दरअसल, दिल्ली हाई कोर्ट ने 23 दिसंबर को सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित करते हुए उन्हें जमानत दी थी। इस फैसले के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सोमवार को इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने सुनवाई की।

UP News : उन्नाव दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराए जा चुके पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को बड़ी राहत देने वाले दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने इस मामले को बेहद डरावना और गंभीर बताते हुए कहा कि ऐसी परिस्थितियों में जमानत जारी रखना उचित नहीं है। दरअसल, दिल्ली हाई कोर्ट ने 23 दिसंबर को सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित करते हुए उन्हें जमानत दी थी। इस फैसले के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सोमवार को इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने सुनवाई की।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि जिस समय अपराध हुआ, उस वक्त पीड़िता की उम्र मात्र 15 वर्ष 10 महीने थी। यानी वह पूरी तरह नाबालिग थी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रायल कोर्ट ने सेंगर को पाक्सो एक्ट और भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2) के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। सरकार की ओर से यह तर्क भी रखा गया कि दिल्ली हाई कोर्ट ने यह महत्वपूर्ण तथ्य नजरअंदाज कर दिया कि आईपीसी की जिन धाराओं में सेंगर को दोषी ठहराया गया है, उनमें भी अधिकतम सजा उम्रकैद तक हो सकती है।
सॉलिसिटर जनरल ने हाई कोर्ट के उस निष्कर्ष पर भी सवाल उठाया, जिसमें कहा गया था कि विधायक को पाक्सो एक्ट के तहत पब्लिक सर्वेंट की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा कि एक विधायक प्रभावशाली पद पर होता है और जनता उससे मदद की उम्मीद करती है, ऐसे में उसे सार्वजनिक सेवक मानने से इनकार करना कानूनी रूप से गलत है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी टिप्पणी की कि यदि किसी व्यक्ति के पास अधिकार और प्रभाव हो और लोग उससे सहायता की अपेक्षा करते हों, तो उसे सार्वजनिक सेवक माना जाना चाहिए।
पीठ ने कहा कि आमतौर पर जमानत रद करने से अदालतें बचती हैं, लेकिन यह मामला अलग है। कोर्ट ने यह भी ध्यान दिलाया कि सेंगर पहले से ही एक अन्य मामले में जेल में बंद है और हाई कोर्ट ने फैसले में कुछ अहम पहलुओं पर विचार नहीं किया। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत निलंबित कर दी।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि नाबालिग से जुड़े गंभीर अपराधों में अदालतें बेहद सख्त रुख अपनाएंगी और पीड़ित के अधिकारों को सर्वोपरि रखा जाएगा।