नितिन नबीन का उदय भारतीय राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत

भाजपा ने आज एक बड़ा संगठनात्मक और राजनीतिक कदम उठाते हुए 45 वर्षीय युवा नेता नितिन नबीन को पार्टी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह फैसला केवल संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि पार्टी के नेतृत्व में एक पीढ़ीगत बदलाव का प्रतीक भी माना जा रहा है।

Rise of Nitin Nabin BJP
नितिन नबीन के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar18 Jan 2026 10:12 PM
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भाजपा आलाकमान ने नितिन नबीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर यह साफ संकेत दिया है कि पार्टी में नेतृत्व का रास्ता उम्र या वंशवाद नहीं, बल्कि मेहनत, ऊर्जा और संगठनात्मक क्षमता तय करती है। इस कदम के साथ ही भाजपा ने यह भी दिखाया है कि वह आगामी चुनावों के लिए युवा नेतृत्व तैयार करने में विश्वास रखती है। इससे पहले कांग्रेस की कमान 83 वर्षीय मल्लिकार्जुन खड़गे के हाथ में है, जो इस बदलाव को और भी महत्वपूर्ण बना देता है।

पीढ़ीगत बदलाव का प्रतीक

बता दें कि भाजपा का नेतृत्व अनुभव में पहली, दूसरी और तीसरी पीढ़ी के नेताओं के बाद अब चौथी पीढ़ी यानी युवा नेताओं की तरफ बढ़ रहा है। पार्टी की स्थापना के बाद से ही अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी जैसे दिग्गजों ने संगठन को मजबूत किया। इसके बाद नरेंद्र मोदी, अमित शाह, राजनाथ सिंह जैसे युवा नेताओं ने पार्टी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। अब नितिन नबीन के नेतृत्व में नई पीढ़ी ने नेतृत्व की बागडोर संभाली है।

सामाजिक और क्षेत्रीय परिदृश्य

बता दें कि नितिन नबीन का चुनाव क्षेत्रीय संतुलन को भी ध्यान में रखते हुए किया गया है। बिहार से आने वाले नबीन पूर्वी भारत से भाजपा के पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उनका चयन इस बात का संकेत है कि भाजपा अब केवल हिंदी पट्टी या पश्चिमी भारत पर ही ध्यान केंद्रित नहीं कर रही, बल्कि बिहार, बंगाल, ओडिशा, असम और उत्तर-पूर्व जैसे राज्यों में अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।

राजनीतिक अनुभव और कार्यक्षेत्र

बता दें कि 2006 में अपनी राजनीतिक शुरुआत करने वाले नबीन ने पटना पश्चिम विधानसभा सीट से उपचुनाव जीत कर अपने करियर की शुरुआत की। तब से वे लगातार पांच बार इस सीट से विजेता रहे हैं। राज्य सरकार में मंत्री के रूप में उन्होंने पथ निर्माण, नगर विकास, विधि जैसे अहम विभाग संभाले। संगठन में भी उन्होंने युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव और बिहार प्रदेश अध्यक्ष के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वह सिक्किम और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में संगठन प्रभारी रह चुके हैं।

तिन नबीन के नेतृत्व में लड़ा जाएगा 2029 का चुनाव

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से अपने भाषण में कहा था कि उन्होंने एक लाख युवाओं को राजनीति में लाने का संकल्प लिया है। संघ के प्रमुख मोहन भागवत समेत अन्य संगठनात्मक प्रमुखों ने भी युवाओं को नेतृत्व में आगे आने के संकेत दिए हैं। भाजपा का मानना है कि नितिन नबीन के नेतृत्व में 2029 के लोकसभा चुनाव लड़ा जाएगा, जो उनके तीन साल के कार्यकाल का अंतिम चुनाव होगा।

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दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता ने फेज-4 मेट्रो विस्तार को दी हरी झंडी!

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने दिल्ली के लोगों के लिए खुशखबरी दी है। मेट्रो नेटवर्क के विस्तार को तेज़ करते हुए, मेट्रो फेज-IV के शेष तीन कॉरिडोरों के लिए अपने हिस्से का फंड जारी किया है।

CM Rekha Gupta Metro Network
सीएम रेखा गुप्ता द्वारा मेट्रो नेटवर्क का विस्तार (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar18 Jan 2026 08:23 PM
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मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि मेट्रो फेज-IV की ये परियोजनाएं दिल्ली को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप आधुनिक परिवहन प्रणाली उपलब्ध कराएंगी। बेहतर मेट्रो कनेक्टिविटी से यात्रियों को सुरक्षित, सुविधाजनक और समयबद्ध यात्रा का लाभ मिलेगा, साथ ही निजी वाहनों पर निर्भरता भी कम होगी।

47.225 किलोमीटर का नया मेट्रो नेटवर्क

बता दें कि फेज-IV के तहत प्रस्तावित तीनों कॉरिडोरों की कुल लंबाई 47.225 किलोमीटर होगी। इन पर करीब 14,630.80 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसमें से 3,386.18 करोड़ रुपये का वहन दिल्ली सरकार करेगी। परियोजनाओं के अगले चार वर्षों में पूरा होने की संभावना है।

ये हैं फेज-IV के तीन प्रमुख कॉरिडोर

बता दें कि पहला कॉरिडोर लाजपत नगर से साकेत जी-ब्लॉक तक प्रस्तावित है। इसकी लंबाई 8.385 किलोमीटर होगी और इसमें 8 एलिवेटेड स्टेशन बनाए जाएंगे। दूसरा कॉरिडोर इंद्रलोक से इंद्रप्रस्थ तक होगा, जिसकी लंबाई 12.377 किलोमीटर है। इस लाइन पर कुल 10 स्टेशन होंगे, जिनमें एक एलिवेटेड और 9 अंडरग्राउंड स्टेशन शामिल हैं। इन दोनों कॉरिडोरों की संयुक्त परियोजना लागत 8,399.81 करोड़ रुपये है, जिसमें दिल्ली सरकार का अंश 1,987.86 करोड़ रुपये होगा। तीसरा और सबसे लंबा कॉरिडोर रिठाला से कुंडली तक प्रस्तावित है। यह दिल्ली को हरियाणा से जोड़ेगा। इसकी लंबाई 26.463 किलोमीटर होगी और इसमें 21 स्टेशन बनाए जाएंगे। इस परियोजना की कुल लागत 6,230.99 करोड़ रुपये है, जिसमें दिल्ली सरकार का अंश 1,398.32 करोड़ रुपये होगा, जबकि हरियाणा का हिस्सा 545.77 करोड़ रुपये तय किया गया है।

इन इलाकों को मिलेगा सीधा लाभ

बता दें कि लाजपत नगर–साकेत जी-ब्लॉक कॉरिडोर से लाजपत नगर, एंड्रूज गंज, ग्रेटर कैलाश-1, चिराग दिल्ली, पुष्प विहार और साकेत डिस्ट्रिक्ट सेंटर जैसे इलाकों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। इंद्रलोक–इंद्रप्रस्थ कॉरिडोर इंद्रलोक, दयाबस्ती, सराय रोहिल्ला, झंडेवालान, नबी करीम, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, दिल्ली गेट और दिल्ली सचिवालय जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को जोड़ेगा। रिठाला–कुंडली कॉरिडोर रोहिणी, बवाना औद्योगिक क्षेत्र, नरेला और कुंडली सहित उत्तर दिल्ली के कई इलाकों के लिए राहत लेकर आएगा।

परिवहन और पर्यावरण को मिलेगा लाभ

बता दें कि सरकार के अनुसार इन कॉरिडोरों के निर्माण से दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में मेट्रो कनेक्टिविटी का बड़ा विस्तार होगा। इससे सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा, यात्रियों के समय की बचत होगी और प्रदूषण नियंत्रण में भी मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार राजधानी को विश्वस्तरीय शहर बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है और मेट्रो नेटवर्क का विस्तार उसी प्रतिबद्धता का हिस्सा है।


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अमित शाह और धर्मेंद्र प्रधान ने विश्व पुस्तक मेला 2026 का लिया जायजा

नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 में भारत मंडपम में अभूतपूर्व उत्साह और भीड़ देखने को मिली। इस अवसर पर आयोजित मेले में केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों, राज्यों के मुख्यमंत्रियों, सशस्त्र बलों के शीर्ष अधिकारियों, साहित्यकारों और अंतरराष्ट्रीय कलाकारों ने भाग लेकर आयोजन को और गरिमा प्रदान की।

NewDelhi World Book Fair 20260
नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar18 Jan 2026 06:43 PM
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केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह तथा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मेले के विभिन्न हॉलों का भ्रमण किया। उन्होंने थीम पवेलियन ‘भारतीय सैन्य इतिहास: शौर्य एवं प्रज्ञा @ 75’ का अवलोकन किया, जहां भारत की सैन्य विरासत, रणनीतिक विकास और पराक्रम को दर्शाती विशेष प्रदर्शनी लगाई गई है। मंत्रियों ने अंतरराष्ट्रीय पवेलियन में विभिन्न देशों के स्टॉलों का भी दौरा किया और सम्मानित अतिथि देश कतर के पवेलियन की सराहना की। इस अवसर पर उन्होंने हिंदी एवं भारतीय भाषाओं के प्रकाशकों से संवाद कर देश में पठन संस्कृति और भाषाई विविधता को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका की प्रशंसा की। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी पुस्तक मेले का दौरा किया और राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत के स्टॉल पर उपलब्ध ज्ञान, संस्कृति और साहित्य से जुड़ी पुस्तकों का अवलोकन किया।

सेना प्रमुख का विशेष दौरा

थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने थीम पवेलियन में भारत के प्रमुख सैन्य अभियानों, परमवीर चक्र गैलरी और जमीनी नेतृत्व पर आधारित प्रदर्शनी देखी। उन्होंने बच्चों के पवेलियन ‘किड्स एक्सप्रेस’ का दौरा कर स्कूली बच्चों को पुस्तकें भेंट कीं। इस दिन राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह, राज्यसभा सांसद राधा मोहन दास अग्रवाल, आध्यात्मिक वक्ता जया किशोरी, दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता और राज्यसभा के पूर्व सदस्य विनय सहस्रबुद्धे सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

संसदीय विरासत पर विमर्श

दिल्ली विधानसभा द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘शताब्दी यात्रा: वीर विठ्ठलभाई पटेल’ पर विशेष चर्चा आयोजित की गई। वक्ताओं ने भारत की 100 वर्षीय संसदीय यात्रा और केंद्रीय विधानसभा के पहले निर्वाचित भारतीय अध्यक्ष विठ्ठलभाई पटेल के योगदान को रेखांकित किया। प्रो. रमेशचंद्र गौर ने भारत के लोकतांत्रिक इतिहास से जुड़े दस्तावेजों के समुचित संग्रह और डिजिटल अभिलेखीकरण की आवश्यकता पर बल दिया।

जापानी मंगा कलाकार का आकर्षण

इंटरनेशनल इवेंट्स कॉर्नर में जापान फाउंडेशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में विश्वप्रसिद्ध मंगा कलाकार योशितोकी ओइमा ने लाइव स्केचिंग कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। भारत में किसी जापानी मंगा कलाकार का यह पहला सार्वजनिक आयोजन रहा, जिसमें भारत–जापान सांस्कृतिक संवाद की झलक देखने को मिली।

भारतीय ज्ञान, कविता और आध्यात्म पर संवाद

मेले में प्राचीन भारतीय ग्रंथों की रणनीतिक सोच, स्त्री स्वरों पर आधारित काव्य सत्र, आध्यात्मिक मार्गदर्शन तथा इतिहास और भारतीय ज्ञान परंपराओं पर भी विचार-विमर्श हुआ। जया किशोरी ने विद्यार्थियों के लिए अनुशासन और आंतरिक शांति पर जोर दिया, जबकि शिक्षाविदों ने भारतीय वैज्ञानिक और सांस्कृतिक विरासत की प्रासंगिकता को रेखांकित किया। कुल मिलाकर, नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 न केवल पुस्तकों का उत्सव बना हुआ है, बल्कि यह ज्ञान, संस्कृति, इतिहास और वैश्विक संवाद का जीवंत मंच भी सिद्ध हो रहा है।

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