मनपा चुनाव से पहले मीरा-भाईंदर में सीएम फडणवीस का बड़ा ऐलान

महानगरपालिका चुनाव को लेकर प्रचार अब अपने चरम पर पहुंच गया है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस मीरा-भाईंदर और नालासोपारा में आयोजित भाजपा की जनसभाओं को संबोधित किया।

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महानगरपालिका चुनाव प्रचार (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar10 Jan 2026 06:35 PM
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मीरा रोड स्थित स्व. बालासाहेब ठाकरे मैदान में आयोजित भव्य संकल्प सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मीरा-भाईंदर हमेशा से भाजपा के साथ मजबूती से खड़ा रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2017 में जनता ने भाजपा को पूर्ण बहुमत दिया था और शहर को विकास की दिशा में आगे बढ़ाया। इस बार भी पूर्ण बहुमत की अपील करते हुए उन्होंने कहा, “मैं भाजपा के पार्षदों की गारंटी देने आया हूं।” मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि आने वाले वर्षों में मीरा-भाईंदर बुनियादी सुविधाओं के मामले में एक आदर्श शहर के रूप में विकसित होगा।

सूर्या परियोजना से हर घर तक पानी

फडणवीस ने बताया कि सूर्या जलापूर्ति परियोजना का पहला चरण पूरा हो चुका है और इसके तहत शहर को 75 एमएलडी पानी की आपूर्ति शुरू कर दी गई है। दूसरे चरण के लिए 516 करोड़ रुपये की निधि को मंजूरी दी गई है। उन्होंने कहा कि इसी वर्ष सूर्या परियोजना का पानी शहर के हर नागरिक के घर तक पहुंचेगा और रोजाना जलापूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।

जनवरी में शुरू होगी मेट्रो-9

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि जनवरी माह में मेट्रो लाइन-9 का शुभारंभ किया जाएगा। उन्होंने पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 11 वर्षों में वे 11 किलोमीटर भी मेट्रो नहीं बना सके, जबकि भाजपा सरकार ने पूरे एमएमआर क्षेत्र में 475 किलोमीटर मेट्रो नेटवर्क की योजना तैयार की है। उन्होंने बताया कि विधायक नरेंद्र मेहता की मांग पर मीरा-भाईंदर के लिए मेट्रो परियोजना को मात्र 15 दिनों में मंजूरी दी गई।

वसई-विरार बनेगी तीसरी, पालघर चौथी मुंबई

नालासोपारा पूर्व स्थित सेंट्रल पार्क मैदान में आयोजित विजय संकल्प सभा में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की योजना वसई-विरार को तीसरी और पालघर जिले को चौथी मुंबई के रूप में विकसित करने की है। उन्होंने बताया कि पालघर जिले में एयरपोर्ट के लिए सर्वे शुरू है और जरूरत पड़ी तो यह एयरपोर्ट विरार में भी बनाया जा सकता है। वाढवण पोर्ट को लेकर उन्होंने कहा कि इसके निर्माण से लगभग एक लाख लोगों को रोजगार मिलेगा, जिसकी शुरुआत वसई-विरार से होगी। साथ ही विरार से पालघर तक कोस्टल रोड बनाकर पोर्ट से कनेक्टिविटी दी जाएगी।

आईटी हब के रूप में होगा विकास

मुख्यमंत्री ने कहा कि वसई-विरार को आईटी हब के रूप में विकसित करने की योजना है, जिसके लिए शासन स्तर पर 60 करोड़ रुपये की निधि मंजूर की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य हर घर में रोज पानी, बेहतर सड़कें और सुंदर वातावरण उपलब्ध कराना है। अवैध निर्माण और घर तोड़े जाने को लेकर फैलाए जा रहे दुष्प्रचार पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “भाजपा घर तोड़ने वाली नहीं, बल्कि मुफ्त में घर देने वाली सरकार है। क्लस्टर योजना के तहत लोगों को उनके हक का घर दिया जाएगा।” उन्होंने यह भी घोषणा की कि लोकल ट्रेन में सेकेंड क्लास एसी की सुविधा शुरू की जाएगी, बिना किराया बढ़ाए, जिससे वसई-विरार के यात्रियों को सबसे ज्यादा लाभ होगा।

नरेंद्र मेहता का शिवसेना पर हमला

बता दें कि सभा को संबोधित करते हुए विधायक नरेंद्र मेहता ने कहा कि मीरा-भाईंदर मनपा चुनाव में मुख्य मुकाबला भाजपा और शिवसेना के बीच है। उन्होंने परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक पर निशाना साधते हुए कहा कि विकास कार्यों के उद्घाटन के समय प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के पोस्टर नहीं लगाए गए, लेकिन चुनाव आते ही उनके नामों का सहारा लिया जा रहा है।

मेहता ने दावा किया कि मीरा-भाईंदर मनपा में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनेगी और इसके बाद सभी विकास कार्यों का पुनः लोकार्पण और नामकरण किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि मीरा-भाईंदर में भाजपा और शिंदे गुट की शिवसेना आमने-सामने हैं, जबकि वसई-विरार में दोनों दल साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं।


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आज नहीं तो कल हिजाब वाली बेटी भी संभालेगी पीएम पद - ओवैसी

उन्होंने कहा कि एक दिन ऐसा आएगा जब हिजाब पहनने वाली बेटी इस देश की प्रधानमंत्री बनेगी चाहे उस वक्त हम रहें या न रहें। ओवैसी ने मंच से सामाजिक माहौल पर भी टिप्पणी की और कहा कि नफरत फैलाने वाली राजनीति अंततः टिक नहीं पाएगी।

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar10 Jan 2026 03:02 PM
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Asaduddin Owaisi : महाराष्ट्र के सोलापुर में आयोजित जनसभा में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एक ऐसा बयान दिया जिसने सियासी हलकों में तुरंत चर्चा छेड़ दी। ओवैसी ने कहा कि उनका सपना है एक दिन हिजाब पहनने वाली कोई बेटी भारत की प्रधानमंत्री बने। उन्होंने इसे सीधे-सीधे आंबेडकर के संविधान से जोड़ते हुए कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था किसी नागरिक की पहचान या पहनावे से नहीं, बल्कि उसके संवैधानिक अधिकारों और जनता के जनादेश से तय होती है। ओवैसी के मुताबिक, यही इस देश की असली ताकत है कि यहां हर नागरिक के लिए देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचने के दरवाजे खुले हैं।

“संविधान किसी एक मजहब तक सीमित नहीं करता” - ओवैसी

सभा में ओवैसी ने पाकिस्तान के संविधान का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां प्रधानमंत्री बनने की पात्रता को लेकर मजहब आधारित शर्तों का जिक्र किया जाता है, जबकि भारत का संविधान नागरिकता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्राथमिकता देता है। उन्होंने कहा कि एक दिन ऐसा आएगा जब हिजाब पहनने वाली बेटी इस देश की प्रधानमंत्री बनेगी चाहे उस वक्त हम रहें या न रहें। ओवैसी ने मंच से सामाजिक माहौल पर भी टिप्पणी की और कहा कि नफरत फैलाने वाली राजनीति अंततः टिक नहीं पाएगी। उनके मुताबिक जब समाज में प्रेम और भाईचारा सामान्य होगा, तब लोगों को समझ आएगा कि किस तरह कुछ ताकतें ज़हर घोलने की कोशिश करती रही हैं।

बयान पर प्रतिक्रियाएं शुरू

ओवैसी के बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। राजद सांसद मनोज कुमार झा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री बनने का फैसला पहनावे से नहीं होता और संविधान किसी खास कपड़े या भाषा के आधार पर देश के नेतृत्व की शर्तें तय नहीं करता। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान की बातों को रोज़ाना विवाद में घसीटकर समाज में नफरत बढ़ाई जा रही है। भाजपा नेता आरपी सिंह ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में कोई भी व्यक्ति प्रधानमंत्री बन सकता है निर्णय जनता की प्रक्रिया से होता है।

दिल्ली के मस्जिद-सम्बंधित मामले का भी जिक्र

इसी बीच, ओवैसी ने दिल्ली में वक्फ संपत्ति से जुड़े एक हिस्से को ध्वस्त किए जाने का आरोप लगाया और इसके लिए वक्फ संशोधन अधिनियम को जिम्मेदार ठहराया। रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार-बुधवार की दरम्यानी रात दिल्ली के रामलीला मैदान क्षेत्र में फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण-रोधी अभियान के दौरान हालात तनावपूर्ण हो गए। सोशल मीडिया पर मस्जिद गिराने के दावे से जुड़ी पोस्टों के बाद भीड़ उग्र हुई और पुलिस पर पथराव की घटना सामने आई, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए। स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। Asaduddin Owaisi


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महाराष्ट्र में कानून व्यवस्था पर सवाल, ULC स्कैम ने मचाया राजनीतिक तूफान

महाराष्ट्र की राजनीति में हड़कंप मचाने वाला एक सनसनीखेज खुलासा सामने आया है। वर्ष 2021 में तत्कालीन पुलिस महानिदेशक संजय पांडे ने मौजूदा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को अर्बन लैंड सीलिंग (ULC) घोटाले में झूठे आरोपों में फंसाने की कोशिश की थी।

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महाराष्ट्र में ULC घोटाले में नया मोड़ (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar10 Jan 2026 12:04 PM
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महाराष्ट्र की राजनीति और पुलिस महकमे में हड़कंप मचाने वाला एक सनसनीखेज खुलासा सामने आया है। पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) रश्मि शुक्ला द्वारा तैयार की गई एक रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2021 में तत्कालीन पुलिस महानिदेशक संजय पांडे ने मौजूदा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को अर्बन लैंड सीलिंग (ULC) घोटाले में झूठे आरोपों में फंसाने की कोशिश की थी।

यह रिपोर्ट महाराष्ट्र के गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को सौंपी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, संजय पांडे ने ठाणे के तत्कालीन डीसीपी लक्ष्मीकांत पाटिल और एसीपी सरदार पाटिल को निर्देश दिए थे कि वे वर्ष 2016 के ULC मामले में फडणवीस और शिंदे को आरोपी के रूप में पेश करें और यह दर्शाया जाए कि उन्होंने बिल्डरों से अवैध वसूली की है।

‘गिरफ्तारी का दबाव बनाया गया’

बता दें कि रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एसीपी सरदार पाटिल पर तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे को गिरफ्तार करने का सीधा दबाव डाला गया। इस मामले में गिरफ्तार आरोपी संजय पुनामिया ने जांच एजेंसियों को एक कथित ऑडियो क्लिप भी सौंपी है, जिसमें संजय पांडे, डीसीपी लक्ष्मीकांत पाटिल और एसीपी सरदार पाटिल के बीच फडणवीस को फंसाने को लेकर बातचीत होने का दावा किया गया है।

बिना जांच अधिकारी बने की गई पूछताछ

रिपोर्ट में कोपरी पुलिस स्टेशन में दर्ज केस CR No. 176/2021 का भी उल्लेख है। आरोप है कि डीसीपी लक्ष्मीकांत पाटिल ने इस मामले में गिरफ्तार किए गए संजय पुनामिया और सुनील जैन से पूछताछ की, जबकि वे इस केस के आधिकारिक जांच अधिकारी नहीं थे। पूछताछ के दौरान पुनामिया पर दबाव बनाया गया कि वह देवेंद्र फडणवीस द्वारा बिल्डरों से की गई कथित वसूली की रकम बताए।

राजनीतिक प्रतिशोध के लिए पुलिस तंत्र के दुरुपयोग का आरोप

रश्मि शुक्ला की रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि यह पूरी घटना पुलिस तंत्र के राजनीतिक प्रतिशोध के लिए दुरुपयोग को दर्शाती है। रिपोर्ट ने राज्य की कानून व्यवस्था, निष्पक्ष जांच प्रक्रिया और प्रशासनिक विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस खुलासे के बाद मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा तूफान खड़ा कर सकता है।

जाने क्या है ULC घोटाला?

महाराष्ट्र में अर्बन लैंड सीलिंग (ULC) घोटाला शहरी भूमि सीलिंग अधिनियम, 1976 से जुड़ा हुआ है। इस कानून के तहत शहरी क्षेत्रों में 500 वर्ग मीटर से अधिक भूमि सरकार द्वारा अधिग्रहित की जानी थी, ताकि उसका उपयोग सार्वजनिक हित में किया जा सके। हालांकि, इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार सामने आया। जमीन मालिकों और बिल्डरों ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी अधिग्रहण से बचने की कोशिश की। गलत तरीके से ULC से संबंधित प्रमाणपत्र जारी किए गए, जिससे करोड़ों रुपये की कीमती जमीन सरकार के नियंत्रण से बाहर चली गई।

हाईकोर्ट ने बताया बड़ा जमीन घोटाला

बॉम्बे हाईकोर्ट ने ULC घोटाले को अब तक के सबसे बड़े जमीन घोटालों में से एक करार दिया है। अदालत ने इस मामले में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। पुलिस द्वारा कई गिरफ्तारियां की जा चुकी हैं और जांच अभी भी जारी है। उम्मीद की जा रही है कि दोषियों को कड़ी सजा दी जाएगी।

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