उत्तर प्रदेश बीजेपी को आज मिल सकता है नया अध्यक्ष, नामांकन से साफ होगी तस्वीर

हालांकि प्रदेश अध्यक्ष की रेस में केंद्रीय राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा और पूर्व सांसद निरंजन रंजन ज्योति के नाम भी चर्चा में रहे हैं, लेकिन अंदरूनी संकेत यही हैं कि इनके नामांकन की संभावना फिलहाल कमजोर है। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश की सियासी फाइल में फोकस अभी भी पंकज चौधरी पर टिकता दिख रहा है।

उत्तर प्रदेश बीजेपी का नया अध्यक्ष तय होने की दहलीज पर
उत्तर प्रदेश बीजेपी का नया अध्यक्ष तय होने की दहलीज पर
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar13 Dec 2025 09:45 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश बीजेपी में लंबे समय से चल रहा प्रदेश अध्यक्ष का सस्पेंस शनिवार, 13 दिसंबर 2025 को खत्म होने की संभावना जताई जा रही है।संगठनात्मक चुनाव के तहत आज नामांकन होने हैं और इसी कागजी प्रक्रिया पर उत्तर प्रदेश की राजनीति की धड़कनें टिकी हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी का नाम सबसे आगे है और अगर उनके मुकाबले कोई दूसरा दावेदार नामांकन नहीं करता, तो दोपहर तक ही पार्टी के भीतर अनौपचारिक मुहर लगने की स्थिति बन सकती है। अंदरखाने यह चर्चा भी तेज है कि एकल नामांकन की सूरत में औपचारिक घोषणा भले बाद में हो, लेकिन आज ही तय हो जाएगा कि उत्तर प्रदेश बीजेपी की कमान किसके हाथ जाएगी। संकेत यह भी हैं कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पंकज चौधरी के प्रस्तावक बन सकते हैं, जिससे उत्तर प्रदेश संगठन में नेतृत्व बदलाव की पटकथा लगभग तैयार मानी जा रही है।

औपचारिक घोषणा रविवार को

सूत्रों की मानें तो उत्तर प्रदेश बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष की औपचारिक घोषणा रविवार, 14 दिसंबर 2025 को लखनऊ में प्रस्तावित बड़े कार्यक्रम के दौरान की जा सकती है। इसी मंच से राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों से जुड़ी संगठनात्मक औपचारिकताएं भी पूरी होने की बात कही जा रही है। बताया जा रहा है कि पार्टी ने प्रक्रिया को “एक ही जगह, एक ही दिन” पूरा करने की रणनीति के तहत कई सांसदों को लखनऊ में ही रुकने का संदेश दिया है, ताकि उत्तर प्रदेश संगठन की तस्वीर बिना देरी साफ हो सके। हालांकि प्रदेश अध्यक्ष की रेस में केंद्रीय राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा और पूर्व सांसद निरंजन रंजन ज्योति के नाम भी चर्चा में रहे हैं, लेकिन अंदरूनी संकेत यही हैं कि इनके नामांकन की संभावना फिलहाल कमजोर है। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश की सियासी फाइल में फोकस अभी भी पंकज चौधरी पर टिकता दिख रहा है।

यूपी की राजनीति में ओबीसी कार्ड

उत्तर प्रदेश बीजेपी में संगठन की कमान किसके हाथ जाएगी यह फैसला महज एक नियुक्ति भर नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी और 2024 के लोकसभा चुनाव से मिले सबक के संदर्भ में देखा जा रहा है। पार्टी के भीतर चल रहे आकलन के मुताबिक, इस बार प्रदेश अध्यक्ष के लिए ओबीसी नेतृत्व को आगे कर बीजेपी यूपी में सामाजिक संतुलन और नए सियासी संदेश की बुनियाद रखना चाहती है। इसी रणनीति के केंद्र में पंकज चौधरी का नाम बताया जा रहा है। कुर्मी समुदाय से आने वाले पंकज चौधरी को संगठन की नब्ज समझने वाला और चुनावी राजनीति में अनुभव-समृद्ध चेहरा माना जाता हैयही वजह है कि उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में उन्हें संभावित “कप्तान” के तौर पर सबसे मजबूत दावेदार बताया जा रहा है।

“पूर्वांचल फैक्टर” भी चर्चा में

अगर पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश बीजेपी की कमान मिलती है, तो चर्चा सिर्फ “नाम” तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि सियासी नजरें पूर्वांचल समीकरण पर भी टिक जाएंगी। वजह यह कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और संभावित प्रदेश अध्यक्ष दोनों का जुड़ाव पूर्वांचल से बताया जा रहा है। ऐसे में एक तरफ पार्टी की रणनीति साफ झलकती है ओबीसी, खासकर कुर्मी वोट बैंक को साधकर यूपी की सामाजिक तस्वीर में मजबूती जोड़ना। वहीं दूसरी ओर, प्रदेश के पश्चिम, बुंदेलखंड और अवध जैसे क्षेत्रों में संगठनात्मक क्षेत्रीय संतुलन को लेकर सवाल उठने की गुंजाइश भी बनी रहती है। यानी फैसला आते ही उत्तर प्रदेश की राजनीति में “संदेश” भी जाएगा और “बहस” भी शुरू हो सकती है।

2024 की नाराजगी को साधने की कोशिश?

लोकसभा चुनाव 2024 के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक चर्चा लगातार तैरती रही कि कुछ क्षेत्रों में ओबीसी मतदाताओं, खासकर कुर्मी समाज, की नाराजगी के संकेत सामने आए। अब पार्टी संगठन के शीर्ष पद पर उसी सामाजिक पृष्ठभूमि से नेतृत्व आगे लाने की सुगबुगाहट को डैमेज कंट्रोल और री-कनेक्ट रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है। संदेश साफ माना जा रहा है: बीजेपी यूपी में अपने कोर सामाजिक आधार को फिर से मजबूती से जोड़ना चाहती है—ताकि 2027 की लड़ाई से पहले नाराजगी की दरार भरकर संगठन को एक नई ऊर्जा दी जा सके। UP News



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मुज़फ़्फ़र रज़्मी की बेहतरीन शायरियां

रज़्मी की पंक्तियाँ सरल लगती हैं, लेकिन उनके भीतर समय, समाज और इंसान की मनोवृत्ति पर तीखा सवाल छिपा होता है—यही वजह है कि उनकी शायरी श्रोताओं के दिल में उतरकर देर तक याद रह जाती है।

रज़्मी की शायरी आज भी बोलती है
रज़्मी की शायरी आज भी बोलती है
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar12 Dec 2025 05:36 PM
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Muzaffar Razmi : मुज़फ़्फ़र रज़्मी (तख़ल्लुस: “रज़्मी”) उर्दू शायरी की उस परंपरा के अहम नाम रहे, जिनकी ग़ज़लें सिर्फ़ एहसास नहीं जगातीं—सोच को भी झकझोर देती हैं। उनकी पहचान सामाजिक सरोकारों, सियासी चेतना और तेज़ नज़रिए वाली शायरी से बनी, जिसकी गूंज मुशायरों के मंच पर भी खूब सुनाई देती रही। रज़्मी की पंक्तियाँ सरल लगती हैं, लेकिन उनके भीतर समय, समाज और इंसान की मनोवृत्ति पर तीखा सवाल छिपा होता है—यही वजह है कि उनकी शायरी श्रोताओं के दिल में उतरकर देर तक याद रह जाती है।

1 मुज़फ़्फ़र रज़्मी की मशहूर शायरी 

कोई सौग़ात-ए-वफ़ा दे के चला जाऊँगा

तुझ को जीने की अदा दे के चला जाऊँगा



2 मुज़फ़्फ़र रज़्मी की मशहूर शायरी 


ख़ुद पुकारेगी जो मंज़िल तो ठहर जाऊँगा

वर्ना ख़ुद्दार मुसाफ़िर हूँ गुज़र जाऊँगा


आँधियों का मुझे क्या ख़ौफ़ मैं पत्थर ठहरा

रेत का ढेर नहीं हूँ जो बिखर जाऊँगा



3 मुज़फ़्फ़र रज़्मी की मशहूर शायरी 

इस राज़ को क्या जानें साहिल के तमाशाई

हम डूब के समझे हैं दरिया तिरी गहराई


जाग ऐ मिरे हम-साया ख़्वाबों के तसलसुल से

दीवार से आँगन में अब धूप उतर आई


4 मुज़फ़्फ़र रज़्मी की मशहूर शायरी 


मुक़ाबले तो ग़लत-फ़हमियाँ बढ़ाते हैं

ये वलवले तो ग़लत-फ़हमियाँ बढ़ाते हैं


क़रीब आओ तो शायद समझ में आ जाए

कि फ़ासले तो ग़लत-फ़हमियाँ बढ़ाते हैं


5 मुज़फ़्फ़र रज़्मी की मशहूर शायरी

हर एक शख़्स तिरी चाह के गुमान में था

न जाने कौन सा जादू तिरी ज़बान में था


बुलंदियों के सलीक़े सिखा दिए जिस ने

कहाँ गया वो परिंदा जो आसमान में था Muzaffar Razmi

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने जारी किया माघ मेले का खास लोगो

माघ मेले के लोगो में ज्योतिषीय महत्व तथा सांस्कृतिक महिमा को दर्शाने का सफल प्रयोग किया गया है। माघ मेला-2026 तीन जनवरी 2026 से शुरू होकर 15 फरवरी 2026 तक चलेगा। यहां माघ मेला-2026 से जुड़ी हुई हर जानकारी दी जा रही है।

प्रयागराज माघ मेला-2026 का खास लोगो जारी करते CM योगी आदित्यनाथ।
प्रयागराज माघ मेला-2026 का खास लोगो जारी करते CM योगी आदित्यनाथ।
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar12 Dec 2025 03:18 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माघ मेले के आयोजन की तैयारियां जोरों पर की जा रही हैं। माघ मेला-2026 अनेक विशेषताओं वाला माघ मेला होगा। इस बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माघ मेले का लोगो जारी कर दिया है। माघ मेला-2026 का लोगो बेहद खास माना जा रहा है। माघ मेले के लोगो में ज्योतिषीय महत्व तथा सांस्कृतिक महिमा को दर्शाने का सफल प्रयोग किया गया है। माघ मेला-2026 तीन जनवरी 2026 से शुरू होकर 15 फरवरी 2026 तक चलेगा। यहां माघ मेला-2026 से जुड़ी हुई हर जानकारी दी जा रही है।

अनेक विशेषताओं से भरपूर है माघ मेला-2026 का लोगो

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश के प्रत्येक आयोजन को बहुत गंभीरता से लेते हैं। उत्तर प्रदेश की विरासत को समेटे हुए माघ मेला-2026 को भी दिव्य तथा भव्य बनाने का प्रयास किया जा रहा है। माघ मेला-2026 कितना दिव्य होगा इस बात की झलक माघ मेले के लोगो से मिल रही है। आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माघ मेले का जो लोगो जारी किया है वह लोगो तीर्थराज प्रयाग की पवित्रता, संगम की तपोभूमि और माघ मास की ज्योतिषीय विशेषताओं को समग्र रूप में अभिव्यक्त करता है। लोगो को मेला प्राधिकरण से संबद्ध डिजाइन कंसल्टेंट अनुपम सक्सेना और प्रागल्भ अजय ने तैयार और चंद्रमा की 14 कलाओं का विशेष रूप से चित्रण किया गया है। माघे निमज्जन यत्र पापं परिहरेत् तत श्लोक माघ मास में स्नान के महत्व को बताता है। भारतीय गणना के अनुसार चंद्रमा 27 नक्षत्रों की परिक्रमा 27.3 दिनों में पूरी करता है। जब सूर्य मकर मास बनता है। सनातन परंपरा में मान्यता है कि इस माह में किए गए तप-साधना, स्नान और दान व्यक्ति को निरोगी बनाते हैं और उसे दिव्य बा ऊर्जा प्रदान करते हैं। मेला के लोगी में ऋषि-मुनि और सनातन परंपरा के मार के साथ अक्षयवट प्रमुख रूप से स दर्शाया गया है। ऋषि-मुनियों की आकृति यह दर्शाती है कि प्रयाग की पवित्र भूमि प्राचीन काल से साधना-तपस्या का केंद्र रही है। हर वर्ष संगम क्षेत्र में आने वाले साइबेरियन पक्षी प्रयागराज की जैव विविधता और पर्यावरणीय महत्ता को दिखाते हैं। प्राकृतिक विशेषता के प्रतीक के रूप में लोगों में इनका भी चित्रण किया गया है।

उत्तर प्रदेश में डेढ़ महीना चलेगा माघ मेला

उत्तर प्रदेश में स्थापित तीर्थ नगरी प्रयागराज में माघ मेला-2026 लगभग डेढ़ महीने तक चलेगा। माघ मेले की शुरूआत 3 जनवरी 2026 से होगी। यह माघ मेला 15 फरवरी 2025 तक चलेगा। माघ मेले के लिए अभी से सुरक्षा व्यवस्था की तैयारी की जा रही है। प्रदेश सरकार की ओर से साफ-सफाई से लेकर सुरक्षा, यातायात और चिकित्सा सुविधाओं में कोई भी कमी ना रहने का आदेश दिया है। ऐसे में हर स्तर पर तैयारी चालू हो चुकी है। वहीं माघ मेले से जुड़ा एक शब्द आपने बहुत सुना होगा और वो है कल्पवास। आपने कल्पवास शब्द तो सुना ही होगा। बहुत से लोग इसका मतलब नहीं समझते हैं। इसे आसान सी भाषा में समझते हैं। दरअसल ये एक हिंदू प्रथा है। जब श्रद्धालु संगम जैसी पवित्र नदियों के किनारे लगभग एक महीने तक रहकर आत्मा की शुद्धि के लिए तपस्या और साधना करते हैं और भजन कीर्तन के साथ ही साथ मंत्रों का जाप और ध्यान करते हैं तो इस क्रिया को ही कल्पवास कहा जाता है। इस दौरान अपनी सभी इंदियों पर नियंत्रण साधने की कोशिश की जाती है। माना जाता है कि ये सभी गलतियों से मुक्ति पाने का एक तरीका है।

माघ मेला-2026 के प्रमुख स्थान

माघ मेले में स्नान के लिए कुछ विशेष तिथियां हैं। इन दिनों स्नान करने से कई लाभ मिलेंगे। इसे काफी फलदायी माना जाता है। माघ मेले की शुरुआत यानी 3 जनवरी के दिन पौष पूर्णिमा होगी। इस दिन स्नान किया जाएगा। वहीं इसके बाद स्नान के लिए मकर संक्रांति 15 जनवरी को पड़ेगी। फिर दो दिन बाद 18 जनवरी को मौनी अमावस्या होगी। इसके बाद 23 जनवरी को माघ पूर्णिमा पड़ेगी। इन तारीखों पर किए गए स्नान से आत्मा की शुद्धी होगी। साथ ही हर पाप नष्ट होंगे। स्नान के लिए आखिरी दिन 15 फरवरी होगी और इसी दिन महाशिवरात्रि है। UP News

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