देश के स्तर पर मुस्लिम आबादी 14-15 प्रतिशत के आसपास है, लेकिन इन तीनों राज्यों में स्थिति अलग है। 2011 की जनगणना के मुताबिक, केरल में 27 फीसदी, पश्चिम बंगाल में 30 फीसदी और असम में 35 फीसदी मुस्लिम आबादी है।

Muslims in Indian Politics: देश की सियासी बिसात पर साल 2026 बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाला है। जहां एक तरफ पांच राज्यों में चुनाव का शहनाई बजने वाला है, वहीं सबसे नजर उन तीन राज्यों—पश्चिम बंगाल, असम और केरल—पर है, जहां जम्मू-कश्मीर के बाद सबसे अधिक मुस्लिम आबादी निवास करती है। इन तीनों राज्यों में 'राजा' भले ही कोई बने, लेकिन 'किंगमेकर' (राजा बनाने वाले) की भूमिका मुस्लिम वोटर्स ही निभाते आए हैं। साल 2026 के विधानसभा चुनाव में यह ताकत किसके साथ खड़ी दिखेगी, यह सबसे बड़ा सवाल है।
देश के स्तर पर मुस्लिम आबादी 14-15 प्रतिशत के आसपास है, लेकिन इन तीनों राज्यों में स्थिति अलग है। 2011 की जनगणना के मुताबिक, केरल में 27 फीसदी, पश्चिम बंगाल में 30 फीसदी और असम में 35 फीसदी मुस्लिम आबादी है। इसी वजह से इन राज्यों में मुस्लिम संगठन और दल अपनी सियासी पकड़ मजबूत करने के लिए बेताब नजर आ रहे हैं।
पश्चिम बंगाल की 294 सीटों में से करीब 120 सीटों पर मुस्लिम वोटर्स अहम भूमिका निभाते हैं। 2021 के चुनाव में मुस्लिम वोटर्स ने ममता बनर्जी की तरफ दिल खोलकर 86 प्रतिशत वोट डाले थे, जिसके नतीजे स्वरूप कांग्रेस और लेफ्ट का मुस्लिम बहुल सीटों पर सफाया हो गया था।
हालांकि, 2026 का चुनाव ममता बनर्जी के लिए आसान नहीं होने वाला। फुरफुरा शरीफ के पीरजादा अब्बास सिद्दीकी की 'इंडियन सेक्युलर फ्रंट' (ISF) और हुमायूं कबीर की 'जनता उन्नयन पार्टी' ने मैदान में पल्ला झाड़ लिया है। हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद में बाबर के नाम पर मस्जिद बनाने का ऐलान कर जोरदार सियासी हलचल मचाई है। साथ ही, असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के प्रवेश की भी अटकलें तेज हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या मुस्लिम वोटर्स ममता के साथ खड़े रहेंगे या बंगाल में भी 'तीसरी विकल्प' की राजनीति को जन्म देंगे?
पड़ोसी राज्य असम में मुस्लिम आबादी करीब 35 फीसदी है। बदरुद्दीन अजमल की पार्टी AIUDF ने 2006 में 10 सीटों से शुरुआत की थी, जो 2011 में बढ़कर 18 हो गई थीं। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में अजमल को अपनी गढ़ धुबरी में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा।
2026 का चुनाव अजमल के लिए 'करो या मरो' की लड़ाई साबित हो सकता है। डिलिमिटेशन प्रक्रिया ने राज्य की सियासत का समीकरण ही बदल दिया है। जहां पहले 32 सीटों पर मुस्लिम वोट निर्णायक था, अब डिलिमिटेशन के बाद यह सीटें घटकर 22 रह गई हैं। इस बार कांग्रेस और AIUDF अलग-अलग लड़ाई लड़ रहे हैं, जिससे मुस्लिम वोटों के बंटवारे की संभावना बनी हुई है। क्या अजमल फिर से असम की सत्ता की कुंजी बन पाएंगे, यह अभी समय ही बताएगा।
दक्षिण भारत में केरल वह राज्य है, जहां मुस्लिम सियासत सबसे व्यवस्थित दिखती है। 27 फीसदी मुस्लिम आबादी वाले इस राज्य में 'इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग' (IUML) का दबदबा कायम है। 1962 से लगातार हर लोकसभा में पार्टी के कम से कम दो सांसद चुने गए हैं।
विधानसभा की 140 सीटों में से 43 सीटों पर मुस्लिम मतदाता चुनाव का रुख तय करते हैं। IUML कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF का हिस्सा है और मुस्लिम वोटों के बंटने की संभावना यहां कम ही दिखती है। मलप्पुरम जैसे जिले लीग के गढ़ माने जाते हैं। 2026 में भी यह उम्मीद की जा रही है कि मुस्लिम लीग अपनी पकड़ बनाए रखेगी। Muslims in Indian Politics