भारत गाड़ेगा आर्थिक विकास के झंडे, ट्रंप की धमकी बेअसर
IMF ने अपनी रिपोर्ट में संसोधन करके भारत की GDP की वृद्धि दर को 7.3 प्रतिशत कर दिया है। IMF ने वर्ष-2026-27 के लिए भारत के ग्रोथ अनुमान को 6.2 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.4 प्रतिशत कर दिया है।

India economic growth 2026 : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी तथा भारी टैरिफ का भारत के ऊपर कोई असर पडऩे वाला नहीं है। भारत आर्थिक विकास के झंडे गाडऩे वाला है। दुनिया की तमाम बड़ी-बड़ी एजेंसी दावा कर रही हैं कि भारत पाँच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था वाला देश बनने की दिशा में तेजी के साथ आगे बढ़ रहा है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत की बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था के ऊपर अपनी सहमति की मोहर लगा दी है।
IMF का बड़ा दावा, 7.3 प्रतिशत की दर से बढ़ेगा भारत
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष यानि IMF एक प्रतिष्ठित संगठन है। IMF ने सोमवार 19 जनवरी 2026 को भारत को लेकर बड़ी रिपोर्ट जारी की है। IMF ने भारत के लिए जारी की गई अपनी रिपोर्ट में भारत के घरेलू, सकल उत्पाद यानि कि GDP की दर को बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है। अक्टूबर में IMF ने भारत की DGP दर को 0.7 प्रतिशत कम पर आंका था। IMF ने अपनी रिपोर्ट में संसोधन करके भारत की GDP की वृद्धि दर को 7.3 प्रतिशत कर दिया है। IMF ने वर्ष-2026-27 के लिए भारत के ग्रोथ अनुमान को 6.2 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.4 प्रतिशत कर दिया है।
उम्मीद से ज्यादा अच्छा प्रदर्शन किया है भारत ने
भारत की अर्थव्यवस्था ने चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है और इस अवधि में विकास दर 8 प्रतिशत से अधिक रही है। 6 जनवरी को जारी सरकार के पहले अग्रिम अनुमानों के अनुसार, FY26 में भारत की GDP वृद्धि 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो IMF के संशोधित अनुमान के काफी करीब है। IMF का यह अपग्रेड ऐसे समय में आया है, जब विश्व बैंक ने भी भारत की विकास संभावनाओं को लेकर सकारात्मक रुख अपनाया है. वॉशिंगटन स्थित विश्व बैंक ने हाल ही में भारत के लिए FY26 के विकास दर अनुमान को बढ़ाकर 7.2 प्रतिशत कर दिया था। इसके बाद के वर्षों में लगभग 6.5 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। विश्व बैंक ने मजबूत घरेलू मांग, उपभोग में लचीलापन और निवेश गतिविधियों में सुधार को इसके प्रमुख कारण बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बुनियादी कारकों, घरेलू मांग और संरचनात्मक सुधारों के चलते तेजी से आगे बढ़ रही है। IMF और विश्व बैंक जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों द्वारा किए गए ये संशोधित अनुमान भारत की आर्थिक मजबूती और वैश्विक मंच पर उसकी बढ़ती भूमिका को रेखांकित करते हैं।
एसबीआई की रिसर्च रिपोर्ट में बड़ा दावा
इस दौरान SBI की एक रिसर्च रिपोर्ट में बड़ा दावा किया गया है। सोमवार 19 जनवरी 2026 को जारी SBI रिसर्च रिपोर्ट में बताया गया है कि रिपोर्ट के मुताबिक, भारत को आजादी के बाद 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में करीब 60 साल लगे। इसके बाद देश ने महज 7 साल में 2014 में 2 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का आंकड़ा छू लिया। इसके पश्चात 2021 में भारत 3 ट्रिलियन डॉलर और 2025 में 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन गया। इससे साफ है कि समय के साथ भारत की आर्थिक गति लगातार तेज हुई है। एसबीआई के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर डॉ. सौम्य कांति घोष ने कहा कि भारत अगले दो वर्षों में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में भी अग्रसर है। उन्होंने बताया कि भारत ने 2009 में आजादी के 62 साल बाद पहली बार 1,000 डॉलर प्रति व्यक्ति आय हासिल की थी।
2026 तक 3,000 डॉलर प्रति व्यक्ति आय का अनुमान
डॉ. घोष के अनुसार, इसके बाद 2019 में प्रति व्यक्ति आय 2,000 डॉलर के स्तर तक पहुंची और 2026 में इसके 3,000 डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले एक दशक में भारत की आर्थिक वृद्धि दर दुनिया के कई देशों की तुलना में बेहतर रही है, जिससे वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति मजबूत हुई है।
भारत के लिए जरूरी है 7.5 प्रतिशत की वृद्धि दर
SBI रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि भारत को 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य के तहत उच्च आय वाला देश बनना है, तो प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (जीएनआई) को हर साल औसतन 7.5% की सीएजीआर से बढ़ाना होगा। डॉ. घोष ने बताया कि पिछले 23 वर्षों में भारत की प्रति व्यक्ति जीएनआई करीब 8.3% की दर से बढ़ी है, जिससे यह लक्ष्य हासिल करना संभव प्रतीत होता है। हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि भविष्य में उच्च आय वाले देशों की सीमा (थ्रेशहोल्ड) बढ़ सकती है। यदि यह सीमा 13,936 डॉलर से बढ़कर 18,000 डॉलर हो जाती है, तो भारत को 2047 तक उच्च आय वाला देश बनने के लिए प्रति व्यक्ति आय को लगभग 8.9% सालाना की दर से बढ़ाना होगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जनसंख्या वृद्धि और महंगाई को ध्यान में रखते हुए अगले 23 वर्षों तक भारत को डॉलर के लिहाज से अपनी नॉमिनल जीडीपी करीब 11.5% की दर से बढ़ानी होगी। India economic growth 2026
India economic growth 2026 : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी तथा भारी टैरिफ का भारत के ऊपर कोई असर पडऩे वाला नहीं है। भारत आर्थिक विकास के झंडे गाडऩे वाला है। दुनिया की तमाम बड़ी-बड़ी एजेंसी दावा कर रही हैं कि भारत पाँच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था वाला देश बनने की दिशा में तेजी के साथ आगे बढ़ रहा है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत की बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था के ऊपर अपनी सहमति की मोहर लगा दी है।
IMF का बड़ा दावा, 7.3 प्रतिशत की दर से बढ़ेगा भारत
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष यानि IMF एक प्रतिष्ठित संगठन है। IMF ने सोमवार 19 जनवरी 2026 को भारत को लेकर बड़ी रिपोर्ट जारी की है। IMF ने भारत के लिए जारी की गई अपनी रिपोर्ट में भारत के घरेलू, सकल उत्पाद यानि कि GDP की दर को बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है। अक्टूबर में IMF ने भारत की DGP दर को 0.7 प्रतिशत कम पर आंका था। IMF ने अपनी रिपोर्ट में संसोधन करके भारत की GDP की वृद्धि दर को 7.3 प्रतिशत कर दिया है। IMF ने वर्ष-2026-27 के लिए भारत के ग्रोथ अनुमान को 6.2 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.4 प्रतिशत कर दिया है।
उम्मीद से ज्यादा अच्छा प्रदर्शन किया है भारत ने
भारत की अर्थव्यवस्था ने चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है और इस अवधि में विकास दर 8 प्रतिशत से अधिक रही है। 6 जनवरी को जारी सरकार के पहले अग्रिम अनुमानों के अनुसार, FY26 में भारत की GDP वृद्धि 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो IMF के संशोधित अनुमान के काफी करीब है। IMF का यह अपग्रेड ऐसे समय में आया है, जब विश्व बैंक ने भी भारत की विकास संभावनाओं को लेकर सकारात्मक रुख अपनाया है. वॉशिंगटन स्थित विश्व बैंक ने हाल ही में भारत के लिए FY26 के विकास दर अनुमान को बढ़ाकर 7.2 प्रतिशत कर दिया था। इसके बाद के वर्षों में लगभग 6.5 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। विश्व बैंक ने मजबूत घरेलू मांग, उपभोग में लचीलापन और निवेश गतिविधियों में सुधार को इसके प्रमुख कारण बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बुनियादी कारकों, घरेलू मांग और संरचनात्मक सुधारों के चलते तेजी से आगे बढ़ रही है। IMF और विश्व बैंक जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों द्वारा किए गए ये संशोधित अनुमान भारत की आर्थिक मजबूती और वैश्विक मंच पर उसकी बढ़ती भूमिका को रेखांकित करते हैं।
एसबीआई की रिसर्च रिपोर्ट में बड़ा दावा
इस दौरान SBI की एक रिसर्च रिपोर्ट में बड़ा दावा किया गया है। सोमवार 19 जनवरी 2026 को जारी SBI रिसर्च रिपोर्ट में बताया गया है कि रिपोर्ट के मुताबिक, भारत को आजादी के बाद 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में करीब 60 साल लगे। इसके बाद देश ने महज 7 साल में 2014 में 2 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का आंकड़ा छू लिया। इसके पश्चात 2021 में भारत 3 ट्रिलियन डॉलर और 2025 में 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन गया। इससे साफ है कि समय के साथ भारत की आर्थिक गति लगातार तेज हुई है। एसबीआई के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर डॉ. सौम्य कांति घोष ने कहा कि भारत अगले दो वर्षों में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में भी अग्रसर है। उन्होंने बताया कि भारत ने 2009 में आजादी के 62 साल बाद पहली बार 1,000 डॉलर प्रति व्यक्ति आय हासिल की थी।
2026 तक 3,000 डॉलर प्रति व्यक्ति आय का अनुमान
डॉ. घोष के अनुसार, इसके बाद 2019 में प्रति व्यक्ति आय 2,000 डॉलर के स्तर तक पहुंची और 2026 में इसके 3,000 डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले एक दशक में भारत की आर्थिक वृद्धि दर दुनिया के कई देशों की तुलना में बेहतर रही है, जिससे वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति मजबूत हुई है।
भारत के लिए जरूरी है 7.5 प्रतिशत की वृद्धि दर
SBI रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि भारत को 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य के तहत उच्च आय वाला देश बनना है, तो प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (जीएनआई) को हर साल औसतन 7.5% की सीएजीआर से बढ़ाना होगा। डॉ. घोष ने बताया कि पिछले 23 वर्षों में भारत की प्रति व्यक्ति जीएनआई करीब 8.3% की दर से बढ़ी है, जिससे यह लक्ष्य हासिल करना संभव प्रतीत होता है। हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि भविष्य में उच्च आय वाले देशों की सीमा (थ्रेशहोल्ड) बढ़ सकती है। यदि यह सीमा 13,936 डॉलर से बढ़कर 18,000 डॉलर हो जाती है, तो भारत को 2047 तक उच्च आय वाला देश बनने के लिए प्रति व्यक्ति आय को लगभग 8.9% सालाना की दर से बढ़ाना होगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जनसंख्या वृद्धि और महंगाई को ध्यान में रखते हुए अगले 23 वर्षों तक भारत को डॉलर के लिहाज से अपनी नॉमिनल जीडीपी करीब 11.5% की दर से बढ़ानी होगी। India economic growth 2026












