महाशिवरात्रि की रात क्यों है सबसे खास? जानें पूजा, मंत्र और शुभ समय
Mahashivratri: महाशिवरात्रि का पावन पर्व 15 फरवरी को मनाया जा रहा है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह की स्मृति में व्रत, रात्रि जागरण और चार प्रहर की विशेष पूजा की जाती है। यहां जानें महाशिवरात्रि की सही तिथि, पूजा मुहूर्त, निशीथ काल का समय, जलाभिषेक के शुभ घंटे और व्रत की सरल विधि।

फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी की यह पवित्र रात सिर्फ एक पर्व नहीं बल्कि शिव और शक्ति के दिव्य मिलन का उत्सव है। महाशिवरात्रि वह खास अवसर है जब पूरा देश “हर हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठता है। मान्यता है कि इसी रात भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। साल भर में 12 शिवरात्रियां आती हैं लेकिन महाशिवरात्रि का महत्व सबसे अधिक माना जाता है। इस दिन व्रत, रात्रि जागरण और चार प्रहर की पूजा का विशेष विधान है। इस वर्ष महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जा रही है और इस दिन कई शुभ योग भी बन रहे हैं जो पूजा के फल को और भी शुभ बना देते हैं।
चार प्रहर पूजन का शुभ मुहूर्त
महाशिवरात्रि की रात को चार प्रहर में पूजा करने का विशेष महत्व है। हर प्रहर में भगवान शिव का अभिषेक और मंत्र जाप किया जाता है।
प्रथम प्रहर
शाम 6:11 बजे से रात 9:23 बजे तक
द्वितीय प्रहर
रात 9:23 बजे से 16 फरवरी को 12:35 बजे तक
तृतीय प्रहर
रात 12:35 बजे से सुबह 3:47 बजे तक
चतुर्थ प्रहर
सुबह 3:47 बजे से 6:59 बजे तक
चारों प्रहर में शिवलिंग पर जल, दूध या गंगाजल चढ़ाकर “ॐ नमः शिवाय” का जाप करना अत्यंत शुभ माना गया है।
निशीथ काल का महत्व
महाशिवरात्रि की पूजा का सबसे पवित्र समय निशीथ काल होता है।
निशीथ काल मुहूर्त
रात 12:09 बजे से 1:01 बजे तक (16 फरवरी)
इस समय शिव पूजन करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
जलाभिषेक के शुभ समय
यदि आप दिन में अभिषेक करना चाहते हैं तो ये समय उत्तम रहेंगे-
सुबह 8:24 से 9:48 बजे तक
सुबह 9:48 से 11:11 बजे तक
सुबह 11:11 से 12:35 बजे तक (अमृत सर्वोत्तम समय)
शाम 6:11 से 7:47 बजे तक
श्रद्धा से जल अर्पित करने मात्र से भी भोलेनाथ प्रसन्न हो जाते हैं।
बन रहे हैं शुभ योग
इस वर्ष महाशिवरात्रि पर कई शुभ योग बन रहे हैं जैसे-
व्यतीपात योग- 15 फरवरी सुबह 3:18 बजे से 16 फरवरी रात 2:47 बजे तक
सर्वार्थ सिद्धि योग- सुबह 7:00 बजे से शाम 7:48 बजे तक
इसके अलावा प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, शिव, शुक्ल, शोभन, चंद्रमंगल और राजयोग जैसे कई शुभ संयोग बन रहे हैं।
महाशिवरात्रि की सरल पूजन विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
साफ वस्त्र पहनें और शिव मंदिर जाएं।
शिवलिंग पर जल, दूध या गन्ने के रस से अभिषेक करें।
बेलपत्र, धतूरा, भांग, फल और मिठाई अर्पित करें।
“ॐ नमः शिवाय” और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
शिव चालीसा पढ़ें और आरती करें।
रात में जागरण करना भी शुभ माना जाता है।
महाशिवरात्रि के शक्तिशाली मंत्र
महामृत्युंजय मंत्र
ऊं त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
रुद्र गायत्री मंत्र
ऊं तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि।
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
महाशिवरात्रि की कथा
गरुड़ पुराण में एक कथा मिलती है। एक शिकारी जंगल में शिकार की तलाश में गया लेकिन उसे कुछ नहीं मिला। रात में वह एक तालाब के किनारे बेल वृक्ष के नीचे बैठ गया जहां शिवलिंग स्थापित था। अनजाने में उसके हाथ से बेलपत्र और जल शिवलिंग पर गिर गए। इस तरह उससे अनजाने में शिव पूजा हो गई। जब मृत्यु के बाद यमदूत उसे लेने आए तो शिवगणों ने उसकी रक्षा की। इस कथा से सीख मिलती है कि सच्ची श्रद्धा से किया गया छोटा सा कार्य भी भगवान शिव को प्रिय होता है।
फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी की यह पवित्र रात सिर्फ एक पर्व नहीं बल्कि शिव और शक्ति के दिव्य मिलन का उत्सव है। महाशिवरात्रि वह खास अवसर है जब पूरा देश “हर हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठता है। मान्यता है कि इसी रात भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। साल भर में 12 शिवरात्रियां आती हैं लेकिन महाशिवरात्रि का महत्व सबसे अधिक माना जाता है। इस दिन व्रत, रात्रि जागरण और चार प्रहर की पूजा का विशेष विधान है। इस वर्ष महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जा रही है और इस दिन कई शुभ योग भी बन रहे हैं जो पूजा के फल को और भी शुभ बना देते हैं।
चार प्रहर पूजन का शुभ मुहूर्त
महाशिवरात्रि की रात को चार प्रहर में पूजा करने का विशेष महत्व है। हर प्रहर में भगवान शिव का अभिषेक और मंत्र जाप किया जाता है।
प्रथम प्रहर
शाम 6:11 बजे से रात 9:23 बजे तक
द्वितीय प्रहर
रात 9:23 बजे से 16 फरवरी को 12:35 बजे तक
तृतीय प्रहर
रात 12:35 बजे से सुबह 3:47 बजे तक
चतुर्थ प्रहर
सुबह 3:47 बजे से 6:59 बजे तक
चारों प्रहर में शिवलिंग पर जल, दूध या गंगाजल चढ़ाकर “ॐ नमः शिवाय” का जाप करना अत्यंत शुभ माना गया है।
निशीथ काल का महत्व
महाशिवरात्रि की पूजा का सबसे पवित्र समय निशीथ काल होता है।
निशीथ काल मुहूर्त
रात 12:09 बजे से 1:01 बजे तक (16 फरवरी)
इस समय शिव पूजन करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
जलाभिषेक के शुभ समय
यदि आप दिन में अभिषेक करना चाहते हैं तो ये समय उत्तम रहेंगे-
सुबह 8:24 से 9:48 बजे तक
सुबह 9:48 से 11:11 बजे तक
सुबह 11:11 से 12:35 बजे तक (अमृत सर्वोत्तम समय)
शाम 6:11 से 7:47 बजे तक
श्रद्धा से जल अर्पित करने मात्र से भी भोलेनाथ प्रसन्न हो जाते हैं।
बन रहे हैं शुभ योग
इस वर्ष महाशिवरात्रि पर कई शुभ योग बन रहे हैं जैसे-
व्यतीपात योग- 15 फरवरी सुबह 3:18 बजे से 16 फरवरी रात 2:47 बजे तक
सर्वार्थ सिद्धि योग- सुबह 7:00 बजे से शाम 7:48 बजे तक
इसके अलावा प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, शिव, शुक्ल, शोभन, चंद्रमंगल और राजयोग जैसे कई शुभ संयोग बन रहे हैं।
महाशिवरात्रि की सरल पूजन विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
साफ वस्त्र पहनें और शिव मंदिर जाएं।
शिवलिंग पर जल, दूध या गन्ने के रस से अभिषेक करें।
बेलपत्र, धतूरा, भांग, फल और मिठाई अर्पित करें।
“ॐ नमः शिवाय” और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
शिव चालीसा पढ़ें और आरती करें।
रात में जागरण करना भी शुभ माना जाता है।
महाशिवरात्रि के शक्तिशाली मंत्र
महामृत्युंजय मंत्र
ऊं त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
रुद्र गायत्री मंत्र
ऊं तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि।
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
महाशिवरात्रि की कथा
गरुड़ पुराण में एक कथा मिलती है। एक शिकारी जंगल में शिकार की तलाश में गया लेकिन उसे कुछ नहीं मिला। रात में वह एक तालाब के किनारे बेल वृक्ष के नीचे बैठ गया जहां शिवलिंग स्थापित था। अनजाने में उसके हाथ से बेलपत्र और जल शिवलिंग पर गिर गए। इस तरह उससे अनजाने में शिव पूजा हो गई। जब मृत्यु के बाद यमदूत उसे लेने आए तो शिवगणों ने उसकी रक्षा की। इस कथा से सीख मिलती है कि सच्ची श्रद्धा से किया गया छोटा सा कार्य भी भगवान शिव को प्रिय होता है।












