उत्तर प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला: नक्शा पास कराने की भागदौड़ खत्म

ई व्यवस्था के तहत भू-स्वामी खुद ऑनलाइन आवेदन कर कुछ ही मिनटों में अपने मानचित्र की मंजूरी हासिल कर सकेंगे। इसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से की गई है, जहां लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने नए बिल्डिंग बायलॉज के तहत फास्ट-ट्रैक सिस्टम फास्टपास लागू कर दिया है।

उत्तर प्रदेश सरकार की नई डिजिटल सौगात
उत्तर प्रदेश सरकार की नई डिजिटल सौगात
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar01 Jan 2026 11:17 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। उत्तर प्रदेश से जुड़ी यह खबर हर उत्तर प्रदेश वासी के लिए अति आवश्यक है। उत्तर प्रदेश से जुडी खर उत्तर प्रदेश सरकार ने दी है। उत्तर प्रदेश सरकार ने नए साल 2026 के मौके पर उत्तर प्रदेश वासियों को बड़ा तौफा दिया है। नए साल 2026 पर उत्तर प्रदेश सरकार ने लोगों को बड़ी सुविधा देते हुए भवन मानचित्र (नक्शा) स्वीकृति की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और तेज बना दिया है। अब घर या दुकान का नक्शा पास कराने के लिए विकास प्राधिकरण के दफ्तरों के चक्कर लगाने की मजबूरी नहीं रहेगी। नई व्यवस्था के तहत भू-स्वामी खुद ऑनलाइन आवेदन कर कुछ ही मिनटों में अपने मानचित्र की मंजूरी हासिल कर सकेंगे। इसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से की गई है, जहां लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने नए बिल्डिंग बायलॉज के तहत फास्ट-ट्रैक सिस्टम ‘फास्टपास’ लागू कर दिया है। एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के अनुसार, ‘फास्टपास’ के जरिए 100 वर्गमीटर तक के आवासीय और 30 वर्गमीटर तक के व्यावसायिक भवनों के नक्शे अब स्वयं भू-स्वामी ऑनलाइन माध्यम से स्वीकृत करा सकेंगे

map.up.gov.in पर होगा आवेदन

उत्तर प्रदेश सरकार की इस नई डिजिटल व्यवस्था में आवेदकों को map.up.gov.in पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। पूरी प्रक्रिया को डिजिटल, पारदर्शी और यूजर-फ्रेंडली रखा गया है, ताकि उत्तर प्रदेश के आम नागरिक बिना किसी बिचौलिये, बिना भागदौड़ और बिना अनावश्यक देरी के अपना नक्शा पास करा सकें। आवेदन की शुरुआत पोर्टल पर नाम और मोबाइल नंबर दर्ज कर रजिस्ट्रेशन से होगी। इसके बाद आवेदक अपना लॉगिन आईडी और पासवर्ड बनाकर सिस्टम में प्रवेश करेगा और वहीं से मानचित्र अपलोड कर सकेगा। इतना ही नहीं, पोर्टल पर ही स्वतः गणना के आधार पर देय शुल्क दिख जाएगा, जिसे आवेदक ऑनलाइन भुगतान कर तुरंत प्रक्रिया आगे बढ़ा सकेगा।

भू-स्वामी को देना होगा पूरा विवरण

उत्तर प्रदेश में फास्टपास के जरिए नक्शा स्वीकृत कराने से पहले भू-स्वामी को यह सुनिश्चित करना होगा कि संबंधित भूखण्ड का लैंड यूज मास्टर प्लान के अनुरूप हो। यानी नियमों के खिलाफ जाकर अब कोई भी आवेदन आगे नहीं बढ़ पाएगा। आवेदन करते समय भू-स्वामी को पोर्टल पर कुछ जरूरी जानकारियां स्व-प्रमाणित (Self-Verified) करनी होंगी, ताकि मंजूरी की प्रक्रिया तेज भी रहे और पारदर्शी भी। इनमें भूखण्ड की सटीक लोकेशन, आसपास की सड़कों की लंबाई-चौड़ाई, प्रस्तावित भवन की ऊंचाई और कवर्ड एरिया, फ्रंट-साइड-रियर सेटबैक से जुड़ी जानकारी के साथ-साथ प्रवेश-निकास द्वार और पार्किंग व्यवस्था का पूरा ब्योरा शामिल होगा।

मिनटों में मिलेगा प्रमाणित नक्शा और सर्टिफिकेट

उत्तर प्रदेश में लागू इस नई डिजिटल व्यवस्था की खासियत यह है कि जैसे ही भू-स्वामी मानचित्र के साथ पूरा विवरण पोर्टल पर दर्ज करेगा, सिस्टम तय मानकों के आधार पर तुरंत सत्यापन शुरू कर देगा। अगर जानकारी और मानक सही पाए गए, तो कुछ ही मिनटों में नक्शा स्वीकृत हो जाएगा। मंजूरी मिलते ही आवेदक को पोर्टल पर ही ऑटो-जनरेटेड प्रमाणित मानचित्र और स्वीकृति प्रमाणपत्र (सर्टिफिकेट) उपलब्ध करा दिया जाएगा, जिसे डाउनलोड कर सीधे उपयोग किया जा सकेगा। UP News

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उत्तर प्रदेश के इस शहर को नए साल की बड़ी सौगात, गंगा पर छह लेन ब्रिज लगभग तैयार

प्रयागराज में गंगा के उस पार फाफामऊ क्षेत्र की ओर रोज बड़ी संख्या में लोग आवागमन करते हैं। वर्तमान में वहां मौजूद पुराने पुल पर सुबह और शाम के समय लंबा जाम लगना आम बात है। कई बार लोगों को घंटों तक वाहनों में फंसे रहना पड़ता है। इसी समस्या को देखते हुए लंबे समय से एक नए पुल की मांग की जा रही थी।

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गंगा पर बन रहा पुल
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar31 Dec 2025 07:17 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज शहरवासियों के लिए नया साल बड़ी खुशखबरी लेकर आ रहा है। गंगा नदी पर बन रहा बहुप्रतीक्षित छह लेन पुल अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। इस पुल के चालू होते ही रोजाना फाफामऊ और शहर के बीच सफर करने वाले हजारों लोगों को जाम की गंभीर समस्या से राहत मिलने वाली है। प्रयागराज में गंगा के उस पार फाफामऊ क्षेत्र की ओर रोज बड़ी संख्या में लोग आवागमन करते हैं। वर्तमान में वहां मौजूद पुराने पुल पर सुबह और शाम के समय लंबा जाम लगना आम बात है। कई बार लोगों को घंटों तक वाहनों में फंसे रहना पड़ता है। इसी समस्या को देखते हुए लंबे समय से एक नए पुल की मांग की जा रही थी।

10 किलोमीटर लंबा अत्याधुनिक छह लेन पुल का हो रहा निर्माण

योगी सरकार ने इस मांग को स्वीकार करते हुए गंगा पर 10 किलोमीटर लंबे अत्याधुनिक छह लेन पुल के निर्माण को मंजूरी दी थी। यह विशाल पुल गंगापार के मलाका क्षेत्र से शुरू होकर शहर के बेली चौराहे तक बनाया गया है। पुल का निर्माण आधुनिक तकनीक से किया गया है, जिससे यह लंबे समय तक सुरक्षित और टिकाऊ रहेगा। इस परियोजना पर लगभग 2,000 करोड़ रुपये की लागत आई है। फरवरी 2021 में शुरू हुए इस पुल निर्माण कार्य का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा पूरा हो चुका है। फिलहाल अंतिम चरण के कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। पहले इसे महाकुंभ 2025 तक शुरू करने की योजना थी, लेकिन तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से इसकी समय सीमा बढ़ाकर 2026 कर दी गई।

प्रयागराज के अंदर यातायात का दबाव कम होगा

जानकारी के अनुसार, पुल को सितंबर 2026 तक आम जनता के लिए खोलने की तैयारी है। यह पुल 67 मजबूत पिलरों पर खड़ा है, जो इसे अत्यधिक भार सहन करने में सक्षम बनाते हैं। इस छह लेन ब्रिज के शुरू होने से न सिर्फ प्रयागराज के अंदर यातायात का दबाव कम होगा, बल्कि लखनऊ, कानपुर, आगरा और दिल्ली जैसे बड़े शहरों की ओर जाने वाले यात्रियों को भी सीधा और सुगम मार्ग मिलेगा। इससे यात्रा समय घटेगा और ईंधन की भी बचत होगी। कुल मिलाकर, गंगा पर बना यह नया पुल प्रयागराज के यातायात ढांचे को एक नई दिशा देगा और शहर के विकास में अहम भूमिका निभाएगा। नए साल पर यह परियोजना प्रयागराजवासियों के लिए किसी बड़ी सौगात से कम नहीं है।

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उत्तर प्रदेश में लेखपाल भर्ती में आरक्षण विवाद का मामला, योगी ने दिए निर्देश

योगी आदित्यनाथ की सरकार ने सभी सरकारी भर्तियों में आरक्षण नियमों का सख्ती से पालन करने का निर्देश जारी किया। इसका मकसद न केवल विपक्ष के आरोपों का जवाब देना था, बल्कि चुनावी साल में पिछड़े, दलित और अन्य आरक्षित वर्ग के असंतोष को कम करना भी था।

cm yogi (27)
योगी आदित्यनाथ 1
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar31 Dec 2025 06:21 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश में हाल ही में लेखपाल भर्ती में आरक्षण के नियमों के पालन को लेकर विवाद खड़ा हुआ। शिकायत थी कि ओबीसी वर्ग को उनके तय प्रतिशत से कम पद दिए गए, जबकि नियम के अनुसार उन्हें अधिक हिस्सेदारी मिलनी चाहिए थी। यह मामला पंचायत चुनाव 2025 के पहले राजनीतिक रूप से संवेदनशील बन गया। योगी आदित्यनाथ की सरकार ने सभी सरकारी भर्तियों में आरक्षण नियमों का सख्ती से पालन करने का निर्देश जारी किया। इसका मकसद न केवल विपक्ष के आरोपों का जवाब देना था, बल्कि चुनावी साल में पिछड़े, दलित और अन्य आरक्षित वर्ग के असंतोष को कम करना भी था। मुख्य सचिव (नियुक्ति एवं कार्मिक) ने सभी विभागों और भर्ती एजेंसियों को निर्देश दिए कि वर्टिकल आरक्षण (एससी, एसटी, ओबीसी) और हॉरिजॉन्टल आरक्षण (महिला, दिव्यांग, पूर्व सैनिक आदि) का पूरा पालन सुनिश्चित किया जाए।

आरक्षण और पदों का विवरण

सरकारी नौकरियों में कुल 60% आरक्षण लागू है। लेखपाल भर्ती में ओबीसी को शुरू में केवल 18% पद दिए गए थे, जबकि नियम के मुताबिक उन्हें 27% पद मिलना चाहिए था। विरोध और समीक्षा के बाद ओबीसी के पद बढ़ाए गए और सामान्य वर्ग के पद घटाए गए।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे आरक्षित वर्ग विरोधी और अन्यायपूर्ण कदम बताया। जैसे ही यह सरकार के संज्ञान में आया इस पूरी तरह से सुधार लिया गया।

सामान्य वर्ग के वोटरों को खुश करने के लिए नियमों की अनदेखी

उनका आरोप था कि सरकार सामान्य वर्ग के वोटरों को खुश करने के लिए जानबूझकर नियमों की अनदेखी कर रही थी। सरकार ने इस विवाद के बाद स्पष्ट किया कि भविष्य में सभी भर्तियों में आरक्षण का पूर्ण और पारदर्शी पालन किया जाएगा। लेखपाल भर्ती विवाद ने यह दिखाया कि राजनीतिक दबाव और चुनावी संवेदनशीलता के समय में आरक्षण एक अहम मुद्दा बन जाता है। योगी सरकार ने इसे शांत करने और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कड़े कदम उठाए।

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