स्वतंत्रता दिवस पर जरूर याद आती है नोएडा के नलगढ़ा में भगत सिंह की शरणस्थली
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 03:27 PM
स्वतंत्रता दिवस-2025 भारत का 78 वां स्वतंत्रता दिवस है। स्वतंत्रता दिवस पर हर साल नोएडा शहर को भी याद किया जाता है। नोएडा शहर का भारत के स्वतंत्रता दिवस के साथ गहरा सम्बंद्ध है। नोएडा में आज भी वह गाँव मौजूद है जहां भारत के अमर शहीद भगत सिंह तथा उनके साथी शरण लिया करते थे। इतना ही नहीं भारत को स्वतंत्रता दिवस का दिन दिखाने के लिए हुई क्रांति के दौरान दिल्ली की एसेंबली में जो बम फोड़ा गया था वह बम नोएडा शहर की धरती पर ही तैयार किया गया था। यहां हम आपको स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नोएडा की भूली हुई गाथा याद दिला रहे हैं। Independence Day-2025
नोएडा के नलगढ़ा गाँव में था शहीद भगत सिंह का छिपा हुआ ठिकाना
15 अगस्त के आसपास देशभर में आज़ादी के दीवानों को याद किया जाता है, लेकिन नोएडा के सेक्टर-145 में स्थित एक छोटा-सा गाँव नलगढ़ा (Nalgarha) अभी भी गुमनाम है। यह वही जगह है जिसने कभी महान क्रांतिकारी भगत सिंह जैसे स्वतंत्रता सेनानी को अंग्रेज़ों से छिपने की पनाह दी थी। स्थानीय लोग और स्वतंत्रता सेनानियों के वंशज गर्व के साथ बताते हैं कि इस गाँव का भारत के स्वतंत्रता संग्राम से गहरा नाता रहा है, पर वे इस बात पर अफ़सोस भी जताते हैं कि उनकी विरासत को आज तक वह पहचान और सम्मान नहीं मिला जिसकी वह हक़दार है।
नोएडा शहर में स्थित नलगढ़ा गाँव को हर साल स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जरूर याद किया जाता है। सदियों से यमुना नदी के पार का इलाक़ा दिल्ली से दूर और अनदेखा रहा था। वर्तमान नोएडा का यह क्षेत्र ब्रिटिश शासन के दौर में दलदली ज़मीन और घने जंगलों से भरा एक सुनसान इलाक़ा था। नलगढ़ा गाँव के एक ओर हिंडन नदी और दूसरी ओर यमुना बहती है; लगभग सौ साल पहले इन नदियों के बीच बसी इस निर्जन जगह की अपरिचित लोकेशन और घने जंगलों ने अंग्रेज़ों से छुपने में क्रांतिकारियों की काफी मदद की। कहा जाता है कि भगत सिंह कानपुर से 1924 में निकलकर कुछ समय के लिए इसी क्षेत्र के एक गाँव में प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक बनकर रहे थे। उस दौर में हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) जैसे क्रांतिकारी दल के सदस्य गुपचुप उनसे मिलने यहाँ आते थे। Independence Day-2025
वर्ष-1972 में नोएडा के नलगढ़ा में थे भगत सिंह
सन 1927 के आसपास भगत सिंह वास्तव में आज के नोएडा शहर में स्थित नलगढ़ा की इसी जमीन पर मौजूद थे। गाँव के बुज़ुर्ग आज भी बताते हैं कि भगत सिंह अकेले नहीं थे- उनके साथ सुखदेव, राजगुरु जैसे क्रांतिकारी साथी और आसपास के फूल सिंह, करनैल सिंह जैसे स्थानीय स्वतंत्रता सेनानी भी यहाँ आए थे। गाँव वालों की मानें तो अंग्रेज़ों से बचने के लिए भगत सिंह अकसर अपना हुलिया बदलकर रहते थे और आसपास के खेतों में प्रयोग करते थे। इसी गाँव में रहकर भगत सिंह और उनके साथियों ने बम बनाने और उन्हें परखने की योजना बनाई थी। आठ अप्रैल 1929 को दिल्ली की केंद्रीय विधान सभा में जो बम फेंके गए, वे कथित तौर पर नलगढ़ा में ही तैयार किए गए थे।
ब्रिटिश हुकूमत को चुनौती देने वाली इस कार्रवाही की बुनियाद कहीं न कहीं इसी गाँव में रखी गई थी। नलगढ़ा के गुरुद्वारे में आज भी एक बड़ा पत्थर संभालकर रखा गया है, जिसके बारे में मान्यता है कि भगत सिंह और उनके साथियों ने इसी पर विस्फोटक मिश्रण तैयार किया था। इस पत्थर पर दिखाई देते दो छोटे गड्ढे मानो उन रसायनों की कहानी कहते हैं जो भारत की आज़ादी की लड़ाई में इस्तेमाल हुए थे। ग्रामीण इस पत्थर को अपने इतिहास की अनमोल निशानी मानते हैं और इसे सम्मानपूर्वक गुरुद्वारे में सजाकर रखा गया है। कहा जाता है कि यह वही पत्थर है जिस पर केमिकल मिलाकर बम बनाए गए थे, जिनका इस्तेमाल 1929 में दिल्ली असेंबली बमकांड में हुआ। आज़ादी के दीवानों की उन गुप्त गतिविधियों की यह मूक निशानी पीढ़ी दर पीढ़ी गाँव के गौरव और बलिदान की गाथा सुनाती आ रही है। Independence Day-2025
स्वतंत्रता दिवस को लेकर आज़ाद भारत में बदलता दौर, भूली यादें
आपको बता दें कि स्वतंत्रता दिवस को लेकर आजाद भारत में सोच बदलती रही है। 1947 में आज़ादी मिलने और देश के बंटवारे के बाद नोएडा के इलाके में अनेक सिख एवं गुर्जर परिवार आकर बसे। 1950 के दशक तक नलगढ़ा एक स्थायी बस्ती का रूप लेने लगा, जब करीब 300 परिवारों ने जंगल काटकर यहाँ अपना आशियाना बनाया। यहीं आजीवन रहने वाले करनैल सिंह जैसे बुज़ुर्ग स्वतंत्रता सेनानी ने अपनी जि़न्दगी इसी गाँव में गुज़ारी। ग्रामीण अमरजीत सिंह बताते हैं कि करनैल सिंह उम्र के अस्सीवें पड़ाव पर भी हृष्ट-पुष्ट थे और आज़ादी के बाद भी रोज़ साइकिल चलाकर दूर दादरी कस्बे तक अख़बार लेने जाते थे।
जब लोग उनसे पूछते कि इतनी दूर क्यों, तो करनैल मुस्कुराकर कहते- "देखूं तो देश कितना बदल रहा है"। ये वही करनैल सिंह थे जिन्होंने भगत सिंह के साथ मिलकर आज़ादी की लड़ाई लड़ी और बाद में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आज़ाद हिंद फ़ौज में भी योगदान दिया। हालांकि वक़्त के साथ नलगढ़ा का परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है। कभी चारों ओर जंगल से घिरा यह इलाक़ा अब नोएडा के सेक्टर-145 में समा चुका है। गाँव के आसपास तेज रफ़्तार यमुना एक्सप्रेसवे दौड़ता है और ऊँची-ऊँची रिहायशी इमारतें खड़ी हो चुकी हैं। वीरान पनाहगाह रहा नलगढ़ा आज आधुनिक विकास के बीच दब गया है, पर इसके इतिहास के निशान पूरी तरह नहीं मिटे। गाँव के गुरुद्वारे में रखे पत्थर और बुज़ुर्गों की कहानियाँ इस जगह की महत्ता की याद दिलाते हैं। Independence Day-2025
नलगढ़ा को आज भी नहीं मिला वह सम्मान
आज़ादी के करीब आठ दशक बाद भी इस "क्रांतिकारियों के गाँव" को वह सम्मान नहीं मिला जिसकी उम्मीद थी। स्थानीय लोग शिकायत करते हैं कि सरकार ने यहाँ के वीरों की अनदेखी की है – न कोई स्मारक बना, न उनकी याद में सालाना आयोजन होता है। बीते स्वतंत्रता दिवस पर गाँव में शायद ही किसी घर पर तिरंगा नजऱ आया था। गुरुद्वारे के ग्रंथि जोगिंदर सिंह दर्द के साथ पूछते हैं, "आज हम अपने पूर्वजों की बदौलत आज़ादी मना पा रहे हैं। अगर हमारा देश उनकी भूमिका को पहचान कर इस गाँव को उसका हक़ का सम्मान नहीं दे सकता, तो हम क्यों यह आज़ादी मनाएँ?" उनकी पीड़ा उस उपेक्षा को बयां करती है जो नलगढ़ा ने झेली है। Independence Day-2025
नोएडा प्राधिकरण ने सेक्टर-145 में शहीद भगत सिंह के नाम पर एक स्मारक पार्क बनाने की योजना घोषित की थी। तस्वीर में नलगढ़ा की खाली ज़मीन पर लगा स्मारक स्थल का बोर्ड इस इंतज़ार का प्रतीक है। वर्ष 2015 में इस भूखंड पर पार्क और मेमोरियल बनाने की बात कही गई थी, लेकिन आज भी यह बोर्ड सूनी जमीन पर अकेला खड़ा है। इसके आसपास गगनचुंबी इमारतों का नया नोएडा बस चुका है, पर यह बोर्ड मानो अतीत की ओर इशारा करके पूछ रहा है कि उन बलिदानों की याद को ठोस रूप कब मिलेगा। नलगढ़ा के लोग चाहते हैं कि उनकी मिट्टी की इस विरासत को आधिकारिक मान्यता मिले, ताकि आने वाली पीढिय़ाँ जान सकें कि उनके शहर की नींव में किसका ख़ून-पसीना शामिल है।
नोएडा तथा ग्रेटर नोएडा से जुड़े प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों को जानना जरूरी है
जब हम स्वतंत्रता दिवस की बात कर रहे हैं तो हमें नोएडा तथा ग्रेटर नोएडा से जुड़े रह चुके स्वतंत्रता सेनानियों की बात करना भी जरूरी है।
भगत सिंह -महान क्रांतिकारी, जिन्होंने ब्रिटिश राज के ख़िलाफ़ नौजवान भारत सभा व अन्य संगठनों के जरिए संघर्ष किया। भगत सिंह ने नोएडा के नलगढ़ा गाँव को कुछ समय के लिए अपना गुप्त ठिकाना बनाया और यहीं अपने साथियों संग बम परीक्षण व योजना बनाई।
सुखदेव थापर - भगत सिंह के करीबी साथी और लाहौर षडय़ंत्र केस के शहीद। सुखदेव नलगढ़ा में भगत सिंह से मिलने आते थे और इस क्षेत्र में क्रांतिकारी गतिविधियों में सहयोग देते थे।
शिवराम राजगुरु - भगत सिंह के साथी, जिन्होंने सांडर्स हत्याकांड में सहयोग किया था। कहा जाता है कि राजगुरु ने भी नोएडा क्षेत्र (नलगढ़ा) में छिपकर कुछ समय बिताया और भगत सिंह के साथ मिलकर रणनीति बनाई।
चंद्रशेखर आज़ाद - हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी के प्रमुख नेता और भगत सिंह के मार्गदर्शक। लोककथाओं के अनुसार आज़ाद ने भी कुछ समय के लिए इस इलाके में गुप्त शरण ली थी, क्योंकि दिल्ली से लगते यमुना पार के इन जंगलों में अंग्रेज़ों की पहुँच मुश्किल थी।
बटुकेश्वर दत्त - क्रांतिकारी जिन्होंने भगत सिंह के साथ मिलकर दिल्ली असेंबली में बम फेंका था। दत्त भी भगत सिंह के सहयोगी थे और नलगढ़ा में बम बनाने की तैयारी व परीक्षण में शामिल रहे; यही वे बम थे जिनसे ब्रिटिश सरकार को चेतावनी दी गई थी।
सुभाष चंद्र बोस - आज़ाद हिंद फ़ौज (INA) के संस्थापक नेताजी भले सीधे नोएडा क्षेत्र में न रहे हों, लेकिन उनकी सेना के कई सदस्यों ने आज़ादी की लड़ाई के दौरान नलगढ़ा समेत गौतमबुद्ध नगर के आसपास शरण ली थी। नलगढ़ा में आज़ाद हिंद फ़ौज से जुड़े करनैल सिंह जैसे स्वतंत्रता सेनानी रहते थे, जिन्होंने आज़ादी के बाद भी इस गाँव को अपना घर बनाया और संघर्ष की कहानियों को जीवित रखा।
नोएडा का नलगढ़ा गाँव आज भले ही गुमनामी में है, लेकिन स्वतंत्रता संग्राम में इसकी भूमिका गौरवशाली रही है। आधुनिक चमक-दमक के बीच दब चुकी इस विरासत को उजागर करने की ज़रूरत है, ताकि स्वतंत्रता दिवस के जश्न के मौके पर हम उन अनसुने नायकों को भी नमन कर सकें जिन्होंने चुपचाप राष्ट्र की आज़ादी की बुनियाद रखी थी। Independence Day-2025