Advertisement
Advertisement
यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। तेल से होने वाली कमाई का उपयोग सरकार बुनियादी ढांचे, सब्सिडी, सामाजिक योजनाओं और बड़े विकास प्रोजेक्ट्स में करती रही है।

Advertisement
Saudi Arabia : सऊदी अरब को लंबे समय तक एक ऐसे देश के रूप में जाना गया जिसकी अर्थव्यवस्था लगभग पूरी तरह तेल पर निर्भर थी। लेकिन 21वीं सदी के दूसरे दशक में यह तस्वीर तेजी से बदल रही है। आज सऊदी अरब न केवल दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादकों में से एक है, बल्कि वह अपनी अर्थव्यवस्था को विविध (Diversify) बनाने की दिशा में भी ठोस कदम उठा रहा है।
सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था का आधार कच्चा तेल है। देश के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों में से एक है और सरकारी कंपनी Saudi Aramco दुनिया की सबसे मूल्यवान तेल कंपनियों में गिनी जाती है। सरकारी राजस्व का बड़ा हिस्सा तेल निर्यात से आता है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। तेल से होने वाली कमाई का उपयोग सरकार बुनियादी ढांचे, सब्सिडी, सामाजिक योजनाओं और बड़े विकास प्रोजेक्ट्स में करती रही है।
सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था में सरकार की भूमिका बेहद मजबूत है। सरकार न केवल प्रमुख उद्योगों की मालिक है, बल्कि वह रोजगार सृजन, वेतन संरचना और सामाजिक कल्याण योजनाओं को भी नियंत्रित करती है। सरकारी बजट मुख्य रूप से तेल से होने वाली आय पर आधारित होता है। जब तेल की कीमतें ऊंची होती हैं, तो सरकार के पास खर्च करने के लिए अधिक संसाधन होते हैं। वहीं कीमतें गिरने पर बजट घाटा बढ़ सकता है। इसी जोखिम को कम करने के लिए सऊदी नेतृत्व ने अर्थव्यवस्था में सुधारों की शुरुआत की।
साल 2016 में सऊदी अरब ने Vision 2030 नामक एक महत्वाकांक्षी योजना पेश की। इसका उद्देश्य देश को तेल पर निर्भरता से बाहर निकालकर एक बहुआयामी अर्थव्यवस्था बनाना है।इस योजना के तहत पर्यटन, मनोरंजन, खेल, तकनीक, लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा दिया जा रहा है। NEOM जैसे मेगा प्रोजेक्ट, रेड सी टूरिज्म प्रोजेक्ट और क़िद्दिया जैसे मनोरंजन शहर इसी सोच का हिस्सा हैं।
पहले सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था में निजी क्षेत्र की भूमिका सीमित थी, लेकिन अब इसे मजबूती से आगे बढ़ाया जा रहा है। विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए नियमों में ढील दी गई है, टैक्स सिस्टम को आधुनिक बनाया गया है और बिज़नेस करना आसान बनाया गया है। पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड (PIF) सऊदी अरब का सॉवरेन वेल्थ फंड है, जो देश और विदेश में बड़े पैमाने पर निवेश करता है। इसका उद्देश्य भविष्य के लिए स्थायी आय स्रोत तैयार करना है।
एक समय सऊदी अरब लगभग टैक्स-फ्री अर्थव्यवस्था माना जाता था। लेकिन आर्थिक सुधारों के तहत VAT (Value Added Tax) लागू किया गया और ईंधन व बिजली जैसी सब्सिडी में कटौती की गई। इन फैसलों का उद्देश्य सरकारी राजस्व को स्थिर बनाना और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना है। हालांकि इससे आम नागरिकों पर शुरुआती दबाव भी पड़ा, लेकिन सरकार ने इसके संतुलन के लिए सामाजिक सहायता योजनाएं भी शुरू कीं।
सऊदी अर्थव्यवस्था लंबे समय तक विदेशी श्रमिकों पर निर्भर रही है। इसे बदलने के लिए Saudization नीति लागू की गई, जिसके तहत निजी क्षेत्र में सऊदी नागरिकों को अधिक रोजगार देने पर जोर है। शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट और महिला कार्यबल की भागीदारी बढ़ाकर सरकार एक सक्षम और आत्मनिर्भर श्रम बाजार तैयार करने की कोशिश कर रही है।
सऊदी अरब G20 जैसे वैश्विक मंचों का हिस्सा है और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में उसकी भूमिका निर्णायक मानी जाती है। OPEC के माध्यम से तेल उत्पादन को नियंत्रित कर वह वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। इसके साथ ही, गैर-तेल क्षेत्रों में बढ़ता निवेश सऊदी अरब को एक उभरती हुई आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित कर रहा है। Saudi Arabia
Advertisement
Advertisement