वफादारी का चरम, मालिक की अंतिम विदाई में साये की तरह साथ रहा कुत्ता

ग्रामीणों का कहना है कि पोस्टमार्टम हाउस के बाहर भी कुत्ता टकटकी लगाए इंतजार करता रहा। शव गांव लौटने के बाद अंतिम संस्कार की तैयारी के दौरान भी वह साए की तरह साथ रहा।

The dog became the guard
कुत्ता बना पहरेदार, अंतिम संस्कार तक नहीं हटा (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar21 Jan 2026 11:57 AM
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इंसान और पालतू जानवर के रिश्ते की एक मार्मिक तस्वीर मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से सामने आई है। करैरा थाना क्षेत्र के ग्राम बडोरा में एक पालतू कुत्ते ने अपने मृत मालिक के प्रति ऐसा समर्पण दिखाया कि गांववालों की आंखें नम हो गईं। कुत्ता पूरी रात अपने मालिक के शव के पास बैठकर पहरा देता रहा और पुलिस कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाते समय करीब 4 किलोमीटर तक ट्रैक्टर-ट्रॉली के पीछे दौड़ता रहा। जानकारी के अनुसार, ग्राम बडोरा निवासी 40 वर्षीय जगदीश प्रजापति ने कथित तौर पर घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की सूचना मिलने पर परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों के मुताबिक, जगदीश का पालतू कुत्ता रातभर शव के नीचे/पास बैठा रहा, जैसे वह आखिरी बार भी मालिक की सुरक्षा कर रहा हो।

पोस्टमार्टम ले जाते समय पीछे-पीछे दौड़ा

पुलिस द्वारा शव को ट्रैक्टर-ट्रॉली में रखकर पोस्टमार्टम के लिए करैरा ले जाया जा रहा था। इसी दौरान कुत्ता धूप और धूल की परवाह किए बिना ट्रैक्टर के पीछे दौड़ता रहा। परिजनों ने उसकी हालत देखकर उसे बीच रास्ते में ट्रॉली पर बैठा लिया।

अंतिम संस्कार तक नहीं छोड़ा साथ

ग्रामीणों का कहना है कि पोस्टमार्टम हाउस के बाहर भी कुत्ता टकटकी लगाए इंतजार करता रहा। शव गांव लौटने के बाद अंतिम संस्कार की तैयारी के दौरान भी वह साए की तरह साथ रहा। बताया जा रहा है कि मालिक की मौत के बाद कुत्ते ने अन्न-जल तक त्याग दिया और चिता के पास गुमसुम बैठा रहा।

जांच जारी, सोशल मीडिया पर चर्चा

पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। वहीं, कुत्ते की वफादारी की यह कहानी इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है और सोशल मीडिया पर भी लोगों की भावुक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह घटना रिश्तों में संवेदना और निस्वार्थ प्रेम का संदेश देती है।

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सोशल मीडिया पर वायरल हुई शख्स की अनोखी रिपोर्ट, पेट में दिखा गर्भाशय

पीड़ित ने जब इस गंभीर त्रुटि को लेकर डायग्नोस्टिक सेंटर के संचालक से संपर्क किया, तो उन्होंने किसी भी तरह की प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया। इस बीच, रिपोर्ट की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।

Went viral on social media
निजी डायग्नोस्टिक सेंटर की लापरवाही उजागर (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar21 Jan 2026 10:03 AM
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मध्य प्रदेश के सतना जिले से स्वास्थ्य सेवाओं में भारी लापरवाही का मामला सामने आया है। एक निजी डायग्नोस्टिक सेंटर ने 47 वर्षीय पुरुष की सोनोग्राफी रिपोर्ट में गर्भाशय (यूट्रस) होने की पुष्टि कर दी। हैरानी की बात यह रही कि रिपोर्ट में गर्भाशय को उल्टा (रेट्रोवर्टेड) तक बताया गया। मामला सामने आते ही स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है और जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

यह चौंकाने वाली घटना उचेहरा नगर पंचायत के अध्यक्ष निरंजन प्रजापति के साथ हुई। पेट दर्द और असहजता की शिकायत के बाद डॉक्टर की सलाह पर उन्होंने 13 जनवरी को स्टेशन रोड स्थित सतना डायग्नोस्टिक सेंटर में सोनोग्राफी कराई थी। रिपोर्ट मिलने पर जब उसमें पुरुष शरीर में गर्भाशय होने का उल्लेख देखा गया, तो मरीज और उनके परिजन स्तब्ध रह गए।

सवालों के घेरे में डायग्नोस्टिक सेंटर

बता दें कि पीड़ित ने जब इस गंभीर त्रुटि को लेकर डायग्नोस्टिक सेंटर के संचालक डॉ. अरविंद सराफ से संपर्क किया, तो उन्होंने किसी भी तरह की प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया। इस बीच, रिपोर्ट की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिसके बाद निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने दिए जांच के निर्देश

बता दें कि मामला तूल पकड़ने के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. मनोज शुक्ला ने कहा कि यह मामला अत्यंत गंभीर है। मरीजों की सेहत के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पूरे प्रकरण की जांच कराई जा रही है और यदि लापरवाही प्रमाणित होती है, तो संबंधित सेंटर पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मेडिकल मिरेकल या भारी लापरवाही?

इस घटना ने स्वास्थ्य तंत्र की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस तरह की गलत रिपोर्ट के आधार पर इलाज या सर्जरी शुरू हो जाती, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते थे। फिलहाल यह मामला किसी ‘मेडिकल मिरेकल’ से ज्यादा मेडिकल लापरवाही का उदाहरण बनकर सामने आया है।

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बॉन्ड बंद… BJP का फंड ऑन! कांग्रेस की जेब हुई हल्की

लेकिन वित्त वर्ष 2024-25 के आंकड़े इससे उलट तस्वीर दिखाते हैं। चुनावी बॉन्ड बंद होने के बावजूद बीजेपी की आय में बड़ा उछाल दर्ज हुआ है, जबकि कांग्रेस को मिलने वाले दान में गिरावट सामने आई है।

BJP के फंडिंग आंकड़े चर्चा में
BJP के फंडिंग आंकड़े चर्चा में
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar21 Jan 2026 09:31 AM
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Electoral bond : सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2024 में इलेक्टोरल बॉन्ड योजना पर रोक लगाकर राजनीतिक चंदे की व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया था। इसके बाद माना जा रहा था कि पार्टियों की फंडिंग पर असर पड़ेगा और चंदे की रफ्तार धीमी होगी। लेकिन वित्त वर्ष 2024-25 के आंकड़े इससे उलट तस्वीर दिखाते हैं। चुनावी बॉन्ड बंद होने के बावजूद बीजेपी की आय में बड़ा उछाल दर्ज हुआ है, जबकि कांग्रेस को मिलने वाले दान में गिरावट सामने आई है।

BJP को 2024-25 में ₹6,125 करोड़ का स्वैच्छिक योगदान, 54% की बढ़त

चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के मुताबिक, 2024-25 में बीजेपी को करीब ₹6,125 करोड़ का वालंटरी/स्वैच्छिक योगदान मिला। यह राशि पिछले वित्त वर्ष 2023-24 के ₹3,967 करोड़ की तुलना में करीब 54% अधिक है। मतलब एक साल में पार्टी के चंदे में ₹2,158 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है जो चुनावी बॉन्ड खत्म होने के बाद संभावित नुकसान की भरपाई से कहीं ज्यादा मानी जा रही है।

कॉरपोरेट डोनेशन में बड़ा उछाल

बीजेपी की वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर बताया गया है कि कंपनियों और संगठनों से मिलने वाले दान में भी तेज वृद्धि हुई। आंकड़ों के अनुसार 2024-25 में कॉरपोरेट डोनेशन ₹5,422 करोड़ रहा, जबकि 2023-24 में यह ₹1,885 करोड़ था। यानी चुनावी बॉन्ड बंद होने के बाद कॉरपोरेट दान का ग्राफ करीब तीन गुना तक बढ़ा हुआ नजर आया। गौरतलब है कि 2023-24 में बीजेपी को चुनावी बॉन्ड के जरिए करीब ₹1,686 करोड़ का चंदा मिला था, जिसे बॉन्ड स्कीम बंद होने के बाद फंडिंग के नए रास्तों से कवर किए जाने की चर्चा भी तेज है।

कांग्रेस की आय घटी

दूसरी तरफ कांग्रेस के लिए 2024-25 का वित्तीय साल अपेक्षाकृत चुनौतीपूर्ण नजर आया। रिपोर्ट में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक पार्टी की कुल आय ₹918 करोड़ रही, जबकि कुल खर्च ₹1,123 करोड़ तक पहुंच गया। सबसे बड़ा संकेत पार्टी को मिलने वाले चंदे में आई तेज गिरावट से मिलता है। 2023-24 में कांग्रेस को करीब ₹1,130 करोड़ का चंदा मिला था, लेकिन 2024-25 में यह घटकर लगभग ₹522 करोड़ रह गया। इसका मतलब है कि पार्टी की डोनेशन इनकम में करीब 54% की कमी दर्ज हुई। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि चुनावी बॉन्ड बंद होने का असर कांग्रेस पर ज्यादा पड़ा, क्योंकि 2023-24 में पार्टी ने बॉन्ड के जरिए करीब ₹828 करोड़ जुटाए थे।

व्यक्तिगत दान से भी BJP को बढ़त

भाजपा की फंडिंग में व्यक्तिगत दाताओं की हिस्सेदारी भी इस बार तेज़ी से बढ़ती दिखी। वित्त वर्ष 2024-25 में पार्टी को पर्सनल डोनर्स से ₹641 करोड़ मिले, जो 2023-24 के ₹240 करोड़ के मुकाबले कहीं ज्यादा हैं। कुल मिलाकर 2024-25 में भाजपा की कुल आय ₹6,769 करोड़ दर्ज की गई, जो पिछले साल (2023-24) के ₹4,340 करोड़ से उल्लेखनीय रूप से अधिक है। आय के स्रोतों पर नजर डालें तो सबसे बड़ा हिस्सा स्वैच्छिक योगदान का रहा ₹6,125 करोड़। इसके अलावा पार्टी को बैंक ब्याज से ₹634 करोड़, शुल्क/सदस्यता से ₹5.7 करोड़ और अन्य आय से ₹4.5 करोड़ मिलने की बात रिपोर्ट में दर्ज है। साफ है कि चुनावी बॉन्ड के बाद भी पार्टी की फंडिंग मशीनरी ने डोनर बेस से लेकर फाइनेंशियल इनकम तक, दोनों स्तरों पर मजबूती दिखाई है।

प्रचार की हर लाइन में बढ़ा बजट

खर्च के मोर्चे पर भी भाजपा ने 2024-25 में बड़ा दांव खेला। पार्टी का कुल खर्च ₹3,775 करोड़ दर्ज किया गया, जिसमें से ₹3,335 करोड़ सिर्फ चुनाव प्रचार पर झोंके गए,यह रकम 2023-24 के ₹1,754 करोड़ की तुलना में करीब दोगुनी है। उधर, कांग्रेस ने भी प्रचार खर्च बढ़ाया 2024-25 में ₹896 करोड़, जो पिछले साल ₹620 करोड़ था। भाजपा की प्रचार-लागत का बड़ा हिस्सा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर गया, जहां खर्च ₹1,125 करोड़ तक पहुंच गया (पिछले वर्ष ₹435 करोड़)। इसके अलावा हवाई यात्राओं पर ₹583 करोड़, उम्मीदवारों को वित्तीय सहायता के रूप में ₹313 करोड़, होर्डिंग्स पर ₹107 करोड़, मोर्चों/रैलियों पर ₹91 करोड़ और बैठक/मीटिंग खर्च में करीब ₹52 करोड़ दर्ज किए गए। कुल मिलाकर आंकड़े यही संकेत देते हैं कि 2024-25 में प्रचार रणनीति के केंद्र में मीडिया-पुश, तेज मूवमेंट और ग्राउंड-मैनेजमेंट रहा, और इसी पर खर्च का बड़ा बजट तय हुआ।

साल के अंत में बढ़ा पार्टी का कॉर्पस

भाजपा की ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2024-25 की शुरुआत में पार्टी के जनरल फंड में ₹9,170 करोड़ का ओपनिंग बैलेंस दर्ज था। साल भर में आय–व्यय के बाद पार्टी ने ₹2,995 करोड़ का अधिशेष बनाया, जिसके चलते क्लोजिंग बैलेंस बढ़कर ₹12,164 करोड़ तक पहुंच गया। इतना ही नहीं, 31 मार्च 2025 की स्थिति में भाजपा के पास ₹9,996 करोड़ की राशि नकद/नकद समकक्ष के रूप में बताई गई है जो पिछले साल के ₹7,114 करोड़ के मुकाबले स्पष्ट बढ़त दिखाती है। Electoral bond

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