी में अध्यक्ष का चयन सर्वसम्मति से तय हुआ है या फिर 20 जनवरी को वोटिंग की औपचारिक लड़ाई तक मामला पहुंचने वाला है।

चरण 4: मतदान और परिणाम (20 जनवरी 2026)

नाम वापसी के बाद तस्वीर अगर साफ नहीं होती और मैदान में एक से ज्यादा वैध दावेदार बने रहते हैं, तो मुकाबला 20 जनवरी 2026 को सीधे वोटिंग तक पहुंच जाएगा। उस दिन सुबह 11:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक इलेक्टोरल कॉलेज के सदस्य मतदान करेंगे और उसी दिन नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे। लेकिन अगर नाम वापसी के बाद सिर्फ एक ही उम्मीदवार बचता है, तो पार्टी की परंपरा और नियमों के मुताबिक उसे निर्विरोध राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया जाएगा

संभावित उम्मीदवार के प्रस्तावक कौन हो सकते हैं?

सूत्रों की मानें तो बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन के नामांकन को इस बार संगठन बहु-स्तरीय समर्थन के साथ मजबूत दिखाने की तैयारी में है। चर्चा है कि वे तीन अलग-अलग सेट में नामांकन दाखिल कर सकते हैं, ताकि संदेश सिर्फ संख्या का नहीं, बल्कि नेतृत्व से लेकर संगठन के हर स्तर की सहमति का जाए। पहले सेट में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व—प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और जेपी नड्डा के प्रस्तावक बनने की संभावना जताई जा रही है। दूसरे सेट में 20 से अधिक निर्वाचित प्रदेश अध्यक्षों के हस्ताक्षर शामिल हो सकते हैं, जो देशभर में संगठनात्मक स्वीकार्यता का संकेत देंगे। वहीं तीसरे सेट में नेशनल काउंसिल के सदस्यों का समर्थन जोड़कर नामांकन को व्यापक वैधता देने की रणनीति बताई जा रही है।

प्रधानमंत्री की मौजूदगी में नई कमान का औपचारिक हस्तांतरण

यदि नितिन नबीन पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाते हैं, तो बीजेपी मुख्यालय में नेतृत्व परिवर्तन का औपचारिक मंचन किया जाएगा। पार्टी परंपरा के मुताबिक उन्हें दीनदयाल उपाध्याय मार्ग स्थित राष्ट्रीय अध्यक्ष कार्यालय तक प्रधानमंत्री और शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी में ले जाया जाएगा। इसी के साथ पार्टी में राष्ट्रीय नेतृत्व का औपचारिक बदलाव पूरा हो जाएगा। बीजेपी के लिए यह प्रक्रिया ‘संगठन पर्व-2024’ के समापन की तरह भी देखी जा रही है और साथ ही आने वाले महीनों में संगठन को चुनावी मोड में शिफ्ट करने वाले नए चरण की शुरुआत भी। इसलिए नए अध्यक्ष का चयन केवल एक पद की घोषणा नहीं, बल्कि अगले वर्षों की राजनीतिक दिशा, रणनीति और चुनावी तैयारी का रोडमैप तय करने वाला फैसला माना जा रहा है। BJP National President Election 2026

संबंधित खबरें