रेरा ने उत्तर प्रदेश के सात प्रमुख जिलों में 15 नई रियल एस्टेट परियोजनाओं को दी स्वीकृति

इन परियोजनाओं पर लगभग 3,069.10 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। स्वीकृत योजनाओं के तहत कुल 3,923 आवासीय, व्यावसायिक और मिश्रित उपयोग की इकाइयों जिनमें फ्लैट, विला, प्लॉट और दुकानें शामिल हैं, का विकास किया जाएगा।

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उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा)
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar14 Feb 2026 02:39 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (UP RERA) ने राज्य के सात प्रमुख जिलों में 15 नई रियल एस्टेट परियोजनाओं को स्वीकृति देकर प्रॉपर्टी सेक्टर को नई रफ्तार दी है। इन परियोजनाओं पर लगभग 3,069.10 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। स्वीकृत योजनाओं के तहत कुल 3,923 आवासीय, व्यावसायिक और मिश्रित उपयोग की इकाइयों जिनमें फ्लैट, विला, प्लॉट और दुकानें शामिल हैं, का विकास किया जाएगा। यह निर्णय प्राधिकरण की 195वीं बैठक में लिया गया। 

किन जिलों में क्या होगा विकास?

लखनऊ :

लखनऊ में 414 आवासीय इकाइयों वाली दो परियोजनाओं को मंजूरी मिली है। इनका अनुमानित बजट लगभग 328.04 करोड़ है।

गौतमबुद्ध नगर:

गौतमबुद्ध नगर में सबसे ज्यादा चार परियोजनाओं को हरी झंडी दी गई है। इनमें दो आवासीय (396 इकाइयां) और दो व्यावसायिक (433 इकाइयां) परियोजनाएं शामिल हैं। कुल निवेश करीब 1,092.19 करोड़ रहेगा।

गाजियाबाद: 

गाजियाबाद में तीन आवासीय परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन योजनाओं के तहत 1,193 नए घर बनाए जाएंगे और इनकी अनुमानित लागत 1,119.22 करोड़ है।

आगरा:

आगरा में एक मिश्रित उपयोग (रिहायशी व व्यावसायिक) परियोजना को स्वीकृति मिली है। इसमें 432 इकाइयों का निर्माण होगा और लागत 133.17 करोड़ आंकी गई है।

अलीगढ़:

अलीगढ़ में 512 आवासीय इकाइयों वाली एक परियोजना को मंजूरी दी गई है, जिसकी लागत 243.62 करोड़ है।

मथुरा:

मथुरा में एक आवासीय और एक व्यावसायिक परियोजना को स्वीकृति मिली है। इन दोनों में कुल 347 इकाइयां विकसित की जाएंगी और लगभग 40.61 करोड़ खर्च होंगे।

मुरादाबाद:

मुरादाबाद में दो नई आवासीय परियोजनाओं को हरी झंडी दी गई है। यहां 196 घरों का निर्माण प्रस्तावित है, जिन पर करीब 112.25 करोड़ का निवेश होगा। इन स्वीकृतियों से राज्य में रियल एस्टेट गतिविधियों को मजबूती मिलेगी, निवेश बढ़ेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। साथ ही, घर खरीदने वालों को नए और अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे, जिससे बाजार में प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी। UP News


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अखिलेश ने कहा- किसी धर्मगुरु के पद और प्रतिष्ठा पर टिप्पणी करना उचित नहीं

यह कि सदन में बोलते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा कि हर कोई शंकराचार्य नहीं हो सकता और किसी भी धार्मिक पीठ से जुड़े व्यक्ति को ऐसा आचरण नहीं करना चाहिए जिससे सामाजिक वातावरण प्रभावित हो। इस बयान को विपक्ष ने धार्मिक पद की गरिमा से जोड़ते हुए आपत्तिजनक बताया।

yogi akhilesh
मुख्यमंत्रीयोगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar14 Feb 2026 06:54 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद उस समय उभर आया जब मुख्यमंत्रीयोगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में शंकराचार्य अविमुक्तेस्वरानंद को लेकर टिप्पणी की। उनके बयान के बाद विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला। हुआ यह कि सदन में बोलते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा कि हर कोई शंकराचार्य नहीं हो सकता और किसी भी धार्मिक पीठ से जुड़े व्यक्ति को ऐसा आचरण नहीं करना चाहिए जिससे सामाजिक वातावरण प्रभावित हो। इस बयान को विपक्ष ने धार्मिक पद की गरिमा से जोड़ते हुए आपत्तिजनक बताया।

अखिलेश यादव ने साधा निशाना

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री की टिप्पणी को अत्यंत अपमानजनक बताया। उन्होंने लिखा कि जब व्यक्ति में अहंकार हावी हो जाता है तो उसकी भाषा और व्यवहार मर्यादा से भटक जाते हैं।

अखिलेश ने यह भी कहा कि किसी धर्मगुरु के पद और प्रतिष्ठा पर टिप्पणी करना उचित नहीं है और ऐसा करना नैतिक रूप से गलत है।

अन्य मुद्दों को भी जोड़ाअपने बयान में अखिलेश यादव ने महाकुंभ से जुड़े मामलों और मुआवजा वितरण पर भी सवाल उठाए। उन्होंने सरकार से पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा कि जनता को हर मामले में स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य पर अहंकार हावी हो जाता है तो वह इसी प्रकार की बयानबाजी बिना सोचे समझे करने लगता है।

राजनीतिक माहौल हुआ गरम

मुख्यमंत्री की टिप्पणी अब विधानसभा की कार्यवाही का स्थायी हिस्सा बन चुकी है। सत्तापक्ष इसे संदर्भ में देखे जाने की बात कर रहा है, जबकि विपक्ष इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा गंभीर मुद्दा बता रहा है। इस घटनाक्रम ने प्रदेश की राजनीति में धर्म, मर्यादा और जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है, जो आगे भी चर्चा का विषय बनी रह सकती है।UP News


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कानून के रखवाले ही तोड़ रहे हैं कानून, हाईकोर्ट हुआ नाराज

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस स्थिति को बेहद गंभीर स्थिति बताते हुए उत्तर प्रदेश के जिलों में तैनात जिला जजों को कड़ी चेतावनी दी है। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट (इलाहाबाद हाईकोर्ट) के द्वारा जिला जजों को चेतावनी देने का यह मामला चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar14 Feb 2026 01:14 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने प्रदेशा के जिला जजों के प्रति गहरी नाराजगी जताई है। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने जिला जजों के प्रति नाराजगी जताते हुए साफ कहा कि कानून के रखवाले ही कानून को तोड़ने का काम कर रहे हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस स्थिति को बेहद गंभीर स्थिति बताते हुए उत्तर प्रदेश के जिलों में तैनात जिला जजों को कड़ी चेतावनी दी है। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट (इलाहाबाद हाईकोर्ट) के द्वारा जिला जजों को चेतावनी देने का यह मामला चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।

क्या है कानून तोडऩे का यह मामला ?

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी अदालत यानी हाईकोर्ट का नाम इलाहाबाद हाईकोर्ट है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि उत्तर प्रदेश की अदालतों में ज्यादातर मामलों में आरोप तय करने में बड़ी देरी की जा रही है। आरोप तय करने में देरी कानून का स्पष्ट उल्लंघन है। इतना ही नहीं जिला जजों ने हाईकोर्ट के द्वारा मांगी गई जानकारी भी आधी-अधूरी उपलब्ध कराई है। उत्तर प्रदेश ने इस पूरी स्थिति को न्यायिक अनुशासनहीनता की संज्ञा देते हुए तुरन्त पूरी जानकारी देने के निर्देश जारी किए हैं। इस प्रकार के निर्देश न्यायमूति विनोद दिवाकर ने जारी किए हैं। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने कहा है कि जिला जजों का व्यवहार न्याय व्यवस्था की बुनियाद को हिलाने वाला व्यवहार है।

उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने मांगी थी वर्षवार जानकारी

दरअसल उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट में तैनात न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने 16 दिसंबर 2025 को प्रदेश के सभी जिला जजों को एक सप्ताह के भीतर ऐसी चार्जशीट की वर्षवार जानकारी देने का निर्देश दिया था, जिनमें वर्ष 2004 से 2024 तक आरोप तय नहीं हुए हैं। प्रत्येक आपराधिक न्यायालय से अलग-अलग आंकड़े देने को कहा गया था। कोर्ट को 75 में से 49 जिलों से रिपोर्ट प्राप्त हुई। गोंडा और बरेली ने समय विस्तार मांगा। 26 जिलों से कोई रिपोर्ट नहीं आई और न ही समय बढ़ाने का अनुरोध किया गया। इस पर न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने कहा कि यह आचरण प्रथमदृष्टया गंभीर है, हालांकि बड़े संस्थागत हित में एक सप्ताह का अंतिम अवसर दिया जाता है। कोर्ट ने पाया कि हमीरपुर, मथुरा, बांदा, अमरोहा, हापुड़, पीलीभीत, उन्नाव, आजमगढ़, मुजफ्फरनगर, भदोही, सुल्तानपुर, रायबरेली और महाराजगंज की रिपोर्ट अधूरी है। साथ ही बस्ती, अंबेडकर नगर, चित्रकूट, फतेहपुर, उरई, लखनऊ, मिर्जापुर, मुरादाबाद, सहारनपुर, सिद्धार्थनगर, हरदोई, औरैया, मऊ, कुशीनगर, कन्नौज, बहराइच, बलरामपुर, रामपुर, अलीगढ़, ललितपुर, संत कबीर नगर, श्रावस्ती, सीतापुर, गाजियाबाद, महोबा, गाजीपुर, लखीमपुर, कानपुर और बिजनौर की रिपोर्ट को निर्देशों की पूर्ण अवहेलना बताया। कोर्ट ने कहा कि कई जिलों ने दशकों से लंबित मामलों की कुल संख्या जानबूझकर नहीं दी गई।

आगरा के जिला जज से सीखने की नसीहत

आगरा, बुलंदशहर, फर्रुखाबाद और अयोध्या की रिपोर्ट को निर्देशों के अनुरूप पाया गया। विशेष रूप से आगरा के जिला जज के प्रयासों की कोर्ट ने सराहना की। कोर्ट ने उन्नाव, कुशीनगर, कन्नौज, संत कबीर नगर, श्रावस्ती, सीतापुर, गाजियाबाद और हापुड़ में जिला जज की बजाय ऑफिसर इंचार्ज द्वारा रिपोर्ट भेजने पर भी आपत्ति जताई। कहा कि यह लापरवाही या अवमानना है या नहीं, इस पर बाद में विचार किया जाएगा। कोर्ट ने आगरा, बुलंदशहर, फर्रुखाबाद और अयोध्या को छोडक़र अन्य सभी जिला जजों को 27 फरवरी तक निर्देश के अनुसार रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है। साथ ही कहा कि दूसरे जिला जजों को आगरा के जिला जज से शिक्षा लेनी चाहिए। UP News

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