उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा कॉरिडोर तैयार, गंगा एक्सप्रेसवे 98% पूरा
यह कॉरिडोर मेरठ के बिजौली गांव से निकलकर प्रयागराज के जुदापुर दांडू तक पहुंचेगा और रास्ते में उत्तर प्रदेश के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करते हुए व्यापार, पर्यटन और निवेश को नई धार देगा। उम्मीद है कि एक्सप्रेसवे के शुरू होते ही माल ढुलाई तेज होगी,

UP News : उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर बनने जा रहा गंगा एक्सप्रेसवे अब अपने फिनिशिंग टच के बेहद करीब है। UPEIDA के अनुसार 594 किमी लंबे इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का 98% निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। अब बारी है औपचारिक ट्रायल रन, सेफ्टी ऑडिट और क्वालिटी चेक की इन प्रक्रियाओं के बाद इसे 2026 की शुरुआत तक आम लोगों के लिए खोलने का लक्ष्य रखा गया है। एक्सप्रेसवे चालू होते ही मेरठ से प्रयागराज का सफर, जो अभी 11–12 घंटे तक थका देता है, अनुमान है कि 6–7 घंटे में सिमट जाएगा।
यूपी को पूर्व-पश्चिम में जोड़ने वाला ‘फास्ट ट्रैक’
भदोही के बेमिसाल कालीन हों या मुरादाबाद का चमकता पीतल, फिरोजाबाद का कांच हो या पूर्वांचल की उपज उत्तर प्रदेश की पहचान हमेशा दुनिया तक पहुंची, लेकिन राज्य के भीतर पश्चिम से पूर्व तक तेज और भरोसेमंद सड़क कनेक्टिविटी की कमी बरसों से सबसे बड़ी चुनौती रही। अब इसी खालीपन को भरने के लिए गंगा एक्सप्रेसवे आकार ले रहा है। यह कॉरिडोर मेरठ के बिजौली गांव से निकलकर प्रयागराज के जुदापुर दांडू तक पहुंचेगा और रास्ते में उत्तर प्रदेश के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करते हुए व्यापार, पर्यटन और निवेश को नई धार देगा। उम्मीद है कि एक्सप्रेसवे के शुरू होते ही माल ढुलाई तेज होगी, बाजारों तक पहुंच आसान बनेगी और रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे।
12 जिलों से गुजरकर 518 गांवों को देगा सीधा फायदा
गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के 12 जिलों - मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज—से गुजरते हुए प्रदेश की पश्चिम-से-पूर्व धड़कन को एक ही रफ्तार में जोड़ने जा रहा है। बताया जा रहा है कि इसका रूट करीब 518 गांवों को छूएगा, जिससे गांवों से मंडियों तक पहुंच आसान होगी, किसानों के परिवहन खर्च घटेंगे और स्थानीय स्तर पर छोटे कारोबार को नई “हाईवे अर्थव्यवस्था” का फायदा मिलेगा। यह एक्सप्रेसवे 6 लेन का बन रहा है, जिसे जरूरत पड़ने पर 8 लेन तक बढ़ाया जा सकेगा। 120 किमी/घंटा की निर्धारित अधिकतम गति के साथ लक्ष्य यही है कि सफर तेज भी रहे और सुरक्षित भी। परियोजना DBFOT मॉडल (डिजाइन-बिल्ड-फाइनेंस-ऑपरेट-ट्रांसफर) पर आधारित है, यानी निर्माण से लेकर संचालन तक की जिम्मेदारी एक तय ढांचे के तहत निभाई जाएगी और उत्तर प्रदेश की कनेक्टिविटी को एक नई ऊंचाई मिलेगी।
लागत और निवेश
गंगा एक्सप्रेसवे को उत्तर प्रदेश की लंबी दूरी की ग्रोथ-लाइन माना जा रहा है और इसका पैमाना इसकी लागत से भी साफ झलकता है। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 37,350 करोड़ रुपये बताई गई है, जिसमें से लगभग 9,500 करोड़ रुपये सिर्फ भूमि अधिग्रहण पर खर्च हो चुके हैं। सरकार ने 2024–25 के बजट में भी इस एक्सप्रेसवे के लिए 2,057 करोड़ रुपये का प्रावधान रखकर संकेत दे दिया है कि काम की रफ्तार थमने नहीं दी जाएगी। दावा है कि यह निवेश आगे चलकर उद्योग, व्यापार, लॉजिस्टिक्स और रोजगार के जरिए कई गुना लौटेगा यानी गंगा एक्सप्रेसवे सिर्फ सड़क नहीं, उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति देने वाली बड़ी पूंजीगत परियोजना है।
डेडलाइन पर सरकार सख्त
गंगा एक्सप्रेसवे की नींव 18 दिसंबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शिलान्यास के साथ रखी गई थी। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समय-समय पर समीक्षा कर प्रोजेक्ट को तय समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए, ताकि पश्चिम से पूर्व तक उत्तर प्रदेश की कनेक्टिविटी को नई रफ्तार मिल सके। हालांकि दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के चलते GRAP-4 जैसी पाबंदियों के दौरान निर्माण कार्य की गति पर असर पड़ा, लेकिन अब प्रोजेक्ट एक बार फिर फिनिशिंग मोड में लौट आया है। UPEIDA के मुताबिक एक्सप्रेसवे पर 1498 बड़े स्ट्रक्चर प्रस्तावित हैं, जिनमें 1497 पूरे हो चुके हैं। शेष काम को तेजी से पूरा कर रोड सेफ्टी और क्वालिटी एक्सपर्ट्स की जांच के बाद ट्रायल रन की औपचारिक प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
सुविधाएं और बड़े स्ट्रक्चर
गंगा एक्सप्रेसवे को सिर्फ “तेज सड़क” नहीं, बल्कि यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार आधुनिक हाईवे-कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जा रहा है। प्रस्तावित सुविधाओं में 2 मुख्य टोल प्लाजा, 15 रैंप टोल, और 9 सुविधा केंद्र शामिल हैं। जहां खाना-पीना, शौचालय, विश्राम जैसी बेसिक से लेकर जरूरी सेवाएं उपलब्ध होंगी। इंजीनियरिंग के लिहाज से भी यह प्रोजेक्ट अहम है: गंगा नदी पर 960 मीटर और रामगंगा पर 720 मीटर लंबे पुल, साथ में 18 फ्लाईओवर और 8 रोड ओवर ब्रिज प्रस्तावित किए गए हैं, ताकि ट्रैफिक फ्लो बाधित न हो और सफर सुरक्षित बना रहे। कनेक्टिविटी के मोर्चे पर योजना और भी बड़ी है गंगा एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे और आगरा–लखनऊ एक्सप्रेसवे से जोड़ने की तैयारी है। इससे पूर्वी यूपी से दिल्ली-एनसीआर तक यात्रा ज्यादा सीधी, तेज और भरोसेमंद होगी और उत्तर प्रदेश का रोड नेटवर्क देश में और मजबूती से अपनी पहचान बनाएगा। फेज-1 के बाद विस्तार की दिशा में भी रोडमैप तय है मेरठ/बुलंदशहर से हरिद्वार (मुजफ्फरनगर–रुड़की होकर) करीब 110–150 किमी का संभावित विस्तार, और प्रयागराज से बलिया तक (वाराणसी–गाजीपुर–भदोही–मिर्जापुर होकर) विस्तार का प्रस्ताव, जिसका सर्वे पूरा बताया जा रहा है और DPR तैयार होने की प्रक्रिया चल रही है।
कैसे आगे बढ़ा गंगा एक्सप्रेसवे
गंगा एक्सप्रेसवे की कहानी दरअसल उत्तर प्रदेश के “विजन से वर्क-ऑन-ग्राउंड” तक पहुंचने की लंबी यात्रा है। इसकी पहली रूपरेखा 2007 में ग्रेटर नोएडा–बलिया एक्सप्रेसवे के विचार के तौर पर सामने आई थी। फिर जनवरी 2019 में इसे औपचारिक पहचान मिली और नाम पड़ा “गंगा एक्सप्रेसवे”। सितंबर 2019 में अलाइनमेंट को मंजूरी मिलने के बाद परियोजना ने गति पकड़ी; फरवरी 2020 में बजट आवंटन की प्रक्रिया तेज हुई और मार्च 2021 में टेंडर समेत शुरुआती औपचारिकताएं आगे बढ़ीं। इसके बाद दिसंबर 2021 में शिलान्यास के साथ काम ने जमीन पर आकार लिया। UP News
UP News : उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर बनने जा रहा गंगा एक्सप्रेसवे अब अपने फिनिशिंग टच के बेहद करीब है। UPEIDA के अनुसार 594 किमी लंबे इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का 98% निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। अब बारी है औपचारिक ट्रायल रन, सेफ्टी ऑडिट और क्वालिटी चेक की इन प्रक्रियाओं के बाद इसे 2026 की शुरुआत तक आम लोगों के लिए खोलने का लक्ष्य रखा गया है। एक्सप्रेसवे चालू होते ही मेरठ से प्रयागराज का सफर, जो अभी 11–12 घंटे तक थका देता है, अनुमान है कि 6–7 घंटे में सिमट जाएगा।
यूपी को पूर्व-पश्चिम में जोड़ने वाला ‘फास्ट ट्रैक’
भदोही के बेमिसाल कालीन हों या मुरादाबाद का चमकता पीतल, फिरोजाबाद का कांच हो या पूर्वांचल की उपज उत्तर प्रदेश की पहचान हमेशा दुनिया तक पहुंची, लेकिन राज्य के भीतर पश्चिम से पूर्व तक तेज और भरोसेमंद सड़क कनेक्टिविटी की कमी बरसों से सबसे बड़ी चुनौती रही। अब इसी खालीपन को भरने के लिए गंगा एक्सप्रेसवे आकार ले रहा है। यह कॉरिडोर मेरठ के बिजौली गांव से निकलकर प्रयागराज के जुदापुर दांडू तक पहुंचेगा और रास्ते में उत्तर प्रदेश के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करते हुए व्यापार, पर्यटन और निवेश को नई धार देगा। उम्मीद है कि एक्सप्रेसवे के शुरू होते ही माल ढुलाई तेज होगी, बाजारों तक पहुंच आसान बनेगी और रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे।
12 जिलों से गुजरकर 518 गांवों को देगा सीधा फायदा
गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के 12 जिलों - मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज—से गुजरते हुए प्रदेश की पश्चिम-से-पूर्व धड़कन को एक ही रफ्तार में जोड़ने जा रहा है। बताया जा रहा है कि इसका रूट करीब 518 गांवों को छूएगा, जिससे गांवों से मंडियों तक पहुंच आसान होगी, किसानों के परिवहन खर्च घटेंगे और स्थानीय स्तर पर छोटे कारोबार को नई “हाईवे अर्थव्यवस्था” का फायदा मिलेगा। यह एक्सप्रेसवे 6 लेन का बन रहा है, जिसे जरूरत पड़ने पर 8 लेन तक बढ़ाया जा सकेगा। 120 किमी/घंटा की निर्धारित अधिकतम गति के साथ लक्ष्य यही है कि सफर तेज भी रहे और सुरक्षित भी। परियोजना DBFOT मॉडल (डिजाइन-बिल्ड-फाइनेंस-ऑपरेट-ट्रांसफर) पर आधारित है, यानी निर्माण से लेकर संचालन तक की जिम्मेदारी एक तय ढांचे के तहत निभाई जाएगी और उत्तर प्रदेश की कनेक्टिविटी को एक नई ऊंचाई मिलेगी।
लागत और निवेश
गंगा एक्सप्रेसवे को उत्तर प्रदेश की लंबी दूरी की ग्रोथ-लाइन माना जा रहा है और इसका पैमाना इसकी लागत से भी साफ झलकता है। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 37,350 करोड़ रुपये बताई गई है, जिसमें से लगभग 9,500 करोड़ रुपये सिर्फ भूमि अधिग्रहण पर खर्च हो चुके हैं। सरकार ने 2024–25 के बजट में भी इस एक्सप्रेसवे के लिए 2,057 करोड़ रुपये का प्रावधान रखकर संकेत दे दिया है कि काम की रफ्तार थमने नहीं दी जाएगी। दावा है कि यह निवेश आगे चलकर उद्योग, व्यापार, लॉजिस्टिक्स और रोजगार के जरिए कई गुना लौटेगा यानी गंगा एक्सप्रेसवे सिर्फ सड़क नहीं, उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति देने वाली बड़ी पूंजीगत परियोजना है।
डेडलाइन पर सरकार सख्त
गंगा एक्सप्रेसवे की नींव 18 दिसंबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शिलान्यास के साथ रखी गई थी। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समय-समय पर समीक्षा कर प्रोजेक्ट को तय समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए, ताकि पश्चिम से पूर्व तक उत्तर प्रदेश की कनेक्टिविटी को नई रफ्तार मिल सके। हालांकि दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के चलते GRAP-4 जैसी पाबंदियों के दौरान निर्माण कार्य की गति पर असर पड़ा, लेकिन अब प्रोजेक्ट एक बार फिर फिनिशिंग मोड में लौट आया है। UPEIDA के मुताबिक एक्सप्रेसवे पर 1498 बड़े स्ट्रक्चर प्रस्तावित हैं, जिनमें 1497 पूरे हो चुके हैं। शेष काम को तेजी से पूरा कर रोड सेफ्टी और क्वालिटी एक्सपर्ट्स की जांच के बाद ट्रायल रन की औपचारिक प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
सुविधाएं और बड़े स्ट्रक्चर
गंगा एक्सप्रेसवे को सिर्फ “तेज सड़क” नहीं, बल्कि यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार आधुनिक हाईवे-कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जा रहा है। प्रस्तावित सुविधाओं में 2 मुख्य टोल प्लाजा, 15 रैंप टोल, और 9 सुविधा केंद्र शामिल हैं। जहां खाना-पीना, शौचालय, विश्राम जैसी बेसिक से लेकर जरूरी सेवाएं उपलब्ध होंगी। इंजीनियरिंग के लिहाज से भी यह प्रोजेक्ट अहम है: गंगा नदी पर 960 मीटर और रामगंगा पर 720 मीटर लंबे पुल, साथ में 18 फ्लाईओवर और 8 रोड ओवर ब्रिज प्रस्तावित किए गए हैं, ताकि ट्रैफिक फ्लो बाधित न हो और सफर सुरक्षित बना रहे। कनेक्टिविटी के मोर्चे पर योजना और भी बड़ी है गंगा एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे और आगरा–लखनऊ एक्सप्रेसवे से जोड़ने की तैयारी है। इससे पूर्वी यूपी से दिल्ली-एनसीआर तक यात्रा ज्यादा सीधी, तेज और भरोसेमंद होगी और उत्तर प्रदेश का रोड नेटवर्क देश में और मजबूती से अपनी पहचान बनाएगा। फेज-1 के बाद विस्तार की दिशा में भी रोडमैप तय है मेरठ/बुलंदशहर से हरिद्वार (मुजफ्फरनगर–रुड़की होकर) करीब 110–150 किमी का संभावित विस्तार, और प्रयागराज से बलिया तक (वाराणसी–गाजीपुर–भदोही–मिर्जापुर होकर) विस्तार का प्रस्ताव, जिसका सर्वे पूरा बताया जा रहा है और DPR तैयार होने की प्रक्रिया चल रही है।
कैसे आगे बढ़ा गंगा एक्सप्रेसवे
गंगा एक्सप्रेसवे की कहानी दरअसल उत्तर प्रदेश के “विजन से वर्क-ऑन-ग्राउंड” तक पहुंचने की लंबी यात्रा है। इसकी पहली रूपरेखा 2007 में ग्रेटर नोएडा–बलिया एक्सप्रेसवे के विचार के तौर पर सामने आई थी। फिर जनवरी 2019 में इसे औपचारिक पहचान मिली और नाम पड़ा “गंगा एक्सप्रेसवे”। सितंबर 2019 में अलाइनमेंट को मंजूरी मिलने के बाद परियोजना ने गति पकड़ी; फरवरी 2020 में बजट आवंटन की प्रक्रिया तेज हुई और मार्च 2021 में टेंडर समेत शुरुआती औपचारिकताएं आगे बढ़ीं। इसके बाद दिसंबर 2021 में शिलान्यास के साथ काम ने जमीन पर आकार लिया। UP News












