
Nagpur News : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का वार्षिक ‘विजयदशमी उत्सव’ कार्यक्रम महाराष्ट्र के नागपुर में कार्यकर्ताओं के ‘पथ संचलन’ के साथ शुरू हुआ। इस मौके पर RSS प्रमुख मोहन भागवत ने संगठन के संस्थापक केबी हेडगेवार को श्रद्धांजलि दी। साथ ही, उन्होंने ‘विजयदशमी उत्सव’ के मौके पर शस्त्र पूजा की। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी मौजूद थे। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में संगीतकार शंकर महादेवन मौजूद रहे।
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने दशहरा की बधाई दी और लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि हम हर वर्ष विजयादशमी को शक्ति पर्व के रूप में मनाते हैं। इस वर्ष यह त्योहार हम सभी के लिए गर्व, खुशी और उत्साहजनक घटनाएं लेकर आया है। भारत की विशिष्ट सोच और दृष्टि के कारण ही हमारा ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का मार्गदर्शक सिद्धांत अब पूरे विश्व के दर्शन में समाहित हो गया है। समस्या से उबरने के लिए दुनिया भारत की ओर देख रही है। उन्होंने कहा कि कट्टरपंथ की वजह से युद्घ हो रहे हैं। समाज आपस में कटटरपंथ की वजह से नहीं जुड़ पा रहा है। इसका कोई उपाय भी नहीं है।
उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष, भारत ने जी-20 के अध्यक्ष के रूप में मेजबान की भूमिका निभाई। लोगों द्वारा दिए गए गर्मजोशी भरे आतिथ्य के अनुभव, भारत के गौरवशाली अतीत, चल रही रोमांचक विकास यात्रा ने सभी देशों के प्रतिभागियों को बहुत प्रभावित किया।
एशियाई खेलों में भारत की उपलब्धि पर उन्होंने कहा कि हाल ही में, हमारे देश के खिलाडिय़ों ने एशियाई खेलों में पहली बार 100 का आंकड़ा पार करते हुए 107 पदक (28 स्वर्ण, 38 रजत और 41 कांस्य) जीतकर हमें बहुत गर्व और खुशी दी। हम उन्हें हार्दिक बधाई देते हैं। साथ ही उन्होंने चंद्रयान-3 मिशन को लेकर कहा कि चंद्रयान मिशन ने पुनर्जीवित भारत की ताकत, बुद्धिमत्ता और चातुर्य का भी शानदार प्रदर्शन किया। देश के नेतृत्व की इच्छाशक्ति हमारे वैज्ञानिकों के वैज्ञानिक ज्ञान और तकनीकी कौशल के साथ सहज रूप से जुड़ी हुई है।
मोहन भागवत ने कहा कि रामलला की प्रतिष्ठा के अवसर पर हमें जगह-जगह यह आयोजन करना चाहिए। इससे हर हृदय में मन के राम जागृत होंगे और मन की अयोध्या का श्रृंगार होगा, समाज में स्नेह, जिम्मेदारी और सद्भावना का वातावरण बनेगा। किसी राष्ट्र के प्रयास राष्ट्रीय आदर्शों से प्रेरित होते हैं। रामलला, जिनका चित्र हमारे संविधान की मूल प्रति के एक पृष्ठ पर दर्शाया गया है, उनका मंदिर अयोध्या में बनाया जा रहा है। यह घोषणा कर दी गई है कि श्री रामलला को मंदिर के गर्भगृह में 22 जनवरी, 2024 को प्रतिष्ठित किया जाएगा।
आरएसएस प्रमुख ने कहा, ‘हम महावीर स्वामी के 2550वें निर्वाण वर्ष का जश्न मना रहे हैं, जिन्होंने अपने अनुकरणीय जीवन से पूरे विश्व को अहिंसा, दया और नैतिकता का मार्ग दिखाया। हमने अभी-अभी तमिल संत श्रीमद रामलिंग वल्लालर की 200वीं वर्षगांठ का समारोह पूरा किया है, जिन्होंने अपनी युवावस्था से ही देश की आजादी के लिए लोगों को जागृत करना शुरू कर दिया था। गरीबों के अन्नदान के लिए उन्होंने जो चूल्हा जलाया, वह आज भी तमिलनाडु में जलता है।’