NEET PG राउंड-3: उत्तर प्रदेश में PG एडमिशन का अंतिम अवसर, डेट्स घोषित

उत्तर प्रदेश के उम्मीदवारों को सलाह है कि वे अंतिम दिन की भीड़ और तकनीकी अड़चनों के भरोसे न रहें, क्योंकि डेडलाइन निकलते ही आवेदन प्रक्रिया ऑटोमैटिक बंद हो जाएगी और फिर मौका हाथ से निकल सकता है।

UP NEET PG राउंड-3 का शेड्यूल जारी
UP NEET PG राउंड-3 का शेड्यूल जारी
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar01 Jan 2026 04:44 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश में PG मेडिकल एडमिशन (MD/MS, DNB, डिप्लोमा) की रेस में जुटे उम्मीदवारों के लिए बड़ी खबर है। DGME उत्तर प्रदेश ने UP NEET PG 2025 काउंसलिंग (राउंड-3) का पूरा शेड्यूल जारी कर दिया है। उत्तर प्रदेश के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में सीट पाने की उम्मीद कर रहे कई अभ्यर्थियों के लिए यह राउंड आखिरी बड़ा अवसर माना जा रहा है। ऐसे में रजिस्ट्रेशन से लेकर चॉइस फिलिंग और रिपोर्टिंग तक, हर चरण को तय समय-सीमा में पूरा करना जरूरी है क्योंकि एक छोटी-सी देरी भी सीट की दौड़ से बाहर कर सकती है।

UP NEET PG 2025 Round-3: रजिस्ट्रेशन कब से?

DGME उत्तर प्रदेश के जारी शेड्यूल के अनुसार UP NEET PG 2025 (राउंड-3) के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन 2 जनवरी सुबह 11 बजे से खुलेगा। वहीं आवेदन की अंतिम समय-सीमा 5 जनवरी दोपहर 2 बजे तय की गई है। उत्तर प्रदेश के उम्मीदवारों को सलाह है कि वे अंतिम दिन की भीड़ और तकनीकी अड़चनों के भरोसे न रहें, क्योंकि डेडलाइन निकलते ही आवेदन प्रक्रिया ऑटोमैटिक बंद हो जाएगी और फिर मौका हाथ से निकल सकता है।

फीस और सिक्योरिटी मनी: इन तारीखों का रखें ध्यान

उत्तर प्रदेश में UP NEET PG काउंसलिंग के राउंड-3 में सिर्फ ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना काफी नहीं होगा। DGME यूपी के नियमों के मुताबिक फीस के साथ सिक्योरिटी मनी जमा करना भी अनिवार्य है। यह भुगतान प्रक्रिया 2 जनवरी से 9 जनवरी (शाम 5 बजे तक) चलेगी। जो उम्मीदवार तय समय-सीमा में रजिस्ट्रेशन + सिक्योरिटी मनी पूरा नहीं करेंगे, वे आगे चॉइस फिलिंग और सीट अलॉटमेंट की दौड़ से बाहर हो जाएंगे।

मेरिट लिस्ट कब आएगी?

रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी होते ही उम्मीदवारों की नजरें अब मेरिट लिस्ट पर टिक जाएंगी। शेड्यूल के मुताबिक 5 जनवरी 2026 को मेरिट लिस्ट जारी होने की संभावना है। यही मेरिट उत्तर प्रदेश में आगे की पूरी काउंसलिंग का टर्निंग पॉइंट बनेगी इसी के आधार पर उम्मीदवार चॉइस फिलिंग करेंगे और फिर सीट अलॉटमेंट की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

चॉइस फिलिंग और लॉकिंग: कब से कब तक?

Round-3 में चॉइस फिलिंग/लॉकिंग 6 जनवरी (सुबह 11 बजे) से शुरू होगी। उम्मीदवार 9 जनवरी (दोपहर 2 बजे तक) अपने पसंदीदा कॉलेज और कोर्स भर सकेंगे। ध्यान रहे चॉइस लॉक होने के बाद बदलाव का मौका नहीं मिलेगा, इसलिए यूपी के कॉलेजों की प्राथमिकता रैंक के हिसाब से सोच-समझकर भरें।

चॉइस फिलिंग के लिए कौन-सी वेबसाइट?

UP NEET PG काउंसलिंग में चॉइस फिलिंग के लिए उम्मीदवारों को upneet.in और dgme.up.gov.in पर लॉगिन करना होगा। उत्तर प्रदेश में केवल वे अभ्यर्थी चॉइस फिलिंग कर सकेंगे जिन्होंने निर्धारित समय-सीमा में रजिस्ट्रेशन और सिक्योरिटी मनी की प्रक्रिया पूरी कर ली हो। तय समय तक चॉइस लॉक न करने की स्थिति में सिस्टम अंतिम सेव की गई चॉइस को स्वतः लॉक कर सकता है।

सीट अलॉटमेंट रिजल्ट और एडमिशन की डेट

उत्तर प्रदेश NEET PG राउंड-3 में सीट अलॉटमेंट का रिजल्ट 12 जनवरी 2026 को जारी होगा। रिजल्ट आते ही उम्मीदवार अपने लॉगिन से अलॉटमेंट लेटर डाउनलोड कर सकेंगे। इसके बाद 13 जनवरी से 17 जनवरी 2026 के बीच संबंधित मेडिकल कॉलेज में रिपोर्टिंग/एडमिशन अनिवार्य होगा। यूपी के उम्मीदवारों को कॉलेज पहुंचकर डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन कराना होगा और निर्धारित कॉलेज फीस जमा करनी होगी। तय समय-सीमा के भीतर रिपोर्ट न करने पर सीट कैंसिल होने का खतरा रहेगा।

एक नजर में पूरा शेड्यूल (UP NEET PG Round-3)

उत्तर प्रदेश NEET PG राउंड-3 काउंसलिंग में एक भी तारीख मिस हुई तो चांस हाथ से निकल सकता है। DGME उत्तर प्रदेश के शेड्यूल के मुताबिक रजिस्ट्रेशन 2 जनवरी सुबह 11 बजे से शुरू होकर 5 जनवरी दोपहर 2 बजे बंद हो जाएगा। इसके साथ फीस और सिक्योरिटी मनी जमा करने की विंडो 2 जनवरी से 9 जनवरी (शाम 5 बजे) तक रहेगी। मेरिट लिस्ट 5 जनवरी 2026 को आने की संभावना है, जिसके बाद चॉइस फिलिंग/लॉकिंग 6 जनवरी (11 बजे) से 9 जनवरी (2 बजे) तक होगी। फिर 12 जनवरी 2026 को सीट अलॉटमेंट रिजल्ट जारी होगा और सीट मिलने पर उम्मीदवारों को 13 से 17 जनवरी 2026 के बीच संबंधित कॉलेज में रिपोर्टिंग कर एडमिशन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। UP News

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अब नालों का पानी भी बनेगा काम का, योगी सरकार ने तैयार किया बड़ा प्लान

उत्तर प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक 50% और 2035 तक 100% वेस्ट वॉटर को दोबारा उपयोग में लाया जाए, ताकि उत्तर प्रदेश में बूंद-बूंद पानी की बर्बादी रोकी जा सके।

उत्तर प्रदेश में वेस्ट वॉटर मैनेजमेंट की नई रणनीति लागू
उत्तर प्रदेश में वेस्ट वॉटर मैनेजमेंट की नई रणनीति लागू
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar01 Jan 2026 04:06 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश में अब नालियों-नालों में बहकर बेकार समझा जाने वाला पानी भी काम आएगा। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने जल संरक्षण और पर्यावरण सुधार की दिशा में एक बड़ा रोडमैप तैयार किया है, जिसके तहत शहरी क्षेत्रों से निकलने वाले उपयोग किए गए पानी (वेस्ट वॉटर) का वैज्ञानिक उपचार कर उसे खेती, उद्योग और गैर-पीने योग्य घरेलू जरूरतों में इस्तेमाल किया जाएगा। उत्तर प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक 50% और 2035 तक 100% वेस्ट वॉटर को दोबारा उपयोग में लाया जाए, ताकि उत्तर प्रदेश में बूंद-बूंद पानी की बर्बादी रोकी जा सके।

2030 और 2035 के लक्ष्य तय

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उत्तर प्रदेश में जल प्रबंधन को लेकर अब मिशन-मोड में तैयारी शुरू हो गई है। सरकार की नीति के मुताबिक जिन शहरों में एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) पहले से हैं, या जहां वेस्ट वॉटर को एकत्र कर उपचार की व्यवस्था जल्दी विकसित की जा सकती है, वहां 2025 से 2030 के बीच पहले चरण का काम तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। इस चरण में लक्ष्य रखा गया है कि उपचारित पानी का कम से कम 50% हिस्साकृषि सिंचाई और इंडस्ट्री को उपलब्ध कराया जाए। इसके बाद 2035 तक उत्तर प्रदेश में इस्तेमाल हो चुके पानी के 100% उपचार और उसे खेती-उद्योग में पूरी तरह लगाने की रूपरेखा तय की गई है। सरकार का दावा है कि इस पहल से जल संकट का दबाव घटेगा, भूजल का अत्यधिक दोहन कम होगा और उत्तर प्रदेश में पानी को “खपत” नहीं बल्कि पुन: उपयोग के मॉडल के तौर पर विकसित किया जाएगा।

नगर निकाय खेती और इंडस्ट्री तीनों को मिलेगा फायदा

उत्तर प्रदेश सरकार की नीति के तहत उपचारित जल का उपयोग सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रहेगा। इसे नगर निकायों के कार्यों (जैसे पार्कों की सिंचाई, सफाई, निर्माण कार्यों में जल उपयोग), उद्योगों और गैर-पेय घरेलू जरूरतों में भी लाया जाएगा। सरकार का जोर इस बात पर है कि पीने योग्य पानी का उपयोग वहां न हो, जहां उपचारित जल से काम चल सकता है। उत्तर प्रदेश के कई जिलों और शहरों में अभी वेस्ट वॉटर के संग्रहण व उपचार की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। ऐसे क्षेत्रों के लिए सरकार ने तीसरे चरण का लक्ष्य तय किया है। इसके तहत 2045 तक चरणबद्ध तरीके से पहले 30 प्रतिशत, फिर 50 प्रतिशत और अंततः 100 प्रतिशत उपयोग किए गए पानी को उपचारित कर कृषि और उद्योग में इस्तेमाल के लिए तैयार किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश की नई ताकत बनेगा बेकार पानी

उत्तर प्रदेश में यह पहल जल संरक्षण के साथ-साथ पर्यावरण सुधार की दिशा में भी अहम मानी जा रही है। नालों में बहकर प्रदूषण बढ़ाने वाला पानी अब वैज्ञानिक उपचार के बाद उत्पादन और विकास का संसाधन बनेगा। सरकार का दावा है कि इस योजना से उत्तर प्रदेश में पानी की उपलब्धता बेहतर होगी, शहरों का प्रदूषण दबाव घटेगा और खेती-उद्योग को एक वैकल्पिक जल स्रोत मिलेगा। UP News

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नए साल में इन 10 मेगा प्रोजेक्ट्स से उत्तर प्रदेश में आएगा बड़ा बदलाव

ये योजनाएं न सिर्फ कनेक्टिविटी और रोजगार बढ़ाएंगी, बल्कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति को भी नई मजबूती देंगी। आइए जानते हैं वे 10 प्रमुख परियोजनाएं, जो आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदल देंगी।

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यूपी में बनने वाली विभिन्न परियोजनाएं
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar01 Jan 2026 03:40 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश विकास की तेज रफ्तार पर आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2026 राज्य के लिए बेहद अहम साबित होने वाला है, क्योंकि इस दौरान कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रांसपोर्ट, ऊर्जा, खेल और टेक्नोलॉजी से जुड़े प्रोजेक्ट पूरे होने वाले हैं। ये योजनाएं न सिर्फ कनेक्टिविटी और रोजगार बढ़ाएंगी, बल्कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति को भी नई मजबूती देंगी। आइए जानते हैं वे 10 प्रमुख परियोजनाएं, जो आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदल देंगी।

1. यमुना सिटी में इंटरनेशनल फिल्म सिटी

यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र के सेक्टर-21 में प्रस्तावित इंटरनेशनल फिल्म सिटी का पहला चरण 2026 में रफ्तार पकड़ेगा। लगभग 1000 एकड़ में विकसित होने वाली इस परियोजना के अंतर्गत शुरुआती दौर में 230 एकड़ भूमि पर निर्माण शुरू किया जाएगा। यह फिल्म सिटी आधुनिक स्टूडियो, पोस्ट-प्रोडक्शन सुविधाओं और व्यावसायिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र बनेगी, जिससे एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को नया ठिकाना मिलेगा।

2. जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ानों की शुरुआत

नोएडा के पास बन रहा जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट लगभग तैयार हो चुका है। यहां यात्री सुविधाओं और तकनीकी व्यवस्थाओं का सफल परीक्षण किया जा चुका है। एयरड्रोम लाइसेंस मिलते ही 2026 की शुरुआत में यहां से उड़ान सेवाएं शुरू होने की उम्मीद है। यह एयरपोर्ट उत्तर भारत की हवाई कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देगा।

3. नोएडा में पहली सेमीकंडक्टर यूनिट

उत्तर प्रदेश टेक्नोलॉजी सेक्टर में एक बड़ी छलांग लगाने जा रहा है। नोएडा में प्रदेश की पहली सेमीकंडक्टर निर्माण इकाई स्थापित की जाएगी। इस प्रोजेक्ट में करीब 3700 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है। यहां इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में इस्तेमाल होने वाले चिप्स का निर्माण होगा, जिससे स्थानीय उद्योग और रोजगार को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

4. गंगा एक्सप्रेसवे का शुभारंभ

मेरठ से प्रयागराज को जोड़ने वाला लगभग 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे अपने अंतिम चरण में है। साइनेज और सुरक्षा से जुड़ा काम पूरा होते ही 2026 में इसका उद्घाटन किया जा सकता है। इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से दोनों शहरों के बीच यात्रा समय घटकर करीब 8 घंटे रह जाएगा।

5. वाराणसी में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम

काशी में बन रहा अंतरराष्ट्रीय स्तर का क्रिकेट स्टेडियम 2026 टी-20 विश्व कप से पहले तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। लगभग 452 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह स्टेडियम भगवान शिव की थीम पर आधारित वास्तुकला के लिए जाना जाएगा। दर्शक दीर्घा और फ्लडलाइट्स को भी खास डिजाइन में विकसित किया जा रहा है।

6. बुंदेलखंड बनेगा सौर ऊर्जा का केंद्र

बुंदेलखंड क्षेत्र को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। झांसी, ललितपुर और चित्रकूट में तीन विशाल सोलर पार्क विकसित किए जा रहे हैं। इनके पूरा होने के बाद यह इलाका न सिर्फ अपनी जरूरतें पूरी करेगा, बल्कि प्रदेश को भी बिजली आपूर्ति में अहम भूमिका निभाएगा।

7. उत्तर भारत की पहली फिनटेक सिटी

यमुना सिटी में उत्तर भारत की पहली फिनटेक सिटी विकसित की जा रही है। यह परियोजना गुजरात की जीआईएफटी सिटी की तर्ज पर तैयार होगी। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है और आने वाले समय में यह क्षेत्र डिजिटल फाइनेंस और टेक्नोलॉजी का बड़ा हब बनेगा।

8. सोनभद्र में अल्ट्रा-सुपर क्रिटिकल पावर यूनिट

सोनभद्र के ओबरा क्षेत्र में 800 मेगावाट क्षमता की दो अल्ट्रा-सुपर क्रिटिकल थर्मल यूनिट स्थापित की जा रही हैं। कोयला आधारित यह परियोजना राज्य की बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने में मदद करेगी और इसके 2026 के अंत तक उत्पादन शुरू करने की संभावना है।

9. लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे

लखनऊ और कानपुर के बीच बन रहा एक्सप्रेसवे फरवरी 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है। इसके चालू होने से दोनों शहरों के बीच सफर महज 40 मिनट में पूरा किया जा सकेगा, जो फिलहाल 2 से 3 घंटे तक का होता है। इससे व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों को बड़ा लाभ मिलेगा।

10. लखनऊ को अक सिटी बनाने की पहल

राज्य सरकार लखनऊ को देश की पहली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिटी के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। नादरगंज क्षेत्र में एक आधुनिक टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है, जिसमें निजी क्षेत्र की बड़ी कंपनियां भी शामिल हैं। 2026 में इस प्रोजेक्ट को और गति मिलने की उम्मीद है।

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