फरीदाबाद की कालका फैक्ट्री में भीषण विस्फोट, 35 लोग झुलसे

प्रभावित फैक्ट्री में मेटल शीट कटिंग का काम होता है, जहां सीएनसी मशीनें लगी हैं। शाम के समय जब कर्मचारी काम में जुटे थे, तभी वहां रखे केमिकल ड्रम में अचानक विस्फोट हो गया। इसके बाद कई ड्रम लगातार फटते चले गए, जिससे आग पूरे परिसर में तेजी से फैल गई।

Massive explosion in Faridabad factory
पुलिस और दमकलकर्मी भी चपेट में, दर्जनों घायल (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar16 Feb 2026 09:06 PM
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Faridabad News : राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के फरीदाबाद शहर में शाम एक भीषण दुर्घटना ने दहशत फैला दी। सेक्टर-24 स्थित कालका केमिकल फैक्ट्री में अचानक हुए विस्फोट के बाद इतनी तेज आग लगी कि ज्वाला फैक्ट्री की दीवारों को लांघकर सड़क तक पहुंच गई। इस भीषण अग्निकांड में कम से कम 35 लोग झुलस गए, जिनमें पांच पुलिस और दमकल कर्मी भी शामिल हैं। हादसे में सड़क किनारे खड़ी कई गाड़ियां जलकर खाक हो गईं।

ऐसे हुआ था हादसा?

जानकारी के मुताबिक, प्रभावित फैक्ट्री में मेटल शीट कटिंग का काम होता है, जहां सीएनसी मशीनें लगी हैं। शाम के समय जब कर्मचारी काम में जुटे थे, तभी वहां रखे केमिकल ड्रम में अचानक विस्फोट हो गया। इसके बाद कई ड्रम लगातार फटते चले गए, जिससे आग पूरे परिसर में तेजी से फैल गई। आग की लपटें इतनी ऊंची थीं कि यह फैक्ट्री के बाहर सड़क तक पहुंच गईं, जिससे वहां खड़ी गाड़ियां आग का शिकार हो गईं।

अफरा-तफरी और बचाव कार्य

घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। कर्मचारी जान बचाने के लिए यूं भागे जैसे आग से जान छुड़ा रहे हों। सूचना पर पहुंची पुलिस और दमकल विभाग की टीमों ने तत्काल बचाव कार्य शुरू कर दिया। दमकल विभाग ने शुरू में दो गाड़ियां भेजीं, लेकिन आग की भयावहता को देखते हुए बाद में कुल 12 दमकल गाड़ियां मौके पर तैनात कर दी गईं। पुलिस ने एहतियातन फैक्ट्री के आसपास के पूरे इलाके को खाली करा दिया ताकि जान-माल का नुकसान कम से कम हो।

पुलिस और दमकलकर्मी भी प्रभावित

बचाव कार्य के दौरान दो पुलिसकर्मी और तीन दमकलकर्मी भी आग की चपेट में आकर झुलस गए। प्रशासन ने युद्ध स्तर पर बचाव अभियान चलाते हुए आग पर काबू पाया और आग को और फैलने से रोका।

अस्पतालों में इमरजेंसी

घायलों को तत्काल सिविल अस्पताल और निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। फरीदाबाद के चीफ मेडिकल ऑफिसर (सीएमओ) डॉ. जयंत आहूजा ने बताया कि अब तक 35 लोगों के झुलसने की पुष्टि हुई है। उन्होंने कहा, "12 घायल सरकारी अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि अन्य को निजी अस्पतालों में इलाज मुहैया कराया जा रहा है।" अस्पताल प्रशासन ने आपातकालीन स्थिति के मद्देनजर सभी डॉक्टरों को बुला लिया है और घायलों के इलाज के लिए बेड खाली करवाए गए हैं। Faridabad News

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दुनिया में सबसे तेज इंटरनेट वाला देश, स्पीड जानकर रह जाएंगे हैरान!

मोबाइल इंटरनेट के मामले में यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) के पास दुनिया का सबसे तेज इंटरनेट होने का टाइटल है। यहां औसत मोबाइल डाउनलोड स्पीड 691 एमबीपीएस (Mbps) से ज्यादा है।

India gains momentum
इंटरनेट की रफ्तार ने बदल दी दुनिया की तस्वीर (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar16 Feb 2026 07:12 PM
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The fastest internet in the world : आज के डिजिटल युग में स्ट्रीमिंग, गेमिंग और रिमोट वर्क के लिए तेज इंटरनेट स्पीड का होना अनिवार्य हो गया है। ऐसे में ग्लोबल रैंकिंग में कौन सा देश सबसे आगे है, यह जानना हर किसी के लिए रोचक होता है। अगर अल्ट्रा-फास्ट कनेक्टिविटी की बात करें, तो इस मामले में दो देश पूरी दुनिया में छाए हुए हैं। जहां एक देश मोबाइल इंटरनेट स्पीड में सबसे आगे है, वहीं दूसरा देश होम ब्रॉडबैंड परफॉर्मेंस के चार्ट में टॉप पर बैठा है।

यूएई के पास सबसे तेज मोबाइल इंटरनेट

मोबाइल इंटरनेट के मामले में यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) के पास दुनिया का सबसे तेज इंटरनेट होने का टाइटल है। यहां औसत मोबाइल डाउनलोड स्पीड 691 एमबीपीएस (Mbps) से ज्यादा है। इतनी शानदार स्पीड पर यूजर्स बिना किसी बफरिंग के 4K वीडियो स्ट्रीम कर सकते हैं और सेकंडों में ही हाई डेफिनेशन मूवीज डाउनलोड कर सकते हैं। देश में 5G के तेजी से रोलआउट और एडवांस्ड टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर ने इस उपलब्धि को हासिल करने में अहम भूमिका निभाई है।

सिंगापुर है ब्रॉडबैंड का राजा

वहीं, जब होम ब्रॉडबैंड की बात आती है तो सिंगापुर नंबर एक पर काबिज है। सिंगापुर में औसत फिक्स्ड ब्रॉडबैंड स्पीड लगभग 410 एमबीपीएस है। इस शानदार परफॉर्मेंस का श्रेय देश भर में 99% फाइबर ऑप्टिक कवरेज को जाता है। सिंगापुर सरकार की लंबे समय से चली आ रही 'स्मार्ट नेशन' पहल ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश किया है, जिसके नतीजे स्वरूप यहां स्टेबल और अल्ट्रा-फास्ट होम कनेक्टिविटी मिलती है।

जापान का अनोखा लैब रिकॉर्ड

व्यावसायिक तौर पर तो यूएई और सिंगापुर आगे हैं, लेकिन जापान ने एक अलग ही मुकाम हासिल किया है। जापानी वैज्ञानिकों ने लैब में एक्सपेरिमेंटल इंटरनेट स्पीड 1.02 पेटाबिट्स प्रति सेकंड हासिल की है। आसान शब्दों में कहें तो यह स्पीड इतनी शक्तिशाली है कि थ्योरी के हिसाब से इससे कुछ ही सेकंड में पूरी नेटफ्लिक्स लाइब्रेरी डाउनलोड की जा सकती है।

अन्य देशों की रैंकिंग

रिपोर्ट के मुताबिक, मोबाइल इंटरनेट स्पीड में कतर दूसरे नंबर पर है, जहां औसत स्पीड लगभग 573 एमबीपीस है। वहीं, ब्रॉडबैंड परफॉर्मेंस में चिली लगभग 357 एमबीपीएस के साथ सिंगापुर के बाद दूसरे और फ्रांस लगभग 349 एमबीपीएस के साथ तीसरे स्थान पर है।

भारत की स्थिति में सुधार

भारत की स्थिति भी इस मामले में तेजी से सुधर रही है। पूरे देश में 5G रोलआउट के बाद भारत में औसत मोबाइल स्पीड अब 130 से 136 एमबीपीएस के बीच पहुंच गई है। इसके चलते भारत वैश्विक स्तर पर लगभग 26वें से 30वें स्थान पर पहुंच गया है। हालांकि, अभी भी भारत यूएई और सिंगापुर से काफी पीछे है, लेकिन तेजी से हो रहे डिजिटल विस्तार से उम्मीद है कि आने वाले सालों में यह अंतर कम होगा। The fastest internet in the world

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सिरसा में अपने ही खून में नशे की गोलियां घोलकर ले रहे युवा

गांव में अब तक 35 से अधिक युवा मारे जा चुके हैं, जिनकी उम्र 16 से 25 साल के बीच थी। कोविड-19 महामारी के दौरान नशे की आपूर्ति में रुकावट आने के बाद इस समस्या ने और अधिक गंभीर रूप ले लिया। युवक पहले अपनी नसों से खून निकालते हैं और उसमें नशे की गोलियां मिलाकर शरीर में इंजेक्शन लगाते हैं।

nasha
युवा अब अपनी जान जोखिम में डालकर नशा कर रहे
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar16 Feb 2026 03:31 PM
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Drug Addiction Problem : हरियाणा के सिरसा जिले के ओटू गांव में नशे की समस्या बेहद गंभीर रूप ले चुकी है। हालात इतने भयावह हैं कि युवा अब अपनी जान जोखिम में डालकर नशा कर रहे हैं। यहां पानी की कमी के कारण कुछ युवा अपने ही खून में नशे की गोलियां घोलकर इंजेक्शन लगा रहे हैं।

मौतों की संख्या और उम्र

गांव में अब तक 35 से अधिक युवा मारे जा चुके हैं, जिनकी उम्र 16 से 25 साल के बीच थी। कोविड-19 महामारी के दौरान नशे की आपूर्ति में रुकावट आने के बाद इस समस्या ने और अधिक गंभीर रूप ले लिया। युवक पहले अपनी नसों से खून निकालते हैं और उसमें नशे की गोलियां मिलाकर शरीर में इंजेक्शन लगाते हैं। यह कोई काल्पनिक कहानी नहीं, बल्कि गांव-गांव में देखी जाने वाली सच्चाई है। इस व्यवहार ने न केवल उनके जीवन को खतरे में डाल दिया है, बल्कि उनके परिवारों को भी मानसिक और आर्थिक दबाव में डाल दिया है। उदाहरण के तौर पर, एक बुजुर्ग ने बताया कि उनके 19 वर्षीय पोते की ओवरडोज से मौत हो गई जबकि बड़ा पोता राजस्थान में नशामुक्ति केंद्र में इलाज करा रहा है।

प्रशासनिक और सामाजिक विफलता

युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए 2017-18 में खेल मैदान बनाने की योजना बनाई गई थी। इसके लिए पंचायत ने जमीन भी उपलब्ध करवाई, लेकिन अब तक काम नहीं हुआ और जमीन पर कूड़ाघर बन गया। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि काम प्रक्रियाधीन है। 

विधायक अर्जुन चौटाला ने विधानसभा में बार-बार इस मुद्दे को उठाया है और तस्करों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, नशामुक्ति केंद्रों को मजबूत करने और जिला स्तर पर निगरानी कमेटियां बनाने की मांग की है।

सामाजिक और मानवीय प्रभाव

* युवा नशे के लिए जान जोखिम में डाल रहे हैं।

* परिवार मानसिक और आर्थिक बोझ झेल रहे हैं।

* रात के समय श्मशान घाट के पास इंजेक्शन लगाने वाले युवा देखे जाते हैं।

समाधान की दिशा

* सरकारी नशामुक्ति केंद्रों को सुदृढ़ करना।

* नशा तस्करों और माफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई।

* युवाओं के लिए खेल, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों की सुविधा।

* परिवार और समाज में जागरूकता और सहयोग बढ़ाना।



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