Kanishk Aluminium IPO लिस्टिंग पर बड़ा नुकसान, निवेशकों की टूटी उम्मीदें

Kanishk Aluminium IPO: Kanishk Aluminium IPO लिस्टिंग पर निवेशकों को बड़ा झटका लगा है। ₹73 के IPO शेयर लिस्टिंग पर ₹55.48 तक टूट गए हैं जिससे हर लॉट पर ₹28,032 का नुकसान हुआ है। IPO को मिला-जुला रिस्पॉन्स रहा, खुदरा निवेशकों का हिस्सा 1.86 गुना सब्सक्राइब हुआ था।

Kanishk Aluminium
Kanishk Aluminium IPO
locationभारत
userअसमीना
calendar04 Feb 2026 04:11 PM
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Kanishk Aluminium IPO का लिस्टिंग डे निवेशकों के लिए चौंकाने वाला साबित हुआ। जोधपुर की एलुमिनियम एक्स्ट्रूजन कंपनी, कनिष्क एलुमिनियम का IPO ₹73 की कीमत पर लॉन्च हुआ था लेकिन शेयर आज BSE SME पर ₹58.40 पर लिस्ट हुए। इससे IPO निवेशकों को कोई लिस्टिंग गेन नहीं मिला बल्कि शुरुआती ही दिन में शेयर टूटकर ₹55.48 तक आ गए। हर लॉट में 1,600 शेयर होने की वजह से निवेशकों को एक लॉट पर लगभग ₹28,032 का नुकसान हुआ।

निवेशकों का मिला-जुला रिस्पॉन्स

कनिष्क एलुमिनियम का IPO 28-30 जनवरी 2026 के बीच खुला था और इसे निवेशकों का मिला-जुला रिस्पॉन्स मिला। कुल IPO सब्सक्रिप्शन सिर्फ 1.04 गुना हुआ। खास बात यह रही कि खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित 50% हिस्से का 1.86 गुना सब्सक्रिप्शन हुआ जबकि नॉन-इंस्टीट्यूशनल निवेशकों का हिस्सा सिर्फ 0.23 गुना भरा। IPO के तहत ₹10 फेस वैल्यू वाले 40 लाख नए शेयर जारी किए गए।

ब्रांड प्रमोशन पर फोकस

IPO से जुटाए गए कुल ₹29 करोड़ में से ₹19.50 करोड़ का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए ₹0.80 करोड़ का इस्तेमाल 'Baari by Kanishk' ब्रांड के प्रमोशन में और बाकी राशि का इस्तेमाल सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। इससे साफ है कि कंपनी ने अपने कर्ज को कम करने और ब्रांड प्रमोशन पर फोकस किया है।

कनिष्क एलुमिनियम की स्थापना

कनिष्क एलुमिनियम वर्ष 2022 में स्थापित हुई थी और जोधपुर में एलुमिनियम एक्स्ट्रूजन प्रोडक्ट्स बनाती है। इसके प्रोडक्ट्स इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोटिव, सोलर, फर्नीचर, ट्रांसपोर्ट, इलेक्ट्रिकल और आर्किटेक्चर सेक्टर्स में इस्तेमाल होते हैं। कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन भी समय के साथ बदलता रहा है। FY 2023 में शुद्ध मुनाफा ₹1.76 करोड़ था जो FY 2024 में घटकर ₹1.52 करोड़ हुआ लेकिन FY 2025 में यह तेजी से बढ़कर ₹3.04 करोड़ तक पहुंच गया। इसी दौरान टोटल इनकम FY 2023 में ₹59.68 करोड़, FY 2024 में ₹59.54 करोड़ और FY 2025 में ₹60.13 करोड़ रही। चालू वित्त वर्ष 2026 (अप्रैल-अगस्त 2025) में कंपनी का शुद्ध मुनाफा ₹2.15 करोड़ और टोटल इनकम ₹29.25 करोड़ रही जबकि कुल कर्ज ₹25.55 करोड़ और रिजर्व व सरप्लस ₹9.28 करोड़ थे।

कितने घाटे में है निवेशक?

IPO निवेशकों के लिए शुरुआती लिस्टिंग पर नुकसान की स्थिति बनी हुई है। IPO की कीमत ₹73 थी लेकिन शेयर की लिस्टिंग ₹58.40 पर हुई और बाद में ₹55.48 तक टूट गया। इसका मतलब है कि निवेशक लगभग 24% घाटे में हैं। हर लॉट में 1,600 शेयर होने के कारण एक लॉट पर ₹28,032 का नुकसान हुआ जिससे शुरुआती निवेशकों को बड़ा झटका लगा।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। चेतना मंच की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।)

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IPO Investors को मिला 55% का Listing Gain, Accretion Nutraveda शेयर ने मचाई धूम

Accretion Nutraveda IPO: Accretion Nutraveda IPO ने शेयर बाजार में जबरदस्त एंट्री मारी है। यह आयुर्वेदिक और न्यूट्रास्यूटिकल उत्पाद बनाने वाली कंपनी है। IPO में ₹129 के भाव पर शेयर जारी हुए थे। आज इसका शेयर ₹200.55 तक पहुंच चुका है। निवेशकों को हर लॉट पर ₹71,500 का मुनाफा मिल चुका है।

Accretion Nutraveda
Accretion Nutraveda IPO
locationभारत
userअसमीना
calendar04 Feb 2026 03:44 PM
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Accretion Nutraveda IPO ने शेयर बाजार में धमाकेदार एंट्री की है। आयुर्वेदिक दवाइयां और बाम-जेल बनाने वाली इस कंपनी के IPO में ₹129 के भाव पर शेयर जारी किए गए थे। आज BSE SME प्लेटफॉर्म पर इसका शेयर ₹200.55 तक पहुंच चुका है यानी निवेशकों को 55.43% का लिस्टिंग गेन मिल चुका है। चूंकि एक लॉट 1000 शेयरों का था इसलिए हर लॉट पर निवेशक ₹71,500 का मुनाफा कमा चुके हैं।

19.20 लाख नए शेयर जारी

Accretion Nutraveda का IPO ₹25 करोड़ का था और यह 28 से 30 जनवरी तक सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था। निवेशकों का रिस्पांस बेहद अच्छा रहा और IPO 1.83 गुना ओवरऑल सब्सक्राइब हुआ। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) का हिस्सा 1.01 गुना, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 2.08 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 2.19 गुना भरा गया। इस IPO के तहत ₹10 फेस वैल्यू वाले 19.20 लाख नए शेयर जारी किए गए।

IPO से जुटाए गए पैसों का उपयोग

IPO से जुटाए गए पैसों का उपयोग कंपनी ने अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने और वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने के लिए करने का प्लान बनाया है। ₹4.22 करोड़ मौजूदा यूनिट में ऑटोमेशन के लिए मशीनरी पर खर्च होंगे ₹8.03 करोड़ नए मैन्युफैक्चरिंग सेटअप के लिए मशीनरी पर और ₹5.50 करोड़ वर्किंग कैपिटल की जरूरतों के लिए खर्च होंगे। शेष राशि आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होगी।

Accretion Nutraveda की स्थापना कब हुई थी?

Accretion Nutraveda की स्थापना वर्ष 2021 में हुई थी। यह कंपनी टैबलेट्स, कैप्सूल्स, ओरल लिक्विड, पाउडर, तेल, बाम, क्रीम और जेल जैसे आयुर्वेदिक और न्यूट्रास्यूटिकल उत्पाद बनाती है। यह CDMO (Contract Development & Manufacturing Organization) के रूप में भी काम करती है और इसका कारोबार भारत के अलावा श्रीलंका, सिंगापुर और अमेरिका में फैला हुआ है। कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी गुजरात में स्थित है।

वित्तीय सेहत लगातार हो रही मजबूत

कंपनी की वित्तीय सेहत लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2023 में इसका शुद्ध मुनाफा ₹28 लाख था जो वित्त वर्ष 2024 में ₹82 लाख और वित्त वर्ष 2025 में ₹2.61 करोड़ तक बढ़ गया। इस दौरान कंपनी की टोटल इनकम सालाना 128% से अधिक की CAGR पर बढ़कर ₹16.06 करोड़ हो गई। वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर 2025) में कंपनी का शुद्ध मुनाफा ₹2.33 करोड़ और टोटल इनकम ₹14.07 करोड़ रही। सितंबर 2025 के अंत में कुल कर्ज ₹4.43 करोड़ था, जबकि रिजर्व और सरप्लस ₹2.95 करोड़ थे।

निवेशकों के लिए सुनहरा अवसर

IPO निवेशकों के लिए यह एक सुनहरा अवसर साबित हुआ है। ₹129 के शेयर की एंट्री ₹191 पर हुई और अब यह ₹200.55 तक पहुंच चुका है। इसका मतलब है कि हर लॉट पर निवेशक ₹71,500 का मुनाफा कमा चुके हैं। यह शानदार लिस्टिंग और मजबूत वित्तीय स्थिति निवेशकों को आकर्षित करती है और आयुर्वेदिक और न्यूट्रास्यूटिकल उत्पादों के क्षेत्र में निवेश के लिए यह IPO एक बेहतरीन विकल्प बनाता है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। चेतना मंच की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।)

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WhatsApp Privacy पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, Telegram CEO ने खोली Zuckerberg की पोल

सुप्रीम कोर्ट ने WhatsApp यूजर्स की प्राइवेसी को लेकर Meta को कड़ी फटकार लगाई है जिससे डेटा सुरक्षा पर नई बहस शुरू हो गई है। इसी बीच Telegram CEO द्वारा Mark Zuckerberg की पुरानी चैट शेयर किए जाने से यह सवाल उठने लगा है कि क्या WhatsApp और Meta प्लेटफॉर्म्स पर यूजर्स का डेटा वास्तव में सुरक्षित है।

Zuckerberg
WhatsApp Privacy
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userअसमीना
calendar04 Feb 2026 01:10 PM
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डिजिटल दौर में WhatsApp, Facebook और Instagram हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं लेकिन क्या इन प्लेटफॉर्म्स पर हमारी निजी जानकारी सच में सुरक्षित है? हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने WhatsApp यूजर्स की प्राइवेसी को लेकर Meta को कड़ी फटकार लगाई है जिससे एक बार फिर डेटा सुरक्षा पर बहस तेज हो गई है। इसी बीच Telegram के CEO पावेल दुरोव ने Mark Zuckerberg की एक पुरानी चैट शेयर कर दी जिसने यूजर्स की चिंता और बढ़ा दी है। सवाल साफ है क्या Meta प्लेटफॉर्म्स पर यूजर्स का डेटा खतरे में है?

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों लगाई WhatsApp को फटकार?

सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि यूजर्स की प्राइवेसी से कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कोर्ट का मानना है कि किसी भी टेक कंपनी को यूजर्स के पर्सनल डेटा का गलत इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं है। WhatsApp और उसकी पेरेंट कंपनी Meta से यह उम्मीद की जाती है कि वह भारतीय यूजर्स के डेटा की पूरी सुरक्षा करे और पारदर्शिता बनाए रखे।

Telegram CEO ने क्यों शेयर की Zuckerberg की पुरानी चैट?

SC की फटकार के बाद Telegram CEO Pavel Durov ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर Mark Zuckerberg की साल 2004 की एक पुरानी चैट का स्क्रीनशॉट शेयर किया। यह चैट उस समय की है जब Zuckerberg हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ते थे और Facebook की शुरुआत कर रहे थे।

इस चैट में Zuckerberg यह कहते हुए मजाक करते नजर आते हैं कि लोग उन पर भरोसा कर अपनी पर्सनल डिटेल्स जैसे ईमेल, फोटो, एड्रेस और सोशल सिक्योरिटी नंबर शेयर कर रहे हैं। यह चैट पहले से इंटरनेट पर मौजूद थी लेकिन डुरोव के कमेंट ने इसे फिर से चर्चा में ला दिया।

पावेल दुरोव ने कसा तंज

Pavel Durov ने लिखा कि उस समय सिर्फ कुछ हजार लोगों का डेटा था लेकिन आज Meta के पास अरबों यूजर्स का डेटा है। उनका इशारा साफ तौर पर Meta की डेटा पॉलिसी पर था। डुरोव ने तंज कसते हुए कहा कि पहले Zuckerberg 4 हजार लोगों पर हंस रहा था आज वही कंपनी 4 अरब लोगों के डेटा को संभाल रही है जो WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म्स के प्राइवेसी दावों पर भरोसा करते हैं।

WhatsApp का End-to-End Encryption कितना भरोसेमंद?

WhatsApp दावा करता है कि उसके मैसेज End-to-End Encryption से सुरक्षित हैं यानी भेजने वाला और पाने वाला ही मैसेज पढ़ सकता है। कंपनी के मुताबिक बीच में कोई तीसरा व्यक्ति, यहां तक कि WhatsApp भी मैसेज नहीं पढ़ सकता। हालांकि आलोचकों का कहना है कि भले ही मैसेज एन्क्रिप्टेड हों लेकिन Meta दूसरी तरह की जानकारी इकट्ठा कर सकता है जैसे-आप किससे बात करते हैं, कितनी बार करते हैं, आपकी लोकेशन और डिवाइस से जुड़ा डेटा आदि।

यूजर्स की प्राइवेसी पर क्यों बढ़ रही है चिंता?

SC की सख्ती और Zuckerberg की पुरानी चैट के सामने आने के बाद यह सवाल और गहरा हो गया है कि बड़ी टेक कंपनियां यूजर्स के डेटा के साथ कितना जिम्मेदार व्यवहार कर रही हैं। आज जब हमारी बातचीत, फोटो, कॉल और बिजनेस सब डिजिटल हो चुके हैं तब प्राइवेसी सिर्फ एक विकल्प नहीं बल्कि जरूरत बन चुकी है।

अब यूजर्स को क्या करना चाहिए?

यूजर्स को किसी भी ऐप की प्राइवेसी पॉलिसी ध्यान से पढ़नी चाहिए और अनावश्यक परमिशन देने से बचना चाहिए। साथ ही, यह समझना जरूरी है कि फ्री ऐप्स अक्सर डेटा के जरिए ही कमाई करते हैं। जागरूक रहना ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।