बीएमसी चुनाव 2026: ठाकरे-भाजपा की नजदीकियों ने बढ़ाया सियासी पारा
मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनावों के नतीजों के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोरों पर है कि उद्धव ठाकरे गुट अपने पार्षदों को मेयर चुनाव के दौरान मतदान से दूर रहने का निर्देश दे सकता है। ऐसी स्थिति में भाजपा बिना बड़े विरोध के अपना मेयर चुन सकती है।

मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनावों के नतीजों के बाद अब असली राजनीतिक जोड़-तोड़ शुरू हो गई है। मेयर पद को लेकर सत्ता के गलियारों में हलचल तेज है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और भाजपा के बीच पर्दे के पीछे संभावित समझौते की चर्चाएं चल रही हैं। इस संभावित रणनीति का उद्देश्य उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बढ़ते प्रभाव को सीमित करना बताया जा रहा है।
बीएमसी के 227 सदस्यीय सदन में भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि बहुमत का आंकड़ा 114 है। शिवसेना (उद्धव गुट) के पास 65, शिंदे गुट के पास 29, कांग्रेस के 24 और अन्य दलों के 20 पार्षद हैं। भाजपा और शिंदे गुट मिलकर 118 के आंकड़े तक पहुंचते हैं, लेकिन यह बहुमत बेहद नाजुक माना जा रहा है।
ठाकरे गुट की ‘तटस्थ’ भूमिका की चर्चा
बता दें कि राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोरों पर है कि उद्धव ठाकरे गुट अपने पार्षदों को मेयर चुनाव के दौरान मतदान से दूर रहने का निर्देश दे सकता है। ऐसी स्थिति में भाजपा बिना बड़े विरोध के अपना मेयर चुन सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम 2017 के बीएमसी चुनावों में भाजपा द्वारा उद्धव ठाकरे को दिए गए समर्थन की ‘राजनीतिक वापसी’ हो सकता है। हालांकि, भाजपा नेता प्रवीण दरेकर और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ठाकरे गुट से किसी भी तरह की बातचीत की खबरों को सार्वजनिक रूप से खारिज किया है। बावजूद इसके, मुंबई की राजनीति में संभावनाओं के बदलते समीकरणों से इनकार नहीं किया जा रहा।
शिंदे गुट की किलेबंदी
मेयर चुनाव से पहले शिंदे गुट ने अपने पार्षदों को एक निजी होटल में ठहराया है। पार्टी का कहना है कि यह तीन दिवसीय ‘ओरिएंटेशन प्रोग्राम’ है, क्योंकि 29 में से 20 पार्षद पहली बार चुने गए हैं। वहीं विपक्ष ने इसे ‘पार्षदों को बंधक बनाने’ की कोशिश करार दिया है।शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने होटल को ‘जेल’ बताते हुए पार्षदों को ‘रिहा’ करने की मांग की है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उपमुख्यमंत्री होने के बावजूद एकनाथ शिंदे अपने ही पार्षदों पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। जवाब में शिंदे गुट ने विपक्ष पर ही क्रॉस वोटिंग और अनुपस्थिति की साजिश रचने का आरोप लगाया है।
2017 की यादें और आज की राजनीति
बता दें कि 2017 के बीएमसी चुनावों में भाजपा ने मेयर पद की दौड़ से हटकर अविभाजित शिवसेना का समर्थन किया था। अब वही इतिहास दोहराए जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं, जिससे शिंदे गुट को मेयर पद की सौदेबाजी से दूर रखा जा सके।
जनवरी के अंत तक मेयर चुनाव
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के विश्व आर्थिक मंच की बैठक के लिए दावोस दौरे के कारण फिलहाल महायुति में आंतरिक चर्चा रुकी हुई है। सूत्रों के मुताबिक, बीएमसी मेयर चुनाव की प्रक्रिया जनवरी के अंत तक पूरी होने की संभावना है।
बता दें कि मेयर पद के लिए आरक्षण श्रेणी तय करने हेतु 22 जनवरी 2026 को लॉटरी निकाली जाएगी। इसके बाद अधिसूचना जारी होगी और सात दिन की नोटिस अवधि के बाद मतदान कराया जाएगा। ऐसे में मेयर चुनाव 29 से 31 जनवरी के बीच होने की संभावना जताई जा रही है।
मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनावों के नतीजों के बाद अब असली राजनीतिक जोड़-तोड़ शुरू हो गई है। मेयर पद को लेकर सत्ता के गलियारों में हलचल तेज है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और भाजपा के बीच पर्दे के पीछे संभावित समझौते की चर्चाएं चल रही हैं। इस संभावित रणनीति का उद्देश्य उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बढ़ते प्रभाव को सीमित करना बताया जा रहा है।
बीएमसी के 227 सदस्यीय सदन में भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि बहुमत का आंकड़ा 114 है। शिवसेना (उद्धव गुट) के पास 65, शिंदे गुट के पास 29, कांग्रेस के 24 और अन्य दलों के 20 पार्षद हैं। भाजपा और शिंदे गुट मिलकर 118 के आंकड़े तक पहुंचते हैं, लेकिन यह बहुमत बेहद नाजुक माना जा रहा है।
ठाकरे गुट की ‘तटस्थ’ भूमिका की चर्चा
बता दें कि राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोरों पर है कि उद्धव ठाकरे गुट अपने पार्षदों को मेयर चुनाव के दौरान मतदान से दूर रहने का निर्देश दे सकता है। ऐसी स्थिति में भाजपा बिना बड़े विरोध के अपना मेयर चुन सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम 2017 के बीएमसी चुनावों में भाजपा द्वारा उद्धव ठाकरे को दिए गए समर्थन की ‘राजनीतिक वापसी’ हो सकता है। हालांकि, भाजपा नेता प्रवीण दरेकर और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ठाकरे गुट से किसी भी तरह की बातचीत की खबरों को सार्वजनिक रूप से खारिज किया है। बावजूद इसके, मुंबई की राजनीति में संभावनाओं के बदलते समीकरणों से इनकार नहीं किया जा रहा।
शिंदे गुट की किलेबंदी
मेयर चुनाव से पहले शिंदे गुट ने अपने पार्षदों को एक निजी होटल में ठहराया है। पार्टी का कहना है कि यह तीन दिवसीय ‘ओरिएंटेशन प्रोग्राम’ है, क्योंकि 29 में से 20 पार्षद पहली बार चुने गए हैं। वहीं विपक्ष ने इसे ‘पार्षदों को बंधक बनाने’ की कोशिश करार दिया है।शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने होटल को ‘जेल’ बताते हुए पार्षदों को ‘रिहा’ करने की मांग की है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उपमुख्यमंत्री होने के बावजूद एकनाथ शिंदे अपने ही पार्षदों पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। जवाब में शिंदे गुट ने विपक्ष पर ही क्रॉस वोटिंग और अनुपस्थिति की साजिश रचने का आरोप लगाया है।
2017 की यादें और आज की राजनीति
बता दें कि 2017 के बीएमसी चुनावों में भाजपा ने मेयर पद की दौड़ से हटकर अविभाजित शिवसेना का समर्थन किया था। अब वही इतिहास दोहराए जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं, जिससे शिंदे गुट को मेयर पद की सौदेबाजी से दूर रखा जा सके।
जनवरी के अंत तक मेयर चुनाव
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के विश्व आर्थिक मंच की बैठक के लिए दावोस दौरे के कारण फिलहाल महायुति में आंतरिक चर्चा रुकी हुई है। सूत्रों के मुताबिक, बीएमसी मेयर चुनाव की प्रक्रिया जनवरी के अंत तक पूरी होने की संभावना है।
बता दें कि मेयर पद के लिए आरक्षण श्रेणी तय करने हेतु 22 जनवरी 2026 को लॉटरी निकाली जाएगी। इसके बाद अधिसूचना जारी होगी और सात दिन की नोटिस अवधि के बाद मतदान कराया जाएगा। ऐसे में मेयर चुनाव 29 से 31 जनवरी के बीच होने की संभावना जताई जा रही है।












