10 मिनट डिलीवरी का खेल खत्म? मंत्री से बातचीत के बाद बदला सिस्टम

10-Minute Delivery: 10 मिनट में डिलीवरी को लेकर सरकार ने सख्त कदम उठाया है। श्रम मंत्री मनसुख मांडविया की बातचीत के बाद Blinkit ने बड़ा फैसला लिया है। Zomato और Swiggy पर भी असर पड़ सकता है। पूरी जानकारी जानने के लिए पढ़ें।

10 Minute Delivery
10 मिनट डिलीवरी पर सरकार का बड़ा फैसला
locationभारत
userअसमीना
calendar13 Jan 2026 03:30 PM
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देश में तेजी से फैल रहे 10 मिनट डिलीवरी मॉडल पर अब सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। क्विक कॉमर्स कंपनियों द्वारा तय की गई इस समय सीमा को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे थे खासकर डिलीवरी बॉय की सुरक्षा को लेकर। अब केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया की पहल के बाद बड़ा फैसला सामने आया है। सरकार के हस्तक्षेप के बाद ब्लिंकिट ने अपने सभी ब्रांड से 10 मिनट डिलीवरी फीचर हटाने का ऐलान कर दिया है। आने वाले दिनों में इसका असर बाकी कंपनियों पर भी देखने को मिल सकता है।

सरकार ने 10 मिनट डिलीवरी पर क्यों दिखाई सख्ती?

10 मिनट में डिलीवरी का दबाव सीधे डिलीवरी पार्टनर्स पर पड़ता है। कम समय में ऑर्डर पहुंचाने के चक्कर में तेज रफ्तार, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। इसी को लेकर संसद से लेकर सोशल मीडिया तक लगातार आवाज़ उठाई जा रही थी। सरकार का मानना है कि तेज डिलीवरी से ज्यादा जरूरी डिलीवरी बॉय की जान और सुरक्षा है।

कंपनियों से हुई सीधी बात

केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए क्विक कॉमर्स सेक्टर की बड़ी कंपनियों से बातचीत की। इस बातचीत में ब्लिंकिट, जेप्टो, स्विगी और जोमैटो जैसी कंपनियां शामिल थीं। मंत्री ने साफ कहा कि डिलीवरी के लिए तय की गई टाइम लिमिट हटाई जाए, ताकि डिलीवरी पार्टनर्स पर अनावश्यक दबाव न पड़े।

ब्लिंकिट का बड़ा ऐलान

सरकारी बातचीत के बाद ब्लिंकिट ने सबसे पहले कदम उठाया। कंपनी ने ऐलान किया है कि वह अपने सभी ब्रांड, विज्ञापनों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से 10 मिनट में डिलीवरी का दावा हटा देगी। यह फैसला सीधे तौर पर सरकार के निर्देश और डिलीवरी बॉय की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

बाकी कंपनियों पर भी पड़ेगा असर

सूत्रों के मुताबिक, ब्लिंकिट के बाद अन्य कंपनियां भी जल्द ऐसा ही फैसला ले सकती हैं। मंत्री के साथ हुई बैठक में सभी कंपनियों ने यह भरोसा दिया है कि वे अपने विज्ञापनों और प्रमोशनल कंटेंट से डिलीवरी की तय समय सीमा हटाएंगी। इसका मतलब है कि क्विक कॉमर्स सेक्टर में बड़ा बदलाव तय माना जा रहा है।

संसद और सोशल मीडिया तक उठा मुद्दा

10 मिनट डिलीवरी का मुद्दा सिर्फ सरकार तक सीमित नहीं रहा। यह मामला संसद में भी उठ चुका है जहां डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई। वहीं सोशल मीडिया पर भी पिछले कुछ समय से इसके खिलाफ अभियान चल रहा था जिसमें आम लोग और डिलीवरी बॉय दोनों शामिल थे।

डिलीवरी बॉय की हड़ताल ने बढ़ाया दबाव

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर लाखों डिलीवरी बॉय ने हड़ताल कर दी थी। उनकी मांग थी कि वेतन बढ़ाया जाए और डिलीवरी की सख्त टाइम लिमिट हटाई जाए। इस हड़ताल ने सरकार और कंपनियों दोनों पर दबाव बनाया जिसके बाद अब ठोस कदम उठते दिख रहे हैं। अब आने वाले समय में ग्राहकों को शायद 10 मिनट में डिलीवरी का वादा न दिखे लेकिन सुरक्षित और संतुलित डिलीवरी सिस्टम देखने को मिल सकता है।

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कौन हैं भारत के 10 सबसे अमीर? $100 अरब क्लब में सिर्फ एक नाम

फोर्ब्स के रियल-टाइम बिलेनियर्स इंडेक्स के मुताबिक उनकी नेटवर्थ लगभग $104.6 अरब आंकी गई है। बाजार पूंजीकरण और कारोबार के विस्तार के लिहाज से भी रिलायंस लगातार देश की सबसे बड़ी कंपनियों में शुमार रहती है।

भारत के टॉप-10 अमीरों की सूची
भारत के टॉप-10 अमीरों की सूची
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar13 Jan 2026 10:30 AM
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Indian Billionaires : भारत में दौलतमंदों की सूची लगातार लंबी होती जा रही है। नए-नए अरबपति उभर रहे हैं और बड़े कारोबारी समूहों की संपत्ति में भी तेज उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। इसके बावजूद देश के टॉप-10 रईसों की सूची में पहला और दूसरा स्थान लंबे समय से मुकेश अंबानी और गौतम अडानी के कब्जे में है, जबकि सावित्री जिंदल तीसरे पायदान पर रहते हुए भारत की सबसे अमीर महिला के रूप में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रही हैं। सबसे दिलचस्प तथ्य यह है कि वैश्विक स्तर पर चर्चित $100 अरब क्लब में भारत से फिलहाल सिर्फ एक ही नाम पहुंच पाया है।

मुकेश अंबानी का बढ़ता कद

रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी इस वक्त भारत के ऐसे इकलौते अरबपति बताए जा रहे हैं, जिनकी दौलत $100 बिलियन क्लब की दहलीज पार कर चुकी है। फोर्ब्स के रियल-टाइम बिलेनियर्स इंडेक्स के मुताबिक उनकी नेटवर्थ लगभग $104.6 अरब आंकी गई है। बाजार पूंजीकरण और कारोबार के विस्तार के लिहाज से भी रिलायंस लगातार देश की सबसे बड़ी कंपनियों में शुमार रहती है।

अडानी का दबदबा कायम

भारत के सबसे अमीर लोगों की रैंकिंग में गौतम अडानी लंबे समय से दूसरे पायदान पर मजबूती से बने हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक उनकी कुल संपत्ति लगभग $62.3 अरब आंकी गई है। अडानी समूह की 10 कंपनियां शेयर बाजार में सूचीबद्ध हैं, जिससे उनका कारोबारी विस्तार कई सेक्टरों में साफ दिखाई देता है। हिंडनबर्ग प्रकरण के बाद भले ही समूह पर भारी दबाव आया, लेकिन समय के साथ अडानी ग्रुप ने खुद को संभालते हुए बाजार में धीरे-धीरे वापसी के संकेत दिए हैं और यही वजह है कि उनकी पकड़ देश के टॉप-रईसों की सूची में अब भी कायम नजर आती है।

दौलत के शिखर पर सावित्री जिंदल

भारत की महिला अरबपतियों में सावित्री जिंदल का नाम सबसे ऊपर चमकता है। 75 वर्ष की उम्र में भी उनकी कारोबारी पकड़ उतनी ही मजबूत मानी जाती है। साल 2005 से वे ओपी जिंदल ग्रुप की बागडोर संभाल रही हैं और संपत्ति के लिहाज से देश के अमीरों की सूची में तीसरे पायदान पर काबिज हैं। आंकड़ों के मुताबिक उनकी कुल संपत्ति करीब $36.4 अरब आंकी गई है और इसी वजह से उन्हें भारत की सबसे अमीर महिला के तौर पर पहचानी जाती है। 

चौथे स्थान पर HCL के फाउंडर शिव नादर

टॉप-10 अमीरों की सूची में चौथे स्थान पर HCL के संस्थापक शिव नादर का नाम आता है। रिपोर्ट के मुताबिक उनकी संपत्ति लगभग $35.8 अरब आंकी गई है। हालांकि, शिव नादर की पहचान सिर्फ दौलत तक सीमित नहीं है, उन्हें देश के सबसे बड़े दानदाताओं में भी खास जगह हासिल है। हुरुन परोपकार सूची 2025 में उन्होंने करीब 2708 करोड़ रुपये का दान देकर शीर्ष स्थान पाया था। यह भी बड़ी बात है कि शिव नादर और उनका परिवार पिछले पांच वर्षों में चार बार सबसे अधिक दान देने वालों की सूची में टॉप पर रहा है। वैश्विक स्तर पर देखें तो HCL का कारोबार 60 देशों में फैला है।

टॉप-10 में शामिल अन्य बड़े नाम

फोर्ब्स बिलेनियर्स इंडेक्स के मुताबिक भारत के 10 सबसे अमीरों की सूची में आगे ये दिग्गज भी शामिल हैं -

  1. दिलीप संघवी (5वें) — $25.5 अरब
  2. लक्ष्मी निवास मित्तल (6वें) — $24.2 अरब
  3. के. एम. बिड़ला (7वें) — $21.1 अरब
  4. साइरस पूनावाला (8वें) — $20.2 अरब
  5. राधा किशन दमानी (9वें) — $15.5 अरब
  6. उदय कोटक (10वें) — $14.8 अरब Indian Billionaires

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मोदी सरकार की इस योजना से बनें खुद के बॉस, जानें पूरी प्रक्रिया

प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र (Pradhan Mantri Bhartiya Jan Aushadhi Kendra – PMJAK) की, जो देशभर में तेजी से खोले जा रहे हैं। इस योजना का मकसद आम लोगों को सस्ती दरों पर गुणवत्तापूर्ण दवाइयां उपलब्ध कराना है और साथ ही युवाओं को स्वरोज़गार का अवसर देना है।

_PMJAK
जन औषधि केंद्र (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar12 Jan 2026 01:03 PM
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अगर आप भी अपना खुद का बिजनेस शुरू करना चाहते हैं लेकिन बजट की वजह से रुक जाते हैं, तो आपके लिए ये खबर बेहद काम की है। केंद्र सरकार की एक खास योजना के तहत आप सिर्फ ₹5000 में ऐसा बिजनेस शुरू कर सकते हैं, जिसमें न सिर्फ कम निवेश लगेगा बल्कि सरकार की ओर से आर्थिक मदद भी मिलेगी।

 देशभर में तेजी से बढ़ रही है जन औषधि केंद्रों की संख्या

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 30 जून 2025 तक देश में कुल 16,912 प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोले जा चुके हैं। इन केंद्रों पर 2110 प्रकार की दवाइयां, 315 प्रकार के मेडिकल डिवाइस उपलब्ध कराए जाते हैं।राज्यों की बात करें तो सबसे ज्यादा जन औषधि केंद्र उत्तर प्रदेश–3550, केरल–1629, कर्नाटक–1480, तमिलनाडु 1,432, बिहार—900, गुजरात–812 इन केंद्रों पर दवाइयां बाजार की ब्रांडेड दवाओं के मुकाबले 50% से 90% तक सस्ती मिलती हैं, जिससे आम जनता को बड़ा फायदा होता है।

सिर्फ ₹5000 में कर सकते हैं आवेदन

प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोलने के लिए आवेदन शुल्क मात्र ₹5000 है। हालांकि, इसके लिए कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी होती हैं आवेदक के पास D-Pharma या B-Pharma की डिग्री होनी चाहिए, कम से कम 120 वर्गफुट जगह उपलब्ध होनी चाहिए, केंद्र संचालन के लिए वैध फार्मासिस्ट रजिस्ट्रेशन जरूरी है।

आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज

PM Jan Aushadhi Kendra के लिए आवेदन करते समय निम्न दस्तावेजों की जरूरत होती है आधार कार्ड,

फार्मासिस्ट रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (D-Pharma / B-Pharma), पैन कार्ड, वैध मोबाइल नंबर, निवास प्रमाण पत्र।

घर बैठे करें ऑनलाइन आवेदन

जन औषधि केंद्र के लिए आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है। आवेदन करने के लिए नीचे दिए गए स्टेप्स फॉलो करें:

  1. janaushadhi.gov.in वेबसाइट पर जाएं
  2. मेन्यू में Apply For Kendra पर क्लिक करें
  3. नए पेज पर Click Here To Apply चुनें
  4. Sign In पेज के नीचे **Register Now** पर क्लिक करें
  5. रजिस्ट्रेशन फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारी भरें
  6. फॉर्म को ध्यान से चेक करें और राज्य चुनें
  7. Terms & Conditions स्वीकार कर Submit करें

इसके साथ ही आपका आवेदन प्रोसेस पूरा हो जाएगा।

बिजनेस बढ़ाने के लिए सरकार देगी आर्थिक मदद

सरकार जन औषधि केंद्र संचालकों को प्रोत्साहन राशि (Incentive) भी देती है, हर महीने ₹5 लाख तक की दवाओं की खरीद पर, 15% इंसेंटिव या अधिकतम ₹15,000 प्रति माह, स्पेशल कैटेगरी क्षेत्रों में, ₹2 लाख तक की एकमुश्त इंफ्रास्ट्रक्चर सहायता।

कम निवेश, स्थायी कमाई का मौका

प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र न सिर्फ एक सामाजिक सेवा है, बल्कि यह **कम निवेश में स्थायी कमाई** का शानदार मौका भी है। अगर आपके पास फार्मेसी की योग्यता है, तो यह बिजनेस आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है।

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