उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा कॉरिडोर तैयार, गंगा एक्सप्रेसवे 98% पूरा

यह कॉरिडोर मेरठ के बिजौली गांव से निकलकर प्रयागराज के जुदापुर दांडू तक पहुंचेगा और रास्ते में उत्तर प्रदेश के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करते हुए व्यापार, पर्यटन और निवेश को नई धार देगा। उम्मीद है कि एक्सप्रेसवे के शुरू होते ही माल ढुलाई तेज होगी,

गंगा एक्सप्रेसवे
गंगा एक्सप्रेसवे
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar15 Dec 2025 04:17 PM
bookmark

UP News : उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर बनने जा रहा गंगा एक्सप्रेसवे अब अपने फिनिशिंग टच के बेहद करीब है। UPEIDA के अनुसार 594 किमी लंबे इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का 98% निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। अब बारी है औपचारिक ट्रायल रन, सेफ्टी ऑडिट और क्वालिटी चेक की इन प्रक्रियाओं के बाद इसे 2026 की शुरुआत तक आम लोगों के लिए खोलने का लक्ष्य रखा गया है। एक्सप्रेसवे चालू होते ही मेरठ से प्रयागराज का सफर, जो अभी 11–12 घंटे तक थका देता है, अनुमान है कि 6–7 घंटे में सिमट जाएगा

यूपी को पूर्व-पश्चिम में जोड़ने वाला ‘फास्ट ट्रैक’

भदोही के बेमिसाल कालीन हों या मुरादाबाद का चमकता पीतल, फिरोजाबाद का कांच हो या पूर्वांचल की उपज उत्तर प्रदेश की पहचान हमेशा दुनिया तक पहुंची, लेकिन राज्य के भीतर पश्चिम से पूर्व तक तेज और भरोसेमंद सड़क कनेक्टिविटी की कमी बरसों से सबसे बड़ी चुनौती रही। अब इसी खालीपन को भरने के लिए गंगा एक्सप्रेसवे आकार ले रहा है। यह कॉरिडोर मेरठ के बिजौली गांव से निकलकर प्रयागराज के जुदापुर दांडू तक पहुंचेगा और रास्ते में उत्तर प्रदेश के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करते हुए व्यापार, पर्यटन और निवेश को नई धार देगा। उम्मीद है कि एक्सप्रेसवे के शुरू होते ही माल ढुलाई तेज होगी, बाजारों तक पहुंच आसान बनेगी और रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे।

12 जिलों से गुजरकर 518 गांवों को देगा सीधा फायदा

गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के 12 जिलों - मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज—से गुजरते हुए प्रदेश की पश्चिम-से-पूर्व धड़कन को एक ही रफ्तार में जोड़ने जा रहा है। बताया जा रहा है कि इसका रूट करीब 518 गांवों को छूएगा, जिससे गांवों से मंडियों तक पहुंच आसान होगी, किसानों के परिवहन खर्च घटेंगे और स्थानीय स्तर पर छोटे कारोबार को नई “हाईवे अर्थव्यवस्था” का फायदा मिलेगा। यह एक्सप्रेसवे 6 लेन का बन रहा है, जिसे जरूरत पड़ने पर 8 लेन तक बढ़ाया जा सकेगा। 120 किमी/घंटा की निर्धारित अधिकतम गति के साथ लक्ष्य यही है कि सफर तेज भी रहे और सुरक्षित भी। परियोजना DBFOT मॉडल (डिजाइन-बिल्ड-फाइनेंस-ऑपरेट-ट्रांसफर) पर आधारित है, यानी निर्माण से लेकर संचालन तक की जिम्मेदारी एक तय ढांचे के तहत निभाई जाएगी और उत्तर प्रदेश की कनेक्टिविटी को एक नई ऊंचाई मिलेगी।

लागत और निवेश

गंगा एक्सप्रेसवे को उत्तर प्रदेश की लंबी दूरी की ग्रोथ-लाइन माना जा रहा है और इसका पैमाना इसकी लागत से भी साफ झलकता है। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 37,350 करोड़ रुपये बताई गई है, जिसमें से लगभग 9,500 करोड़ रुपये सिर्फ भूमि अधिग्रहण पर खर्च हो चुके हैं। सरकार ने 2024–25 के बजट में भी इस एक्सप्रेसवे के लिए 2,057 करोड़ रुपये का प्रावधान रखकर संकेत दे दिया है कि काम की रफ्तार थमने नहीं दी जाएगी। दावा है कि यह निवेश आगे चलकर उद्योग, व्यापार, लॉजिस्टिक्स और रोजगार के जरिए कई गुना लौटेगा यानी गंगा एक्सप्रेसवे सिर्फ सड़क नहीं, उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति देने वाली बड़ी पूंजीगत परियोजना है।

डेडलाइन पर सरकार सख्त

गंगा एक्सप्रेसवे की नींव 18 दिसंबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शिलान्यास के साथ रखी गई थी। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समय-समय पर समीक्षा कर प्रोजेक्ट को तय समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए, ताकि पश्चिम से पूर्व तक उत्तर प्रदेश की कनेक्टिविटी को नई रफ्तार मिल सके। हालांकि दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के चलते GRAP-4 जैसी पाबंदियों के दौरान निर्माण कार्य की गति पर असर पड़ा, लेकिन अब प्रोजेक्ट एक बार फिर फिनिशिंग मोड में लौट आया है। UPEIDA के मुताबिक एक्सप्रेसवे पर 1498 बड़े स्ट्रक्चर प्रस्तावित हैं, जिनमें 1497 पूरे हो चुके हैं। शेष काम को तेजी से पूरा कर रोड सेफ्टी और क्वालिटी एक्सपर्ट्स की जांच के बाद ट्रायल रन की औपचारिक प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

सुविधाएं और बड़े स्ट्रक्चर

गंगा एक्सप्रेसवे को सिर्फ “तेज सड़क” नहीं, बल्कि यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार आधुनिक हाईवे-कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जा रहा है। प्रस्तावित सुविधाओं में 2 मुख्य टोल प्लाजा, 15 रैंप टोल, और 9 सुविधा केंद्र शामिल हैंजहां खाना-पीना, शौचालय, विश्राम जैसी बेसिक से लेकर जरूरी सेवाएं उपलब्ध होंगी। इंजीनियरिंग के लिहाज से भी यह प्रोजेक्ट अहम है: गंगा नदी पर 960 मीटर और रामगंगा पर 720 मीटर लंबे पुल, साथ में 18 फ्लाईओवर और 8 रोड ओवर ब्रिज प्रस्तावित किए गए हैं, ताकि ट्रैफिक फ्लो बाधित न हो और सफर सुरक्षित बना रहे। कनेक्टिविटी के मोर्चे पर योजना और भी बड़ी है गंगा एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे और आगरा–लखनऊ एक्सप्रेसवे से जोड़ने की तैयारी है। इससे पूर्वी यूपी से दिल्ली-एनसीआर तक यात्रा ज्यादा सीधी, तेज और भरोसेमंद होगी और उत्तर प्रदेश का रोड नेटवर्क देश में और मजबूती से अपनी पहचान बनाएगा। फेज-1 के बाद विस्तार की दिशा में भी रोडमैप तय है मेरठ/बुलंदशहर से हरिद्वार (मुजफ्फरनगर–रुड़की होकर) करीब 110–150 किमी का संभावित विस्तार, और प्रयागराज से बलिया तक (वाराणसी–गाजीपुर–भदोही–मिर्जापुर होकर) विस्तार का प्रस्ताव, जिसका सर्वे पूरा बताया जा रहा है और DPR तैयार होने की प्रक्रिया चल रही है।

कैसे आगे बढ़ा गंगा एक्सप्रेसवे

गंगा एक्सप्रेसवे की कहानी दरअसल उत्तर प्रदेश के “विजन से वर्क-ऑन-ग्राउंड” तक पहुंचने की लंबी यात्रा है। इसकी पहली रूपरेखा 2007 में ग्रेटर नोएडा–बलिया एक्सप्रेसवे के विचार के तौर पर सामने आई थी। फिर जनवरी 2019 में इसे औपचारिक पहचान मिली और नाम पड़ा “गंगा एक्सप्रेसवे”। सितंबर 2019 में अलाइनमेंट को मंजूरी मिलने के बाद परियोजना ने गति पकड़ी; फरवरी 2020 में बजट आवंटन की प्रक्रिया तेज हुई और मार्च 2021 में टेंडर समेत शुरुआती औपचारिकताएं आगे बढ़ीं। इसके बाद दिसंबर 2021 में शिलान्यास के साथ काम ने जमीन पर आकार लिया। UP News

संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

उत्तर प्रदेश को मिलेगा नया स्टार्टअप बूस्ट, ये एक्सप्रेस-वे बनेगा आर्थिक विकास की रीढ़

एक्सप्रेस-वे के चालू होने से कानपुर और लखनऊ के बीच आवागमन बेहद तेज और सुगम हो जाएगा। कम समय में यात्रा पूरी होने से स्टार्टअप्स, उद्योगों और निवेशकों के लिए दोनों शहरों के बीच तालमेल बढ़ेगा। बिजनेस मीटिंग्स, सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी लागत में भी उल्लेखनीय कमी आएगी।

expresway (5)
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस-वे
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar15 Dec 2025 03:34 PM
bookmark

UP News : उत्तर प्रदेश तेजी से देश के उभरते आर्थिक राज्यों में शामिल हो रहा है। इसी दिशा में एक बड़ा कदम है कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस-वे, जिसे भविष्य में एक आधुनिक स्टार्टअप और इनोवेशन कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा। यह परियोजना न केवल परिवहन को आसान बनाएगी, बल्कि व्यापार, तकनीक और रोजगार के नए अवसरों का द्वार भी खोलेगी। एक्सप्रेस-वे के चालू होने से कानपुर और लखनऊ के बीच आवागमन बेहद तेज और सुगम हो जाएगा। कम समय में यात्रा पूरी होने से स्टार्टअप्स, उद्योगों और निवेशकों के लिए दोनों शहरों के बीच तालमेल बढ़ेगा। बिजनेस मीटिंग्स, सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी लागत में भी उल्लेखनीय कमी आएगी।

कॉरिडोर एक समेकित आर्थिक क्षेत्र का रूप लेगा

यह कॉरिडोर धीरे-धीरे एक समेकित आर्थिक क्षेत्र का रूप लेगा, जहां टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स आधारित गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। एक्सप्रेस-वे के आसपास के इलाकों में आईटी पार्क, औद्योगिक जोन और विशेष आर्थिक क्षेत्र विकसित किए जाने की योजना है, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित होंगे। शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में भी इसका सकारात्मक असर देखने को मिलेगा। आईआईटी कानपुर और लखनऊ के प्रमुख शैक्षणिक व प्रबंधन संस्थानों के बीच सहयोग मजबूत होगा। इससे एडवांस टेक्नोलॉजी, डीप-टेक और रिसर्च आधारित स्टार्टअप्स को संयुक्त इन्क्यूबेशन, मेंटरशिप और नवाचार के नए अवसर मिलेंगे।

उत्तर भारत के प्रमुख स्टार्टअप हब के रूप में होगा स्थापित

राज्य सरकार की इंफ्रास्ट्रक्चर-केंद्रित नीतियों ने पहले ही निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है। यही कारण है कि इस एक्सप्रेस-वे को केवल सड़क परियोजना नहीं, बल्कि लंबी अवधि के आर्थिक विकास की आधारशिला के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने वाले स्टार्टअप्स को जन्म दे सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल लखनऊ को उत्तर भारत के प्रमुख स्टार्टअप हब के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाएगी। साथ ही, हजारों उच्च-वेतन वाली नौकरियों का सृजन कर उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में सहायक होगी।

संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

UNESCO सम्मान पर सीएम योगी का आह्वान: ‘परंपरा को अगली पीढ़ी तक पहुंचाएं’

मुख्यमंत्री योगी के मुताबिक, काशी की आध्यात्मिक ऊर्जा से लेकर मथुरा की भक्ति-परंपरा तक और गोरखपुर से वाराणसी तक उत्तर प्रदेश में आज संस्कृति, विश्वास और विकास की त्रिवेणी नई गति के साथ प्रवाहित हो रही है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar15 Dec 2025 03:08 PM
bookmark

UP News : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीपावली को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मिली मान्यता को “देश-प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण मील का पत्थर” बताते हुए प्रदेशवासियों के नाम एक भावुक पत्र लिखा है। इस संदेश को उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा करते हुए कहा कि यह उपलब्धि किसी एक पर्व की प्रशंसा भर नहीं, बल्कि भारतीय सनातन परंपरा, लोक-आस्था और सांस्कृतिक चेतना की वैश्विक स्वीकृति है। मुख्यमंत्री ने लिखा कि जब दीपों की यह दिव्य परंपरा अंतरराष्ट्रीय मंच पर सम्मानित होती है, तो वह उत्तर प्रदेश की उस सांस्कृतिक विरासत को भी नई पहचान देती है, जिसने सदियों से ‘आस्था और उत्सव’ को लोकजीवन की धड़कन बनाए रखा है। उन्होंने इसे यूपी की सांस्कृतिक यात्रा का स्वर्णिम अध्याय बताते हुए कहा कि आज प्रदेश की वही परंपरा दुनिया के सामने सम्मान और गौरव के रूप में चमक रही है।

अयोध्या से प्रयागराज तक संस्कृति की अविरल धारा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में अयोध्या का जिक्र करते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी के आगमन की स्मृति में दीपों से जगमगाती अयोध्या की परंपरा आज भी मन को उल्लास और श्रद्धा से भर देती है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 से उत्तर प्रदेश सरकार ने अयोध्या धाम में दीपोत्सव को नए कलेवर और भव्यता के साथ शुरू किया, जो अब प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान बनकर दुनिया तक अपनी रोशनी पहुँचा रहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि 500 वर्षों की प्रतीक्षा के बाद श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण पूरा होना केवल आस्था की विजय नहीं, बल्कि भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का निर्णायक संकेत है। मुख्यमंत्री योगी के मुताबिक, काशी की आध्यात्मिक ऊर्जा से लेकर मथुरा की भक्ति-परंपरा तक और गोरखपुर से वाराणसी तक उत्तर प्रदेश में आज संस्कृति, विश्वास और विकास की त्रिवेणी नई गति के साथ प्रवाहित हो रही है।

माघ मेले का आमंत्रण

सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने पत्र में प्रयागराज को आस्था और अनुशासन की “राजधानी” बताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में महाकुंभ, कांवड़ यात्रा जैसे विराट धार्मिक आयोजनों का संचालन अब पहले से अधिक सुगम, सुरक्षित और सुव्यवस्थित ढंग से हो रहा है। उन्होंने बताया कि इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए संगमनगरी प्रयागराज में माघ मेले का शुभारंभ जल्द होने जा रहा है और श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों के साथ देशभर के श्रद्धालुओं से अपील की कि वे इस पावन अवसर में सहभागी बनें और संगम की आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करें। योगी ने यह भी स्मरण कराया कि इसी वर्ष संपन्न महाकुंभ में 65 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं की सहभागिता ने दुनिया के सामने नए कीर्तिमान रखे और उत्तर प्रदेश की आयोजन क्षमता के साथ उसकी सांस्कृतिक शक्ति का संदेश वैश्विक मंच तक पहुंचाया।

सांस्कृतिक पुनर्जागरण की यात्रा में सहभागिता का आह्वान

पत्र के समापन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों से आग्रह किया कि वे इस गौरवपूर्ण सांस्कृतिक पुनर्जागरण के सहभागी बनेंअपनी परंपराओं को सिर्फ निभाएं नहीं, बल्कि उन्हें नई पीढ़ी की चेतना का हिस्सा बनाएं। उन्होंने कहा कि दीपावली को मिली वैश्विक मान्यता उत्तर प्रदेश की पहचान को विश्व मंच पर और मजबूत करती है, क्योंकि यह वही भूमि है जहां अयोध्या की दीप-परंपरा, काशी की आस्था और प्रयागराज का संगम मिलकर भारतीय संस्कृति को दिशा देते हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक यह सम्मान हर उत्तर प्रदेश वासी के लिए आत्मगौरव का अवसर है। UP News


संबंधित खबरें