संघ में नेतृत्व का चयन मुख्य रूप से संगठन में अनुभव, समर्पण और हिंदू पहचान के आधार पर होता है, न कि जातिगत समीकरणों के आधार पर। आरएसएस का प्रमुख चुनाव से नहीं चुना जाता। यह निर्णय संगठन के वरिष्ठ नेताओं और सक्रिय कार्यकताओं की सलाह से लिया जाता है।

RSS Chief : इस समय यह स्पष्ट नहीं है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का अगला सरसंघचालक किस जाति से होगा। संगठन की परंपरा में जाति को किसी भी प्रकार का औपचारिक मानदंड नहीं माना गया है। संघ में नेतृत्व का चयन मुख्य रूप से संगठन में अनुभव, समर्पण और हिंदू पहचान के आधार पर होता है, न कि जातिगत समीकरणों के आधार पर। आरएसएस का प्रमुख चुनाव से नहीं चुना जाता। यह निर्णय संगठन के वरिष्ठ नेताओं और सक्रिय कार्यकताओं की सलाह से लिया जाता है। ऐतिहासिक रूप से संघ के प्रमुख विभिन्न सामाजिक पृष्ठभूमियों से आए हैं, लेकिन जाति कभी चयन का तय मानदंड नहीं रही।
हाल ही में मोहन भागवत ने साफ किया कि सरसंघचालक के चयन में जाति का कोई महत्व नहीं है। मुख्य आवश्यकता यह है कि व्यक्ति संगठन के प्रति प्रतिबद्ध और हिंदू पहचान वाला हो। उन्होंने यह भी बताया कि आरएसएस का विस्तार जाति के आधार पर नहीं बल्कि भौगोलिक और सामाजिक कार्यों के आधार पर हुआ है।
भागवत का यह बयान उन आलोचनाओं के बीच आया है, जिनमें यह आरोप लगाया जाता रहा है कि आरएसएस के शीर्ष नेतृत्व में ब्राह्मणों का वर्चस्व रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन की प्रक्रिया राजनीतिक दलों जैसी जातिगत समीकरणों पर आधारित नहीं है। अभी तक यह तय नहीं है कि अगला आरएसएस प्रमुख किस जाति का होगा। आरएसएस में जाति की बजाय योग्यता, अनुभव और संगठन के प्रति समर्पण निर्णय के मुख्य मानदंड हैं। मोहन भागवत ने यही परंपरा और प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से समझाया है। RSS Chief